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Blog: बेचैन आत्मा

Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
 मार्निंग वॉक में शाख से झूलते कई आजाद तोते दिखे।मैंने कहा..बोलो! जय श्री राम।तोते इस शाख से उस शाख पर झूलते और मुझे देख कहते- 'टें''टें'।मैं फिर बोला-गोपी कृष्ण कहो बेटू, गोपी कृष्ण।तोते बोले- टें..टें।अच्छा बोलो...जय भीम।तोते बोले-टें..टें।तभी मुझे जेएनयू की घटना का संस्... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   10:05am 15 Apr 2021 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
भेड़ों का मालिक अक्सर अपनी भेड़ों को लेकर उस कसाई के पास जाता जो बकरे काट रहे होते..देखा! इनका मालिक कितना निर्दयी है!!! घास-फूस के बदले अपने ही प्यारे-प्यारे पालतू जानवरों को काट कर बेच देता है। भेड़ें भीतर तक सहम जातीं..आप कितने अच्छे हैं! हम अभी उन मूर्ख बकरों को अपनी मित्रत... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   5:14am 17 Mar 2021 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
मैने मांगा, जाड़े की धूपउसने दिया,घना कोहरा!मैने पूछा,"ठंडी कब जाएगी?"उसने कहा,"थोड़ी बर्फवारी होने दो।"मैने पूछा,"बसंत कहाँ है?"उसने कहा,"रुको! एक ग्लेशियर टूट जाने दो!"मैने कहा,"जाओ! तुमसे बात नहीं करते।"उसने कहा,"मित्र! तुमसे ही सीखी है यह शत्रुता!"............ Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   4:10pm 8 Feb 2021 #कविता
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
यूं ही नहीं आता वसंतलड़नी होती है, लंबी लड़ाईधूप कोकोहरे के साथ।लगने लगता हैहार गया कोहरातभी नहीं दिखतीधूपलगने लगता हैगई ठंडीछाने लगता हैघना कोहरायूँ ही नहीं आता मगर तय हैकोहरे को हराकरआता है एक दिनवसंत।... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   6:15pm 25 Jan 2021 #बसंत
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
 मन बहुत बेचैन मेरातू मिले तो चैन आए।तू धरा में तू गगन मेंजर्रे-जर्रे में छुपा तूहै पढ़ा हमने भी लेकिनवही दिन औ रैन आए!मन बहुत बेचैन मेरातू मिले तो चैन आए।मूर्तियाँ तेरी अनेकोंऔर अनगिन प्रार्थनाएँरूप हैं तेरे अनेकोंदे दरश! अब नैन छाए।मन बहुत बेचैन मेरातू मिले तो चैन ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   4:11pm 21 Dec 2020 #भजन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
एक चिड़ियानींबू की डाली से उतरमुंडेर के प्याले पर बैठ गईइधर-उधर मुंडी हिलाई,पूँछ उठाईफिर गड़ा दिए चोंच प्याले में और..उड़ गई।हाय!प्याले में पानी नहीं है।यह तो वह देख ही रही होगी ऊपर सेफिर उसने इतनी मेहनत क्यों की?शायदमुझसे पानी मांगने काउसके पासयही आसान तरीका था!मैने द... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   5:47am 17 Dec 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
धीरे-धीरेकम हो रहा थानदी का पानीनदी मेंडूब कर गोता लगाने वाले हों या एक अंजुरी पानी निकाल करतृप्त हो जाने वाले,सभी परेशान थे..बहुत कम हो चुका हैनदी का पानी!बात राजा तक गईजाँच बैठीनदी से ही पूछा गया...पानी क्यों कम हुआ?नदी ने राजा को देखा कुछ बोलने के लिए होंठ थरथराए ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   5:04am 20 Oct 2020 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
तुमहवा, जल और धरती का प्रलोभन देते होइन पर तो मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है!तुमनेसजा रखे हैं रंग बिरंगे पिजड़ेऔर चाहते होदाना-पानी के बदलेअपने पंख तुम्हारे हवाले कर दूँ?अपने सभी पिजड़े हटा दो,मेरे पंख मुझे लौटा दोमुझे आकाश चाहिए।... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   4:01pm 12 Oct 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
गंगा उफान पर हैडूब चुकी हैं पंचगंगा घाट की सभी मढ़ियाँनहीं जा सकते एक घाट से दूसरे घाट तकश्रीमठ के पाससीढ़ियों पर बैठजहाँ टकरा रही थींगंगा की लहरेंकई लोग एक साथ कर रहे थेपितरों को तर्पणमन्त्र पढ़ रहा था, ऊपर बैठा पण्डाबीच-बीच में निर्देश देता..जनेऊगले में माला कर लीजिए,... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   2:26am 18 Sep 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
लाइट चली गई है। मैं अँधरे में हूँ। ऐसा लगता है जैसे मैं ही अँधेरे में हूँ और सबके पास रोशनी है! पूरा शहर रोशनी से जगमगा रहा होगा! केवल मैं ही अँधेरे में हूँ! फिर सोचता हूँ... जब मैंअँधरे में हूँ तो पूरा शहर भला कैसे उजाले में होगा? जब मैं अँधेरे में हूँ तो शहर भी अँधरे में होगा... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   4:49am 27 Jul 2020 #कोरोना
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
छोटे गुरु का, बड़े गुरु का, नाग लो! भाई, नाग लो।नागपंचमी के दिन, इसी नारे के शोर से, हम बच्चों की नींद टूटती। ऊँघते, आँखें मलते, घर के बरामदे में खड़े हो, नीचे झाँकते.. गली के चबूतरे पर कुछ किशोर, नाना प्रकार के नागों की तस्वीरों की दुकान सजाए बैठे हैं! मन ललचता, तब तक दूसरे बच्चों... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   3:54am 25 Jul 2020 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
बिल्ली नेदो बच्चे दिए बारिश मेंभगा दिया थादिन मेंफिर आकर, रो रहे हैंरात मेंखाली नहीं है शायदकिसी के घर/आँगन का कोई कोनाआ गए हैंमेरे ही चहारदीवारी के भीतररो रहे हैं,मेरे ही कपारे पर!बिल्ली कोऐसा क्यूँ लगता है?कॉलोनी मेंमैं ही सबसे बड़ा दयालू हूँ!सुनता आया हूँ...बिल्ली का ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   8:43am 7 Jul 2020 #बारिश
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
वे पहले बहुत हँसमुख थे, अब मास्क मुख हो गए हैं। जब तक उनकी झील सी गहरी आँखों में न झाँको, पहचान में ही नहीं आते। बारिश में भीगते हुए, पुलिया पर बैठकर, चीनियाँ बदाम फोड़ रहे थे!मैने पूछा..पगला गए हैं का शर्मा जी! बारिश में भींगकर कोई मूँगफली खाता है?  वे क्रोध से आँखें तरेर क... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   4:05am 20 Jun 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
जब भीमिलता है सम्मानकहताभीतर का इंसानतूनेरूप बनाया है!तूनेझूठ सुनाया है!दिल में खंजर रख कर सबकोगले लगाया है।जब भी मिलता है सम्मान.....तेराहोता है सब कामबाबूकरते सभी सलामतूनेचाय पिलाया हैतूनेपान खिलाया हैसूटकेस में गड्डी भर-भर,घर पहुँचाया है।जब भी मिलता है सम्मान....त... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:08am 14 Jun 2020 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
लोहे के घर की खिड़की सेबगुलों कोभैंस की पीठ पर बैठकथा बाँचते देखा।धूप में धरती कोगोल-गोल नाचते देखा।घर में लोग बातें कर रहे थे...किसने कितना खाया?हमने तो बस फसल कटे खेत मेंभैस, बकरियों कोआम आदमी के साथ भटकते देखा।खिड़की से बाहर चिड़ियों कोदाने-दाने के लिए,चोंच लड़ाते देखा।... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   1:49pm 28 May 2020 #लोहे का घर
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
रोटी पर बैठकरउड़े थेकोरोना खा गया रोटीपैदल हो गएसभी बच्चेतलाश थीट्रेन की, बस कीकुचले गएपटरी पर, सड़क परहमधृतराष्ट्र की तरहअंधे नहीं थेदेखते रहे दूरदर्शनदेखते-देखतेमर गएकई बच्चे!शहर सेपहुँचे हैं घरबीमार हैं, लाचार हैंजागते/सोतेदेखते हैं स्वप्न...रोटी का सहारा हो तोउड़... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   6:01pm 24 May 2020 #मजदूर
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
तुम नदी की धार के संग हो रहे थेफेंककर पतवार भी तुम सो रहे थे।बह रही उल्टी नदी, अब क्या करोगे?क्या नदी की धार में तुम फिर बहोगे?चढ़ नहीं सकती पहाड़ों पर नदीफैलती ही जा रही है, सब तरफडूब जाएंगे सभी घर, खेत, आंगनया तड़प दम तोड़ देगी, खुद नदी!किंतु सोचो तुम भला अब क्या करोगे?बच गए जो भ... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   5:34am 20 May 2020 #कोरोना
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
हम सभी को मिली हैदृष्टि संजय की!देख सकते हैं दशाकुरुक्षेत्र की।धृतराष्ट्र बन पूछतेकितने मरे?आज तक घायल हुएकितने बताओ?चल रहे हैं सड़क परमजदूर सारेलड़ रहे हैं निहत्थेक्रूर पल से।ठीक है किंतु अब तुमयह बताओ?क्या कोई, अपना/सगाघायल पड़ा है?दूर है काल फिर तोभय नहीं हैदृष्टि ब... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   7:52am 18 May 2020 #कोरोना
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
एक बनारसी कवि ने दो बनारसी कवियों का एक मजेदार किंतु सत्य किस्सा सुनाया। जिसे मैं अपने शब्दों में प्रस्तुत कर रहा हूँ। दोनो कवि मुफलिसी में जीवन गुजारते लेकिन कविता के लिए जान देते। एक दिन एक कवि ने रात्रि में 10 बजे दूसरे कवि का दरवाजा खटखटाया...कवि जी हैं? कवि जी छंद रच र... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   6:36am 14 May 2020 #कहानी
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
हँसाना पहले भीआसान नहीं हुआ करता थाफिर भी लोगहँसते थे, हँसाते थे।अब तोऔर भी कठिन हो गया हैदिन ब दिनबढ़ती जा रही हैदुखियारों की संख्याऔर हँसाने वाले, रोने लगे हैंखुद ही।फिर भी,यह जानते हुए भी किकम ही होते हैंजान से ज्यादाचाहने वाले दुनियाँ मेंजब तकजान में जान हैखुश रहि... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   4:34am 12 May 2020 #कोरोना
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
हमनारे लगाते रहे..'कर्मचारी एकता जिंदाबाद''इंकलाब जिंदाबाद''दुनियाँ के मजदूरों एक हो'वे समझाते रहे...तुम हिन्दू होमुस्लिम होअगड़े होपिछड़े होदलित होअतिदलित हो...।हम चीखते..हम मजदूर हैं!वे कहते...हां, हां,हम तुम्हारे सेवक हैं!!!उनमेंसेवक बननेऔर सच्चा, सबसे अच्छा,दिखने की होड़ ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:24am 1 May 2020 #श्रमजीवी
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
छत पर माटी के प्याले रख देपानी, चोंच भर, निवाले रख दे।भूखे हैं, गली के कुत्ते भीखा जाएंगे, गोरे/काले, रख दे ।जाने कौन, काम आ जाए सफर में!कूड़ेदानी में, मन के जाले रख दे।मिलेगा छाँव भी, यूँ ही, चलते-चलतेदो घड़ी रुक, पैरों के छाले रख दे।जानता हूँ, तू भी, परेशां है बहुतअपने होठों पे, ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   6:42am 22 Apr 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
आज बन्द हो गया लोहे का घर। ऐसा दिन भी आएगा, यह किसी ट्रेन ने नहीं सोचा होगा! कई बार तुम ठहर गए, हम ठहर गए लेकिन नहीं रुकीं फोटटी नाइन, फिफ्टी डाउन, एस. जे. वी. पैसिंजर, दून, किसान, ताप्ती या बेगमपुरा। 'चलती का नाम गाड़ी'है तो गाड़ी के रुकने का मतलब जीवन का ठहर जाना भी है। आज ठहर गय... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   9:24am 23 Mar 2020 #लोहे का घर
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
04-03-2020आज नॉन स्टॉप ताप्ती मिल गई जफराबाद में। हिजड़ों के एक दल ने ताली पीटकर रोकवा दिया, वरवा यहाँ, जफराबाद में, इसका स्टॉपेज नहीं है। रेलवे कर्मचारी हरा झण्डा दिखा रहा है, सिग्नल ग्रीन बता रहा है मगर आय-हाय, ट्रेन रुक गई।  सही समय से होती तो निकल जाती 4 से पहले, लेट थी तो मिल ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   7:05am 15 Mar 2020 #
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय
आदमी के मरने से पहलेपढ़ना छोड़ देंगे लोगकविताएँखरीदना छोड़ देंगेउपन्याससुन ही नहीं पाएंगेगीतशोर लगने लगेगासंगीतअखबार के पृष्ठों सेगुम हो जाएगाखेल समाचार,कार्टून का कोना औरव्यंग्यालेख!टी.वी. मेंलोकप्रिय नहीं रह जाएंगेमनोरंजन के चैनललोग देखेंगेसिर्फ समाचारफ्लॉप ... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   2:26am 21 Jan 2020 #
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