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Blog: कविताओं के मन से....!!!!

Blogger: vijay kumar sappatti
घर परिवार अब कहाँ रह गए है , अब तो बस मकान और लोग बचे रहे है बाकी रिश्ते नाते अब कहाँ रह गए है अब तो सिर्फ \बस सिर्फ नाम बचे है बाकी तीज त्योहार कहाँ रह गए है अब तो उपरी दिखावे बचे है बाकी पुरानी ज़िन्दगी अब कहाँ रह गयी है , अब तो बस मोबाइल और इन्टरनेट बचे है बाकी ................वि ज य ... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   3:31am 23 Oct 2017 #
Blogger: vijay kumar sappatti
रूह की मृगतृष्णा मेंसन्यासी सा महकता है मनदेह की आतुरता मेंबिना वजह भटकता है मनप्रेम के दो सोपानों मेंयुग के सांस लेता है मनजीवन के इन असाध्यध्वनियों पर सुर साधता है मनरे मनबावला हुआ जीवन रेमृत्यु की छाँव में बस जा रेप्रभु की आत्मा पुकारे तुझे रेआजा मन रे मन  !© विजय... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   4:40am 6 Sep 2017 #इंसान
Blogger: vijay kumar sappatti
मिलना मुझे तुम उस क्षितिज परजहाँ सूरज डूब रहा हो लाल रंग मेंजहाँ नीली नदी बह रही हो चुपचापऔर मैं आऊँ निशिगंधा के सफ़ेद खुशबु के साथऔर तुम पहने रहना एक सफेद साड़ीजो रात को सुबह बना दे इस ज़िन्दगी भर के लिएमैं आऊंगा जरूर ।तुम बस बता दो वो क्षितिज है कहाँ प्रिय ।© विजय... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   4:21am 2 Sep 2017 #क्षितिझ
Blogger: vijay kumar sappatti
मेरे उम्र के कुछ दिन , कभी तुम्हारे साडी में अटके तो कभी तुम्हारी चुनरी में ....कुछ राते इसी तरह से ; कभी तुम्हारे जिस्म में अटके तो कभी तुम्हारी साँसों में .....मेरे ज़िन्दगी के लम्हे बेचारे बहुत छोटे थे.वो अक्सर तुम्हारे होंठो पर ही रुक जाते थे.फिर उन लम्हों के भी टुकड़े हुए ह... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   2:59am 24 Aug 2017 #vijay sappatti
Blogger: vijay kumar sappatti
चल वहां चल ,किसी एक लम्हे में वक़्त की उँगली को थाम कर !!!!जहाँ नीली नदी खामोश बहती होजहाँ पर्वत सर झुकाए थमे हुए होजहाँ चीड़ के ऊंचे पेड़ चुपचाप खड़े होजहाँ शाम धुन्धलाती न होजहाँ कुल जहान का मौन होजहाँ खुदा मौजूद हो , उसका करम होजहाँ बस तू होचल वहाँ चलकिसी एक लम्हे में वक़्त की ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   1:40pm 22 Aug 2017 #क्षितिझ
Blogger: vijay kumar sappatti
हमें लिखना होंगा जीवन की असफलताओं के बारे मेंताकि फिर उड़ सके हम इतिहास के नभ मेंहमें फूंकना होंगा टूटे हुए सपनो में नयी उर्जा ताकि मृत जीवन की अभिव्यक्ति को दे सकेकुछ और नयी साँसे !© विजय... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   6:08am 20 May 2017 #जीवन
Blogger: vijay kumar sappatti
मिलना मुझे तुम उस क्षितिझ परजहाँ सूरज डूब रहा हो लाल रंग मेंजहाँ नीली नदी बह रही हो चुपचापऔर मैं आऊँ निशिगंधा के सफ़ेद खुशबु के साथऔर तुम पहने रहना एक सफेद साड़ी जो रात को सुबह बना दे इस ज़िन्दगी भर के लिएमैं आऊंगा जरूर ।तुम बस बता दो वो क्षितिझ है कहाँ प्रिय ।वि ज य... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   9:56am 10 Mar 2017 #कविता : ज़िन्दगी
Blogger: vijay kumar sappatti
"माँ का बेटा"वो जो अपनी माँ का एक बेटा थावो आज बहुत उदास है !बहुत बरस बीते ,उसकी माँ कहीं खो गयी थी .....उसकी माँ उसे नहलाती ,खाना खिलाती , स्कूल भेजतीऔर फिर स्कूल से आने के बाद ,उसे अपनी गोद में बिठा कर खाना खिलातीअपनी मीठी सी आवाज़ में लोरियां सुनाती ..और उसे सुलाती , दुनिया की न... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   3:44am 13 Jan 2017 #अम्मा.
Blogger: vijay kumar sappatti
रूह की मृगतृष्णा में सन्यासी सा महकता है मन देह की आतुरता में बिना वजह भटकता है मन प्रेम के दो सोपानों में युग के सांस लेता है मन जीवन के इन असाध्य ध्वनियों पर सुर साधता है मन रे मन बावला हुआ जीवन रे मृत्यु की छाँव में बस जा रेप्रभु की आत्मा पुकारे तुझे रे आजा मन रे मन  !व... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   3:10pm 7 Jan 2017 #कविता
Blogger: vijay kumar sappatti
सोचताहूँकिकविता मेंशब्दोंकीजगहतुम्हेंभरदूँ;अपनेमनकीभावोंकेसंगफिरमैंहोजाऊँगापूर्णविजय ... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   7:24am 2 Jan 2017 #कविता : ज़िन्दगी
Blogger: vijay kumar sappatti
किसी एक लम्हे में तुमसे नज़रे मिलीऔरउम्र भर का परदा हो गया...किसी एक लम्हे में तुमसे मोहब्बत हुईऔरज़िन्दगी भर की जुदाई मिली......लम्हों का सफ़रलम्हों में ही सिमटा रहा !!!© विजय... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   9:38am 30 May 2016 #कविता : ज़िन्दगी
Blogger: vijay kumar sappatti
नज़्म :मुझ से तुझ तक एक पुलिया हैशब्दों का,नज्मो का,किस्सों का,औरआंसुओ का .............और हां; बीच में बहता एक जलता दरिया है इस दुनिया का !!!!© विजय... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   2:51pm 13 Feb 2016 #इंसान
Blogger: vijay kumar sappatti
मित्रो , नव वर्ष पर आप सभी को मेरी ओर से मंगलकामनाये . अपनी कविता के साथ आप सभी को ढेरो शुभकामनाये देता हूँ. जीवन आपका शुभ हो .::: भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा :::भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा,रवि ने किया दूर ,जग का दुःख भरा अन्धकार ;किरणों ने बिछाया जाल ,स्वर्णिम और मधुरअश्व खींच रहें है... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   5:24am 1 Jan 2016 #
Blogger: vijay kumar sappatti
दोस्तों , मेरी ये नज़्म , उन सारे शहीदों को मेरी श्रद्दांजलि है , जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर , मुंबई को 26 / 11  को आतंक से मुक्त कराया. मैं उन सब को शत- शत बार नमन करता हूँ. उनकी कुर्बानी हमारे लिए है ............!!!शहीद हूँ मैं .....मेरे देशवाशियोंजब कभी आप खुलकर हंसोंगे ,तो मेरे परिवार को ... Read more
clicks 290 View   Vote 0 Like   3:00am 26 Nov 2015 #कविता
Blogger: vijay kumar sappatti
एक ज़िन्दगीऔर कितने सारे ख्वाबबस एक रात की सुबह का भी पता नहीं ....कितनी किताबे पढना है बाकीकितने सिनेमा देखना है बाकीकितने जगहों पर जाना है बाकीहक़ीकत में एक पूरी ज़िन्दगी जीना है बाकी !एक ज़िन्दगीऔर कितने सारे ख्वाबबस एक रात की सुबह का भी पता नहीं ....© विजय... Read more
clicks 236 View   Vote 0 Like   2:53am 17 Oct 2015 #खुदा
Blogger: vijay kumar sappatti
उस दिन जब मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ातुमने उस हाथ को दफना दियाअपनी जिस्म की जमीन में !और कुछ आंसू जो मेरे नाम के थे ,उन्हें भी दफना दिया अपनी आत्मा के साथ !अब तुम होऔर मैं हूँऔर हम बहुत दूर है !हां; इश्क खुदा के आगोश में चुपचाप बैठा है!खुदा ने एक कब्र बनायीं है ,तुम्हारी और मेरी ,... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   3:48am 15 Oct 2015 #कविता : ज़िन्दगी
Blogger: vijay kumar sappatti
/// नज़्म : दुनिया, तुम और मैं !!! ///दुनिया भर घूम आते हो !दुनिया को जी भर कर देखते हो !!दुनिया से बाते करते रहते हो ....!!!.......कभी उस मोड़ पर भी चले आओ.....जहाँ हम खड़े है ,……….कभी हमें भी जी भर कर देख लो …….आँखे तुम्हारा इन्तजार करती रहती है ;………कभी कोई एक लफ्ज़ हमारे नाम कर दो .......मन तुम्हे सुनन... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   1:38am 24 Sep 2015 #तुम और मैं
Blogger: vijay kumar sappatti
...............और अंत में कुछ भी न रह जायेंगा !!न ही ये सम्मान , न ही ये मान ,न ही ये धन और न ही ये यश !बस ...चंद यादें कुछ अपनों के मन में और वो शब्द भी जो मैंने कभी लिखे थे !!!एक अनंत की जिज्ञासा भी साथ में थी ,साथ में ही रही औरअंत में साथ ही चली गयी !प्रभु तुम ही तो हो एक मेरेबाकी तो सब जग झूठ... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   6:10am 11 Sep 2015 #इंसान
Blogger: vijay kumar sappatti
यूँ ही कभी अगर दुनिया पूछे तुमसेकी मैं कौन हूँ ..तो तुम कह देना ..कोई नहीं है जी ..कोई नहीं ,बस यूँ ही था कोईजो जाने अनजाने मेंबस गया था दिल में ..पर वो कोई नहीं है जी  ...एक दोस्त था जो अब भी है ,जो कभी कभी फ़ोन करकेशहर के मौसम के बारे में पूछता है,मेरे मन के आसमान परउ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   11:12am 4 Sep 2015 #
Blogger: vijay kumar sappatti
यूँ ही ...ज़िन्दगी भर कुछ साए साथ साथ ही चलते है और उन्ही सायो की याद में ये ख़ाक ज़िन्दगी;.......कभी कभी गुलज़ार भी होती है !!!सोचता हूँ अक्सर यूँ ही रातो को उठकर ...अगर अम्मा न होती , अगर पिताजी न होते . अगर तुम न होती ..अगर वो दोस्त न होता ......चंद तकलीफ देने वाले रिश्तेदार न होते ......चंद प्य... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   12:30am 22 Aug 2015 #ईश्वर
Blogger: vijay kumar sappatti
......मैंने पहले बोलना सीखा ...अम्मा... !फिर लिखना सीखा.... क ख ग a b c 1 2 3 ...फिर शब्द बुने !फिर भाव भरे !.... मैं अब कविता गुनता हूँ  , कहानी गड़ता हूँ ..जिन्हें दुनिया पढ़ती है ..खो जाती है .. रोती है ... मुस्कराती है ...हंसती है ..चिल्लाती है ........मुझे इनाम ,सम्मान , पुरस्कार से अनुग्रहित करती है ...!.....औ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   4:16am 17 Aug 2015 #
Blogger: vijay kumar sappatti
भीगा सा दिन,भीगी सी आँखें,भीगा सा मन ,और भीगी सी रात है !कुछ पुराने ख़त ,एक तेरा चेहरा,और कुछ तेरी बात है !ऐसे ही कई टुकड़ा टुकड़ा दिनऔर कई टुकड़ा टुकड़ा रातेहमने ज़िन्दगी की साँसों तले काटी थी !न दिन रहे और न राते,न ज़िन्दगी रही और न तेरी बाते !कोई खुदा से जाकर कह तो दे,मुझे उसकी कायन... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   6:04am 7 Jun 2015 #कविता : ज़िन्दगी
Blogger: vijay kumar sappatti
माँ को मुझे कभी तलाशना नहीं पड़ा;वो हमेशा ही मेरे पास थी और है अब भी .. !लेकिन अपने गाँव/छोटे शहर की गलियों में ,मैं अक्सर छुप जाया करता था ;और माँ ही हमेशा मुझे ढूंढती थी ..!और मैं छुपता भी इसलिए था कि वो मुझे ढूंढें !!....और फिर मैं माँ से चिपक जाता था ..!!!अहिस्ता अहिस्ता इस तलाश की ... Read more
clicks 259 View   Vote 0 Like   2:34am 6 Jun 2015 #माँ
Blogger: vijay kumar sappatti
कुछ दिन पहले मेरा कुछ सामानमैंने तुम्हारे पास रख छोडा था !वो पहली नज़र ..जिससे तुम्हे मैंने देखा था ;मैं अब तक तुम्हे देख रहा हूँ..वो पहली बार तुम्हे छूना..तुम्हारे नर्म लबो के अहसास आज भीअक्सर मुझे रातों को जगा देते है ..वो सारी रात चाँद तारो को देखना ..वो सारी सारी रात बाते क... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   10:40am 2 Jun 2015 #इश्क
Blogger: vijay kumar sappatti
आज "आतंकवाद विरोध दिवस "पर मैं अपनी एक नज़्म आपको नज़र करता हूँ .दोस्तों , मेरी ये नज़्म , उन सारे शहीदों को मेरी श्रद्दांजलि है , जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर , देश को आतंक से मुक्त कराया. मैं उन सब को शत- शत बार नमन करता हूँ. उनकी कुर्बानी हमारे लिए है ............शहीद हूँ मैं .....मेरे देशव... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   5:53am 21 May 2015 #
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