Hamarivani.com

एक प्रयास

मैं भाग रही हूँ तुमसे दूर अब तुम मुझे पकड़ो रोक सको तो रोक लो क्योंकि छोड़कर जाने पर सिर्फ तुम्हारा ही तो कॉपीराइट नहीं गर पकड़ सकोगे फिर संभाल सकोगे और खुद को चेता सकोगे कि हर आईने में दरार डालना ठीक नहीं होता शायद तभी तुम अपने अस्तित्व से वाकिफ करा पाओ और स्वयं को स्थापित ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  June 19, 2017, 12:36 pm
संवाद के आखिरी पलों में नहीं झरते पत्ते टहनियों से नहीं करती घडी टिक टिक नहीं उगते क्यारियों में फूल रुक जाता है वक्त सहमकर कसमसाकर कि नाज़ुक मोड़ों पर ही अक्सर ठहर जाती है कश्ती कोई गिरह खुले न खुले कोई जिरह आकार ले न ले बेमानी है कि हंस ने तो उड़ना ही अकेला है ये तमाशे का व...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  May 23, 2017, 12:54 pm
जाने किस खजुराहो की तलाश में भटकती है मन की मीन कि एक घूँट की प्यास से लडती है प्रतिदिन आओ कि घूँघट उठा दो जलवा दिखा दो अभिसार को फागुन भी है और वसंत भी द्वैत से अद्वैत के सफ़र में प्रीत की रागिनी हो तो ओ नीलकमल !मन मीरा और तन राधा हो जाता है अलौकिकता मिलन में भी और जुदाई में ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  February 16, 2017, 12:17 pm
  मैं बंजारन आधी रात पुकारूँ पी कहाँ पी कहाँ वो छुपे नयनन की कोरन पे वो लुके पलकों की चिलमन में वो रुके अधरों की थिरकन पे अब साँझ सवेरे भूल गयी हूँ इक पथिक सी भटक गयी हूँ कोई मीरा कोई राधा पुकारे पर मैं तो बावरी हो गयी हूँ प्रेम की पायल प्रीत के घुँघरू मुझ बंजारन के बने स...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  February 13, 2017, 11:59 am
एक गुनगुनाहट सी हर पल थिरकती है साँसों संग एक मुस्कराहट फिजाँ में करती है नर्तन उधर से आती उमड़ती - घुमड़ती आवाज़ दीदार है मेरे महबूब का अब और कौन सी इबादत करूँ या रब किसे मानूँ खुदा और किससे करूँ शिकवा वो है मैं हूँ मैं हूँ वो है मन के इकतारे पर बिखरी इक धुन है 'यार मेरा मैं या...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  October 21, 2016, 1:43 pm
मोर वचन चाहे पड़ जाए फीको संत वचन पत्थर कर लीको  तुमने ही कहा था न तो आज तुम ही उस कसौटी के लिए हो जाओ तैयार बाँध लो कमरबंध कर लो सुरक्षा के सभी अचूक उपाय इस बार तुम्हें देनी है परीक्षा  तो सुनो मेरा समर्पण वो नहीं जैसा तुम चाहते हो यानि भक्त का सब हर लूं तब उसे अपने चर...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 23, 2016, 11:55 am
मैं पथिक*********मैं पथिक किस राह की ढूँढूँ पता गली गली मैं विकल मुक्तामणि सी फिरूँ यहाँ वहाँ मचली मचली ये घनघोर मेघ गर्जन सुन कर ह्रदय हुआ कम्पित कम्पित ये कैसी अटूट प्रीत प्रीतम की आह भी निकले सिसकी सिसकी ओ श्यामल सौरभ श्याम बदन तुम बिन फिरूँ भटकी भटकी गह लो बांह मेरी अब म...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 12, 2016, 12:35 pm
  तेरी कस्तूरी से महकती थी मेरे मन की बगिया और अब फासलों से गुजरती है जीवन की नदिया ये इश्क के जनाजे हैं और यार का करम है जहाँ प्यास के चश्मे प्यासे ही बहते हैं तुम क्या जानो विरह की पीर और मोहब्बत का क्षीर बस माखन मिश्री और रास रंग तक ही सीमित रही तुम्हारी दृष्टि ........मो...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  September 6, 2016, 12:01 pm
  मन महोत्सव बने तो गाऊँ गुनगुनाऊँ उन्हें रिझाऊँ कमली बन जाऊँ मगर मन मधुबन उजड़ गया उनका प्यार मुझसे बिछड़ गया अब किस ठौर जाऊँ किस पानी से सींचूं जो मन में फिर से उनके प्रेम की बेल उगाऊँमन महोत्सव बने तो सखी री मैं भी श्याम गुन गाऊँ युगों की अविरल प्यास बुझाऊँ चरण क...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  August 25, 2016, 12:02 pm
आज जन्मदिन है तुम्हारा मना रहे हैं सब अपने अपने ढंग से जिसके पास जो है कर रहा है तुम पर न्यौछावर मगर वो क्या करे जिसके पास अपना आप भी न बचा हो मेरे पास तो बचा ही नहीं कुछ और जो तुमने दिया है वो ही तो तुम्हें दे सकती हूँ विरह की अग्नि से दग्ध मेरा मन स्वीकार सको तो स्वीकार लेन...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  August 25, 2016, 11:37 am
मन का मरना मानो निष्प्राण हो जाना जानते तो हो ही अब सावन बरसे या भादों जो मर जाया करते हैं कितना ही प्राण फूँकोहरे नहीं होते जब से गए हो तुम मन प्राण आत्मा रूह कुछ भी नाम दे लो रूठा साज सिंगार वो देह का विदेह हो जाना वो आत्मा के नर्तन पर आनंद का पारावार न रहना जाने किस सूखे ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  August 5, 2016, 1:48 pm
सब तहस नहस कर देना नेस्तनाबूद कर देना बर्बाद कर देना देकर सब छीन लेना कोई तुमसे सीखे बर्दाश्त जो नहीं होता किसी का सुख फिर वो लौकिक हो या पारलौकिक कर ही देते हो सब ख़त्म उस पर चाहते हो सब तुम्हें चाहें आखिर क्यों ?तुम निर्मोही तो कुछ निर्मोह का अंश हम में भी आना ही हुआ तो क्...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  July 27, 2016, 6:21 pm
कभी कभी लगता है समाधान तो तुम्हारे पास भी नहीं है जब नहीं कर पाते समाधान दुनियावी नीतियों का दुनिया के व्यवहार का तो बुला लिया करते हो अपने चाहने वाले को अपने पास और दिखा देते हो खुद को ज़माने की नज़र में पाक साफ़ तुम्हें चाहने वाले करोड़ों होंगे और हैं लेकिन तुमने किसी को न...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  May 30, 2016, 12:27 pm
ये जानते हुए भी कि तुम ही हो मेरे तर्क वितर्क संकल्प विकल्प आस्था अनास्था फिर भी आरोप प्रत्यारोप से नहीं कर पाती ख़ारिज तुम्हें ऊँगली तुम पर ही उठा देती हैं मेरी चेतना और तुम प्रश्नचिन्ह का वो कटघरा बन जाते होजो किसी उत्तर का मोहताज नहीं ये कैसा बनवास है मेरा और तुम्हार...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  May 7, 2016, 4:29 pm
आस्तिकता से नास्तिकता की ओर प्रयाण शायद ऐसे ही होता है जब कोई तुम्हें जानने की प्रक्रिया में होता है और जानेगा मुझे ?मानो पूछ रहे हो तुम हाँ , शायद उसी का प्रतिदान है जो तुम दे रहे हो पहले भी कहा था आज भी कहती हूँ नहीं हो तुम किसी के माता पिता , सर्वस्व या स्वामी क्योंकि यदि ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  April 30, 2016, 5:46 pm
जन्मदिन हो या वैवाहिक वर्षगाँठ , यदि भूल जाए कोई एक भी तो उसकी आफत .......लेकिन क्यों ? क्या ये सोचने का विषय नहीं ? अब जन्मदिन तुम्हारा . तुम जन्मे उस दिन जरूरी थोड़े ही तुम्हारा पार्टनर भी उसे याद रखे और खुश होने का दिखावा करे . एक तो तुम पार्टनर की ज़िन्दगी में कम से कम २० से २५ स...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  April 21, 2016, 12:47 pm
सुना है गोपाला नंदलाला तुम्हें लाड लड़ाना बहुत प्रिय है लेकिन मैं झूठा आडम्बर नहीं ओढ़ सकती देखा देखी नहीं कर सकती तर्क कुतर्क के बवंडर में घिर जो अक्सर तुम्हारे कान उमेठ लिया करती है तुम पर ही आरोप प्रत्यारोप किया करती है तुम्हें ही कटघरे में खड़ा कर दिया करती है यहाँ तक ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  April 19, 2016, 1:00 pm
जब दुःख पाना नियति है चाहे तुम्हें की माने या नहीं तो फिर क्यों तुम्हें कोई भजे ?जिसने जितना भजा उतना ही दुःख पाया और जिसने तुम्हारे अस्तित्व पर ही प्रश्न खड़ा किया सुखपूर्वक जीवन बिताया तो बताओ कृष्ण तुम्हारे होने का क्या औचित्य ?अब तुम्हें हम माने या नहीं क्या फर्क पड़...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  April 12, 2016, 5:01 pm
रे निर्मोही जब लौट के जाना ही था तो जीवन में आया ही क्यूँ था ये प्रेम का रोग लगाया ही क्यूँ था अब जीती हैं न मरती हैं तेरी गोपियाँ देख तेरे बिन ज़िन्दगी की तपती रेत में नंगे पाँव भटकती हैं सुन , तुझे जरा भी लाज नहीं आई क्या कभी ?यूँ डेरा उठा लिया जैसे कभी ठहरा ही न था क्या तुझम...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  April 9, 2016, 1:31 pm
वो संवाद के दिन थे या नहीं मगर संवाद जारी था मौन का मुखर संवाद बेशक आशातीत सफलता न दे मगर बेचैनियों में इजाफा कर देता था और संवाद मुकम्मल हो जाता था मगर आज मौन , मौन है जाने किस मरघटी खामोशी ने घेरा है जहाँ सृष्टि है या आँखों से ओझल इसका भी पता नहीं फिर क्रियाकर्म की रस्म क...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  March 30, 2016, 1:25 pm
साँवरे रसिया रे होली के बहाने आ जा साँवरेरसिया रे मोहे अपने रंग में रंग जा आज मोहे रंग भाये न दूजा श्याम रंग में ही रंग जा साँवरेरसिया रे एक बार गले लग जा साँवरेरसिया रे प्रीत को अमर कर जा सखिया सभी रंगी खड़ी हैं मेरी चूनर सूखी पड़ी है तू ही आकर भिगो ज...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  March 23, 2016, 11:48 am
अब मेरे पास शब्द है न भाषा न बची खुद से ही कोई आशा सभी सांसारिक तृष्णाओं से होकर मुक्त हो गया हूँ निर्द्वंद बिल्कुल नवजात शिशु सा कच्ची मिटटी सा क्या अब संसारिकता से परे भर सकते हो इसमें कुछ जो जीवन के औचित्य को कर दे रेखांकित ?या फिर चलता रहेगा चक्र जीवन मृत्यु का अनवरत ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  March 20, 2016, 4:33 pm
अब कोई प्रतीक्षा नहीं कोई उमंग कोई उल्लास नहीं जाने किस परछत्ती में दुबक गयी है ललक मेरी कि सुबहो शाम की गर्द से अटा पड़ा है ख्याल तेरा इतना बेनूर हो जाना ज़िन्दगी का किकभी कभी शक होता है खुद के जिंदा होने पर शायद मेरे मौन का विलोम थे तुम ... सिर्फ तुम ... माधव !!!...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  January 2, 2016, 4:25 pm
लगता होगा कुम्भ हर बारह बरस में मगर मेरे मौन का कुम्भ तो महीनों दिनों और पलों में होकर विभक्त अक्सर टोहता रहता है मुझे और मैं अपनी शिथिल इन्द्रियों शिथिल साँसों संग लगा लेती हूँ डुबकी अनंत में अनंत होकर बस यही तो है मेरा विस्तार और शून्य ...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  December 27, 2015, 12:43 pm
सुना है खिले कँवल ही देवता को अर्पित किये जाते हैं मन तो मर चुका तुम्हारे जाने के साथ ही अब इस मिटटी से कौन सा खिलौना बनाओगे और खेलोगे ?जलती चिता होती तो सुलगती रहती उम्र भर डालती रहती उसमे तुम्हारे निष्ठुर प्रेम की आहुति मगर यहाँ न राख है न चिता खुद भी शक में हूँ जिंदा हो...
एक प्रयास...
वन्दना
Tag :
  December 14, 2015, 12:02 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3666) कुल पोस्ट (165802)