जो मेरा मन कहे

नाकामियां किसके जीवन में नहीं आतीं। उनके जीवन में भी विफलताओं का दौर आया। ऐसा दौर, जब मन में आया कि वह क्रिकेट ही छोड़ दें। पर क्रिकेट में तो उनकी जान बसी है। क्रिकेट छोड़ने का मतलब था जीवन से मुंह मोड़ना। तो क्या मुश्किलों से हारकर वह जीना छोड़ देंगे? उन्होंने तय किया ...
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  March 10, 2015, 3:15 pm
कुछ सपनों कासच न होना किसी से मिलनाकिसी से बिछड़नाफूलों के बिस्तर पर सोनाकाँटों के रस्ते पर चलनाकभी गिरना,चोट खानासंभलनाठहरनारोनाहँसनारूठनामनानान जाने क्या क्या सोचनान जाने क्या क्या लिखना  कुछ पढ़नासमझनायाद रखनाभूल जानाइन अनोखी राहों परजो भी हैअच्छा ही है। ~यश...
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  March 9, 2015, 3:03 pm
स्त्री विमर्श पर शिल्पा भारतीय जी का यह आलेख कुछ समय पहले जागरण जंक्शन पर देखा था। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर इसे अपने पाठकों हेतु और सहेजने की दृष्टि से इस ब्लॉग पर साभार प्रस्तुत  कर रहा हूँ। किसी भी समाज और परिवार का दर्पण है स्त्री और उसके बिना समाज का अध...
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  March 8, 2015, 8:21 am
जीवन केइस रंगमंच पर अपनी अपनी भूमिकानिभाते निभाते अपने अपने पात्रोंचरित्रों को जीते जीते हमकभी सजाते हैंदीवारों पर तस्वीरेंऔर कभीखुद हीकोई तस्वीर बन करकैद हो जाते हैंअंधेरे कमरे की  किसी दीवार परजहाँ की तन्हाईकई मौके देती हैबीते दौर कोसोचने समझनेऔरअगले पलों क...
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  March 7, 2015, 9:21 am
हर ओरउड़तेबिखरतेबहकतेचहकतेमहकतेगीलेऔरसूखे रंगरंगभेदजात धर्म   अमीर औरगरीब से परे सबके चेहरों परसजे हुए हैं एक भाव से  विविधता मेंएकता काभाव लिए  क्योंकि रंगइन्सानों की तरहभेदभाव नहीं करते।~यशवन्त यश©होली कीहार्दिक शुभ कामनाएँ ! ...
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  March 6, 2015, 9:06 am
दिन मेंखिले खिले ख्यालशाम होते हीमुरझा जाते हैंपरागविहीन  किसी फूल की तरह थक कर चूर हो करया तोअलग कर लेते हैं खुद को  मन की डाली सेयाउतरा सा चेहरा लिएनये जीवन की आशा मेंतोड़ देते हैं दम....और फिरमौका पाकरख्यालों की नयी कलियाँख्वाबों से बाहर आकरहर नयी सुबहएक नया फूल ब...
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  March 5, 2015, 9:03 am
हे मेरे प्रिय,  सुहृद, सरस्वती मां के वरद पुत्रो! हे साहित्य के मंदिर के जन्मजात पुजारियो! हे कविता का नाम सुनते ही रोमांचित हो खंजड़ी बजाने वाले खंजड़ियो और मिरदंगियो! हे तुच्छता से आपूर्ण इस युग के कवि कोविदो! हे साहित्यानुराग के मारे साहित्य रोगियो! हे पुस्तक से प...
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  March 4, 2015, 8:44 am
किश्त दर किश्तबीतते पलहोते जा रहे हैं दर्ज़इतिहास कीउस किताब पर जिसके पन्नेथोड़े स्याहथोड़े सफ़ेदऔर कुछआड़ी तिरछीलकीरों को साथ लियेबनते जा रहे हैंदस्तावेज़कल के लियेकल कीबीती दस्तानों के।  ये दास्तानेंजो किस्से बन करअक्सरसुनाई दे जाती हैं दूसरों की ज़ुबानों सेगली के...
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  March 3, 2015, 8:58 am
भीतर ही भीतरअनकहे गम को साथ लियेचेहरे परमुस्कुराहट कामुखौटा ओढ़े  कुछ लोगचखते हुएजीवन केकढ़वे -तीखे स्वादहर दिन  बाँटते चलते हैंमिठास भरे शब्दऔर हर रात केगहरे काले अँधेरों  मेंअपनी चादर के भीतरकरवटें बदलते हुएपोंछते रहते हैंगीली आँखों को।गैरलेकिन अपने से  ऐस...
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  March 2, 2015, 9:02 am
मन के आसमान मेंबेखौफ उड़ान भरतेशब्दों के परिंदे जाने कहाँ कहाँ उठते बैठते जाने क्या क्या कहते सुनते क्या क्या कर गुजरते हैं खुद भी नहीं जानते। मावस की रात में चमकते चाँद से बातें कर पूनम के अंधेरे में यूं ही उदास हो कर  पतझड़ के फूलों की खुशबू में ...
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  March 1, 2015, 9:13 am
यूं तो हैं यहाँबहुत से किस्सेसुनने सुनाने को बहुत से सुनूँ क्याऔर क्या कहूँ किससे ....?नहीं दिखता यहाँकोई अपना साकुछ समझता साराह दिखाता साबस  खुद की परछाई सेअक्सर बातें करता सा....मन की आज़ादी कोबांटते हुए खुद सेमुझे नहीं कहनाकुछ भी किसी से।~यशवन्त यश©...
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Tag :बस यूँ ही
  February 19, 2015, 8:48 pm
कहना नहीं आतालिखना नहीं आताशब्दों से कभीखेलना नहीं आता।ये जो कुछ भी है बिखराऔर रचा बसा यहाँ परकिस दिमाग की उपजसमझ नहीं आता।बस देखता हूँ नज़ारेकुछ यहाँ के कुछ वहाँ केपेड़ों के हिलते पत्तेऔर इशारे हवा के ।झोंकों से झूमते मन कोकभी नाचना नहीं आतागुनगुनाता है गीतकभी गाना ...
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  February 11, 2015, 11:02 am
बाहर चल रहेतेज़ तूफान के असर सेवक़्त के कत्लखाने के भीतरहोने लगती हैहलचल  हिलने लगते हैं पर्देदरवाज़े और खिड़कियाँअंतिम पलगिनने लगती हैंभीतर की रोशनियां  ..हवा के तीखे झोंकेझकझोर देते हैंकई पैबंद लगीखंडहर सी इमारत की नींव जिसमें रहने वालेइंसानी शक्लो सूरत वालेनवजा...
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  February 1, 2015, 10:05 am
निर्वाणोन्मुख आदर्शों के अंतिम दीप शिखोदय!--जिनकी ज्योति छटा के क्षण से प्लावित आज दिगंचल,-- गत आदर्शों का अभिभव ही मानव आत्मा की जय,अत: पराजय आज तुम्हारी जय से चिर लोकोज्वल!मानव आत्मा के प्रतीक! आदर्शों से तुम ऊपर, निज उद्देश्यों से महान, निज यश से विशद, चिरंतन; सिद्ध नहीं...
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  January 30, 2015, 8:09 am
एक तरफ रातें काली हैंएक तरफ है उजला सवेराझोपड्पट्टी की बस्ती मेंमैले कुचलों का है डेराजैसा भी है देश है मेरा .....कहीं दीवारों में दरारेंकही ऊंची खड़ी मीनारें  मखमल के पर्दों के पीछेअशर्फ़ियों का बना बसेराजैसा भी है देश है मेरा .......जन तो चलतासड़क पर पैदलतंत्र को लेकरचलती&n...
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  January 26, 2015, 4:00 am
कदम दर कदमकहीं दूर को जाती हुई सीमंज़िल से मिल करमुस्कुराती हुई सी ....नींव पर टिके रह करछूते हुए ज़मीं कोआसमां से कभीकुछ बतियाती हुई सी .....सीढ़ी!अपने आप मेंककहरा है जिंदगी का ....सीढ़ी !अपने आप मेंफलसफा है जिंदगी का ...बिल्कुल शांतनिश्चिंतऔर अपने स्थायी भाव मेंफर्श को अर्श सेम...
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  January 20, 2015, 3:34 pm
अधूरे ड्राफ्टों मे छुपेकुछ अधूरे ख्यालपूरे होने की उम्मीद मेंपड़े रहते हैंबरसों तक....भविष्य सेबे फिकरबे परवाहसोए रहते हैंगहरी नींद में..... कभी एकाएक जाग उठते हैंपा लेते हैं मंज़िलऔर कभीयूं हीहो जाते हैं विदाहमेशा के लिएचले जाते हैं दूरसिर्फ एक'डिलीट'कीचटक भर से  ....कभ...
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  January 13, 2015, 8:08 pm
कुछ लोगसमझते हैंसिर्फ खुद को सहीदूसरे को गलतउनके तर्कउनकी बातेंउनकी सोचउनके विचारउनके व्यवहारव्यक्त होते रहते हैंकभी उनकी कलम सेकभी उनके मुख सेऔर उनके मन के कपाट बंद रहते हैंनयी प्रगतिनयी उम्मीदों के लिए ....दिल से दिल तकजज़्बातों से भरेकुछ लोगअपनी वैज्ञानिकता सेर...
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Tag :पंक्तियाँ
  January 9, 2015, 10:02 am
आते जातेहर सड़क  हर चौराहे परदिख जाती हैएक चलती फिरतीकहानी.....कहानीजो भागती हैतेज रफ्तारवाहनों के साथ  जो चलती हैहमकदमहमराहों के साथजो लंगड़ाती हैकिसी की छड़ी के साथ .....कहानीजो अंधीबहरी और गूंगी हैजो फुटपाथों औरठेलों परअधनंगी सोती है .....कहानीजो किसी कटोरे में गिर कर...
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  January 4, 2015, 9:13 am
बिखरे हुए हैंअनेकों दृश्यजीवन के ....कहीं बहता पानीऊंचे पहाड़मैदानउगते डूबतेसूरज चाँद ....अमीरी गरीबीउठने गिरने कीसैकड़ोंकही अनकहीकहानीकविता  औरगीतसरगम की धुनभक्तिविरक्तिशक्तिऔर संघर्ष कीगाथाओं सेभरा पूराइतिहासशोषणऔरतरक्की पर टिकाविकासविज्ञान अंधविश्वासऔरआ...
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  January 1, 2015, 10:00 am
कुछ सोच कर हीऊपर वाले नेबनाया होगाबचपन ....कुछ सोच कर हीऊपर वाले नेदिया होगामासूम सा मन ....कुछ सोच कर हीदी होंगी शरारतेंमुस्कुराहटेंऔर बे परवाह सीजिंदगी ....पर ये न सोचा होगाकि एक दिनउसके ही बनाएकुछ कायर पुतलेउसके ही नाम परबिखरा देंगेखूनी छींटे औरयूं छलनी कर देंगेतार ता...
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  December 17, 2014, 11:10 am
बीते पलों कीकुछ बातें कुछ यादेंबन करदबी रह जाती हैंकहींकिसी कोने मेंवक़्त-बेवक्त  आ जातीं हैंअपनी कब्र से बाहर देने लगती हैं सबूतखुद कीचलती साँसों का.....उधेड़ देती हैंपरत दर परतअनचाहे हीसामने ला देती हैंआदिम रूपजिसेखुद से हीछिपाने सेन नफ़ान नुक्सान ही होता है .....लेकि...
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  December 16, 2014, 7:00 pm
घर बार सेकहीं दूरकिसी रेगिस्तान कीरेतीली ज़मीन परयाबर्फ भरीपर्वतों कीऊंची चोटियों पर ठौर जमाए  पीठ परभारी बोझ  हाथ में हथियारऔर निगाहों मेंपैनापन लिए वहजूझता है  मौसम की मारऔरदुश्मन के वार सेलेकिनहिलता नहींशहादत केअटलदृढ़ संकल्प से  .....उसका समर्पण उसका तनउ...
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  December 13, 2014, 12:36 pm
मैं या हमकभी अकेलेकभी साथनिकल चलते हैंबाहर की ओरदेखनेघटना चक्र  सृष्टि चक्र जो घूम रहा हैअपनी पूर्वनिश्चितधुरी पर  तय परिपथ परजिससे पीछे हटनाबाहर निकलनाअब तकसंभव नहींलेकिन संभव हैंअपार परिवर्तनइसी सीमा केभीतररिक्त स्थानों में जहांनिर्वात के होते हुए भीमैं ...
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  December 10, 2014, 11:34 am
बीते दिन कीबीत चुकीयादों कीतस्वीर कोसाथ लिएफिर आयीएक नयी सुबह  हवा मेंहल्की ठंडकऔर ताजगी के साथउम्मीद भरीसूरज कीकिरणों सेमन कीकुछकहते हुए...हो जाता है शुरूइस सुबह काइंतज़ार हर दिन केढलने के साथ  हर रात केगहराने के साथमिटने लगते हैंहताशानिराशा केबोझिल पल  आस लि...
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  December 8, 2014, 11:22 am
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