Hamarivani.com

बेचैन आत्मा

पिता स्वर्ग में रहतेघर मेंबच्चों के संगमां रहती थीं।बच्चों के सुख की खातिरजाने क्या-क्यादुःख सहती थीं।क्या बतलाएं साथी तुमकोमेरी अम्माक्या-क्या थीं?देहरी, खिड़की,छत-आंगनघर का कोना-कोना थीं।चोट लगे तोमरहम मां थींभूख लगे तोरोटी मां थींमेरे मन की सारी बातेंसुनने वा...
बेचैन आत्मा...
Tag :माँ
  May 13, 2019, 8:44 pm
वहघाट की ऊँची मढ़ी पर बैठनदी में फेंकता हैकंकड़!नदी किनारेनीचे घाट पर बैठे बच्चेखुश हो, लहरें गिनने लगते हैं...एक कंकड़कई लहरें!एक, दो...सात, आठ, नौ दस...बस्स!!!वहऊँची मढ़ी पर बैठनदी में,दूसरा कंकड़ फेंकता है..।देखते-देखते,गिनते-गिनतेबच्चे भी सीख जाते हैंनदी में कंकड़ फेंकनापहले स...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य
  May 12, 2019, 1:20 pm
अच्छा हैबनारस कीपूरी एक युवा पीढ़ीदेखे बिनाजवान हो गई लेकिनअपने किशोरावस्था मेंहमने खूब देखेकर्फ्यू।गंगा तट के ऊपर फैलेपक्के महाल की तंग गलियों मेंकर्फ्यू का लगनाबुजुर्गों के लिएचिंता का विषय,बच्चों/किशोरों/युवाओं के लिएउत्सव के शुरू होने काआगाज़ होता था!स्कूलों...
बेचैन आत्मा...
Tag :संस्मरण
  April 27, 2019, 8:13 pm
बनारस की एक गलीगली में चबूतराचबूतरे पर खुलतीबड़े से कमरे की खिड़कीखिड़की से झाँकोकमरे में टी.वी.टी.वी. में दूरदर्शनएक से बढ़कर एकसीरियलहम लोग, बुनियाद, नीम का पेड़सन्डे की रंगोली, चित्रहार, रामायण..सुबह हो या शामतिल रखने की खाली जगह भी न होती थीचबूतरे से कमरे तकजब शुरू होते ...
बेचैन आत्मा...
Tag :संस्मरण
  April 25, 2019, 12:39 pm
लोहे के घर की खिड़की से बाहर झाँक रहे हैं एक वृद्ध। सामने की खिड़की पर उनकी श्रीमती जी बैठी हैं। वे भी देख रही हैं तेजी से पीछे छूटते खेत, घर, मकान, वृक्ष....। ढल रहे हैं सुरुज नारायण। तिरछी होकर सीधे खिड़की से घर में घुस रही हैं सूरज की किरणें। जल्दी-जल्दी, बाय-बाय, हाय-हैलो कर ल...
बेचैन आत्मा...
Tag :संस्मरण
  April 24, 2019, 11:58 am
गली मेंबच्चे खेलते थेक्रिकेटबड़ेपान की दुकान के पासखड़े-खड़ेदेर तकसुनते रहते थे कमेंट्रीबूढ़ेचबूतरे पर बैठ करकोसते रहते थे..क्रिकेट ने बरबाद कर दियादेश को।देश कितना बर्बाद हुआ, नहीं पता!टेस्ट, वन डे, ट्वेंटी-ट्वेन्टीघरेलू, विश्वकप, आई.पी.यलक्रिकेट का इतना फैला बाजा...
बेचैन आत्मा...
Tag :संस्मरण
  April 24, 2019, 11:49 am
ढूँढ रहा था अपने ही शहर की गलियों में भटकते हुए बचपन का कोई मित्र जिसके साथ खेले थे हमने आइस-पाइस, विष-अमृत या लीलो लीलो पहाड़िया. हार कर बैठ गया पान की एक दुकान के सामने चबूतरे पर. बड़ी देर बाद एक बुढ्ढा नजर आया. बाल सफ़ेद लेकिन चेहरे में वही चमक. ध्यान से देखा तो वही बचानू था! ज...
बेचैन आत्मा...
Tag :संस्मरण
  April 21, 2019, 12:57 pm
गली में भीड़ देखठिठक जाते थे कदमघुसकरझाँकते थे हम भीचबूतरे परबिछी होती थीशतरंज की बाजीखेलने वाले तोदो ही होते थेचाल बताने वाले होते थेकई।हर मोहल्ले में थींदो/चारचाय और पान की दुकानेंदुकानों के पासचबूतरों परसजती थीं अड़ियाँहोती थींखेल, फ़िल्म, नाटक, संगीत, साहित्य और.....
बेचैन आत्मा...
Tag :बनारस की गलियाँ
  April 20, 2019, 7:03 pm
सोम से रवि तकअलग-अलगसभी भगवानों के दिन निर्धारित हैं।जब हम छोटे थेजाते थे समय निकालनिर्धारित वारनिर्धारित भगवान के दरबारसोमवार-विश्वनाथ जी,मंगलवार-संकटमोचन,बुद्धवार-बड़ा गणेश,बी वार-बृहस्पति भगवान,शुक्रवार-संकठा जी,शनिवार-शनिदेव,रविवार-काशी के कोतवाल, भैरोनाथ के ...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य
  April 20, 2019, 12:10 am
चबूतरे पर बैठे होते थेप्याऊबड़े-से मिट्टी के घड़े में लेकरठंडा-ठंडा पानीपेट भर पीते थे हमहोने पर कभी दे भी देेते थेएक पइसा, दो पइसा या फिर पूरे पाँच पैसे भीलेकिन नहीं माँगता था कभीअपने मुँह सेएक पइसा भीप्याऊ!गर्मी की दोपहरी मेंबनारस की गली में।.........................सहमकरचढ़ जाते...
बेचैन आत्मा...
Tag :बनारस की गलियाँ
  April 19, 2019, 11:29 pm
ढेरा सारादाल-भात, साग-सब्जी खाकरमस्त सांड़-साखिड़की के पासपसर जाता था तोंदियलभरता रहता थाजोर-जोर खर्राटेपास बैठी उसकी पत्नीनिरीह गाय-सीघुमाती रहती थीगोल-गोलघिर्रीदार हाथ का पंखापर्दा हटाकरखिड़की से घर मेंझांकना चाहता थापूरा शहरझांक पाते थे मगरकुछ मेरी ही उम्र क...
बेचैन आत्मा...
Tag :बनारस की गलियाँ
  April 19, 2019, 11:25 pm
उस गली सेलगते थे नारे..दो बैलों की जोड़ी हैएक अंधा एक कोढ़ी है।इस गली सेलगते थे नारे...जिस दिये में तेल नही हैवह दिया बेकार है।पता नहींवे गर्मियों के दिन थे या जाड़े केपर याद हैहम भीनिकलते थे घर सेइन्कलाब जिंदाबाद कोतीन क्लास जिंदाबाद कहते हुएबनारस की गली में।...........................
बेचैन आत्मा...
Tag :बनारस की गलियाँ
  April 19, 2019, 11:22 pm
खिड़की के रास्तेकमरे मेंआ ही जाते हैंकबूतरमैने इन्हें कई बार कहा..कहाँ तुम शांति के प्रतीक,कहाँ यह सरकारी कार्यालय!यहाँ मत आओ।तुम चाहे जितने भी निर्बल वर्ग के हो,इसमें तुम्हारा कोई स्थान नहीं!प्राकृतिक संसाधनों परहम मनुष्यों का हो चुका है सम्पूर्ण कब्जा,आरक्...
बेचैन आत्मा...
Tag :फेसबुक
  April 9, 2019, 7:18 pm
जब तक एक भी बनारसी में फक्कड़पन है तब तक यह वाक्य सत्य है कि बनारस में मोक्ष मिलता है। मोक्ष मतलब आवागमन से मुक्त हो जाना। लाभ/हानी से मुक्त हो जाना। जय/पराजय से मुक्त हो जाना। यश/अपयश से मुक्त हो जाना। अपने/पराए से मुक्त हो जाना। मुक्त होने के लिए मुक्त करना आना चाहिए। त...
बेचैन आत्मा...
Tag :दर्शन
  March 24, 2019, 2:07 pm
जब भी चुनाव आता, भेड़ों का मालिक अपनी भेड़ों को लेकर उस कसाई के पास जाता जो बकरे काट रहे होते..देखा! इनका मालिक कितना निर्दयी है!!! घास-फूस के बदले अपने ही प्यारे-प्यारे पालतू जानवरों को काट कर बेच देता है। भेड़ें भीतर तक सहम जातीं..आप कितने अच्छे हैं! हम अभी उन मूर्ख बकरों को अप...
बेचैन आत्मा...
Tag :
  March 23, 2019, 3:41 pm
जूते का यह अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान। .......................................................एक मंदिर के द्वार पर जूतों का एक झुण्ड अपने-अपने चरणों की प्रतीक्षा में भजन-कीर्तन का आनन्द ले रहा था। उन्हें देख चप्पलों ने तंज किया.. यहाँ तो ये भजन सुनते हुए आराम फरमा रहे हैं और वहाँ इनके एक साथी को एक नेत...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य की जुगलबंदी
  March 23, 2019, 3:37 pm
भागो भागो चीखतीसहम करघोसलों में दुबक गईंचिड़ियां।जुगाली करने लगींगाय भैंसेंउठने लगाझोपडिय़ों सेधुआं।गाजी कीरा औरचार मुन्नियों से छुपाकरधनियांजल्दी-जल्दी खिलाने लगीमुन्ने कोदूध भात।उल्लुओं की नज़रघने वृक्षों के बीच छुपेजुगनुओं परपड़ने लगीचमकने लगाएक टुकड़...
बेचैन आत्मा...
Tag :लोहे का घर
  March 23, 2019, 3:26 pm
जीजा और साले ने मिलकर शहर से दूर, एक सुनसान इलाके में, मकान बनाने की इच्छा से, तीन बिस्वे का एक प्लॉट खरीदा। मिलकर खरीदने के पीछे कई कारण थे। पहला कारण तो यह कि दोनो की हैसियत इतनी अच्छी नहीं थी कि अकेले पूरे प्लॉट का दाम चुका सकें। दूसरा कारण यह कि सुनसान इलाके में दो परिव...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्यकीजुगलबन्दी
  March 3, 2019, 5:10 pm
सब लिखेनवीर रस क कविताहमहूँ सोचेलिख ही दें वीर रस क कवितासबसे पहिलेआपन वीरत्व के जगाईकलम मेंतबे न कुछ धार देखाई?बहुत खोजेवीर तत्व ससुरा!वक्त के चाकी मा पिसाय-पिसायपिसान अस दुबका रहा रसोई के टीना मा!टीना से निकाल केथरिया में उझील दियादे पानी, मार छींटा, जगावे के क...
बेचैन आत्मा...
Tag :वीर रस
  February 19, 2019, 11:51 am
इसमें कोई शक नहीं कि पुरुष अपने कर्मों से महान बनता है। पुरुष से महापुरुष बनने के लिए उसे कई सत्कर्म करने पड़ते हैं। महापुरुष बनने के लिए पुरुष को सबसे बड़ा सत्कर्म तो यह करना पड़ता है कि उसे अपना पुरुष तत्व त्यागना पड़ता है। पुरुषत्व त्यागने के लिए पुरुष को स्त्री से दूर भ...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्य की जुगलबंदी
  February 4, 2019, 9:23 pm
हमारे देश मे दरवाजा बंद करना कभी सुहागरात की निशानी होती थी, अब स्वच्छता अभियान की पहचान है। इसके लिए आदरणीय अमित सर और दूरदर्शन के शुक्रगुजार हैं। खाना खाते समय टी वी खोलकर दूरदर्शन का समाचार देखने वालों के सामने कभी-कभी बड़ी असहज स्थिति आ जाती है। इधर एक कौर मुँह में ड...
बेचैन आत्मा...
Tag :व्यंग्यकीजुगलबन्दी
  January 21, 2019, 12:56 pm
तेरी नीयततेरे मंझेतू ही जानेमैं साथ रहना चाहता हूँइन पतंगों के!ये पतंगेंबादलों मेंधूप लिखना चाहती हैं।आकाश मेंछाई है बदली,हो रही हैहल्की-फुल्कीबूंदाबांदीऔर फिरबह रहीकातिल हवाएं!प्रतिकूल हैंरंग सारेमगर फिर भीये पतंगेंबादलों को चीरकरकिरण लिखना चाहती हैं।ये पतं...
बेचैन आत्मा...
Tag :पतंग
  January 13, 2019, 6:05 pm
अफसोस मत करइक्कीसवीं सदीअभी अपनेटीन एज केआखिरी साल मेंप्रवेश कर रही हैऔर हमपचपन पार हो गए!अफसोस मत करचाँद पर घर बनाने औरउड़ने वाले जूते/जैकेटखरीदने से पहलेहम स्वर्ग सिधार जाएंगे।अफ़सोस मत करनहीं खत्म हुएजम्मू कश्मीर से आतंकवादी,संसार से परमाणु हथियार औरनहीं मिटी अ...
बेचैन आत्मा...
Tag :
  December 31, 2018, 9:30 pm
आज मैंने भी तुमसे खूब प्यार कियाआज तुमने भी मेरा खूब साथ दिया।छत पर चढ़ा तो झट से लिपट गई मुझसेथोड़ा ठहरा तो जी भर के मुझे गर्म किया।पँछी आते हैं, चुगते हैं औ चहकते भी हैं!एक छुट्टी में, हमने भी ये महसूस किया।पत्नी ने पाल रख्खे हैं गमलों में कई पौधेइक गुलाब को हँसकर मैंने आ...
बेचैन आत्मा...
Tag :जाड़े की धूप
  December 30, 2018, 5:20 pm
एक बच्चासांता बनकरगुब्बारे बांटता है।एक बच्चागुब्बारे पा करखुश होता है।हमारे देश मेंतीसरा बच्चा भी रहता हैजो न गुब्बारे बांटता है न गुब्बारे पाता हैशाम की रोटी के लिएदिनभर गुब्बारे बेचता है।हे सांता!तुम उस तीसरे बच्चे तक पहुँच सकोयही शुभकामना है।..........................
बेचैन आत्मा...
Tag :क्रिसमस
  December 30, 2018, 5:15 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3872) कुल पोस्ट (188697)