POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: Jakhira, Shayari Collection, जखीरा, शायरी संग्रह

Blogger: Devendra Gehlod
क्यों ये समझू वो अब पराया हैसिर्फ उसने मुझे गवाया हैअब कि जब उसने शहर छोड़ दियाउस गली से गुजरना आया हैइक तमाशा हू आज सबके लिएउसने इतना मुझे सजाया हैउम्र भर जाग कर भी सिर्फ मुझेनींद में आँख मलना आया हैफिर ख्यालो में मैंने अपने लिएभीड़ में रास्ता बनाया है – शारिक कैफ़ीIn Roman» kyo... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   3:48pm 9 Jul 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
संग में नहर बनाने का हुनर मेरा हैराह सबकी है मगर अज्मे सफर मेरा हैसारे फलदार दरख्तों  पे तसर्रुफ उसकाजिसमे पत्ते भी नहीं है वह शज़र मेरा हैदर व दीवार  पे सब्जे की हुकूमत है यहाँहोगा ग़ालिब का कभी अब तो यह घर मेरा हैतू मुझे पाके भी न खुश था यह किस्मत तेरीमै तुझे खो के भी खुश ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:24am 29 Jun 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
इस बरस ग़ज़ल को आम लोगो तक पहुचाने वाले फरिश्तों का जाना हुआ है कुछ समय पहले जगजीत सिंह साहब इस दुनिया से रुकसत हुए और आज पकिस्तान के मशहूर ग़ज़ल गायक मेहंदी हसन साहब का इंतकाल हुआ | खुदा उन्हें जन्नत अता करे | आप सबके लिए उनकी गई हुई दाग देहलवी की यह मशहूर ग़ज़ल :गज़ब किया तेरे वा... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   12:56pm 13 Jun 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
मुझे गर इश्क का अरमान होता,तो घर में ‘मीर’ का दीवाना होता |किसी तकरीब का सामान होता,कि हमसाया मेरा सामान होता |न होते फ़ासलों के शहर में हम,तो फिर मिलना बहुत आसान होता |अगर सब लोग होते मुझसे छोटे,तो मै सबसे बड़ा इंसान होता |जिसे दिल में छिपाए फिर रहे,अगर लब पर वही तूफ़ान होता |त... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   6:56am 9 Jun 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
हिज्र की शब का सहारा भी नहींअब फलक पर कोई तारा भी नहींबस तेरी याद ही काफी है मुझेऔर कुछ दिल को गवारा भी नहींजिसको देखूँ तो मैं देखा ही करूँऐसा अब कोई नजारा भी नहींडूबने वाला अजब था कि मुझेडूबते वक्त पुकारा भी नहींकश्ती ए इश्क वहाँ है मेरीदूर तक कोई किनारा भी नहींदो घड़ी... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   8:17am 4 Jun 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत हैतमाम मुल्क में वो सबसे खूबसूरत हैकभी-कभी कोई इंसान ऐसा लगता हैपुराने शहर में जैसे नयी ईमारत हैबहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाममुझे पता चला वो कितनी खूबसूरत हैये ज़ाईरान-ए-अलीगढ़ का खास तोहफ़ा हैमिरी ग़ज़ल का तबर्रुक दिलो की बरकत है- बशीर ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   9:51am 2 Jun 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
पोस्ट लिखना चाही तो काफी शायर दिमाग के इर्द गिर्द घूमते रहे और उनके कलाम भी | पर कभी लगा के नासिर काज़मी, मुनीर नियाजी, फज़ल ताबिश या कैफ भोपाली का कोई कलाम पेश किया जाए पर मखदूम साहब का यह कलाम काफी पसंद आया जो की ग़ालिब को नज्र है |“ग़ालिब”तुम जो आ जाओ आज दिल्ली मेंखुद को पाओग... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   11:02am 27 May 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
तुझे खोकर भी तुझे पाऊ जहाँ तक देखूँहुस्ने-यज़दां से तुझे हुस्ने-बुताँ तक देखूतुने यूँ देखा है जैसे कभी देखा ही न थामै तो दिल में तेरे कदमों के निशाँ तक देखूँसिर्फ इस शौक से पूछी है हजारों बातेंमै तेरा हुस्न, तेरे हुस्ने-बयाँ तक देखूँमेरे वीरानाए-जाँ में तेरी यादो के तु... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   1:32pm 23 May 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
अच्छी भली इबादत बेकार हो रही हैजन्नत हमारी कब से तैयार हो रही हैबारिश से सारी फसलों को फ़ायदे हुए हैंमिटटी कहीं की भी हो हमवार हो रही हैचेहरा बदल बदल कर तुम मिल रहे हो मुझसेक्या एक ही मुहब्बत सौ बार हो रही हैइन चींटियों से बचना मुश्किल है, सख्त मुश्किलजिस्मों प ख्वाहिश... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   3:41pm 11 May 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भीये नज़राना तेरा भी है, मेरा भीअपने ग़म को गीत बना कर गा लेनाराग पुराना तेरा भी है, मेरा भीमैं तुझको और तू मुझको समझाएं क्यादिल दीवाना तेरा भी है, मेरा भीशहर में गलियों गलियों जिसका चर्चा हैवो अफ़साना तेरा भी है, मेरा भीमैख़ाने की बात न कर वाइज़ मुझ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   11:10am 10 May 2012 #प्रोडकास्ट
Blogger: Devendra Gehlod
फिर एक दिन ऐसा आयेगाआँखों के दिये बुझ जायेंगेहाथों के कँवल कुम्हलायेंगेऔर बर्ग-ए-ज़बाँ से नुक्तो-सदाकी हर तितली उड़ जायेगी!इक काले समन्दर की तह मेंकलियों की तरह से खिलती हुईफूलों की तरह से हँसती हुईसारी शक्लें खो जायेंगीखूँ की गर्दिश, दिल की धड़कनसब रागनियाँ सो जाये... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   1:07pm 4 May 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
बेपर्दा नज़र आयी कल जो चन्द बीबियांअकबर ज़मीं में गैरत-ए-क़ौमी से गड़ गयापूछा जो मैने आप का पर्दा वो क्या हुआकहने लगीं के अक़्ल पे मर्दों के पड़ गयानिकलो न बेनकाब, ज़माना खराब हैऔर इसपे ये शबाब, ज़माना खराब हैसब कुछ हमें खबर है नसीहत न दीजिएक्या होंगे हम खराब, जमाना खराब हैमतलब छ... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   1:26pm 28 Apr 2012 #Audio
Blogger: Devendra Gehlod
झूठी सच्ची आस पे जीना कब तक आखिर कब तकमय की जगह खून-ए-दिल पीना कब तक आखिर कब तकसोचा है अब पार उतरेंगे या टकरा कर डूब मरेंगेतुफानो की ज़द पे सफीना कब तक आखिर कब तकएक महीने के वादे पर साल गुजारा फिर भी ना आयेवादे का ये एक महीना कब तक आखिर कब तकसामने दुनिया भर के गम है और इधर एक त... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   5:10pm 25 Apr 2012 #Audio
Blogger: Devendra Gehlod
भीतर बसने वाला खुद बाहर की सैर करे, मौला खैर करेइक सूरत की चाह में फिर काबे को दैर करे, मौला खैर करेइश्क़-विश्क़ ये चाहत-वाहत मन का बहलावा फिर मन भी अपना क्यायार ये कैसा रिश्ता जो अपनों को ग़ैर करे, मौला खैर करेरेत का तोदा आंधी की फ़ौजों पर तीर चलाए, टहनी पेड़ चबाएछोटी मछली दरि... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   12:43pm 24 Apr 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
तेरी यादों से, तेरे ग़म से वफ़ादारी कीबस यही एक दवा थी मेरी बीमारी कीखुद हवा आई है चलकर, तो चलो बुझ जाएँइक तमन्ना ही निकल जायेगी बेचारी कीउम्र भर ज़हन रहा दिल की अमलदारी मेंउम्र भर बात न की हमने समझदारी कीफर्क कुछ खास नहीं था मेरे हमदर्दों मेंकुछ ने मायूस किया कुछ ने दिल ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   2:55pm 19 Apr 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
बहुत कुछ यूँ तो था दिल में मगर लब सी लिए मैंने,अगर सुन लो तो आज एक बात मेरे दिल में आई हैमुहब्बत दुश्मनी में कारगर है रश्क का जज़्बा,अजब रूसवाइयाँ हैं यह, अजब यह जग-हँसाई हैहमीं ने मौत को आँखों में आँखें डालकर देखा,यह बेबाकी नज़र की यह मुहब्बत की ठिटाई हैमेरे अशआर के मफ़ह... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   11:05am 13 Apr 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैंमेरी याद से जंग फ़रमा रहे हैंइलाही मेरे दोस्त हों ख़ैरियत सेये क्यूँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैंबहुत ख़ुश हैं गुस्ताख़ियों पर हमारीबज़ाहिर जो बरहम नज़र आ रहे हैंये कैसी हवा-ए-तरक्की चली हैदीये तो दीये दिल बुझे जा रहे हैंबहिश्ते-तसव्वुर क... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   7:14am 11 Apr 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगालेकिन मेरी आँखों में तुझे डर न मिलेगासर पर तो बिठाने को है तैयार जमानालेकिन तेरे रहने को यहाँ घर न मिलेगाजाती है, चली जाये, ये मैखाने कि रौनककमज़र्फो के हाथो मै तो सागर न मिलेगादुनिया की तलब है, कनाअत ही न करनाकतरे ही से खुश हो, तो समन्दर ... Read more
clicks 168 View   Vote 1 Like   3:31pm 6 Apr 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
अख्तर शीरानी को मोहब्बत का शायर कहा जाता है या यु कहे वो मोहब्बत के सबसे बड़े शायर थे क्योंकि नारी को और उसके कारण प्रेम और रोमांस को अपना काव्य-विषय बनाने वाले आधुनिक उर्दू-शायर आंतरिक अनुभूतियों के साथ-साथ बाह्य प्रेरणाओं को भी अपने सम्मुख रखते हैं| सामाजिक प्रतिबन्ध... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   10:23am 27 Mar 2012 #लेख
Blogger: Devendra Gehlod
गर्द चेहरे पर, पसीने में जबीं डूबी हईआँसुओं मे कोहनियों तक आस्तीं डूबी हुईपीठ पर नाक़ाबिले बरदाश्त इक बारे गिराँज़ोफ़ से लरज़ी हुई सारे बदन की झुर्रियाँहड्डियों में तेज़ चलने से चटख़ने की सदादर्द में डूबी हुई मजरूह टख़ने की सदापाँव मिट्टी की तहों में मैल से चिकटे हु... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   6:47am 17 Mar 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
शोला हूँ धधकने की गुज़ारिश नहीं करता सच मुंह से निकल जाता है कोशिश नहीं करता गिरती हुई दीवार का हमदर्द हूँ लेकिन चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता माथे के पसीने की महक आए न जिससे वो खून मेरे जिस्म में गर्दिश नहीं करता। हम्दर्दी-ए-अहबाब से डरता हूँ ‘मुज़फ़्फ़र’ मैं ज़ख़्म तो ... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   7:28am 14 Mar 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
आप सभी को होली की शुभकामनाए इस अवसर पर नजीर अकबराबादी की एक ग़ज़ल पेश है: हां इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारी। देखें कैसी है तेरी रंगबिरंग पिचकारी।। तेरी पिचकारी की तकदीद में ऐ गुल हर सुबह। साथ ले निकले हैं सूरज की किरन पिचकारी।। जिस पे हो रंग फिशां उसको बना देती है।... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   7:22am 8 Mar 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
मै कौन हू – मेरा बाप कौन था? ये सवाल ग्वालियर के एक मुहल्ले में कुछ दशको पहले सुने थे | इन सवालो का संबोधन अधेड़ उम्र की एक महिला फातिमा जुबैर से था | वो एक स्थानीय गर्ल्स हाई स्कूल में टीचर थी, इन सवालों को पूछने वाला एक नौजवान शायर था शमीम फ़रहत... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:33pm 23 Feb 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
Blogger: Devendra Gehlod
मै कौन हू – मेरा बाप कौन था? ये सवाल ग्वालियर के एक मुहल्ले में कुछ दशको पहले सुने थे | इन सवालो का संबोधन अधेड़ उम्र की एक महिला फातिमा जुबैर से था | वो एक स्थानीय गर्ल्स हाई स्कूल में टीचर थी, इन सवालों को पूछने वाला एक नौजवान शायर था शमीम फ़रहत |फातिमा जुबैर जिनको सब फातिमा ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   8:22am 23 Feb 2012 #लेख
Blogger: Devendra Gehlod
आपने पिछली कई कड़ियों में ज़िया फतेहाबादी की गज़ले पढ़ी है आज उनके सुपूत्र रविन्दर सोनी जी की एक ग़ज़ल पेश कर रहा हू आशा है आप सभी को पसंद आएगी | सुकूँ से आशना अब तक दिल ए इनसाँ नहीं है कहूँ क्यूँ कर कि अहसास ए ग़म ए दौराँ नहीं है भरोसा अपने... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   2:21pm 4 Feb 2012 #ग़ज़ल और नज्मे
[ Prev Page ] [ Next Page ]


Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3941) कुल पोस्ट (195176)