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Blog: यथार्थ

Blogger: rahul.ranjan
शूटिंग नहीं है आज कल खाली ही हूँ। अभी वहीं कर रहा हूँ जो अमूमन साल के 7-8 महीने करना पड़ता है मुंबई में- ‘काम ढुढ़ने का काम’। यह काम भी कुछ कम मज़ेदार नहीं है। सुबह उठे,एक दो फोन लगाए,किसिने मिलने को बुला लिया तो ठीक नहीं तो लैपटाप ऑन किया कोई फिल्म चला ली। काम की तलाश आज खत्... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   9:18pm 30 Apr 2013 #
Blogger: rahul.ranjan
कोई आकृति नहीं,परछाइयाँ फिर क्यों हैं?लगाव तो तनिक भर का नहीं,पर होता अलगाव नहीं क्यों है?गलत हैं,फिर सही क्यों हैं ?जहां सालों पहले थे,अब भी वहीं क्यों हैं?मूर्त ना हो तो ना सही,जख्म अब भी देते क्यों हैं?न लिखित हैं,न उकेरे हुये,छाप इनकी अमिट क्यों है?चैन से न दिन कटने देते ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   11:19am 28 Apr 2013 #
Blogger: rahul.ranjan
अंधेरा बहुत है,फिर भी जगह जगह दीप जलते हैं,धुंध भी है,नमी भी है सब सजोया हुआ है.... पर कोई कमी सी हैभरा हुआ है,भीड़ है,फिर भी खाली हैं,सजीव भी हैं,निर्जीव भी,रंगीन हैं,फिर काली हैं,हर रोज कुछ जा जुड़ती हैं दूर जाती हैं फिर मुड़ती हैं,कुछ गुमसुम,कुछ चित्कारतीकुछ सोई -2 कुछ खोई-2कि... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   2:03pm 28 Jan 2013 #
Blogger: rahul.ranjan
बहुत शातिर है,चाल बड़ी तेज़ है उसकी....कितनी भी कोशिश कर लूँ....उसके कदमों से कदम नहीं मिला पता हूँ...वह आगे निकाल जाता है,छोड़ के सब कुछ पीछे...लिखावट महीन है उसकी... सबके समझ में नहीं आती....गणित बहुत अच्छा है,कुछ भी नहीं भूलता,सब याद रखता है,हर साल मेरे कर्मों का हिसाबमेरे चेहरे ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   6:36am 30 Dec 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
थोड़ी लज्जित हैं यह आँखें,कुछ बोझ सा होता है पलकों पर!झुकी-2 सी ,दबी -2 सी रहती हैं,बोझिल पलकें मेरी!नज़रें नहीं मिला पता हूँ किसी महिला की नज़रों से..... दिल में चोर सा बैठा है एक ‘मर्द’जो शर्मिंदा है.... लज्जित है....अपने मर्द होने पर!!!!!!!... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   7:35am 21 Dec 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
“अगर लहरों ने तुम्हारा क़िला गिरा दिया तो?“अरे,नहीं गिराएंगी... उनसे permissionजो ली है मैंने..... जब तक मैं यहाँ हूँ तब तक यह क़िला मेरा है....”“और उसके बाद...???“ वैसे सब तो इनका ही है..... मेरे जाने के बाद इनकी मर्जी.... चाहे इस क़िले में आ बसें ... या अपने साथ बहा ले जाएँ .... मुझे क्या..."मैं बस मु... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   7:47pm 29 Nov 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
लड़ाई हुई थी अपनी आँखों की,पहली मुलाक़ात पर,वह बूढ़ा सा बस स्टैंड,मुस्कुराया था देख हमें,जाने कितनी बार मिले थे हम वहाँ,जाने कितने मिले होंगे वहाँ हम जैसे,वह शब्दों की पहली जिरह,या अपने लबों की पहली लड़ाई,सब देखा था उसने,सब सुना था,चुपचाप,खामोशी से,बोला कुछ नहीं।पर कहा न... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   8:41pm 16 Oct 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
सुबह सबेरे चिपका होता है आसमां से यूं,ज्यो सोते वक़्त,माथे की वह बड़ी सी लाल बिंदी,आईने से चिपका देती थी,दादी माँ,बढ़ता,घटता,बढ़ता है,मिटता है और आ जाता है,रंग बदलता रहता है,सुबह,दोपहर,शाम,क्यो?जलता-2 रहता है,पर जलता है क्यो तू?आसमां में मीलों दूर बैठा,जलन किस बात की है तुझे?... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   1:04pm 10 Oct 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
बड़-बड़ ...... बड़-बड़ाता है,आसमां में देख मुसकुराता है,इशारे करते रहता है,अक्सर चलते देखा है,चलता ही रहता है,और चलते-2 खुद से बतियाता है.....ऐसा ही है वह.....कोशिश नहीं दिखतीकुछ बन जाने की,चाह नहीं कुछ पाने की,फिक्र नहीं है खाने की सुध नहीं नहाने कीऐसा ही है वह....बढ़ी हुयी दाढ़ीआधी ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   6:44am 3 Oct 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
मेरा एक घर है इस महानगर में,3 कमरे,रसोई घर और एक बड़ा सा हाल,हर कमरे से जुड़ी एक बालकनी,जहां से सारा शहर दिखता है,चाय की चुस्की लेते हुये मैं जबसमंदर को देखता हूँ तो यूं लगता है,यह लहरें मेरी ऊंचाई तक आने को मचल रही हैं।बहुत सारे लोगों को जनता हूँ यहाँऔर वो सब यह जानते हैं,मे... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   11:57am 2 Oct 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
यथार्थ....छलावा....निराकार.....कामातुर नायिका सा प्रलोभन,वो गुरुत्वाकर्षण....नक्षत्र, उल्काओं सा मेरा गलन....तुम में समाहित होने को उतारू मैं....तुम्हारा अवशोषण ....पा तुम्हें, तुम में खोना नियति,लुभा कर मिटाना तुम्हारी नियत..तुम्हे अपना कर, खोना है अस्तित्व अपना जो बचता है वो तुम... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   7:55am 12 Aug 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
कई बार ये खामोशी कितनी अच्छी लगती है .....मैं चुप हो जाता और सोचता कि तुम कुछ बोलोगी.... और तुम भी ऐसा ही कुछ सोचने लगती थीं शायद.....  और ये खामोशी पैर पसार लेती थी हमारे बीच.....  अचानक से दोनों ही साथ बोल पड़ते.... ये खामोशी हमारी हंसी मे घुल कर रह जाती.... क्यों?खाली बैठे बैठे दिमाग मे ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   7:35am 9 Jun 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
१६-चिट्ठियां,२२- ग्रीटिंग कार्ड्स,४८-सूखे गुलाब,७६-सर्दियों के दिन,१५-रतजगे,१७००-घंटो की फोन पर की गयी बातें,बंटवारे के बाद मेरे हिस्सेइतना सब आया,तुमने भी इतना ही कुछ पाया,जितना तुमने, उतना मैंने,गवाया...साथ देखे फिल्मों के पुराने टिकटनज़रे बचा, मैंने तकिये के नीचे छुप... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   8:13am 24 May 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
भानु गमन की ओर अग्रसर,अस्ताचल पर लालिमा प्रखर,कोलाहल को उतारु खगेन्द्रछू कर लौटे शिखर-काट दिवा निर्वासनअनोखा तुम्हारा प्रपंच,अनोखा प्रलोभनए साँझ............. बिखरी साँझ किरण,संध्या आगमन,तिमिर आह्वान, दिवाकर अवसान,सायों का प्रस्थान,खोलती मेरे यादों की थातीअकिंचन... ए साँझ...... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   4:43am 22 May 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
उफ़ ... कितनी दफा फोन किया......कुछ फूल भेजे ....कोई कार्ड भेजा....नाराज़ जो बैठी थीं ....और हर बार तरह, उस बार भी तुम्हे मानाने की कोशिश में नाकाम हुआ मैं...तुम्हे मानना मेरे बस बात थी ही कहाँ...जितना मनाओ, तुम उतनी नाराज़....वैसे नाराज़ तो तुम्हे होना भी चाहिए था...सर्दी जो हो गई थी तुमक... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   10:07am 10 May 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
कौन था वहजिसने पहली कविता लिखी ....कोईयोगी....या कोई वियोगी.....किसने पहलागीत लिखा?क्या ख्यालआया था उस कवि मन में उस रोज ....जब वह कुछशब्दों से एक चेहरा उकेर रहा था....लिखने काख्याल आया कैसे उस मन में?कहीं ‘तुम्हारे’बारे में तो नहीं सोच रहा था वह?या कहीं ,किसीरोज ,एक छत पर आधीरात ग... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   12:27pm 2 Mar 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
कौन था वहजिसने पहली कविता लिखी ....कोईयोगी....या कोई वियोगी.....किसने पहलागीत लिखा?क्या ख्यालआया था उस कवि मन में उस रोज ....जब वह कुछशब्दों से एक चेहरा उकेर रहा था....लिखने काख्याल आया कैसे उस मन में?कहीं ‘तुम्हारे’बारे में तो नहीं सोच रहा था वह?या कहीं ,किसीरोज ,एक छत पर आधीरात ग... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   12:26pm 2 Mar 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
कल ही की तो बात है....फूँक मार मोमबत्ती बुझाईकेक कटा,गीत गए गएसब ने तालियाँ बजाई...मोमबत्ती का धुआँ बुझा भी नहीं,कि एक और जा जुड़ी केक से,फिर एक और बढ़ी.....और... फिर और.....अब गिनती नहीं करता बस फूँक मार बुझा देता हूँ....कल ही की तो बात है,जब पिछली शाम दोस्तों ने पार्टी दी थी ....और मैंने... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   7:54am 2 Feb 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
यह सख्श मुझे, मेरे घर के उस गौरैये कि याद दिलाता है,आंधी ने जिसके घोसले को तोडा था...उसके पलते अरमानों के अण्डों को फोड़ा था....निरीह,असहाय सी, आशियाने को तिनकों में बिखरती देखती रही...पर अगले ही दिन, उन्ही तिनकों से..वही, उसी जगह, अपना नया घरोंदा जोड़ा था....आदमी जैसा दीखता है ..क... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   6:55am 19 Jan 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
यह शख्स  मुझे, मेरे घर के उस गौरैये कि याद दिलाता है,आंधी ने जिसके घोसले को तोडा था...उसके पलते अरमानों के अण्डों को फोड़ा था....निरीह,असहाय सी, आशियाने को तिनकों में बिखरती देखती रही...पर अगले ही दिन, उन्ही तिनकों से..वही, उसी जगह, अपना नया घरोंदा जोड़ा था....आदमी जैसा दीखता है ..... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   6:55am 19 Jan 2012 #
Blogger: rahul.ranjan
हर रोज ये शाम कितनी आसानी से सूरज को बुझा देती है!काम इतनी सफाई से होता है कि सूरज की आग का एक कतरा तक नहीं बचाता.रात अन्देरी गलियों में भटकती रहती है.और हर रोज सुबह अपने साथ एक नया सूरज लाती है.जैसे कि पिछली शाम कुछ हुआ ही नहीं था.....एक रोज ऐसे ही, किसी रिश्ते के सूरज को बुझ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   7:38am 1 Nov 2011 #
Blogger: rahul.ranjan
भू-२ कर स्वाहा होने लगा रावण..नेता जी के तीर ने रावण की आहुति दे दी थी...'वह' परेशां सा रावण दहन का यह दृश देखता रहा..अब उसे भी किसी नेता को तलाशना होगा,नेता तीर चला उसके अन्दर छुपे रावण का दहन कर देगा..खुश हुआ एक पल को.. नेता की तलाश शुरू हो गयी...पर हर चेहरे के पीछे उसे कोई ना क... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   6:49pm 6 Oct 2011 #
Blogger: rahul.ranjan
कुछ था जो अब नहीं है..बेतहाशा दौड़ता रहता हूँउसकी परछाई पकडे..वक़्त बदला तो नहीं पर उसकी चाल नई है ...एक-२ कर जाने कितने पैबंद लगाये..चादरे बदली, कई राज़ छुपाये..अब भी बोझिल है ज़मीर,गुनाह जो कई हैं!कुछ पता हूँ तो टीस सी उठती है अब..दिन सोने नहीं देता.रात से नींद रूठी है..ना मैं ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   3:48pm 6 Oct 2011 #
Blogger: rahul.ranjan
साहिल अब भी वहीं खड़ा मुस्कुरा रहा था,जब उतावली सी उस लहर ने साहिल को भिगाया था.साहिल खामोश...लहर पलटी और गुस्से से साहिल को एक और टक्कर मारा..और खुद ही साहिल के पत्थरों में उलझ कर रह गई..मानो साहिल की बांहों में बिखर सी गई हो .."आखिर तुम चाहते क्या हो?"साहिल की बाँहों से सरकती ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   6:01pm 23 Sep 2011 #
Blogger: rahul.ranjan
आखिर मेरी खता क्या है?जब भी सूखता हूँ,  गीला कर जाते हो!तनता हूँ और तुम गिराने आ जाते हो. मेरी हस्ती को मिटने की कोशिश कर तुम क्या पाते हो?उस रोज उकता कर साहिल ने समंदर से पूछा ...समंदर एक कुटिल मुस्कान मुस्काया..एक लहर से साहिल के कन्धों को थप-थपायाबोला...मैं अनन्त , अथाह और अ... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   5:34am 17 Sep 2011 #
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