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Blog: दिल की कलम से...

Blogger: दिलीप
हँसी होंठों पे रख, हर रोज़ कोई ग़म निगलता है...मगर जब लफ्ज़ निकले तो ज़रा सा नम निकलता है...वो मुफ़लिस खोलता है रोटियों की चाह मे डिब्बे...बहुत मायूस होता है वहाँ जब बम निकलता है....वो अक्सर तोलता है ख्वाब और सिक्के तराजू में...खुशी पाने में इक सिक्का हमेशा कम निकलता है....जबां की ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   2:29pm 28 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
झूठी आज़ादी की बस, इतनी ही परिपाटी रही...भूख बढ़ती ही रही और ज़िंदगी नाटी रही...जब सियासी दाँव, उनको खेलने का मन हुआ...गड्डिया लोगों की हैं पीसी गयी, बाँटी गयी...जिस्म सारा नोच कर खा ही चुके ये भेड़िए...हड्डियाँ मज़हब के पैमाने से हैं छान्टी गयी...ख्वाब इंसानी बढ़ा, कितने घरौंदे ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   8:53am 26 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
मिन्नतें रोटी की वो करता रहा...मैं भी मून्दे आँख बस चलता रहा...आस में बादल की, धरती मर गयी...फिर वहाँ मौसम सुना अच्छा रहा...दूर था धरती का बेटा, माँ से फिर...वो हवा में देर तक लटका रहा...काग़ज़ों पर फिर ग़रीबी मिट गयी...और जो भूखा था, वो भूखा रहा...घर जले, बहुएँ जली, अरमां जले...आग का ये क... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   5:59pm 25 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
बढ़ रही सर्दी में इक बस्ती जला लेते हैं हम...प्यास जो बढ़ने लगी, खूं से बुझा लेते हैं हम...इस सियासत ने हमें करतब सिखाए हैं बहुत...आँख से सड़कों की भी काजल चुरा लेते हैं हम...जुर्म अब करते यहाँ है, ताल अपनी ठोक के...और फिर हंसता हुआ बापू दिखा देते हैं हम...खूँटियों से बाँध कर रखते ह... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   1:23pm 24 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
अब खून में आतिश का आगाज़ ज़रूरी है...ज़हनी गुलामों होना आज़ाद ज़रूरी है...हो बाँसुरी के स्वर से गूंज़ीं भले फ़िज़ायें...पर चक्र सुदर्शन भी इक हाथ ज़रूरी है...काग़ज़ से रगड़ खाकर चिंगारियाँ उठाए...स्याही में क़लम की अब कुछ आग ज़रूरी है...तुम अश्क़, चाँद, मय से ग़ज़लें सजाओ लेकि... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   8:52am 23 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
दूसरोंकेग़मसेभीआँखेंभिगोकरदेखिए...तनको, चुपफुटपाथकेकंकरचुभोकरदेखिए...गरसमझआतीनहोमिट्टीकेबेटोंकीकसक...क़र्ज़लेकरपत्थरोंपरधानबोकरदेखिए...आपकोलेनाहोजोफाकाफकीरीकामज़ा...भीखमेंमिलतेमहलकोमारठोकरदेखिए...थकगयेजोलिखतेलिखते, यादसेभीगीग़ज़ल...खूनमेंअपनीक़लम, अबक... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   9:21pm 22 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
भूखे दिल को इन्क़लाबी इक निवाला दीजिए...बर्फ जैसे खून में थोड़ा उबाला दीजिए...मुल्क की माँओं, बनाना राम जो मुश्किल लगे...कोख की मिट्टी से इक चाणक्य ढाला कीजिए...सीखने को है बहुत कुछ राम के किरदार में...न मुझे शंभूक का झूठा हवाला दीजिए....कब तलक हौव्वा संहालेगी दुपट्टा हाथ से...आ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   4:48am 22 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
जोइश्क़, खुदाईनहोती, येगीतऔसाज़नहींहोते...जोकान्हानफेरेउंगली, मुरलीमेंरागनहींहोते, दोजिस्ममिले, इकआँचउठी, गरइश्क़इसीकोकहतेहैं...तोसूर, बिहारी, मीराक्या, राधेऔरश्यामनहींहोते... जोसूखेचेहरेदेखेथे, उनपरमुस्कानेछिड़काते...जोतबगीलादिलकरलेते, यूँसूखेआजनहींहोते...प... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:07pm 21 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
उनपे जो झेल भूख, खेलें खेल ज़िंदगी का...धर्म के ज़हर का कहर ढा रहे हैं वो...महलों को भूख जब सूखे जिस्मों की हुई...बस्तियों की हड्डियाँ चबा के खा रहे हैं वो...वादे के बुरादे भरे खोखले चुनावी अब्र...पाँच साल बाद फिर बरसा रहे हैं वो...बेड के भी पास 'ज़ेड' रख के बिलों मे रहें...सबकी सुरक... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   1:28pm 20 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
सियासी आग के करतब, दिखा रहे हैं यहाँ...नाखुदा मुझको भंवर में, फँसा रहे हैं यहाँ...कोई क्लाइमैक्स सिनेमाई चल रहा है अभी... मौत के बाद मेरी जाँ बचा रहे हैं यहाँ...मैने कमरों में भर लिए हैं नुकीले पत्थर...चुनाव आने की खबर दिखा रहे हैं यहाँ...न मयस्सर हुई है आग जहाँ लाशों को..सियासी आग... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   5:51am 19 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
मुल्क़ ज़िंदा न फिर हो जाए, ख़ौफ़ रखते हैं...वो तो लाशों की नुमाइश का शौक रखते हैं...यहाँ संसद ने तड़पते हुए, दम तोड़ दिया...वो अपनी बात में ज़हरीला छौंक रखते हैं...वो जो ऐलान कागज़ी उड़ा रहे हैं अभी...उसके नीचे छिपी मुहर में मौत रखते हैं....एक हमले में जो दुबके हुए थे मेज तले...बदन ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   3:46pm 18 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
अभी सुलग़ेगा वो कुछ और, शाम बाक़ी है...हमारे बीच की बातें तमाम बाक़ी हैं...वो बाँधती है कलावा अभी भी पीपल से...अभी उस घर में बुढ़ापे का मान बाक़ी है...जबसे आँगन से उखाड़ी गयी हरी तुलसी...वो घर रहा ही नहीं, बस मकान बाक़ी है...उठी बेटी पे जो नज़र बुरी, मिटा दी गयी...अभी बस्ती में मेरे आ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:54am 18 Jul 2013 #
Blogger: दिलीप
गुज़रे वक़्त की सोहबत में कुछ एहसास लिए...मैं चल रहा हूँ जाम लेके दिल में प्यास लिए...मैने नज़मों को रगों में लहू सा दौड़ाया...ज़िंदगी जी ली शेर पढ़के, बिना साँस लिए...मैं चल पड़ा हूँ, अपने अश्क़, नज़्म, ग़म लेकर...न किसी आम की ख्वाहिश न कोई ख़ास लिए...तेरे शहर की उस गली से आज फिर गु... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:26pm 24 Jun 2013 #
Blogger: दिलीप
मेरेहाथोंमेअपनाहाथदोऔरफिरदेखो...लकीरेंजोड़केतस्वीरनयीबनतीहै...मुझेमालूमनहींहैंशनिराहुकेतु...नउसचौकोरसेडब्बेकाकोईमतलबही...अगरहोताभीहैतोमिलकेहमबनाएँगे...वोचौकोरसेडब्बेकीनयीतस्वीरें...जिसकेखानोंमेंहोगाप्यार, सहारामेरा...तेरेहोंठोंकीज़रासुर्खियाँसजाएँग... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   1:01pm 27 May 2013 #
Blogger: दिलीप
अधूरीइककहानीहूँ, मुक़म्मलहोहीजाऊँगा...अभीइकघासकातिनकाहूँ, जंगलहोहीजाऊँगा...तूयूँलिपटीरहीमुझसे, जोनागिनकीतरहजानां...यकींमुझको, ज़हरतेरेसे, संदलहोहीजाऊँगा...सदाएंहैंवफ़ाकीलबपे, दिलमेंबेवफ़ाईहै...इबादततेरीऐसीहै, तोमंदरहोहीजाऊँगा...तेरीवोखुरदुरीबातें, औमेरेघिस... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   6:07am 11 May 2013 #
Blogger: दिलीप
आज़ादी दी थी मुझे किसी ने...कई साल पहले...बड़े दिन संहाले रखी...अब मोची से उसकी चप्पल बनवा ली है...रोज़ जाता हूँ...उसे पहनकर...बेबसी के गोबर में...रगड़ता हूँ, लथेड़ता हूँ...फिर एक खास दिन...साफ करता हूँ, चमकाता हूँ...घिस गयी है अब वो...टूटने वाली है...किसी तरह बस...मजबूरी की गोंद लगाकर...दोन... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   9:06pm 2 May 2013 #
Blogger: दिलीप
रात पूनम की है, नन्हा नहीं समझता ये...रात, बेबस निगाह लेके है वो घूर रहा...वो सोचता है वो सिक्का कभी गिरेगा कहीं...अपने आका की पिटाई से वो बच जाएगा...वो मासूम सा नन्हा सा भिखारी देखो...हाथ फैलाए, दौड़ता है सड़क पर तन्हा...... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   10:05am 28 Apr 2013 #
Blogger: दिलीप
मेरेकानोंमेंबाँधदोझनकतेसन्नाटे...मेरेहोंठोंपेसुर्खलालसीचीखेंरखदो...मेरेमाथेपेगोलचोटदो, किखूनरिसे...मेरेहाथोंमेगोलखनखनातीहथकड़ियाँ...मेरेसूखेहुएअश्कोंमेंअंधेराघोलो...सज़ादोउसकोमेरीआँखपेकाजलकीतरह...गलेमेंबाँधदोमजबूरियोंकासाँपकोई...मेरीचोटीमेंअपनीकाली... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   2:00pm 25 Apr 2013 #
Blogger: दिलीप
स्टेशनपरखड़ाथा...ट्रेनलेटथी...भूखसीलगी...सामनेअख़बारमेलिपटी...आलूपूड़ीबेचनेवालादिखा...उससेखरीदाऔरखाहीरहाथा...किएकसात-आठसालकालड़का...खड़ाहोगयासामने...घूरनेलगा...मैनेमुँहमोड़ा, पूडियानिपटाई...औरजैसेहीअख़बारफेंकनेवालाहुआ...उसनेवोअख़बारमाँगलिया...मैनेपूछाक्याकरेग... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   3:11pm 16 Apr 2013 #
Blogger: दिलीप
नहिंदू, नमुसलमान...उसकामज़हबतोग़रीबीथा...नभारतनपाकिस्तान...उसकामुल्कतोमुफ़लिसीके...६फुटबाई२फुटमेंघिरा...एकज़मीनकाटुकड़ाथा...नजिहादजानताथा...नधर्मयुद्ध...बसभूखजानताथा...औरजानताथाउसकादर्द...इसीलिएउसेमज़हबीआकाओंकेइशारेपर...मरतेमारतेदेखा...ज़िंदालोगोंकोएकपलमेंची... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   9:24am 14 Apr 2013 #
Blogger: दिलीप
ईंटजोड़केबने...उसबेतरतीबचूल्‍हेकेसामने...आगजलाएबैठीथी...वोसाँवली...झुलसनलिपटरहीथीउससे...पसीनाटपकरहाथामाथेसे...जैसेसाँवलेकमलपरओसफिसलरहीहो...खसमनेजबदेखातोप्यारसेबोला...ताजमहलबनवादूँतेरीखातिर...तिरछीआँखसेदेखा...मुस्काईशरमाईफिरबोली...ताजमहलकामुझेक्याकरना...बसअग... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:59am 13 Apr 2013 #
Blogger: दिलीप
कोईकुछबोलरहाथा...कोईकुछसुनरहाथा...हवासुन्नथी...नकुछबोलरहीथी...नसुनरहीथी...क्यूंकीवहीजानतीथीशायद...किक्याहोनेवालाहै...कुछबूटरौन्द्तेचलेआएज़मींको...इंसाननहींबसवर्दीमेंकुछकठपुतलियाँथीं...एकगोरेनेधागाखींचा...गोलियाँचिल्लापड़ी...बच्चेबूढ़ेऔरतथोड़ाचीखेफिर...खामोश... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   7:41pm 12 Apr 2013 #
Blogger: दिलीप
आओदिन केफ़र्शपेदोनोंरातबिछातेहैं...चाँदअंगीठीजलाकेताज़ीनज़्मपकातेहैं...थोड़ासाएहसासगूँथलो, कलहीपिसवायाहैं...ग़मकेफिरचकलेबेलनपरउसेघुमातेहैं...पिछलीबारकीजोग़ज़लेंबाँधीथीमैनेख़तमें...चलोउसेचखनेसेपहलेकुछगर्मातेहैं...खट्टीबादलकीचटनीयातारोंकीशक्करसे...तोड... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   4:42am 12 Apr 2013 #
Blogger: दिलीप
यहाँमुस्तक़बिलमराथाकोई...इसअधनन्गेहड्डीकेढाँचेसीइमारतमें...ख्वाबउछलतेथेदिनभर...नन्हीनन्हीमुस्कानो, किल्कारियोंवालेख्वाब...एकहीसुरमेंपाठकोईचिल्लातेथेसब...जैसेकोईशंखबजाहो...एकाएकइकरोज़अचानक...शोरहुआथा...एकधमाकेसेकिल्कारीजानेकितनीदूरदूर...टुकड़ोंटुकड़ोंमे... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   9:15am 11 Apr 2013 #
Blogger: दिलीप
जिरहक्यूँकररहेहोतुमभला, शातिरवक़ीलोंसे...सियासतचलरहीहैआजकल, बमकेज़ख़ीरोंसे...नचाहतनाख़ुदामेंहो, तोसबकुछडूबताहीहै...भलाकबतकचलेगामुल्क़, भाड़ेकेवजीरोंसे...भलाबर्बादक्यूँकरतेहोआतिश, बमयाबंदूकें...यहाँइंसानमरजाताहैबसबातोंकेतीरोंसे...वहाँबस्तीमेंसबघरजलगये, क... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   2:10pm 8 Apr 2013 #
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