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Blog: बेचैन आत्मा

Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
लाइट चली गई है। मैं अँधरे में हूँ। ऐसा लगता है जैसे मैं ही अँधेरे में हूँ और सबके पास रोशनी है! पूरा शहर रोशनी से जगमगा रहा होगा! केवल मैं ही अँधेरे में हूँ! फिर सोचता हूँ... जब मैंअँधरे में हूँ तो पूरा शहर भला कैसे उजाले में होगा? जब मैं अँधेरे में हूँ तो शहर भी अँधरे में होगा... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   4:49am 27 Jul 2020 #कोरोना
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
छोटे गुरु का, बड़े गुरु का, नाग लो! भाई, नाग लो।नागपंचमी के दिन, इसी नारे के शोर से, हम बच्चों की नींद टूटती। ऊँघते, आँखें मलते, घर के बरामदे में खड़े हो, नीचे झाँकते.. गली के चबूतरे पर कुछ किशोर, नाना प्रकार के नागों की तस्वीरों की दुकान सजाए बैठे हैं! मन ललचता, तब तक दूसरे बच्चों... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   3:54am 25 Jul 2020 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
बिल्ली नेदो बच्चे दिए बारिश मेंभगा दिया थादिन मेंफिर आकर, रो रहे हैंरात मेंखाली नहीं है शायदकिसी के घर/आँगन का कोई कोनाआ गए हैंमेरे ही चहारदीवारी के भीतररो रहे हैं,मेरे ही कपारे पर!बिल्ली कोऐसा क्यूँ लगता है?कॉलोनी मेंमैं ही सबसे बड़ा दयालू हूँ!सुनता आया हूँ...बिल्ली का ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   8:43am 7 Jul 2020 #बारिश
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
वे पहले बहुत हँसमुख थे, अब मास्क मुख हो गए हैं। जब तक उनकी झील सी गहरी आँखों में न झाँको, पहचान में ही नहीं आते। बारिश में भीगते हुए, पुलिया पर बैठकर, चीनियाँ बदाम फोड़ रहे थे!मैने पूछा..पगला गए हैं का शर्मा जी! बारिश में भींगकर कोई मूँगफली खाता है?  वे क्रोध से आँखें तरेर क... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   4:05am 20 Jun 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
जब भीमिलता है सम्मानकहताभीतर का इंसानतूनेरूप बनाया है!तूनेझूठ सुनाया है!दिल में खंजर रख कर सबकोगले लगाया है।जब भी मिलता है सम्मान.....तेराहोता है सब कामबाबूकरते सभी सलामतूनेचाय पिलाया हैतूनेपान खिलाया हैसूटकेस में गड्डी भर-भर,घर पहुँचाया है।जब भी मिलता है सम्मान....त... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   5:08am 14 Jun 2020 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
लोहे के घर की खिड़की सेबगुलों कोभैंस की पीठ पर बैठकथा बाँचते देखा।धूप में धरती कोगोल-गोल नाचते देखा।घर में लोग बातें कर रहे थे...किसने कितना खाया?हमने तो बस फसल कटे खेत मेंभैस, बकरियों कोआम आदमी के साथ भटकते देखा।खिड़की से बाहर चिड़ियों कोदाने-दाने के लिए,चोंच लड़ाते देखा।... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   1:49pm 28 May 2020 #लोहे का घर
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
रोटी पर बैठकरउड़े थेकोरोना खा गया रोटीपैदल हो गएसभी बच्चेतलाश थीट्रेन की, बस कीकुचले गएपटरी पर, सड़क परहमधृतराष्ट्र की तरहअंधे नहीं थेदेखते रहे दूरदर्शनदेखते-देखतेमर गएकई बच्चे!शहर सेपहुँचे हैं घरबीमार हैं, लाचार हैंजागते/सोतेदेखते हैं स्वप्न...रोटी का सहारा हो तोउड़... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   6:01pm 24 May 2020 #मजदूर
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
तुम नदी की धार के संग हो रहे थेफेंककर पतवार भी तुम सो रहे थे।बह रही उल्टी नदी, अब क्या करोगे?क्या नदी की धार में तुम फिर बहोगे?चढ़ नहीं सकती पहाड़ों पर नदीफैलती ही जा रही है, सब तरफडूब जाएंगे सभी घर, खेत, आंगनया तड़प दम तोड़ देगी, खुद नदी!किंतु सोचो तुम भला अब क्या करोगे?बच गए जो भ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   5:34am 20 May 2020 #कोरोना
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
हम सभी को मिली हैदृष्टि संजय की!देख सकते हैं दशाकुरुक्षेत्र की।धृतराष्ट्र बन पूछतेकितने मरे?आज तक घायल हुएकितने बताओ?चल रहे हैं सड़क परमजदूर सारेलड़ रहे हैं निहत्थेक्रूर पल से।ठीक है किंतु अब तुमयह बताओ?क्या कोई, अपना/सगाघायल पड़ा है?दूर है काल फिर तोभय नहीं हैदृष्टि ब... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   7:52am 18 May 2020 #कोरोना
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
एक बनारसी कवि ने दो बनारसी कवियों का एक मजेदार किंतु सत्य किस्सा सुनाया। जिसे मैं अपने शब्दों में प्रस्तुत कर रहा हूँ। दोनो कवि मुफलिसी में जीवन गुजारते लेकिन कविता के लिए जान देते। एक दिन एक कवि ने रात्रि में 10 बजे दूसरे कवि का दरवाजा खटखटाया...कवि जी हैं? कवि जी छंद रच र... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   6:36am 14 May 2020 #कहानी
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
हँसाना पहले भीआसान नहीं हुआ करता थाफिर भी लोगहँसते थे, हँसाते थे।अब तोऔर भी कठिन हो गया हैदिन ब दिनबढ़ती जा रही हैदुखियारों की संख्याऔर हँसाने वाले, रोने लगे हैंखुद ही।फिर भी,यह जानते हुए भी किकम ही होते हैंजान से ज्यादाचाहने वाले दुनियाँ मेंजब तकजान में जान हैखुश रहि... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   4:34am 12 May 2020 #कोरोना
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
हमनारे लगाते रहे..'कर्मचारी एकता जिंदाबाद''इंकलाब जिंदाबाद''दुनियाँ के मजदूरों एक हो'वे समझाते रहे...तुम हिन्दू होमुस्लिम होअगड़े होपिछड़े होदलित होअतिदलित हो...।हम चीखते..हम मजदूर हैं!वे कहते...हां, हां,हम तुम्हारे सेवक हैं!!!उनमेंसेवक बननेऔर सच्चा, सबसे अच्छा,दिखने की होड़ ... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   5:24am 1 May 2020 #श्रमजीवी
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
छत पर माटी के प्याले रख देपानी, चोंच भर, निवाले रख दे।भूखे हैं, गली के कुत्ते भीखा जाएंगे, गोरे/काले, रख दे ।जाने कौन, काम आ जाए सफर में!कूड़ेदानी में, मन के जाले रख दे।मिलेगा छाँव भी, यूँ ही, चलते-चलतेदो घड़ी रुक, पैरों के छाले रख दे।जानता हूँ, तू भी, परेशां है बहुतअपने होठों पे, ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   6:42am 22 Apr 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
आज बन्द हो गया लोहे का घर। ऐसा दिन भी आएगा, यह किसी ट्रेन ने नहीं सोचा होगा! कई बार तुम ठहर गए, हम ठहर गए लेकिन नहीं रुकीं फोटटी नाइन, फिफ्टी डाउन, एस. जे. वी. पैसिंजर, दून, किसान, ताप्ती या बेगमपुरा। 'चलती का नाम गाड़ी'है तो गाड़ी के रुकने का मतलब जीवन का ठहर जाना भी है। आज ठहर गय... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   9:24am 23 Mar 2020 #लोहे का घर
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
04-03-2020आज नॉन स्टॉप ताप्ती मिल गई जफराबाद में। हिजड़ों के एक दल ने ताली पीटकर रोकवा दिया, वरवा यहाँ, जफराबाद में, इसका स्टॉपेज नहीं है। रेलवे कर्मचारी हरा झण्डा दिखा रहा है, सिग्नल ग्रीन बता रहा है मगर आय-हाय, ट्रेन रुक गई।  सही समय से होती तो निकल जाती 4 से पहले, लेट थी तो मिल ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   7:05am 15 Mar 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
आदमी के मरने से पहलेपढ़ना छोड़ देंगे लोगकविताएँखरीदना छोड़ देंगेउपन्याससुन ही नहीं पाएंगेगीतशोर लगने लगेगासंगीतअखबार के पृष्ठों सेगुम हो जाएगाखेल समाचार,कार्टून का कोना औरव्यंग्यालेख!टी.वी. मेंलोकप्रिय नहीं रह जाएंगेमनोरंजन के चैनललोग देखेंगेसिर्फ समाचारफ्लॉप ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   2:26am 21 Jan 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
शुभकामनाएँ मुझेकि कुरुक्षेत्र में भीढूँढता रहूँसुख के द्वारहरपलमिलता रहे आनन्दशुभकामनाएँ तुम्हेंकि सदा खुश रहो तुम भीशेयर करूँ तुमसेआनन्द के पलतो तुम्हेंऔर भी खुशी मिलेशुभकामनाएँ मजदूरों कोकि हर दिनमिलता रहे कामशुभकामनाएँ मालिकों कोलाभ हो इतनाकि बाँट सकें, ब... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   5:45pm 31 Dec 2019 #नववर्ष
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
इस कड़ाके की ठंड में लगभग 3 किमी प्रातः भ्रमण के बाद मेरा मित्र अचानक से काफी परेशान दिखा! चलते-चलते दो बार कोने में गया फिर मायूस हो, लौट आया।  मैने पूछा.. क्या बात है? अभी तो ठीक-ठाक थे! उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया...क्या बताएं,  बड़ी तेज सू सू लगी है लेकिन....लोअर उल्टा पहन ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   5:40am 28 Dec 2019 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
स्वेटर, टोपी, जर्सी, निकसलजाड़ा आयल का?गली-गली में दिखे मलइयोजाड़ा आयल का?भिनसहरे चूल्हा में कोइलाकलुआ झोंकत हौखट खट, खट खट, एक भगोनाचहवा खउलत हौ।धूप देख मन ललचे लागलजाड़ा आयल का?गली-गली में दिखे मलइयोजाड़ा आयल का?छन छन छन छन छनल कचौड़ीभयल जलेबी लालहमें चार दs, हमें आठ दsमचल ह, ... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   4:56am 23 Nov 2019 #काशिका
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
पत्नी की रहनुमाई में,दिवाली की सफाई में,दृश्य एक दिखलाता हूँक्या पाया, बतलाता हूँ।एक पुराना बक्सा थाजिसमें मेरा कब्जा थाजब बक्सा मैने खोलाधक से मेरा दिल डोलाएक गुलाबी रुमाल मिलातीर चुभा दिलदार मिलाऔर टटोला भीतर तोअक्षर अक्षर प्यार मिलाखत में प्यारी बातें थींधूप छ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   4:24am 27 Oct 2019 #दिवाली
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
बिना चीनी की चाय और प्रातः भ्रमण की आदत को देख,मेरे एक सहकर्मी ने मन ही मन मान लिया,मुझे मधुमेह है!एक दिन लंच में उसने मुझेरसगुल्ले खाते देखा!डिनर के बादबर्फी उड़ाते देखा!!!तो उससे रहा न गया..मेरी तरफ तंज कसते हुएसांकेतिक भाषा मेंमुझे सुनाते हुए, दूसरे से कहने लगा...कु... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   3:01am 25 Sep 2019 #हास्य-व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
पहले सुबह होती थी, शाम होती थी, अब लोहे के घर में, पूरी रात होती है। वे दिन, रोज वाले थे। ये रातें, साप्ताहिक हैं। बनारस से जौनपुर की तुलना में, बनारस से लखनऊ की दूरी लंबी है। रोज आना जाना सम्भव नहीं है। ये रास्ते सुबह/शाम नहीं, पूरी रात निगल जाते हैं और उफ्फ तक नहीं करते!लखनऊ ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:59am 21 Sep 2019 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
सरकारी नौकरों कोकाम के बदलेवेतन दिया जाता हैलेकिन वेइससे संतुष्ट नहीं होतेअधिकार ढूँढते हैं!जबकिउनके हिस्से कीकानूनी वसीयत में,अधिकार शब्दहोता ही नहीं,दायित्व होता है।कुछ तोबड़े खुशफहमी में जीते हैंदायित्व को,अधिकार की शराब मेंघोलकर पीते हैं।ज्यों-ज्योंदायित्... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   12:51pm 10 Sep 2019 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
पाण्डे जी का चप्पल.................................जैसे सभी के पास होता है, ट्रेन में चढ़ने समय पाण्डे जी के पास भी एक जोड़ी चप्पल था। चढ़े तो अपनी बर्थ पर किसी को सोया देख, प्रेम से पूछे.…भाई साहब! क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ? वह शख्स पाण्डे जी की तरह शरीफ नहीं था। हाथ नचाते हुए, मुँह घुमाकर बोला...य... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   11:01am 18 Aug 2019 #हास्य-व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
क्या मैं सही ट्रेन में बैठा हूँ?.................................न जाने कौन टेसन उतरेगा, बनारस से चढ़ा, पैसिंजर ट्रेन के बाथरूम में घुस कर, सफर कर रहा देसी कुत्ता! सौ/दो सौ किमी की यात्रा के बाद जब वह उतरेगा ट्रेन से तो उस पर कितना भौंकेंगे अनजान शहर के कुत्ते! क्या जी पायेगा चैन से? क्या हो जाएग... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   10:55am 18 Aug 2019 #लोहे का घर
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