Hamarivani.com

बेचैन आत्मा

नदीअब वैसी नहीं रहीनदी में तैरते हैंनोटों के बंडल, बच्चों की लाशेंगिरगिट हो चुकी हैनदी!माझी नहीं होतानदी की सफाई के लिए जिम्मेदारवो तो बस्सइस पार बैठो तोपहुँचा देगाउस पारनदीके मैली होने के लिए जिम्मेदार हैंइसमें गोता लगानेऔरहर डुबकी के साथपाप कटाने वालेपाप ऐसे कट...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य
  August 18, 2017, 11:15 pm
सच हैयह मौसमसृजन और संहार का है।खूब बारिश होती हैइस मौसम मेंलहलहाने लगते हैंसूखे/बंजर खेतधरती मेंअवतरित होते हैंझिंगुर/मेंढक/मच्छर और..न जाने कितनेकीट,पतंगे!आंवला या कदम्ब के नीचेबैठ कर देखोहवा चली नहीं किटप-टपशाख से झरते हैंनन्हे-मुन्नेफल।सबतुम्हारी तरहनहीं कर ...
बेचैन आत्मा...
Tag :कृष्ण
  August 15, 2017, 9:28 pm
शायद ही कोई पुरुष हो जिसने किसी को छेड़ा न हो। शायद ही कोई महिला हो जो किसी से छिड़ी न हो। किशोरावस्था के साथ छेड़छाड़ युग धर्म की तरह जीवन को रसीला/नशीला बनाता है। छेड़छाड़ करने वाले लेखक ही आगे चलकर व्यंग्यकार के रूप में प्रतिष्ठित हुए। यश प्राप्त करने के बाद भी व्यंग्यकार ...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्यकीजुगलबन्दी
  August 13, 2017, 1:51 pm
धोबियाsssधुल दे मोरी चदरिया मैं ना उतारूँ नाएक जनम दूँखड़े-खड़े मोरी धुल दे चदरिया!आया तेरे घाट बड़ी आस लगा केजाना दरश को शिव की नगरियाधुल दे चदरिया।रंगरेजवाsssरंग दे मोरी चदरिया मैं ना उतारूँ नाएक जनम दूँखड़े-खड़े मोरी रंग दे चदरियाजइसे उजली धुली धोबिया...
बेचैन आत्मा...
Tag :कविता
  July 12, 2017, 1:51 pm
उमड़-घुमड़ जब बादल गरजते हैं तो मनोवृत्ति के अनुरूप सभी के मन में अलग-अलग भाव जगते हैं। नर्तक के पैर थिरकने लगते हैं, गायक गुनगुनाने लगते हैं, शराबी शराब के लिए मचलने लगता है, शाबाबी शबाब के लिए तो कबाबी कबाब ढूँढने लगता है। सभी अपनी शक्ति के अनुरूप अपनी प्यास बुझाकर तृप्त ...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य की जुगलबंदी
  July 8, 2017, 8:43 pm
बाहर लाख अँधेरा होउजाला हैलोहे के घर मेंमौन हैंअंधेरे में डूबे हुए खेतहलचल हैघर मेंबाहर भी श्रमिक थे, किसान थेजब तक सूरज थासूरज के डूबते हीमौन हो गये खेतउजाले के साथशोर काअँधरे के साथमौन कागहरा नाता दिखता है!मौन थे बुद्ध भीजब तक अँधेरा थाअँधेरा हो तो चुप रहना चाहिये...
बेचैन आत्मा...
Tag :ट्रेन
  July 3, 2017, 8:00 pm
पटरी के किनारेमालगाड़ी सेसीमेंट की बोरियाँ उतारकरबीड़ी, खैनी के साथबतकही कर रहे हैंढेर सारे मजदूरचीखता है ट्रेन का इंजनघबरा कर उड़ते हैंखेतों मेंचुग रहे पँछीखुश होते हैं हमलोहे के घर की खिड़की सेइन्हें देखकर!खेतों मेंजमा हो रहा हैबारिश का पानीकिसी ने करी है गुड़ाईकहीं ...
बेचैन आत्मा...
Tag :ट्रेन
  July 3, 2017, 9:39 am
सुहानी शाम आईमन सशंकित हो गयातेरे शहर मेंआज बारिश हुई होगी!खुद से खपादिन भर का तपाठंडी हवाओं के स्पर्श से भीचकरा जाता हैबारिश में भीगे?माटी की सोंधी सुगन्ध पा आल्हादित हुए?या तपते रहे मेरी तरहदिन भर?लोहे के घर की खिड़कियों सेआ रही है ठंडी हवाघास के बोझ का गठ्ठर सर पर लाद...
बेचैन आत्मा...
Tag :ट्रेन
  July 2, 2017, 4:53 pm
बहुत दर्द होता है मरने से पहलेएक बार मर जाओ तो आसान होता है जीना!हँसो मतअपने जीवित होने का सुबूत दोमरने के बाद जानते हो क्&#...
बेचैन आत्मा...
Tag :
  June 30, 2017, 9:05 pm

...
बेचैन आत्मा...
Tag :
  June 30, 2017, 7:53 pm
गेंहूँ की कटाई जोरों पर है. जहाँ देखो वहीं खड़ी फसल से ज्यादा कटे ढेर दिख रहे हैं. कहीँ-कहीं दवाई भी चल रही है, कहीं पूरे साफ हैं खेत. धरती पुत्र सरसों की चादर के बाद अब गेहूं की चादर भी उतार रहे हैं. रोज नये नजारे दिखाती हैं लोहे के घर की खिड़कियाँ जारी है&n...
बेचैन आत्मा...
Tag :यात्रा
  June 26, 2017, 6:02 pm
लोहे के घर मेंपापाबेटे को सुला रहे हैं कंधे परहिल रहे हैं, हिला रहे हैंबेटाले रहा है मजाखुली आंखों से!पापासोच रहे हैंसो चुका है बेटालिटाना चाहते हैं बर्थ परबेटा हँसता हैपापामुस्कुराकर डाँटते हैं..नहीं मानेगा?धरती परजब तक बच्चे हैंबचपना हैजब तक युवा हैंजवानी हैकोई...
बेचैन आत्मा...
Tag :लोहे का घर
  June 25, 2017, 2:12 pm
आसन और प्राणायाम की शिक्षा तो बचपन में उपनयन संस्कार के साथ ही मिल गई थी लेकिन महत्व तब समझ मे आया जब बाबा को टी.वी. में सिखाते हुए देखा! उस समय बाबा को देख कर लगा था...हांय! ये तो हमारे गुरुजी पहले ही बता चुके हैं!!! इसमें नया क्या है?अंहकार को चोट लगी। गलती का एहसास ह...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य
  June 25, 2017, 12:08 pm
लोहे के घर मेंखिड़की के पास ड्रम के ऊपर बैठी बच्चीकभी इस खिड़की सेकभी उस खिड़की सेझाँक रही है बाहरगोधुली बेला हैतेजी से बदल रहे हैं दृश्यचर रही हैं बकरियाँलड़के खेल रहे हैं क्रिकेटआ/जा रही हैं झुग्गी-झोपड़ीएक झोपड़ी के बाहर आंगन बुहार रही हैएक लड़कीबच्ची के दुधमुँहे भाई को ...
बेचैन आत्मा...
Tag :ट्रेन
  May 25, 2017, 7:05 am
बच्चों की चाँद-चाँदनी लहर-लहर संसार हाथों के गट्टे सहलाते माझी के पतवार....
बेचैन आत्मा...
Tag :गोमती
  April 14, 2017, 11:19 am
घने वृक्ष की छाँव क्या करे?मन बैसाखी धूप!सूखी रोटी कैसे खायें?चाँद पी गया दूध!...
बेचैन आत्मा...
Tag :सारनाथ
  April 14, 2017, 11:14 am
मंदिर के दरवाजों में लिखे दोहे भावनाएं हैं जिन्हें पढ़ना और समझना आनन्द दायक है.अनित्य भावना राजा राणा छत्रपति, हाथिन के असबार.मरना सबको एक दिन, अपनी-अपनी बार.. अनित्य यानि अस्थिर, चंचल, छणिक, परिवर्तनशील, विनाशी, संसार की हर वस्तु, हर नाता रिश्ता, हमारा शरीर, आयु, रूप-ल...
बेचैन आत्मा...
Tag :जैन धर्म
  April 4, 2017, 10:01 am
यूँ तो मॉर्निंग रोज ही गुड होती है लेकिन नौकर की मॉर्निंग तभी गुड होती है जब नौकरी से छुट्टी का दिन हो और लगे आज तो हम अपने मर्जी के मालिक हैं। कैमरा लेकर, मोबाइल छोड़ कर सुबह ही घर से निकलने के बाद हरे-भरे निछद्द्म वातावरण में अकेले घूमते हुए एहसास होता है कि हम भी इसी स्वत...
बेचैन आत्मा...
Tag :सुबह की बातें
  February 19, 2017, 9:04 pm
नींद से जाग कर/करवट बदल फिर सो गया/ लोहे के घर में/ खर्राटे भरता आदमी. भीड़ नहीं है ट्रेन में/ जौनपुर पहुँचने वाली है / किसान. मजे-मजे में सुन रहे थे सभी रोज के यात्री उसके खर्राटे. तास खेलने वाले खर्राटे के सुर से सुर मिलाकर जोर से पटकते हैं अपने पत्...
बेचैन आत्मा...
Tag :यात्रा
  February 19, 2017, 8:50 pm
न आम में बौर आया, न गेहूँ की बालियों ने बसन्ती हवा में चुम्मा-चुम्मी शुरू करी, न धूल उड़े शोखी से और न पत्ते ही झरे शाख से! अभी तो कोहरा टपकता है पात से। सुबह जब उठ कर ताला खोलने जाता हूँ गेट का तो टप-टप टपकते ओस को सुन लगता है कहीं बारिश तो नहीं हो रही! कहाँ है बसन्त? कवियों के ब...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य की जुगलबंदी
  February 19, 2017, 8:20 pm
वरिष्ठ नागरिक होनेऔररिटायर्ड होने कीनिर्धारित उम्रसाठ साल होती हैसाठ सेपाँच ही कम होता हैपचपन साल का आदमीसमा जाते हैंहाथ की पाँच उँगलियों मेंख़ास होते हैंये पाँच सालफैले तो जिंदगीरेत की तरह फिसलती,भिखारी-सी लगेजुड़े तोमुठ्ठी बन जाय!कभीअँगूठा या तर्जनी मत दिखाना!पच...
बेचैन आत्मा...
Tag :
  February 3, 2017, 8:05 am
बच्चों बताओ! बजट कौन बनाता है? कक्षा के सभी बच्चों ने उत्तर दिया-वित्त मंत्री । मगर एक ने हाथ उठा कर कहा-गृह मंत्री! उत्तर सुनते ही गुरूजी म्यान से बाहर! गृह मंत्री वाला जवाब उनकी कुंजी में नहीं था जिससे वो पढ़ाते थे और न उस तंत्र के पास था जिसने उन्हें गुरूजी बनाया था। सजा ...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य की जुगलबंदी
  January 29, 2017, 12:35 pm
बीहड़ में किसी डाकू का दिल बड़े गिरोह पर आ जाय और वह लूट में अधिक हिस्से के लोभ में अपना दल बदल कर बड़े गिरोह में शामिल हो जाय तो किसी को कोई अचरज नहीं होता। जंगल का अपना क़ानून होता है। ताकत की सत्ता होती है। अस्तित्व का संघर्ष होता है। सत्ता की छाया में अधिक माल लूटने या जान ...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य
  January 22, 2017, 7:39 pm
क्या पाण्डे जी! विश्व पुस्तक मेला लगा था दिल्ली में, गये नहीं?हाँ मिर्जा, नहीं गये। टिकट नहीं था।आप कहते तो टिकट कटा देता आपका। दिल्ली कौन दूर है?ट्रेन के टिकट की बात नहीं कर रहा मिर्जा, मैं पुस्तक मेला के टिकट की बात कर रहा हूँ! पुस्तक मेले में वही लेखक जाता है जिसकी एका...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य
  January 19, 2017, 10:35 pm
देखो! सुनो! समझो! तब बोलो।बोलो तो..जोर-जोर से बोलोपूरे आत्मविश्वास से बोलोदो चार और सुनें कि तुमनेक्या देखा? क्या सुना? और क्या समझा?विचलित मत होनाजब वे बोलेंचिल्लाने मत लगना..झूठ! झूठ!तुम गलत! तुम गलत!मैं सही! मैं सही!ध्यान से सुननाउन्होंने क्या बोलाऔर समझनाकि यहउनका देख...
बेचैन आत्मा...
Tag :दर्शन
  January 15, 2017, 11:00 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3685) कुल पोस्ट (167951)