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Blog: जो मेरा मन कहे

Blogger: Yashwant Yash
अब मुझे संतोष है कि हिंदी अगर अपने घर में मर भी गई, तो अमेरिका में जरूर बची रहेगी। देखना, एक दिन हम अमेरिका से करार करेंगे और नकद डॉलर भुगतान करके हिंदी इंपोर्ट किया करेंगे। वह हमें ‘पीएल फोर एट्टी’ की तरह राशन में मिला करेगी और इस तरह हमारी हिंदी,  हतक की सारी कोशिशों ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   6:59am 19 May 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
खुद से कहीं दूरथोड़ा हैरानथोड़ा परेशानखुद को पाने केहर जतनकरता हुआरेतीली राहों परचलता हुआ हर पलजीने की कोशिश मेंसाथ लिए  भीतर थोड़ा दर्दसामने थोड़ी मुस्कान  खुद के कुछ नजदीकखुद को छूने कीकोशिश करता हुआ  न जाने क्योंहोता जा रहा हूँखुद से ही बहुत दूर। ~यशवन्त यश©... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   12:25pm 14 May 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
बहुत सस्ते होते हैं  कुछ लोगजो बिताया करते हैंअंधेरी रातेंफुटपाथों परऔर दिन मेंझुलसा करते हैंघिसटा करते हैंडामर वालीचमकदार सड़कों परचमका करते हैंचाँद के चेहरे परकील मुहांसों की तरह।ये सस्ते लोगखुदा,गॉड औरभगवान नहींसिर्फ एकऊपर वाले केहाथों से ढल करपरीक्षक बन कर... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   9:10am 9 May 2015 #पंक्तियाँ
Blogger: Yashwant Yash
रेत के महलों के भीतरआसन जमाएकुछ लोगसिर्फ देख सकते हैंकाल्पनिक चलचित्रजिनमेंअच्छा ही अच्छासब कुछसकारात्मकसुलझा हुआऔर सिकुड़न मुक्त होता हैलेकिन नहीं जानतेकि यह सब दृश्यपरिणाम हैंउनके खौफया प्रभाव केजिसका अंतसंभव हैतेज़ हवा केसिर्फ एकझोंके से ।~यशवन्त यश©... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   11:22am 5 May 2015 #पंक्तियाँ
Blogger: Yashwant Yash
ढोता हूँदिन भरईंट,पत्थर और गारा  अपने घर काऔर नयी इमारत का सहारामैं नहीं वह बेचारा जो नायक हैकाल्पनिक चलचित्रोंकविताओंऔर कहानियों का जो अपने सुखांतऔर दुखांत के बीचमेरे जीवन कीअनकहीअनजानी रेखाओं कोसरे बाज़ार  नीलाम करने के बाद भीरखती नहींएक धेलामेरी कर्मठकालीम... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   4:10am 1 May 2015 #मई दिवस
Blogger: Yashwant Yash
यहीं कहींकभी कभीमन केएक कोने मेछुप कर जी भरबातें करता हूँखुद से हीअनकही कोकहता हूँ अंधेरों से भरेसुनसान रस्तों परडरता हूँमगर चलता हूँहताशा-निराशा के पलों में झुरमुटों की ओट सेकिसी रोशनी कीतमन्नाऔर उम्मीद लियेअपने मन कीसुनता चलता हूँयूं ही जीता चलता हूँ।  ~यशवन्... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   7:53am 27 Apr 2015 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash
सूने खेतों को अब सिसक कर रोना ही होगाचूल्हे की आग को दिल में जलना ही होगानहीं यहाँ कोई कि जो पी सके आंसुओं कोमजबूरी को हर हाल में बहना ही होगा।~यशवन्त यश©... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   9:55am 16 Apr 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
अपने आप से हीकई अनुमानलगाने वालेकुछ लोगअपने गुमान में खो करकभी कभीकरने लगते हैं दूसरों केअस्तित्व पर प्रहार और खुद हो जाते हैं शिकारवक़्त की तीखों चोट काक्योंकिवक़्तअपने भीतरसमाए हुए है सही गलत कापूरा लेखा जोखाजिसे मिटानासंभव नहींकिसी भीपैबंद से।  ~यशवन्त यश©... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   10:23am 12 Apr 2015 #पंक्तियाँ
Blogger: Yashwant Yash
कभीकिसी जमाने मेंनिकला करते थे सूरज और चाँदपेड़ों कीयापहाड़ों कीओट सेहँसते मुस्कुराते हुएअपनी गरमाहटऔर ठंडक से दिया करते थेशांति  झुलसते याठिटुरते मन को ....और अबआज केइस दौर मेंचाँद औरसूरज परदिखने लगा हैअसरसमय केसंक्रमण का  ..... दोनोंनिकलते हैंअब भीअपने समय से  ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   10:22am 8 Apr 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
मूर्ख कौन ?वह ?जो दिन रात एक करकेखून पसीने सेसींचता हैखेतों मेंलहलहाती फसलों कोऔर बदले मेंझेलता हैआँधी-पानीतीखे कटाक्षखाता हैसमय की तीखी मारऔर हो जाता है शरणागतमृत्यु देवी के चरणों में......यामूर्खवह ?जिसकी पोटली मेंभरे रहते हैंझूठ केअनंत आश्वासनऔर उसकी निगाहेंताकत... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   11:59am 1 Apr 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
रामनवमी के अवसर पर प्रस्तुत है मेरे पिता जी का यह आलेख जो उन्होने लगभग 30 वर्ष पहले लिखा था और आगरा एक स्थानीय साप्ताहिक पत्र में प्रकाशित भी हुआ था -________________________________________________________________________महात्मा गांधी ने भारत में राम राज्य का स्वप्न देखा था.राम कोटि-कोटि जनता के आराध्य हैं.प्रतिवर... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   3:35am 28 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
हाल ही में बाल साहित्य से जुड़ी साहित्य अकादेमी की गोष्ठी में एक महिला वक्ता ने कहा कि हमें एलिस इन वंडरलैंड और पंचतंत्र से मुक्त होना होगा। किसी हद तक उनकी बात सही हो सकती है, मगर यह भी सोचने की बात है कि एलिस इन वंडरलैंड आज तक न सिर्फ बच्चों में, बल्कि बड़ों के बीच भी बेहद ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   10:57am 27 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
Curtsy-Facebook... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   3:30am 26 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
अनजानी दिशाओं की ओरयात्रा पर निकलेकुछ ख्याल  कभी पा लेते हैंअपनी मंज़िलऔर कभीदेहरी छूने से पहले हीहो जाते हैंगुमशुदाहमेशा के लिये  ....बादलों के संगतूफानी हवा के संगबहते -उड़तेकुछ ख्याल  कभी आ गिरते हैंधरती परचोटिल हो करउखड़ती साँसों कोबेहोशी में गिनते हुएबस तरसते... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   2:26pm 25 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
Source-Facebook... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   10:30am 24 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
सपनों के समुद्र मेतैरता मनजानेक्या क्या ढूंढ लाता हैगहराई सेकभी सुनहरेचमकदारअनजाने पत्थरजो किसी के लिएकोई मूल्य नहीं रखतेऔर किसी के लिएअमूल्य होते हैंऔर कभीनिकाल लाता हैकुछ ऐसे ख्याल  जिनका गहराई मेकहीं दबे रहना हीअच्छा है .....पर शायदअब शान्त हो जाएगा  सपनों का... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   11:28am 23 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
साहित्य ‘सम्मान-युग’ में प्रवेश कर गया है। आजकल साहित्य को इतनी तरह से और इतनी बार सम्मानित किया जाने लगा है कि साहित्य घर का ‘शो रूम’ बना जा रहा है। अगर इस दशक और अगले दशक तक ऐसा ही चलता रहा, तो दिल्ली के सदर बाजार, कनॉट प्लेस, करोलबाग, पंखा रोड, ग्रेटर कैलाश और मॉल्स आदि ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   11:25am 22 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
खुद की पहचान से अनजानकुछ लोगनहीं कर पाते अंतरमिट्टी और हीरे मेंरहते हैं धोखे मेंसमझते हुएखुद कोबहुत बड़ा पारखीबहुत बड़ा जौहरीलेकिन नहीं जानतेकि जोउनके हाथ से छूट करअभी गिरा हैवह कीमती है  उसका टूटनाउसका बिखरनाचारों तरफदर्द भरीउसकी आहों का गूंजना  मन के भीतरकिसी ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   10:03am 21 Mar 2015 #पंक्तियाँ
Blogger: Yashwant Yash
शून्य से चलकरशून्य पर पहुँच करशून्य मे उलझ करशून्य सा ही हूँजैसा था पहलेवैसा ही हूँ ।देखता हूँ सपनेसुनहरी राहों के नींद मेंहर सुबह को काँटों परचलता ही हूँजैसा था पहलेवैसा ही हूँ ।जो मन में आता हैउसे यहीं पर लिख कर कुछ अपने ख्यालों मेंजीता ही हूँजैसा था पहलेवैसा ही हू... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   11:53am 20 Mar 2015 #बस यूँ ही
Blogger: Yashwant Yash
सोशल मीडिया जैसे फेसबुक व्हाट्सएप आदि पर कभी कभी हमारे मित्र कुछ ऐसे शब्द इस्तेमाल करते हैं जिनका सही अर्थ हमें किसी शब्दकोश मे भी मिलना मुश्किल होता है। BSTसे साभार यहाँ  प्रस्तुत हैं कुछ ऐसे ही चुनिन्दा शब्द और उनके अर्थ-Slang Code             Full FormASAPAs Soon As Possib... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   10:58am 19 Mar 2015 #Internet
Blogger: Yashwant Yash
नाकामियां किसके जीवन में नहीं आतीं। उनके जीवन में भी विफलताओं का दौर आया। ऐसा दौर, जब मन में आया कि वह क्रिकेट ही छोड़ दें। पर क्रिकेट में तो उनकी जान बसी है। क्रिकेट छोड़ने का मतलब था जीवन से मुंह मोड़ना। तो क्या मुश्किलों से हारकर वह जीना छोड़ देंगे? उन्होंने तय किया ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   9:45am 10 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
कुछ सपनों कासच न होना किसी से मिलनाकिसी से बिछड़नाफूलों के बिस्तर पर सोनाकाँटों के रस्ते पर चलनाकभी गिरना,चोट खानासंभलनाठहरनारोनाहँसनारूठनामनानान जाने क्या क्या सोचनान जाने क्या क्या लिखना  कुछ पढ़नासमझनायाद रखनाभूल जानाइन अनोखी राहों परजो भी हैअच्छा ही है। ~यश... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   9:33am 9 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
स्त्री विमर्श पर शिल्पा भारतीय जी का यह आलेख कुछ समय पहले जागरण जंक्शन पर देखा था। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर इसे अपने पाठकों हेतु और सहेजने की दृष्टि से इस ब्लॉग पर साभार प्रस्तुत  कर रहा हूँ। किसी भी समाज और परिवार का दर्पण है स्त्री और उसके बिना समाज का अध... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   2:51am 8 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
जीवन केइस रंगमंच पर अपनी अपनी भूमिकानिभाते निभाते अपने अपने पात्रोंचरित्रों को जीते जीते हमकभी सजाते हैंदीवारों पर तस्वीरेंऔर कभीखुद हीकोई तस्वीर बन करकैद हो जाते हैंअंधेरे कमरे की  किसी दीवार परजहाँ की तन्हाईकई मौके देती हैबीते दौर कोसोचने समझनेऔरअगले पलों क... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   3:51am 7 Mar 2015 #
Blogger: Yashwant Yash
हर ओरउड़तेबिखरतेबहकतेचहकतेमहकतेगीलेऔरसूखे रंगरंगभेदजात धर्म   अमीर औरगरीब से परे सबके चेहरों परसजे हुए हैं एक भाव से  विविधता मेंएकता काभाव लिए  क्योंकि रंगइन्सानों की तरहभेदभाव नहीं करते।~यशवन्त यश©होली कीहार्दिक शुभ कामनाएँ ! ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:36am 6 Mar 2015 #
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