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Jakhira, Shayari Collection, जखीरा, शायरी संग्रह

क्यों ये समझू वो अब पराया हैसिर्फ उसने मुझे गवाया हैअब कि जब उसने शहर छोड़ दियाउस गली से गुजरना आया हैइक तमाशा हू आज सबके लिएउसने इतना मुझे सजाया हैउम्र भर जाग कर भी सिर्फ मुझेनींद में आँख मलना आया हैफिर ख्यालो में मैंने अपने लिएभीड़ में रास्ता बनाया है – शारिक कैफ़ीIn Roman» kyo...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  July 9, 2012, 9:18 pm
संग में नहर बनाने का हुनर मेरा हैराह सबकी है मगर अज्मे सफर मेरा हैसारे फलदार दरख्तों  पे तसर्रुफ उसकाजिसमे पत्ते भी नहीं है वह शज़र मेरा हैदर व दीवार  पे सब्जे की हुकूमत है यहाँहोगा ग़ालिब का कभी अब तो यह घर मेरा हैतू मुझे पाके भी न खुश था यह किस्मत तेरीमै तुझे खो के भी खुश ...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  June 29, 2012, 12:54 pm
इस बरस ग़ज़ल को आम लोगो तक पहुचाने वाले फरिश्तों का जाना हुआ है कुछ समय पहले जगजीत सिंह साहब इस दुनिया से रुकसत हुए और आज पकिस्तान के मशहूर ग़ज़ल गायक मेहंदी हसन साहब का इंतकाल हुआ | खुदा उन्हें जन्नत अता करे | आप सबके लिए उनकी गई हुई दाग देहलवी की यह मशहूर ग़ज़ल :गज़ब किया तेरे वा...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  June 13, 2012, 6:26 pm
मुझे गर इश्क का अरमान होता,तो घर में ‘मीर’ का दीवाना होता |किसी तकरीब का सामान होता,कि हमसाया मेरा सामान होता |न होते फ़ासलों के शहर में हम,तो फिर मिलना बहुत आसान होता |अगर सब लोग होते मुझसे छोटे,तो मै सबसे बड़ा इंसान होता |जिसे दिल में छिपाए फिर रहे,अगर लब पर वही तूफ़ान होता |त...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  June 9, 2012, 12:26 pm
हिज्र की शब का सहारा भी नहींअब फलक पर कोई तारा भी नहींबस तेरी याद ही काफी है मुझेऔर कुछ दिल को गवारा भी नहींजिसको देखूँ तो मैं देखा ही करूँऐसा अब कोई नजारा भी नहींडूबने वाला अजब था कि मुझेडूबते वक्त पुकारा भी नहींकश्ती ए इश्क वहाँ है मेरीदूर तक कोई किनारा भी नहींदो घड़ी...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  June 4, 2012, 1:47 pm
मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत हैतमाम मुल्क में वो सबसे खूबसूरत हैकभी-कभी कोई इंसान ऐसा लगता हैपुराने शहर में जैसे नयी ईमारत हैबहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाममुझे पता चला वो कितनी खूबसूरत हैये ज़ाईरान-ए-अलीगढ़ का खास तोहफ़ा हैमिरी ग़ज़ल का तबर्रुक दिलो की बरकत है- बशीर ...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  June 2, 2012, 3:21 pm
पोस्ट लिखना चाही तो काफी शायर दिमाग के इर्द गिर्द घूमते रहे और उनके कलाम भी | पर कभी लगा के नासिर काज़मी, मुनीर नियाजी, फज़ल ताबिश या कैफ भोपाली का कोई कलाम पेश किया जाए पर मखदूम साहब का यह कलाम काफी पसंद आया जो की ग़ालिब को नज्र है |“ग़ालिब”तुम जो आ जाओ आज दिल्ली मेंखुद को पाओग...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  May 27, 2012, 4:32 pm
तुझे खोकर भी तुझे पाऊ जहाँ तक देखूँहुस्ने-यज़दां से तुझे हुस्ने-बुताँ तक देखूतुने यूँ देखा है जैसे कभी देखा ही न थामै तो दिल में तेरे कदमों के निशाँ तक देखूँसिर्फ इस शौक से पूछी है हजारों बातेंमै तेरा हुस्न, तेरे हुस्ने-बयाँ तक देखूँमेरे वीरानाए-जाँ में तेरी यादो के तु...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  May 23, 2012, 7:02 pm
अच्छी भली इबादत बेकार हो रही हैजन्नत हमारी कब से तैयार हो रही हैबारिश से सारी फसलों को फ़ायदे हुए हैंमिटटी कहीं की भी हो हमवार हो रही हैचेहरा बदल बदल कर तुम मिल रहे हो मुझसेक्या एक ही मुहब्बत सौ बार हो रही हैइन चींटियों से बचना मुश्किल है, सख्त मुश्किलजिस्मों प ख्वाहिश...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  May 11, 2012, 9:11 pm
ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भीये नज़राना तेरा भी है, मेरा भीअपने ग़म को गीत बना कर गा लेनाराग पुराना तेरा भी है, मेरा भीमैं तुझको और तू मुझको समझाएं क्यादिल दीवाना तेरा भी है, मेरा भीशहर में गलियों गलियों जिसका चर्चा हैवो अफ़साना तेरा भी है, मेरा भीमैख़ाने की बात न कर वाइज़ मुझ...
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Tag :प्रोडकास्ट
  May 10, 2012, 4:40 pm
फिर एक दिन ऐसा आयेगाआँखों के दिये बुझ जायेंगेहाथों के कँवल कुम्हलायेंगेऔर बर्ग-ए-ज़बाँ से नुक्तो-सदाकी हर तितली उड़ जायेगी!इक काले समन्दर की तह मेंकलियों की तरह से खिलती हुईफूलों की तरह से हँसती हुईसारी शक्लें खो जायेंगीखूँ की गर्दिश, दिल की धड़कनसब रागनियाँ सो जाये...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  May 4, 2012, 6:37 pm
बेपर्दा नज़र आयी कल जो चन्द बीबियांअकबर ज़मीं में गैरत-ए-क़ौमी से गड़ गयापूछा जो मैने आप का पर्दा वो क्या हुआकहने लगीं के अक़्ल पे मर्दों के पड़ गयानिकलो न बेनकाब, ज़माना खराब हैऔर इसपे ये शबाब, ज़माना खराब हैसब कुछ हमें खबर है नसीहत न दीजिएक्या होंगे हम खराब, जमाना खराब हैमतलब छ...
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Tag :Audio
  April 28, 2012, 6:56 pm
झूठी सच्ची आस पे जीना कब तक आखिर कब तकमय की जगह खून-ए-दिल पीना कब तक आखिर कब तकसोचा है अब पार उतरेंगे या टकरा कर डूब मरेंगेतुफानो की ज़द पे सफीना कब तक आखिर कब तकएक महीने के वादे पर साल गुजारा फिर भी ना आयेवादे का ये एक महीना कब तक आखिर कब तकसामने दुनिया भर के गम है और इधर एक त...
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Tag :Audio
  April 25, 2012, 10:40 pm
भीतर बसने वाला खुद बाहर की सैर करे, मौला खैर करेइक सूरत की चाह में फिर काबे को दैर करे, मौला खैर करेइश्क़-विश्क़ ये चाहत-वाहत मन का बहलावा फिर मन भी अपना क्यायार ये कैसा रिश्ता जो अपनों को ग़ैर करे, मौला खैर करेरेत का तोदा आंधी की फ़ौजों पर तीर चलाए, टहनी पेड़ चबाएछोटी मछली दरि...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  April 24, 2012, 6:13 pm
तेरी यादों से, तेरे ग़म से वफ़ादारी कीबस यही एक दवा थी मेरी बीमारी कीखुद हवा आई है चलकर, तो चलो बुझ जाएँइक तमन्ना ही निकल जायेगी बेचारी कीउम्र भर ज़हन रहा दिल की अमलदारी मेंउम्र भर बात न की हमने समझदारी कीफर्क कुछ खास नहीं था मेरे हमदर्दों मेंकुछ ने मायूस किया कुछ ने दिल ...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  April 19, 2012, 8:25 pm
बहुत कुछ यूँ तो था दिल में मगर लब सी लिए मैंने,अगर सुन लो तो आज एक बात मेरे दिल में आई हैमुहब्बत दुश्मनी में कारगर है रश्क का जज़्बा,अजब रूसवाइयाँ हैं यह, अजब यह जग-हँसाई हैहमीं ने मौत को आँखों में आँखें डालकर देखा,यह बेबाकी नज़र की यह मुहब्बत की ठिटाई हैमेरे अशआर के मफ़ह...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  April 13, 2012, 4:35 pm
अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैंमेरी याद से जंग फ़रमा रहे हैंइलाही मेरे दोस्त हों ख़ैरियत सेये क्यूँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैंबहुत ख़ुश हैं गुस्ताख़ियों पर हमारीबज़ाहिर जो बरहम नज़र आ रहे हैंये कैसी हवा-ए-तरक्की चली हैदीये तो दीये दिल बुझे जा रहे हैंबहिश्ते-तसव्वुर क...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  April 11, 2012, 12:44 pm
मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगालेकिन मेरी आँखों में तुझे डर न मिलेगासर पर तो बिठाने को है तैयार जमानालेकिन तेरे रहने को यहाँ घर न मिलेगाजाती है, चली जाये, ये मैखाने कि रौनककमज़र्फो के हाथो मै तो सागर न मिलेगादुनिया की तलब है, कनाअत ही न करनाकतरे ही से खुश हो, तो समन्दर ...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  April 6, 2012, 9:01 pm
अख्तर शीरानी को मोहब्बत का शायर कहा जाता है या यु कहे वो मोहब्बत के सबसे बड़े शायर थे क्योंकि नारी को और उसके कारण प्रेम और रोमांस को अपना काव्य-विषय बनाने वाले आधुनिक उर्दू-शायर आंतरिक अनुभूतियों के साथ-साथ बाह्य प्रेरणाओं को भी अपने सम्मुख रखते हैं| सामाजिक प्रतिबन्ध...
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Tag :लेख
  March 27, 2012, 3:53 pm
गर्द चेहरे पर, पसीने में जबीं डूबी हईआँसुओं मे कोहनियों तक आस्तीं डूबी हुईपीठ पर नाक़ाबिले बरदाश्त इक बारे गिराँज़ोफ़ से लरज़ी हुई सारे बदन की झुर्रियाँहड्डियों में तेज़ चलने से चटख़ने की सदादर्द में डूबी हुई मजरूह टख़ने की सदापाँव मिट्टी की तहों में मैल से चिकटे हु...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  March 17, 2012, 12:17 pm
शोला हूँ धधकने की गुज़ारिश नहीं करता सच मुंह से निकल जाता है कोशिश नहीं करता गिरती हुई दीवार का हमदर्द हूँ लेकिन चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता माथे के पसीने की महक आए न जिससे वो खून मेरे जिस्म में गर्दिश नहीं करता। हम्दर्दी-ए-अहबाब से डरता हूँ ‘मुज़फ़्फ़र’ मैं ज़ख़्म तो ...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  March 14, 2012, 12:58 pm
आप सभी को होली की शुभकामनाए इस अवसर पर नजीर अकबराबादी की एक ग़ज़ल पेश है: हां इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारी। देखें कैसी है तेरी रंगबिरंग पिचकारी।। तेरी पिचकारी की तकदीद में ऐ गुल हर सुबह। साथ ले निकले हैं सूरज की किरन पिचकारी।। जिस पे हो रंग फिशां उसको बना देती है।...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  March 8, 2012, 12:52 pm
मै कौन हू – मेरा बाप कौन था? ये सवाल ग्वालियर के एक मुहल्ले में कुछ दशको पहले सुने थे | इन सवालो का संबोधन अधेड़ उम्र की एक महिला फातिमा जुबैर से था | वो एक स्थानीय गर्ल्स हाई स्कूल में टीचर थी, इन सवालों को पूछने वाला एक नौजवान शायर था शमीम फ़रहत...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  February 23, 2012, 11:03 pm
मै कौन हू – मेरा बाप कौन था? ये सवाल ग्वालियर के एक मुहल्ले में कुछ दशको पहले सुने थे | इन सवालो का संबोधन अधेड़ उम्र की एक महिला फातिमा जुबैर से था | वो एक स्थानीय गर्ल्स हाई स्कूल में टीचर थी, इन सवालों को पूछने वाला एक नौजवान शायर था शमीम फ़रहत |फातिमा जुबैर जिनको सब फातिमा ...
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Tag :लेख
  February 23, 2012, 1:52 pm
आपने पिछली कई कड़ियों में ज़िया फतेहाबादी की गज़ले पढ़ी है आज उनके सुपूत्र रविन्दर सोनी जी की एक ग़ज़ल पेश कर रहा हू आशा है आप सभी को पसंद आएगी | सुकूँ से आशना अब तक दिल ए इनसाँ नहीं है कहूँ क्यूँ कर कि अहसास ए ग़म ए दौराँ नहीं है भरोसा अपने...
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Tag :ग़ज़ल और नज्मे
  February 4, 2012, 7:51 pm
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