Hamarivani.com

एक प्रयास

आजकल जाने क्यों मुँह फेरा हुआ है तुमने या फिर मुंह चुरा रहे हो मेरी समझ का मुहाना बहुत छोटा है और तुम्हारी कलाकारी का बेहद वृहद् हाँ, मानती हूँ कुछ मतभेद है हम में लेकिन सुनो कहा गया है न मतभेद बेशक हों लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए मगर तुमने तो मतभेद क...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  October 24, 2018, 12:40 pm
वो कौन सा गीत गाऊँ वो कौन सा राग सुनाऊँ वो कौन सा सुर लगाऊँ जो तेरी प्रिय हो जाऊँ मन का मधुबन सूना है ...तुम बिन...कान्हा बाँसुरी की तान टूट गयी जब से प्रीत तेरी रूठ गयी इक बावरी गम में डूब गयी अब कैसे तुम्हें मनाऊँ मन का मधुबन सूना है ...तुम बिन...कान्हा अब जैसी हूँ वैसी स्वीकार...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 3, 2018, 6:40 pm
कृष्ण तुम नहीं थे ईश्वरईश्वर होने और बनाए जाने में फर्क होता हैनहीं किये तुमने कोई चमत्कारये जो तप की शक्ति से प्राप्त शक्तियों कामचता रहा हाहाकारअसल में तो तुम्हारे द्वारा किये गए अनुसंधानोंका था प्रतिफलतो क्या अनुसंधान के लिएजिस लगन मेहनत और एकाग्रता की जरूरत हो...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 3, 2018, 3:51 pm
न जाने कौन था वो जिसने आवाज़ दी नाम लेकर - वंदना जाने स्वप्न था कोई या थी कोई कशिश इस जन्म या उस जन्म की यादों का न कोई शहर मिला यात्रा के न पदचिन्ह दिखेमैं ख़ामोशी की सीढ़ी चढ़ गयी कौन सा सिरा पकडूँजो तार से तार जुड़े पता चले किसकी प्रीत की परछाइयाँ लम्बवत पड़ीं न आवाज़ पहचान का स...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  August 31, 2018, 12:35 pm
काश वापसी की कोई राह होती है न ...दृढ निश्चय फिर छोड़ा जा सकता है सारा संसार और मुड़ा जा सकता है वापस उसी मोड़ से लेकिन क्या संभव है सारा संसार छोड़ने पर भी उम्र का वापस मुड़ना ?युवावस्था का फिर बचपन में लौटना वृद्धावस्था का फिर युवा होना है न ....मन को साध लो फिर जो चाहे बना लो कैसे ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  July 15, 2018, 4:43 pm
मरघट का सन्नाटा पसरा है मन प्रेत सा भटका है जब से तुम बिछड़े हो प्रियतम हर मोड़ पे इक हादसा गुजरा है मैं तू वह में ही बस जीवन उलझा है ये कैसा मौन का दौर गुजरा है चुभती हैं किरचें जिसकी वो दर्पण चूर चूर हो बिखरा है जब से तुम बिछड़े हो प्रियतम हर मोड़ पे इक हादसा ग...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  June 21, 2018, 12:32 pm
मैं भाग रही हूँ तुमसे दूरअब तुम मुझे पकड़ोरोक सको तो रोक लोक्योंकिछोड़कर जाने पर सिर्फ तुम्हारा ही तो कॉपीराइट नहींगर पकड़ सकोगेफिर संभाल सकोगेऔर खुद को चेता सकोगेकिहर आईने में दरार डालना ठीक नहीं होताशायद तभीतुम अपने अस्तित्व से वाकिफ करा पाओऔर स्वयं को स्थापितक्यो...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  June 19, 2018, 12:29 pm
मैं बनूँ सुवास तुम्हारी कृष्णा करो स्वीकार मेरी ये सेवाजाने कितने युग बीते जाने कितने जन्म रीते पल पल खाए मुझे ये तृष्णा मैं बनूँ सुवास तुम्हारी कृष्णा जाने कब बसंत बीता जाने कब सावन रीता चेतनता हुई मलीन कृष्णा मैं बनूँ सुवास तुम्हारी कृष्णाजाने कितनी प्यासी हूँ जन...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  June 17, 2018, 12:44 pm
पीर प्रसव की यूं ही तो नहीं होती हैइसमें भी तो इक चाहत जन्म लेती हैऔर जन्म किसी का भी होपीर बिना ना हो सकता हैयही तो प्रसव का सुख होता हैगर करें विचार शुरू से तो बीजारोपण से लेकर प्रसव वेदना तकएक सफ़र ही तो तय होता हैजो नयी संभावनाओं को जन्म देता हैतो क्यों ना आजसफ़र का द...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  May 24, 2018, 11:50 am
मेरी सीमितताएँसीमित संसाधन सीमित सोच उठने नहीं देते तल से मुझेफिर कैसे एक नया आसमां उगाऊँहोंगे औरों के लिए तुम चितचोर भँवरे माखनचोर नंदकिशोर लड्डूगोपाल और न जाने क्या क्या मगर इक नशा सा तारी हो गया है जब से तुम्हारा संग किया मेरे लिए तो मेरी 'वासना'भी तुम हो और 'व्यसन'भ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  October 5, 2017, 11:47 am
राम जाने क्यों हम तुम्हें मानव ही न मान पाए महामानव भी नहीं ईश्वरत्व से कम पर कोई समझौता कर ही न पाए शायद आसान है हमारे लिए यही सबसे उत्तम और सुलभ साधन वर्ना यदि स्वीकारा जाता तुम्हारा मानव रूप तो कैसे संभव था अपने स्वार्थ की रोटी का सेंका जाना ?आसान है हमारे लिए ईश्वर बन...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 30, 2017, 4:50 pm
मुझ सी हठी न मिली होगी कोई तभी तो तुमने भी चुनी उलट राह ... मिलन की दुखी दोनों ही अपनी अपनी जगह दिल न समंदर रहा न दरिया सूख गए ह्रदय के भाव पीर की ओढ़ चुनरिया अब ढूँढूं प्रीत गगरिया और तुम लेते रहे चटखारे खेलते रहे , देखते रहे छटपटाहट फिर चाहे खुद भी छटपटाते रहे मगर भाव पुष्ट क...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  August 21, 2017, 11:31 am
पूछना तो नहीं चाहिए लेकिन पूछ रही हूँ क्या जरूरी है हर युग में तुम्हारे जन्म से पहले नन्हों का संहार ...कंसों द्वारा कहो तो ओ कृष्ण जबकि मनाते हैं हम तुम्हारा जन्म प्रतीक स्वरुप सोचती हूँ यदि सच में तुम्हारा जन्म हो फिर से तो जाने कितना बड़ा संहार हो सिहर उठती है आत्मा क्य...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  August 14, 2017, 3:40 pm
 मित्रता किसने किससे निभाई ये बात कहाँ दुनिया जान पाई निर्धन होते हुए भी वो तो प्रेम का नाता निभाता रहा अपनी गरीबी को ही बादशाहत मानता रहा उधर सम्पन्न होते हुए भीअपने अहम के बोझ तले तुमने ही आने/अपनाने में देर लगाई तुम्हारे लिए क्या दूर था और क्या पास मगर ये सच है नह...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  August 6, 2017, 1:50 pm
तुम थे तो जहान में सबसे धनवान थी मैं अब तुम नहींतुम्हारी याद नहीं तुम्हारा ख्याल तक नहीं तो मुझ सा कंगाल भी कोई नहीं वो मोहब्बत की इन्तेहा थी ये तेरे वजूद को नकारने की इन्तेहा है जानते हो न इसका कारण भी तुम ही हो फिर निवारण की गली मैं अकेली कैसे जाऊँ?मुझे जो निभाना था , नि...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  August 2, 2017, 12:52 pm
उलझनों में उलझी इक डोर हूँ मैं या तुम नही जानती मगर जिस राह पर चली वहीं गयी छली अब किस ओर करूँ प्रयाण जो मुझे मिले मेरा प्रमाण अखरता है अक्सर अक्स सिमटा सा , बेढब सा बायस नहीं अब कोई जो पहन लूँ मुंदरी तेरे नाम की और हो जाऊँ प्रेम दीवानी कि फायदे का सौदा करना तुम्हारी फितर...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  July 19, 2017, 11:20 am
मैं निर्जन पथगामी अवलंब तुम्हारा चाहूँसाँझ का दीपक स्नेह की बाती तुमसे ही जलवाऊँमैं, तुमसी प्रीत कहाँ से पाऊँ मन मंदिर की देह पे अंकित अमिट प्रेम की लिपि फिर भी खाली हाथ पछताऊँ मैं, रीती गागर कहलाऊँ जो पाया सब कुछ खोकर खुद से ही निर्द्वंद होकर तर्कों के महल दोमहलों में ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  July 8, 2017, 5:00 pm
मैं भाग रही हूँ तुमसे दूर अब तुम मुझे पकड़ो रोक सको तो रोक लो क्योंकि छोड़कर जाने पर सिर्फ तुम्हारा ही तो कॉपीराइट नहीं गर पकड़ सकोगे फिर संभाल सकोगे और खुद को चेता सकोगे कि हर आईने में दरार डालना ठीक नहीं होता शायद तभी तुम अपने अस्तित्व से वाकिफ करा पाओ और स्वयं को स्थापित ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  June 19, 2017, 12:36 pm
संवाद के आखिरी पलों में नहीं झरते पत्ते टहनियों से नहीं करती घडी टिक टिक नहीं उगते क्यारियों में फूल रुक जाता है वक्त सहमकर कसमसाकर कि नाज़ुक मोड़ों पर ही अक्सर ठहर जाती है कश्ती कोई गिरह खुले न खुले कोई जिरह आकार ले न ले बेमानी है कि हंस ने तो उड़ना ही अकेला है ये तमाशे का व...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  May 23, 2017, 12:54 pm
जाने किस खजुराहो की तलाश में भटकती है मन की मीन कि एक घूँट की प्यास से लडती है प्रतिदिन आओ कि घूँघट उठा दो जलवा दिखा दो अभिसार को फागुन भी है और वसंत भी द्वैत से अद्वैत के सफ़र में प्रीत की रागिनी हो तो ओ नीलकमल !मन मीरा और तन राधा हो जाता है अलौकिकता मिलन में भी और जुदाई में ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  February 16, 2017, 12:17 pm
  मैं बंजारन आधी रात पुकारूँ पी कहाँ पी कहाँ वो छुपे नयनन की कोरन पे वो लुके पलकों की चिलमन में वो रुके अधरों की थिरकन पे अब साँझ सवेरे भूल गयी हूँ इक पथिक सी भटक गयी हूँ कोई मीरा कोई राधा पुकारे पर मैं तो बावरी हो गयी हूँ प्रेम की पायल प्रीत के घुँघरू मुझ बंजारन के बने स...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  February 13, 2017, 11:59 am
एक गुनगुनाहट सी हर पल थिरकती है साँसों संग एक मुस्कराहट फिजाँ में करती है नर्तन उधर से आती उमड़ती - घुमड़ती आवाज़ दीदार है मेरे महबूब का अब और कौन सी इबादत करूँ या रब किसे मानूँ खुदा और किससे करूँ शिकवा वो है मैं हूँ मैं हूँ वो है मन के इकतारे पर बिखरी इक धुन है 'यार मेरा मैं या...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  October 21, 2016, 1:43 pm
मोर वचन चाहे पड़ जाए फीको संत वचन पत्थर कर लीको  तुमने ही कहा था न तो आज तुम ही उस कसौटी के लिए हो जाओ तैयार बाँध लो कमरबंध कर लो सुरक्षा के सभी अचूक उपाय इस बार तुम्हें देनी है परीक्षा  तो सुनो मेरा समर्पण वो नहीं जैसा तुम चाहते हो यानि भक्त का सब हर लूं तब उसे अपने चर...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 23, 2016, 11:55 am
मैं पथिक*********मैं पथिक किस राह की ढूँढूँ पता गली गली मैं विकल मुक्तामणि सी फिरूँ यहाँ वहाँ मचली मचली ये घनघोर मेघ गर्जन सुन कर ह्रदय हुआ कम्पित कम्पित ये कैसी अटूट प्रीत प्रीतम की आह भी निकले सिसकी सिसकी ओ श्यामल सौरभ श्याम बदन तुम बिन फिरूँ भटकी भटकी गह लो बांह मेरी अब म...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 12, 2016, 12:35 pm
  तेरी कस्तूरी से महकती थी मेरे मन की बगिया और अब फासलों से गुजरती है जीवन की नदिया ये इश्क के जनाजे हैं और यार का करम है जहाँ प्यास के चश्मे प्यासे ही बहते हैं तुम क्या जानो विरह की पीर और मोहब्बत का क्षीर बस माखन मिश्री और रास रंग तक ही सीमित रही तुम्हारी दृष्टि ........मो...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 6, 2016, 12:01 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3815) कुल पोस्ट (182943)