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Blog: अनवरत

Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
‘एक लघुकथा’दिनेशराय द्विवेदीनौकरी से निकाले जाने का मुकदमा था। सरवर खाँ को जीतना ही था, उसका कोई कसूर न होते हुए भी बिना कारण नौकरी से निकाला गया था। पर फैसले का दिन धुकधुकी का होता है। सुबह सुबह जज ने सरवर खाँ के वकील को चैम्बर में बुलाया और बोला, “आप मुकदमा लड़ रहे हैं... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   6:18am 18 Aug 2020 #judgment
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
जॉर्जो आगम्बेनजॉर्जो आगम्बेनइतालवी दार्शनिक जार्जो आगम्बेन कोविड के दौर में चर्चा में रहे हैं। अकादमिया में संभवत: वे पहले व्यक्ति थे, जिसने नावेल कोरोना वायरस के अनुपातहीन भय के खिलाफ आवाज़ उठाई। कोविड से संबंधित उनकी टिप्पणियों के हिंदी अनुवादप्रमोद रंजन की शी... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   5:57pm 9 Aug 2020 #Epidemic
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
मैंने राजनीति में 1937 मे प्रदेश किया। उस समय मेरी उम्र बहुत कम थी, लेकिन चूकिं मैंने मैट्रिक की परीक्षा जल्दी पास कर ली थी, इसलिए कालेज में भी मैने बहुत जल्दी प्रवेश किया। उस समय पूना में आर एस एस और सावरकरवादी लोग एक तरफ और राष्ट्रवादी और विभिन्न समाजवादी और वामपंथी दल द... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   3:52am 3 Aug 2020 #Madhu Limaye
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
_______________ Jagadishwar Chaturvediरजनी पाम दत्त रजनी पाम दत्त का विश्व कम्युनिस्ट आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान है।उन्होंने लंबे समय तक स्वाधीनता आंदोलन के दौरान भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन में भी अग्रणी नेता के रूप में भूमिका अदा की।वे कम्युनिस्ट आंदोलन के प्रमुख सिद्धांतकार हैं।भ... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   2:43am 1 Aug 2020 #Marxism
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
डर और अपराधबोध के उपकरणों के माध्यम से जनता के साथ खेल खेलना शासकों और धर्माचार्यों का पुराना आजमाया तरीक़ा रहा है। जब यह चरम सीमा तक पहुंच जाता है तो जनता पर सबसे ज्यादा चोट की जाती है। यहां तक कि कम्युनिस्ट और खुद को शातिर समझने वाले लोग भी इस खेल में शामिल हो कर इसे अं... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   3:30am 19 Jul 2020 #Epidemic
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
बाबूजीपंचायत समिति में स्कूल इंस्पेक्टर हुए तो उन्हें गाँवों के स्कूलों का निरीक्षण करने जाना पड़ता था। वहाँ जाने के लिए साइकिल, मोटर साइकिल और जीप ही साधन थे। सरकार ने तो कुछ उपलब्ध नहीं करा रखा था। बस भत्ता दे दिया करती थी। बाबूजी ने तब तक खुद कभी साइकिल तक नहीं चलाई ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   6:33am 3 Jun 2020 #सायकिल
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
जिन सड़कों पर हम चलेजिन पर चलते हुएकुचले गए भारी वाहनों सेउन सड़कों से पहलेकुछ और था वहाँगाड़ियों के चलने से बनी गडारउस से भी पहलेवहाँ थी पगडण्डियाँजिन्हें बनाया थाइन्सान के पैरों की छाप नेतो सड़कें आयींबहुत बाद मेंवे इन्सान के चलने सेधरती पर पड़े निशानों कीतीसरी ... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   2:26pm 23 May 2020 #
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
जिन सड़कों पर हम चलेजिन पर चलते हुएकुचले गए भारी वाहनों सेउन सड़कों से पहलेकुछ और था वहाँगाड़ियों के चलने से बनी गडारउस से भी पहलेवहाँ थी पगडण्डियाँजिन्हें बनाया थाइन्सान के पैरों की छाप नेतो सड़कें आयींबहुत बाद मेंवे इन्सान के चलने सेधरती पर पड़े निशानों कीतीसरी ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   2:26pm 23 May 2020 #
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
एनडीटीवी इंडियाके डिजिटल एडिटर विवेक रस्तोगी का एक साक्षात्कार समाचार मीडिया डॉट कॉम ने प्रकाशित किया हैइस में उन्होंने फेक न्यूज'के बारे में पूछे गए प्रश्न कि, "फेक न्यूज का मुद्दा इन दिनों काफी गरमा रहा है। खासकर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज की ज्... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   3:30am 20 May 2020 #Media
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
मेरा मुवक्किल जसबीर सिंह अपने ऑटो में स्टेशन से सवारी ले कर अदालत तक आया था। अपने मुकदमे की तारीख पता करने के लिए मेरे पास आ गया। उसका फैक्ट्री से नौकरी से निकाले जाने का मुकदमा मैं लड़ रहा था। जब वो आया तब मैं टाइपिस्ट के पास बैठ कर डिक्टेशन दे रहा था। मुझे व्यस्त देख कर... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   3:49am 16 May 2020 #short short story
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
पता नहींदोनों क्या कर रहे थे। लेकिन पर फड़फड़ाने की आवाजें बहुत जोर की थीं। फिर एक-एक कर तिनके गिरना शुरु हुए। मैं वहाँ से चला आया। कुछ देर बाद शोभा ने आ कर बताया कि उन्हों ने अपना घर गिरा कर नष्ट कर दिया है। मैं ने जा कर देखा तो सारी बालकनी में कबूतर का घोंसला गिरा पड़ा था... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   11:28pm 14 May 2020 #जीवन
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
पिछलेचार-पाँच दिनों से जिस तरह की रिपोर्टें आ रही हैं उन से लग रहा था कि भारत में 75-80 प्रतिशत कोरोना संक्रमित ऐसे हैं जिनमें कोई लक्षण ही नहीं नजर आ रहे हैं। वे समाज में खुले घूम रहे हैं और निश्चित ही अनेक को संक्रमित भी कर रहे हैं। इस पर कल ही लिखना चाहता था, पर अधिकारिक नि... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   7:06am 21 Apr 2020 #Epidemic
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
डाक्टर भीमराव अम्बेडकर ने देश के दलित, आदिवासी और निम्न जातियों के उत्पीड़न के हिन्दू (सनातन) धर्म के आधारों को खुल कर लोगों के सामने रखा और उसके विरुद्ध दलितों को एकजुट हो कर उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष के लिए तैयार किया। यहाँ तक कि उन्होंने हजारों लोगों के साथ हिन्दू ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   3:30am 14 Apr 2020 #अम्बेडकर
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
कल रात 10:45 पर सोने जा रहा था। उत्तमार्ध शोभा सो चुकी थी। मैं शयन कक्ष में गया, बत्ती जलाई। पानी पिया और जैसे ही बत्ती बन्द की, कमबख्त   पंखा भी बन्द हो गया। गर्मी से अर्धनिद्रित उत्तमार्ध को बोला -पंखा बन्द हो गया है। मुझे जवाब मिला - मैने पहले ही कहा था, बिजली मिस्त्री को ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   11:27am 26 Mar 2020 #Lock-down
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
उम्र का 14वाँ साल था। नाक और ऊपरी होठ के बीच रोआँली का कालापन नजर आने लगा था। एक दम सुचिक्कन चेहरे पर काले बालों वाली रोआँली देख कर अजीब सा लगने लगा था। समझ नहीं आ रहा था कि इस का क्या किया जाए। स्कूल में लड़के मज़ाक बनाने लगे थे कि मर्दानगी फूटने लगी है, अब लड़कियाँ फ़िदा ह... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   8:24am 25 Mar 2020 #Essay
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
धरती परकर्क रेखा के आसपास एक देश था। उस देश के लोगों के पास एक बहुत पुरानी  किताब थी। जिसकी भाषा उनके लिए अनजान थी। वह उनके पूर्वजों की भाषा रही होगी। वे ऐसा ही मानते थे। उस किताब की लिपि तो वही थी जो वे इस्तेमाल करते थे। किताबो को वे पढ़ तो सकते थे, लेकिन समझ नहीं सकते थे... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   2:37am 23 Mar 2020 #short short story
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
ˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍ दिनेशराय द्विवेदीअफगानिस्तान,बमबारी में ज़ख्मी बच्चाभर्ती है अस्पताल मेंडाक्टर उसका हाथ बचाना चाहते थेपर असफल रहेबच्चे से कहातुम्हारा हाथ काटना पड़ेगाऐसे ही जिन्दा रहा जा सकता हैबच्चा बोला मैं जिन्दा रहना चाहता हूँडॉक्टर मेरा हाथ काट दीजिये, परपर, मेर... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   4:06am 22 Mar 2020 #
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
_________ दिनेशराय द्विवेदीएक तरह के लोग सोचते हैं-कोई है जिसने दुनिया बनाईफिर दुनिया चलाईवही है जो दुनिया चला रहा हैवे उसे ईश्वर कहते हैं।दूसरी तरह के लोग सोचते हैं-ऐसा कोई नहीं जो दुनिया बनाए और उसे चलाएदुनिया तो खुद-ब-खुद हैहमेशा से और हमेशा के लिएवह चलती भी खुद-ब-खुद ह... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   3:40am 22 Mar 2020 #Philosophy
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
'भँवर म्हाने पूजण दो गणगौर'यहउस लोक गीत का मुखड़ा है जो होली के अगले दिन से ही राजस्थान भर में गाया जा रहा है। राजस्थान में वसंत के बीतते ही भयंकर ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो जाता है। आग बरसाता हुआ सूरज, कलेजे को छलनी कर देने और तन का जल सोख लेने वाली तेज लू के तेज थपेड़े बस आने ह... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   3:57am 21 Mar 2020 #virus
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
अदालतों मेंलगभग पूरा ही लॉक डाउन हो गया है। 31 मार्च तक कोर्ट जाने का कोई मतलब नहीं रहा। आज मेरा सहायक शिव प्रताप यादव अदालत गया था। आज बहुत सारे मुकदमे कलेक्ट्री आदि में थे। जिनकी अगली तारीख वेबसाइट पर अपलोड नहीं होती। उसे कलेक्ट्री परिसर में प्रवेश करने में परेशानी आ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   2:01am 21 Mar 2020 #
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
17 मार्चतक अदालत में कामकाज सामान्य था। 18 को जब अदालत गया तो हाईकोर्ट का हुकम आ चुका था, केवल अर्जेंट काम होंगे। अदालत परिसर को सेनीटाइज करने और हर अदालत में सेनीटाइजर और हाथ धोने को साबुन का इन्तजाम करने को कहा गया था, वो नदारद था। काम न होने से हम मध्यान्ह की चाय के लिए 1.30 ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   3:36am 20 Mar 2020 #Death
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
दुखते हुए जख्मों पर हवा कौन करे,इस हाल में जीने की दुआ कौन करे,बीमार है जब खुद ही हकीमाने वतन,तेरे इन मरीजों की दवा कौन करे ... किस शायर की पंक्तियाँ हैं ये, पता नहीं लग रहा है। पर जिसने भी लिखी होंगी, जरूर वह जख्मी भी रहा होगा और मुल्क के हालात से परेशान भी। आज भी हालात कमोब... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   5:55am 15 Mar 2020 #जनता
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
मानमेराज के घराने का नित्य का आहार था, जिसे वह मंडी में एक खास दुकान से लाता था। कभी वह मंडी की सब से बड़ी दुकान हुआ करती थी। उसका बाप भी उसी दुकान से लाता था। ऐसा नहीं कि मान केवल उसी दुकान पर मिलता हो। मंडी में और भी दुकानें थीं। उसकी बुआएँ दूसरी जगह से मान लेती थीं। बाप म... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   4:04am 13 Mar 2020 #politics
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
तरह-तरह के दिवस मनाना भी अब एक रवायत हो चली है। हमारे सामने एक दिन का नामकरण करके डाल दिया जाता है और हम उसे मनाने लगते हैं। दिन निकल जाता है। कुछ दिन बाद कोई अन्य दिन, कोई दूसरा नाम लेकर हमारे सामने धकेल दिया जाता है। कल सारी दुनिया स्त्री-दिवस मना रही थी। इसी महिने की आखि... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   2:48am 9 Mar 2020 #Equality
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
न्याय की स्थिति बहुत बुरी है। विशेष रुप से मजदूर वर्ग के लिए। आज मेरी कार्यसूची में दो मुकदमे अंतिम बहस के लिए थे। इन दोनों मामलों में प्रार्थी मजदूर हैं, जिनके मुकदमे 2008 से अदालत में लंबित हैं। हालाँकि श्रम न्यायालय में जाने के पहले इन मजदूरों ने श्रम विभाग में अपनी शि... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   1:35pm 5 Mar 2020 #Labour
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