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Blog: मेरी संवेदना

Blogger: Nityanand Gayen
वे ,जो लूट रहे हैंबोल कर झूठउन्हें माफ़ है सब|जिन्होंने बड़ा ली हैदाढ़ी , मूछऔर केशगेरुआ वस्त्र पहनकरबन वैठे हैं बाबाउन्हें माफ़ है सब |वे , जोपहन कर टोपीहमें पहना रहे हैं टोपीऔर मंच पर चढ़ करपहनते हैं नोटों की मालाऔर होते गए मालामालजिनके भीतर का गीदड़पहने हुए हैं , आदम... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   2:31am 15 Jul 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
कुछ इस तरह से सिकुड़ गया प्रेम जैसे ,फागुन-चैत में सूखता है ताल का पानी मौसमी प्रेम अमर नही होता मालूम था तुम्हे ,अब करो फिर सावन का इंतज़ारक्या पता , फिर पनप जाये तुम्हारा प्यार .............. Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   5:36am 24 Jun 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
तुम्हे गिना था अपनों में रखा था पलकों पर मूँद कर आँखे यकीं करना, खता थी मेरी सीखा दिया, तुमने भावनाओं में डूबना खता थी मेरी, जता दिया तुमने ...... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   5:58pm 21 Jun 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
परिवर्तन के नारों के बीच शांत पड़ी है  ‘मौनी नदी’सुंदरवन के बीच कुछ बचे बाघों ने माथे पर लिए आदमखोर का कलंकपंकिल कछार पर  नदी किनारे छोड़ दिए हैंपंजों के निशान ताकि, गिन सके हम आसानी से उनकी संख्या और मैनग्रोव के जंगल करते हैं ज्वार का इंतेजार जंगल निवासी भी हो गए विलुप... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   2:38pm 12 Jun 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
शिखोरबाली (मेरा गांव ) में आज अंतिम दिन है ....बहुत मुश्किल है तुम्हे भूलना तुम्हे छोडना 'मेरे साथ जायेगी तुम्हारी मिट्टी की खुशबू हवा की महक चिडियों की चहक कच्ची सड़कमन उदास हैहवा भी बंद हैतुम्हे भी गम हैमेरी आँखें आज नम है ........... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   7:35pm 9 Jun 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
मेरा विरोध यूँ ही जारी रहे ताकि , मैं सक्रिय हूँ अहसास होता रहे |रोज करोतुम मेरी मौत की दुआमैं जीवित हूँअहसास होता रहे |यूँ ही देते रहो अहसानों के तानेताकि , मैं ऋणी हूँ तुम्हारायह अहसास होता रहे |छुप कर करो वारपीठ परएक दुश्मन है मेरा, कायरअहसास होता रहे |... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   10:30am 7 Jun 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
जल दर्पण में देखा चाँद को एक दम शांत लहरों ने किया विचलित रह -रह कर पानी को मालूम था चाँद की बेचैनी ......... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   8:59am 7 Jun 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
तुम्हारे कांधों से जब उतरे मेरी सांसे और भीग जाये तुम्हारा तन मेरे अश्कों सेतब....बंद आँखों से खोजना मुझेतुम बीते हुए हर लम्हे  मेंमेरी मौजूदगी का अहसास होने तक ............ Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   5:00pm 6 Jun 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
दिल्ली में जब होता हैमंथन मूल्य वृद्धि परवे खामोश रहते हैंख़ामोशी, समर्थन हैवे शायद भूल जाते हैंमूल्य वृद्धि के बाद वे हल्ला करते हैंइसे ही राजनीति कहते हैं किया जाता हैबंध का आह्वानवे भूल जाते हैंकि मूल्य वृद्धि से ही जीवनआप ही थम जाता है आम आदमी काबस थमती नहीलाल बत... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   10:00am 1 Jun 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
उस पार हल्दियाइस पार मैंबीच हमारे डायमंड हार्बर नदीतीब्र लहरेंलहरों पर नाचती नौकाएंबेचैन मन की भावनाओं की तरह |वाम शासन के पतन के बादतानाशाह के उदय के साथपरिवर्तन के नाम परबंग सागर मेंडूबते देखा आज सूरज कोउदास मन के साथभूख की आग में जलतीदेह व्यापार में लिप्तकिशोरी ... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   7:13pm 30 May 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
शुद्धता बची है अभीहरे –भरे दरख्तों के बीचमेरे गांव मिट्टी में , हवा मेंतभी तो हंसते हैं वृक्ष,चिड़िया और तालाब का पानी |षड्यंत्रों की खबर सेदहल उठता है इनका मनशहरी आगंतुक केआने की सूचना पा करमछलियाँ चली जाती हैजल की गहराई मेंकाली परछाई से बचने कोसड़के रोक लेती हैंअपन... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   11:02am 15 May 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
गंगा, मैं जा रहा हूँइस साहित्य भूमि से मन में समाकरतुम्हारी स्मृति | फिर देखूंगा तुम्हे  बाबू घाट पर ,हुगली में |हैदराबाद में जब कभी उदास होगा मेरा मन बनारस घाटों की स्मृतियों को उभार लूँगा सीने में शिवाला घाट से केदार घाट तक स्मृतियों की नौका विहार पर निकल पडूंगा तुम्ह... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   6:52am 13 May 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
गंगा अभीशांत है,किन्तु गर्म हैधूप से |नावे थके हुए मजदूरों की तरहकिनारे पर पड़ी हैं |तापमान गिरने के साथगंगा की छाती परफिर करेंगेये सभी जलक्रीड़ा|विनम्र होने परअपने भी चीर देते हैं सीना ..... ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   9:42am 11 May 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
गंगा अभीशांत है,किन्तु गर्म हैधूप से |नावे थके हुए मजदूरों की तरहकिनारे पर पड़ी हैं |तापमान गिरने के साथगंगा की छाती परफिर करेंगेये सभी जलक्रीड़ा|विनम्र होने परअपने भी चीर देते हैं सीना .........नित्यानंद गायेन, बनारस ११/०५/१२ ,... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   9:32am 11 May 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
चाँद पूछता है :‘कैसी यात्रा है |    किससे मिले ,किसे भर मन से गले लगाया ?किसकी खोजी जीवन धारा दिल भर आया |’चाँद भरे मन से कोहरे में डूबा....८/०५/१२ ५:१८ सुबह --विष्णुचंद्र शर्मा  ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   9:49am 8 May 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
गुवाहाटी के वशिष्ठ आश्रम के कवि अरुणाभ लाल होंठों पर लिए शब्दों के ताप ह्रदय में लिए प्रेम का प्रताप मुस्कुराते हैं मेरे ख्यालों में तुमसे कभी मिला था सहरसा में ,चैनपुर में आज भी मिलता हूँ तुमसे गुजरकर तुम्हारी रचनाओं से सुनो, मित्र अरुणाभ यूँ ही बढते रहना सृजन प... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   7:47pm 6 May 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
रात की तन्हाई क्या बताऊँ तुम्हे मेरी तन्हाई में साझेदार हैउधर रात जागती  है मेरे लिए इधर मैं ,कहीं रात भी बेवफा न समझ ले मुझे उनकी तरह ............. Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   2:10am 28 Apr 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
ऐसा नहीं कि मैं,तुमसे मिलना नही चाहता अकेले में , पर क्या करूँ हर तरफ भीड़ है बेशुमारगली का वो कोना आज ही बिका है तालाब के किनारे खड़े हो गए सीमेंट के जंगल अब यहाँ पंछियों का जोड़ा भी नही आता कभी मैं नही डरता लोगों की कानाफुसी से बस सहम उठता हूँ कभी –कभी खाफ पंचायत से सरकार... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   6:27pm 24 Apr 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
यदि मिला कभी तुमसे ....सुनाऊंगा अपनी कहानी फुर्सत से....अब तक जो बुना थाओढ़ कर सोने दो मुझे... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   7:08pm 23 Apr 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
हम दोनों के बीच की दूरीयूँ ही बनी रहे अपनी सफाई देकर नही करना चाहता खुद पर संदेहन ही करना चाहता हूँ तुम्हे शर्मिंदा ....... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   11:21am 21 Apr 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
एक दीर्घ विश्रामके पश्चात आजकागज –कलमएक साथ हैबहुत कुछ जमा हो गया है ,मन मेंकुछ सुनहरेऔर कुछ गाद की तरहअब तीब्र बेचैनी हैबाहर निकलने कीकविता का रूप लेना चाहती है,स्मृति और भावनाओं का ढेरजो पकते रहे मेरे भीतरविश्राम काल  के दौरानअभी पतझड़ का मौसम हैनग्न है सभी पेड़नम... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   4:09am 17 Apr 2012 #
Blogger: Nityanand Gayen
मैंने नहीं पढ़े तुम्हारे खुदवाए शिलालेखपर पढा है तुम्हारे बारे में इतिहास पुस्तकों में यहाँ तुम्हे लिखा गया है ‘महान’तुम्हारे बर्बर कारनामों के बाद भी सत्ता के लिए तुमने किये अपने ही भाइयों की हत्या रक्त से नहलाया बेकसूर कलिंग को फिर भी तुम महान हो इतिहास की किताबो... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:51pm 7 Apr 2012 #
clicks 84 View   Vote 0 Like   4:10pm 5 Apr 2012 #
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