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Blog: सच्चा शरणम्

Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
सौन्दर्यलहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किया है सौ... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   8:32am 13 Dec 2015 #Translated Works
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
शैलबाला शतक शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   3:26pm 20 Oct 2015 #भोजपुरी
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भिक आठ कवित्त... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   3:16am 14 Oct 2015 #भोजपुरी
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
कुछ दिनों पहले गुरुदेव की गीतांजलि के भावानुवाद के क्रम में  उनके गीत "This is my prayer to thee.." का बाबूजी द्वारा किया भावानुवाद " है महाराज प्रार्थना यही " इस ब्लॉग पर प्रकाशित हुआ था। इस गीत को अर्चना जी ने अपना स्वर दिया है। अर्चना जी अपने ब्लॉग ’मेरे मन की’ पर निरंतर इस प्रकार की ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   2:23pm 10 Oct 2015 #audio
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
सौन्दर्यलहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किया है सौ... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   4:48am 9 Sep 2015 #Translated Works
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
[डॉ० कार्ल गुस्ताव युंग (Carl Gustav Jung) का यह आलेख मूल रूप में तो पढ़ने का अवसर नहीं मिला, पर लगभग पचास साल पहले ’भारती’ (भवन की पत्रिका) में इस आलेख का हिन्दी रूपांतर प्रकाशित हुआ था, जिसे अपने पिताजी की संग्रहित किताबों-पत्रिकाओं को उलटते-पलटते मैंने पाया। आधुनिक मनुष्य कौन?- ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   3:47am 21 Aug 2015 #Carl Gustav Jung
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
[डॉ० कार्ल गुस्ताव युंग (Carl Gustav Jung)का यह आलेख मूल रूप में तो पढ़ने का अवसर नहीं मिला, पर लगभग पचास साल पहले ’भारती’ (भवन की पत्रिका) में इस आलेख का हिन्दी रूपांतर प्रकाशित हुआ था, जिसे अपने पिताजी की संग्रहित किताबों-पत्रिकाओं को उलटते-पलटते मैंने पाया। आधुनिक मनुष्य कौन?- प्... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   11:43am 16 Aug 2015 #Carl Gustav Jung
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भिक आठ कवित्त (... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   3:16am 6 Aug 2015 #भोजपुरी
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
Geetanjali: Tagore This is my prayer to thee, my lord-strike, strike at the root of penury inmy heart.Give me the strength lightly to bearmy joys and sorrows.Give me the strength to make mylove fruitful in service.Give me the strength never to disownthe poor or bend my knees beforeinsolent might.Give me the strength to raise mymind high above daily trifles. हिन्दी भावानुवाद: पंकिल है महाराज प्रार्थना यही।तुम बारंबार प्रहार करो रह न जाय न उर दीनता कहीं॥जड़ से मिट जाय दैन्य उर का निज बल द... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   12:56pm 5 Jul 2015 #Tagore's Poetry
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
सौन्दर्यलहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किया है सौ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   1:05pm 14 Jun 2015 #Translated Works
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
मैंचिट्ठाकार हूँ, पर गिरिजेश रावजैसा तो नहीं जो बने तो निपट आलसी पर रचे तो जीवन-स्फूर्ति का अनोखा  व्याकरण- बाउ। संस्कारशील गिरिजेश राव कहूँ?- शृंखलासापेक्ष, पर्याप्त अर्थसबल, नितान्त आकस्मिकता में भी पर्याप्त नियंत्रित। जो प्रकृति का शृंगार है- चाहे वह शोभन हो, मधु... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   7:32am 4 May 2015 #एक आलसी का चिट्ठा
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
एक ज्योति सौं जरैं प्रकासैंकोटि दिया लख बाती।जिनके हिया नेह बिनु सूखेतिनकी सुलगैं छाती।बुद्धि को सुअना मरमु न जानै कथै प्रीति की मैना।दिपै दूधिया ज्योति प्रकासैं घर देहरी अँगन। नवेली बारि धरैं दियना॥---(आत्म प्रकाश शुक्ल) नवसंवत्सर ने आनन्द भरित अँगड़ाई ली। आ गया ... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   1:23pm 28 Mar 2015 #आलेख
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
सौन्दर्य-लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किया है सौन... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   1:24am 13 Mar 2015 #शंकराचार्य
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
यह देश अपूर्व, अद्भुत क्षमताओं का आगार है। यहाँ जो है, कहीं नहीं है, किन्तु यहाँ जो होता दिख रहा है वह भी कहीं नहीं है। इस देश की अनिर्वच प्रज्ञा और अद्वितीय पौरुष को विस्मरण ने आकंठ आवृत कर लिया है। अपनी क्षमता को न पहचान सकने से हमारा विषद वैभव नीर कायरता की काई से ढंक गय... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   4:18am 22 Jan 2015 #Tagore's Poetry
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
जितना मेरा अध्ययन है उसमें भारतीय अंग्रेजी लेखकों में निस्सीम ईजीकेलका लेखन मुझे अत्यधिक प्रिय है। ईजीकेल स्वातंत्र्योत्तर भारतीय अंग्रेजी कविता के पिता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आधुनिक भारतीय अंग्रेजी काव्य में विशिष्ट स्थान प्राप्त ईजीकेल सहज कविता, सामान्य... Read more
clicks 440 View   Vote 0 Like   4:17pm 16 Jan 2015 #Literary Classics
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
सौन्दर्य-लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किया है सौन्... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   3:28am 11 Jan 2015 #शंकराचार्य
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है।करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भिक आठ कवित्त (... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   7:59am 28 Dec 2014 #कवित्त
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
प्रायः ऐसा होता है कि फेसबुक पर देखी पढ़ी गयी प्रविष्टियों पर कुछ कहने का मन हो तो उसके टिप्पणी स्थल की अपेक्षा ब्लॉग पर लिख देने की आदत बना ली है मैंने। यद्यपि ऐसा भी कम ही हो पाता है क्योंकि समय और सामर्थ्य की कमी से यहाँ भी आमद घट गयी है मेरी। फेसबुक पर अमरेन्द्र भाई ने ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   5:14pm 25 Dec 2014 #Poetic Adaptation
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
शैलबाला शतक भगवती पराम्बा के चरणों में वाक् पुष्पोपहार है। यह स्वतः के प्रयास का प्रतिफलन हो ऐसा कहना अपराध ही होगा। उन्होंने अपना स्तवन सुनना चाहा और यह कार्य स्वतः सम्पादित करा लिया। यह उक्ति सार्थक लगी- जेहि पर कृपा करहिं जन जानी/कवि उर अजिर नचावहिं बानी।" शैलबाल... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   3:44am 24 Dec 2014 #कवित्त
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
Geetanjali: R.N. Tagore I have had my invitation to this worldfestival, and thus my life hasbeen blessed. My eyes have seenand my ears have heard.It was my part at this feast to playupon my instrument, and I have doneall I could.Now, I ask, has the time come at lastwhen I may go in and see thy faceand after thee my silent salutation?Hindi Translation: Pankil जगत के उत्सव में श्रीमान्निमंत्रण मिला तुम्हारा प्राण।मिल गया जीवन को आशीषतुम्हारी जय हो जय हो ईश॥नयन ने देख लिया स्वयमेवश्र... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   12:39pm 26 Oct 2014 #Tagore's Poetry
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
पिछली प्रविष्टियों  ’बतावत आपन नाम सुदामा - एकऔर दोसे आगे -(प्रहरी राजमहल में प्रवेश करता है। प्रभु मखमली सेज पर शांत मुद्रा में लेटे हैं। रुक्मिणी पैर सहला रही हैं। समीप में विविध भोग सामग्री सजी पड़ी है। गृह परिचारिकाएँ पंखा झल रहीं हैं। मह-मह सुगन्ध से पवन बोझिल ह... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   3:31pm 3 Oct 2014 #नाटक
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
दृश्य द्वितीय (द्वारिकापुरी का दृश्य। वैभव का विपुल विस्तार। धन-धान्य का अपार भण्डार। धनिक, वणिक, कुबेर हाट सजाये। संगीतागार, मल्लशाला, शुचि गुरुकुल, प्रशस्त मार्ग, गगनचुम्बी अट्टालिकाओं की मणि-माला, विभूषित अखण्ड शृंखला, सुसज्जित घने विटप एवं राज्य सभागार के फहरते ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   9:26am 23 Sep 2014 #नाटक
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
सहज, सरल, सरस भजन। बाबूजी की भावपूर्ण लेखनी के अनेकों मनकों में एक। छुटपन-से ही सुलाते वक़्त बाबूजी अनेकों स्वरचित भजन गाते और सुलाते। लगभग सभी रचनायें अम्मा को भी याद होतीं और उनका स्वर भी हमारी नींद का साक्षी हुआ करता। बड़े होने पर यह सब अलभ्य, हम सब अकिंचन। इन्हें सँजो ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   4:00am 21 Sep 2014 #Bhajan
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
दृश्य प्रथम(सुदामा की जीर्ण-शीर्ण कुटिया। सर्वत्र दरिद्रता का अखण्ड साम्राज्य। भग्न शयन शैय्या। बिखरे भाण्ड, मलिन वस्त्रोपवस्त्रम। एक कोने विष्णु का देवविग्रह। कुश का आसन। धरती पर समर्पित अक्षत-फूल। तुरन्त देवार्चन से उठे सुदामा भजन गुनगुना रहे हैं। सम्मुख प्रसा... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   5:31am 7 Sep 2014 #नाटक
Blogger: हिमांशु कुमार पाण्डेय
सौन्दर्य-लहरी संस्कृत के स्तोत्र-साहित्य का गौरव-ग्रंथ व अनुपम काव्योपलब्धि है। आचार्य शंकर की चमत्कृत करने वाली मेधा का दूसरा आयाम है यह काव्य। निर्गुण, निराकार अद्वैत ब्रह्म की आराधना करने वाले आचार्य ने शिव और शक्ति की सगुण रागात्मक लीला का विभोर गान किया है ’सौन... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   3:10am 31 Aug 2014 #शंकराचार्य
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