| आखिर हम कब तक दूसरों के अतिरेक में घिरे रहेंगे, कभी किसी नेता के आभामंडल में, कभी किसी दल के, कभी किसी बाबा के, कभी किसी लोक कलाकार के....। कब समझेंगे कि हम जिसकी खातिर बहस मुबाहिसों में उलझे हैं,वह हमेशा अपने हितों से जुड़े सरोकारों से ही घिरा रहा है। कभी उसने किसी और को सहा... |
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December 2, 2012, 12:42 am |
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November 28, 2012, 1:42 am |
| महीपाल सिंह नेगीवाया ऊर्जा प्रदेश, उत्तराखंड की विकृत होने वाली तस्वीर को वाया यहां केरचनाशील समाज की नजर से देखा जा सकता है। छह साल पहले टिहरी बांध से बिजली पैदाहोते ही योजनाकारों और राजनेताओं ने तालियां बजाई थीं। ठीक इसी दौरान टिहरी डूबनेकी त्रासदी पर भागीरथी घ... |
| महीपाल सिंह नेगीपहले एक बड़ी खबर, जो अब तक मीडिया में नहीं आई है। टिहरीबांध की झील के ऊपरी क्षेत्र में बसे करीब एक दर्जन और गांव कभी भी खिसककर झील मेंसमा सकते हैं। इन गांवों में रहने वाले 1, 336 परिवारों को दूसरी जगह बसाने (पुनर्वासित करने) की सिफारिश भारतीय भूगर्भ सर्वेक्... |
| 11000 से अधिक लोगों द्वारा बोल पहाड़ी ब्लॉग का अवलोकन करने और समय-समय पर पीठ थपथपाने के लिए मैं आप सभी सुधि पाठकों का तहेदिल से शुक्र गुजार हूं। उम्मीद करता हूं कि विजिट करने के साथ आपका स्नेह विचारों, शब्दों, मार्गदर्शन और समालोचना के रुप में भी मिलेगा। बोल पहाड़ी का ... |
| हमने आवाजें उठाई, मुट्ठियां भींची लहराई, ललकारा, लड़े भीड़े तो एक अलग राज्य को हासिल किया। मगर, फिर जुदा होने की खुशी में इतना मस्त हो गए कि अपने आसपास कचोटते सवालों की चुभन को अनदेखा कर दिया, चुप हो गए। खुद भी लूटने खसोटने वालों के साथ मशरुफ हो गए।दौड़ पड़े उंदार की तर... |
| उत्तराखंड जनमंच के जल अधिकार सम्मेलन में शामिल संगठनों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है यदि 28 अप्रैल तक विष्णुगाड-पीपलकोटी, लोहारीनाग पाला,पाला मनेरी और भैंरों घाटी पन बिजली परियोजनाओं पर निर्माण कार्य कराने के आदेश जारी नहीं किए गए तो बद्रीनाथ के कपाट खुलने के दिन... |
| फूलदेई फूलदेई संगरांदसुफल करो नयो साल तुमकु श्री भगवानरंगीला सजीला फूल ऐगीं , डाळा बोटाला ह्र्याँ व्हेगींपौन पंछे दौड़ी गैन, डाळयूँ फूल हंसदा ऐन,तुमारा भण्डार भर्यान, अन्न धन्न कि बरकत ह्वेन औंद रओ ऋतु मॉस. होंद रओ सबकू संगरांद.बच्यां रौला तुम हम त, फिर होली फूल संगर... |
| धाद : लोकभाषा एकांश द्वारा आयोजित ”आखिर कैसे बचेंगी लोकभाषाएं ” व्याख्यान माला-4 देहरादून (तन्मय ममगाईं) : समाज और सरकार दोनों स्तरों पर उत्तराखंड की लोकभाषाओं की निरन्तर अनदेखी होती रही है जिसका नतीजा है के कुमाऊंनी और गढ़वाली दोनों भाषाएं अपने मूल से कटने लगी हैं।... |
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February 28, 2012, 1:09 am |
| नैनीताल। टीम अण्णा का दो दिन का उत्तराखण्ड दौरा विरोध, सवाल और शंकाओंसे भरा रहा। टीम अण्णा ने हरिद्वार, देहरादून, हल्द्वानी और रूद्रपुर मेंसभाएं कर केन्द्र सरकार के लोकपाल बिल को कोसा। उत्तराखण्ड के लोकायुक्तविधेयक और मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खण्डूडी़ की खुद जमक... |
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January 26, 2012, 12:05 am |
| उत्तराखंड की बीजेपी सरकार को.. खंडूड़ी है जरूरी... का एक चुनावी नाराक्या मिला कि उसने इस पहाड़ी राज्य के जनहित के मुद्दों को ही जमीन मेंदफना दिया है. आज जहाँ पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाली 60 प्रतिशत महिलायेंखून की कमी के जूझ रही हों तथा 72 प्रतिशत महिलायें बिना इलाज के किसी न... |
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January 25, 2012, 11:59 pm |
| प्रदेश का लोकायुक्त कानून भाजपा के मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खण्डूडी के गले की फाँस बनता जा रहा है। लोकायुक्त विधेयक बनाने और उसे विधानसभा में पारित करवाने के बाद प्रदेश सरकार और उसके मुखिया भुवन चन्द्र खण्डूड़ी ने इस बात का जोर-शोर से प्रचार किया कि अब राज्य का कोई भ... |
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January 5, 2012, 11:08 pm |
| नववर्ष २०१२ की हार्दिक शुभकामनाएंनया साल कि आप थैं सुभकामना... |
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January 1, 2012, 12:51 am |
| अखिल भारतीय उत्तराखण्ड महासभा कि राष्ट्रीयकार्यकारणी कि बैठक पटियाला, पंजाब में सफलता पूर्वक संपन्न हुई ! बैठक मेंमुख्य रूप से राष्ट्रीय महासचिव श्री मनमोहन दुदपुड़ी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,डॉ. विहारी लाल जालंधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री शम्भू प्रसाद पोखरियाल,राष... |
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December 12, 2011, 11:36 pm |
| उत्तराखंड की लगभग 70 प्रतिशत आबादी गाँव मैं निवास करती है 2011 की जनगणना के अनुसार हमारे देश मैं लगभग 6 लाख 41 हजार गाँव हैं उत्तराखंड मैं भी लगभग 16826 गाँव हैं लेकिन पहाड़ो का शायद ही कोई ऐसा गाँव होगा जिसमे 40 प्रतिशत से कम पलायन हुआ होगा पहाड़ के खासकर उत्तराखंड हिमालय मैं औपन... |
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December 10, 2011, 11:28 pm |
| गढ़वाली भाषा की शब्द-संपदाइन दिनों रमाकांत बेंजवाल की गढ़वाली भाषा पर आधारित पुस्तक ‘गढ़वाली भाषा की शब्द-संपदा’ बेहद चर्चा में है। वह इसलिए क्योंकि उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद गढ़वाली भाषा पर आधारित पहली ऐसी पुस्तक प्रकाशित हुई है, जो आम पाठक को गढ़वाली बोलने एवं सीखने... |
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September 29, 2011, 11:39 pm |
| बीती रात से ही मूसलाधार बारिश रुक रुककर हो रही थी. सुबह काम पर निकला तो शहरभर में आम दिनों जैसी हलचल नहीं थी. मित्रों के साथ त्रिवेणीघाट निकला. गंगा के पानी का रंग गाढ़ा मटमैला होने के कारण हम मान रहे थे कि जलस्तर में कुछ बढ़ोतरी हुई है. लेकिन जब वाटर लेवल पोल को देखा तो और दि... |
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September 15, 2011, 11:52 pm |
| उत्तराखण्ड भाषा संस्थान ने पिछले दिनों राजधानी देहरादून में लोकभाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया। सरकार ने जिस मंशा से इसे किया था, उसे समझने में किसी को ज्यादा दिमागी जमाखर्च करने की जरूरत नहीं है। लोकभाषाओं पर सरकार की चिंता से सभ... |
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