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Blog: SUBODH BHARTIYA

Blogger: Subodh Bhartiya
हवा जब तेज़ चलती है तो पत्ते टूट जाते हैंमुसीबत के दिनों में अच्छे-अच्छे टूट जाते हैंबहुत मजबूर हैं हम झूठ तो बोला नहीं जाताअगर सच बोलते हैं हम तो रिश्ते टूट जाते हैंबहुत मुश्किल सही फिर भी मिज़ाज अपना बदल लो तुमलचक जिनमें नहीं होती तने वे टूट जाते हैंभले ही देर से आए म... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   5:27pm 6 Feb 2012 #
Blogger: Subodh Bhartiya
1. A daily application of the mixture of sandalwood and rose water-cools your skin as well as brings a fair glow to you.http://www.herbalcureindia.com/lakme/lakme-body-care.html2. You can make a fine paste of grinded almonds and rose water. A regular application of this paste on the face and neck will bring a natural fairness.3. Vegetables have a wonderful power in enhancing fairness. Cut a tomato into two halves and rub it on your face. You can see the change within a few days.You can also soak potatoes in cold water for 10 minutes. Rub theses slices on your face, hands and neck. This regular act will bring a positive result within a short period.4. You can also soak potatoes in cold water ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   8:24am 22 Jan 2012 #
Blogger: Subodh Bhartiya
ये मोजज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझेकि संग तुझपे गिरे और ज़ख़्म आये मुझेवो महरबाँ है तोप इक़रार क्यूँ नहीं करतावो बदगुमाँ है तो सौ बार आज़माये मुझेमैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साये कोबदन मेरा ही सही दोपहर न भाये मुझेमैं घर से तेरी तमन्ना पहन के जब निकलूँबरहना शहर में ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   3:19pm 21 Jan 2012 #
Blogger: Subodh Bhartiya
पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइयेफिर जो निगाह-ए-यार कहे मान जाइयेपहले मिज़ाज-ए-राहगुज़र जान जाइयेफिर गर्द-ए-राह जो भी कहे मान जाइयेकुछ कह रही है आपके सीने की धड़कनेमेरी सुनें तो दिल का कहा मान जाइयेइक धूप सी जमी है निगाहों के आस पासये आप हैं तो आप पे क़ुर्बान जाइयेशायद ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   3:14pm 21 Jan 2012 #
Blogger: Subodh Bhartiya
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं किस को ख़बर थी साँवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैं सावन आया लेकिन अपनी क़िस्मत में बरसात नहीं माना जीवन में औरत एक बार मोहब्बत करती है लेकिन मुझको ये तो बता दे क्या तू औरत ज़ात नहीं ख़त्म हुआ ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   3:13pm 21 Jan 2012 #
Blogger: Subodh Bhartiya
ज़िन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा तू मिला है तो ये एहसास हुआ है मुझको ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिये थोड़ी है इक ज़रा सा ग़म-ए-दौराँ का भी हक़ है जिस पर मैनें वो साँस भी तेरे लिये रख छोड़ी है तुझपे हो जाऊँगा क़ुरबान तुझे चाहूँगा अपन... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   3:11pm 21 Jan 2012 #
Blogger: Subodh Bhartiya
मैं ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलतानई ज़मीं नया आसमाँ नहीं मिलतानई ज़मीं नया आसमाँ भी मिल जायेनये बशर का कहीं कुछ निशाँ नहीं मिलतावो तेग़ मिल गई जिस से हुआ है क़त्ल मेराकिसी के हाथ का उस पर निशाँ नहीं मिलतावो मेरा गाँव है वो मेरे गाँव के चूल्हेकि जिन में शोले तो शोले... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   5:53pm 13 Dec 2011 #
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कोई ये कैसे बता ये के वो तन्हा क्यों हैंवो जो अपना था वो ही और किसी का क्यों हैंयही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यों हैंयही होता हैं तो आखिर यही होता क्यों हैंएक ज़रा हाथ बढ़ा, दे तो पकड़ लें दामनउसके सीने में समा जाये हमारी धड़कनइतनी क़ुर्बत हैं तो फिर फ़ासला इतना क्... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   5:51pm 13 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
किसी को क्या पता जो महफ़िलों की जान होता है कभी होता है जब तन्हा तो कितनी देर रोता है यह दुनिया है यहाँ होती है आसानी भी मुश्किल भी बुरा भी ख़ूब होता है यहाँ अच्छा भी होता है तेरी यादों के बादल से गुज़र होता है जब इसका उदासी का परिंदा मुझसे मिलकर खूब रोता है किसी को रिश्ते ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   5:49pm 13 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
अब तो आते हैं सभी दिल को दुखाने वाले जाने किस राह गए नाज़ उठाने वाले क्या गुज़रती है किसी पर यह कहाँ सोचते हैं कितने बेदर्द हैं ये रूठ के जाने वाले दर्द उनका कि जो फुटपाथ पे करते हैं बसर क्या समझ पाएँगे ये राजघराने वाले इश्क़ में पहले तो बीमार बना देते हैं फिर पलटते ही नह... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:48pm 13 Dec 2011 #
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हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरामैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेराकिससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ बरसों सेहर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेराएक से हो गए मौसमों के चेहरे सारेमेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरामुद्दतें बीत गईं ख़्वाब सुहाना देखेजागता रहता है हर ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:45pm 13 Dec 2011 #
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होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ हैउन से नज़रें क्या मिली रोशन फिजाएँ हो गईं आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ हैख़ुलती ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ हैहम लबों से कह न पाये उ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   5:44pm 13 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
जब किसी से कोई गिला रखनासामने अपने आईना रखनायूँ उजालों से वास्ता रखनाशम्मा के पास ही हवा रखनाघर की तामीर[1]चाहे जैसी होइस में रोने की जगह रखनामस्जिदें हैं नमाज़ियों के लियेअपने घर में कहीं ख़ुदा रखनामिलना जुलना जहाँ ज़रूरी होमिलने-जुलने का हौसला रखना... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   5:43pm 13 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जायेघर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जायेजिन चिराग़ों को हवाओं का कोई ख़ौफ़ नहींउन चिराग़ों को हवाओं से बचाया जायेबाग में जाने के आदाब हुआ करते हैंकिसी तितली को न फूलों से उड़ाया जायेख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब मेंऔर कुछ दिन यूँ ह... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   5:39pm 13 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
आदमी की अजब-सी हालत है।वहशियों में ग़ज़ब की ताक़त है॥चन्द नंगों ने लूट ली महफ़िल,और सकते में आज बहुमत है।अब किसे इस चमन की चिन्ता है,अब किसे सोचने की फुरसत है?जिनके पैरों तले ज़मीन नहीं,उनके सिर पर उसूल की छत है।रेशमी शब्दजाल का पर्याय,हर समय, हर जगह सियासत है।वक़्त के ड... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   5:29pm 13 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
जब तलक ये ज़िन्दगी बाक़ी रहेगीज़िन्दगी में तिशनगी बाक़ी रहेगीसूख जाएंगे जहाँ के सारे दरियाआँसुओं की ये नदी बाक़ी रहेगीमेह्रबाँ जब तक हवायें हैं तभी तकइस दिए में रोशनी बाक़ी रहेगीकौन दुनिया में मुकम्मल हो सका हैकुछ न कुछ सब में कमी बाक़ी रहेगीआज का दिन चैन से गुज़रा,... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:26pm 13 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
ये जो ज़िन्दगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है|कहीं इक हसीन सा ख़्वाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब है|[अज़ाब=दुखदाई वस्तु/वेदना]कहीं छँव है कहीं धूप है कहीं और ही कोई रूप है,कई चेहरे इस में छुपे हुए इक अजीब सी ये नक़ाब है|कहीं खो दिया कहीं पा लिया कहीं रो लिया कहीं गा लिया,कह... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:23pm 13 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
क्‍यों डरें ज़िन्‍दगी में क्‍या होगाकुछ ना होगा तो तज़रूबा होगाहँसती आँखों में झाँक कर देखोकोई आँसू कहीं छुपा होगाइन दिनों ना-उम्‍मीद सा हूँ मैंशायद उसने भी ये सुना होगादेखकर तुमको सोचता हूँ मैंक्‍या किसी ने तुम्‍हें छुआ होगा ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   9:17am 11 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
हर ख़ुशी में कोई कमी-सी हैहँसती आँखों में भी नमी-सी हैदिन भी चुप चाप सर झुकाये थारात की नब्ज़ भी थमी-सी हैकिसको समझायें किसकी बात नहींज़हन और दिल में फिर ठनी-सी हैख़्वाब था या ग़ुबार था कोई गर्द इन पलकों पे जमी-सी हैकह गए हम ये किससे दिल की बातशहर में एक सनसनी-सी हैहसरते... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   9:16am 11 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
आज मैंने अपना फिर सौदा कियाऔर फिर मैं दूर से देखा कियाज़िन्‍दगी भर मेरे काम आए असूलएक एक करके मैं उन्‍हें बेचा कियाकुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थीतुम से क्‍या कहते कि तुमने क्‍या कियाहो गई थी दिल को कुछ उम्‍मीद सीखैर तुमने जो किया अच्‍छा किया ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   9:12am 11 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ हैज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ हैजब हक़ीक़त है के हर ज़र्रे में तू रहता हैफिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ हैअपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भीअपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ हैज़िन्दगी जीने के क़ाबिल ह... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   9:11am 11 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
मेरे दुख की कोई दवा न करोमुझ को मुझ से अभी जुदा न करोनाख़ुदा को ख़ुदा कहा है तो फिरडूब जाओ, ख़ुदा ख़ुदा न करोये सिखाया है दोस्ती ने हमेंदोस्त बनकर कभी वफ़ा न करोइश्क़ है इश्क़, ये मज़ाक नहींचंद लम्हों में फ़ैसला न करोआशिक़ी हो या बंदगी 'फ़ाकिर'बे-दिली से तो इबतिदा न करो... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   9:10am 11 Dec 2011 #
Blogger: Subodh Bhartiya
हम तो यूँ अपनी ज़िन्दगी से मिलेहम तो यूँ अपनी ज़िन्दगी से मिले अजनबी जैसे अजनबी से मिलेहर वफ़ा एक जुर्म हो गोया दोस्त कुछ ऐसी बेरुख़ी से मिलेफूल ही फूल हम ने माँगे थे दाग़ ही दाग़ ज़िन्दगी से मिलेजिस तरह आप हम से मिलते हैं आदमी यूँ न आदमी से मिले... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   9:04am 11 Dec 2011 #
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