POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: अनवरत

Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
कल रात 10:45 पर सोने जा रहा था। उत्तमार्ध शोभा सो चुकी थी। मैं शयन कक्ष में गया, बत्ती जलाई। पानी पिया और जैसे ही बत्ती बन्द की, कमबख्त   पंखा भी बन्द हो गया। गर्मी से अर्धनिद्रित उत्तमार्ध को बोला -पंखा बन्द हो गया है। मुझे जवाब मिला - मैने पहले ही कहा था, बिजली मिस्त्री को ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   11:27am 26 Mar 2020 #Lock-down
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
उम्र का 14वाँ साल था। नाक और ऊपरी होठ के बीच रोआँली का कालापन नजर आने लगा था। एक दम सुचिक्कन चेहरे पर काले बालों वाली रोआँली देख कर अजीब सा लगने लगा था। समझ नहीं आ रहा था कि इस का क्या किया जाए। स्कूल में लड़के मज़ाक बनाने लगे थे कि मर्दानगी फूटने लगी है, अब लड़कियाँ फ़िदा ह... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   8:24am 25 Mar 2020 #Essay
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
धरती परकर्क रेखा के आसपास एक देश था। उस देश के लोगों के पास एक बहुत पुरानी  किताब थी। जिसकी भाषा उनके लिए अनजान थी। वह उनके पूर्वजों की भाषा रही होगी। वे ऐसा ही मानते थे। उस किताब की लिपि तो वही थी जो वे इस्तेमाल करते थे। किताबो को वे पढ़ तो सकते थे, लेकिन समझ नहीं सकते थे... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   2:37am 23 Mar 2020 #short short story
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
ˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍ दिनेशराय द्विवेदीअफगानिस्तान,बमबारी में ज़ख्मी बच्चाभर्ती है अस्पताल मेंडाक्टर उसका हाथ बचाना चाहते थेपर असफल रहेबच्चे से कहातुम्हारा हाथ काटना पड़ेगाऐसे ही जिन्दा रहा जा सकता हैबच्चा बोला मैं जिन्दा रहना चाहता हूँडॉक्टर मेरा हाथ काट दीजिये, परपर, मेर... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   4:06am 22 Mar 2020 #
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
_________ दिनेशराय द्विवेदीएक तरह के लोग सोचते हैं-कोई है जिसने दुनिया बनाईफिर दुनिया चलाईवही है जो दुनिया चला रहा हैवे उसे ईश्वर कहते हैं।दूसरी तरह के लोग सोचते हैं-ऐसा कोई नहीं जो दुनिया बनाए और उसे चलाएदुनिया तो खुद-ब-खुद हैहमेशा से और हमेशा के लिएवह चलती भी खुद-ब-खुद ह... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   3:40am 22 Mar 2020 #Philosophy
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
'भँवर म्हाने पूजण दो गणगौर'यहउस लोक गीत का मुखड़ा है जो होली के अगले दिन से ही राजस्थान भर में गाया जा रहा है। राजस्थान में वसंत के बीतते ही भयंकर ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो जाता है। आग बरसाता हुआ सूरज, कलेजे को छलनी कर देने और तन का जल सोख लेने वाली तेज लू के तेज थपेड़े बस आने ह... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   3:57am 21 Mar 2020 #virus
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
अदालतों मेंलगभग पूरा ही लॉक डाउन हो गया है। 31 मार्च तक कोर्ट जाने का कोई मतलब नहीं रहा। आज मेरा सहायक शिव प्रताप यादव अदालत गया था। आज बहुत सारे मुकदमे कलेक्ट्री आदि में थे। जिनकी अगली तारीख वेबसाइट पर अपलोड नहीं होती। उसे कलेक्ट्री परिसर में प्रवेश करने में परेशानी आ... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   2:01am 21 Mar 2020 #
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
17 मार्चतक अदालत में कामकाज सामान्य था। 18 को जब अदालत गया तो हाईकोर्ट का हुकम आ चुका था, केवल अर्जेंट काम होंगे। अदालत परिसर को सेनीटाइज करने और हर अदालत में सेनीटाइजर और हाथ धोने को साबुन का इन्तजाम करने को कहा गया था, वो नदारद था। काम न होने से हम मध्यान्ह की चाय के लिए 1.30 ... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   3:36am 20 Mar 2020 #Death
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
दुखते हुए जख्मों पर हवा कौन करे,इस हाल में जीने की दुआ कौन करे,बीमार है जब खुद ही हकीमाने वतन,तेरे इन मरीजों की दवा कौन करे ... किस शायर की पंक्तियाँ हैं ये, पता नहीं लग रहा है। पर जिसने भी लिखी होंगी, जरूर वह जख्मी भी रहा होगा और मुल्क के हालात से परेशान भी। आज भी हालात कमोब... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   5:55am 15 Mar 2020 #जनता
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
मानमेराज के घराने का नित्य का आहार था, जिसे वह मंडी में एक खास दुकान से लाता था। कभी वह मंडी की सब से बड़ी दुकान हुआ करती थी। उसका बाप भी उसी दुकान से लाता था। ऐसा नहीं कि मान केवल उसी दुकान पर मिलता हो। मंडी में और भी दुकानें थीं। उसकी बुआएँ दूसरी जगह से मान लेती थीं। बाप म... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   4:04am 13 Mar 2020 #politics
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
तरह-तरह के दिवस मनाना भी अब एक रवायत हो चली है। हमारे सामने एक दिन का नामकरण करके डाल दिया जाता है और हम उसे मनाने लगते हैं। दिन निकल जाता है। कुछ दिन बाद कोई अन्य दिन, कोई दूसरा नाम लेकर हमारे सामने धकेल दिया जाता है। कल सारी दुनिया स्त्री-दिवस मना रही थी। इसी महिने की आखि... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   2:48am 9 Mar 2020 #Equality
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
न्याय की स्थिति बहुत बुरी है। विशेष रुप से मजदूर वर्ग के लिए। आज मेरी कार्यसूची में दो मुकदमे अंतिम बहस के लिए थे। इन दोनों मामलों में प्रार्थी मजदूर हैं, जिनके मुकदमे 2008 से अदालत में लंबित हैं। हालाँकि श्रम न्यायालय में जाने के पहले इन मजदूरों ने श्रम विभाग में अपनी शि... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   1:35pm 5 Mar 2020 #Labour
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
अमूल्या लियोना गुनहगार है या नहीं, इसे अदालत तय करेगी। अदालत कहे कि वह गुनहगार नहीं तो उसे गुनहगार बताने वाले बड़ी अदालत जाएंगे। वहाँ भी वह गुनहगार न ठहरे तो उससे बड़ी अदालत जाएंगे। वहाँ भी नहीं तो सबसे बड़ी अदालत जाएंगे।पर अदालत का इंतजार क्यों करें? वे तो तुरन्त उसक... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   4:14am 23 Feb 2020 #Freedom of speech
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
राष्ट्र कभी वास्तविक नहीं होता। वह एक काल्पनिक अवधारणा है।यही कारण है कि किसी कानून में और कानून की किताबों में राष्ट्रद्रोह नाम का कोई अपराध वर्णित नहीं है।कानून में राजद्रोह नाम का अपराध मिलता है। जिस का उपयोग सिर्फ सबसे खराब राजा विरोध के स्वरों को दबाने के लिए क... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   4:08am 23 Feb 2020 #राजद्रोह
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
आक्सफेम की ताजा रपट कतई आश्चर्यजनक नहीं है। इस ने आंकड़ों के माध्यम से बताया है कि भारत के एक प्रतिशत अमीरों के पास देश के 70 प्रतिशत लोगों से चार गुना अधिक धन-संपदा है। सारी दुनिया की स्थिति इस से बेहतर नहीं है। दुनिया के 1 प्रतिशत लोगों के पास दुनिया के 92 प्रतिशत की संपत... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   10:49am 22 Jan 2020 #पूंजीपति
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
सबसे बुरा तब लगता है जब जज की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति अपने इजलास में किसी मजदूर से कहता है कि "फैक्ट्रियाँ तुम जैसे मजदूरों के कारण बन्द हुई हैं या हो रही हैं"।40 साल से अधिक की वकालत में अनगिन मौके आए जब यह बात जज की कुर्सी से मेरे कान में पड़ी। हर बार मेरे कानों से गुजर कर म... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   2:00am 8 Sep 2019 #Fudal System
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
"वैज्ञानिक भौतिकवाद"राहुल सांकृत्यायन की महत्वपूर्ण पुस्तक है, उस में भौतिकवाद को समझाते हुए राहुल जी ने भाववादी दर्शनों की जो आलोचना की है वह पढ़ने योग्य है, इस में ज्ञान के साथ साथ हमें भाषा के सौंदर्य का भी आनन्द प्राप्त होता है और व्यंग्य की धार भी। यहाँ इस पुस्त... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   1:49am 6 Sep 2019 #Rahul Sankrityayan
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
- प्रेमचन्द राष्ट्रीयता वर्तमान युग का कोढ़ है. उसी तरह जैसे मध्यकालीन युग का कोढ़ साम्प्रदायिकता थी. नतीजा - दोनों का एक है. साम्प्रदायिकता अपने घेरे के अन्दर पूर्ण शक्ति और सुख का राज्य स्थापित कर देना चाहती थी, मगर उस घेरे के बाहर जो संसार था, उसको नोंचने-खसोटने मे... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   12:40am 28 Aug 2019 #Munshi Premchand
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
वकालतमें 40 साल से ऊपर हो गए हैं। कॉलेज छोड़े भी लगभग इतना ही अरसा हो गया। वकालत के शुरू में हाथ से बहुत लिखा। उस वक्त तो दरख्वास्तें और दावे भी हाथ से लिखे जा रहे थे। टाइप की मशीनें आ चुकी थीं। फिर भी हाथ से लिखने का काम बहुत होता था। मैं टाइप कराने के पहले दावे हाथ से लिखता... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   11:57am 20 Jul 2019 #बेहतर लेखन
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
पोक्सोकी विशेष अदालत में (Protection of Children from Sexual Offences Act – POCSO) बच्चों का यौन अपराधों से बचाव अधिनियम में म.प्र. के झाबुआ जिले के एक आदिवासी भील नौजवान के विरुद्ध मुकदमा चल रहा है। उस पर आरोप है कि वह एक आदिवासी भील नाबालिग लड़की को भगा ले गया और उस के साथ यौन संबंध स्थापित किए। चूंकि म... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   7:56am 22 Jun 2019 #Justice
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
21 अक्टूबर, 1928 को ‘नवजीवन’ में गांधीजी ने लिखा - ‘बोल्शेविज्म को जो कुछ थोड़ा-बहुत मैं समझ सका हूं वह यही कि निजी मिल्कियत किसी के पास नहीं हो— प्राचीन भाषा में कहें तो व्यक्तिगत परिग्रह न हो। यह बात यदि सभी लोग अपनी इच्छा से कर लें, तब तो इसके जैसा कल्याणकारी काम दूसरा नही... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   5:57am 25 May 2019 #समाजवाद
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
परसों 16 मई को दोपहर कोर्ट से वापस आने के बाद लंच लिया। मेरा सहायक शिवप्रताप कार्यालय का काम निपटा रहा था। मुझे याद आया कि साल भर के लिए गेहूँ के बैग खरीदे सप्ताह भर हो गया है, उन्हें अभी तक खोल कर स्टोरेज में नहीं डाला है। शिव के निपटते ही मैं ने उसे कहा- तुम मदद कर दो। मैं न... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   12:52pm 18 May 2019 #Exposer
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
बचपन में परिवार और समाज का वातावरण पूरी तरह भाववादी था। उस वातावरण में एक ईश्वर था जिस ने इस सारे जगत का निर्माण किया था। जैसे यह जगत जगत नहीं था बल्कि कोई खिलौना था जो किसी बच्चे ने अपने मनोरंजन के लिए बनाया हो। वह अपनी इच्छा से उसे तोड़ता-मरोड़ता, बनाता-बिगाड़ता रहता द... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   6:27pm 21 Feb 2019 #Play
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
दिसंबर के आखिरी सप्ताह अवकाश का होता है, मन यह रहता है कि इस सप्ताह कम से कम पाँच दिन बाहर अपनी उत्तमार्ध शोभा के साथ यात्रा पर रहा जाए। इस बार भी ऐसा ही सोचा हुआ था। लेकिन संभव नहीं हुआ। केवल एक दिन के लिए अपने शहर से महज 100 किलोमीटर दूर रामगढ़ क्रेटर की यात्रा हुई। यात्रा ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   7:24pm 10 Jan 2019 #गोर्की
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी
व्लादिमीर इल्यीच लेनिन ने 2005 में कम्युनिस्ट पार्टी और धर्म के बारे में एक छोटा आलेख लिखा था जो नोवाया झिज्न के अंक 28 में 3 दिसंबर, 1905 को प्रकाशित हुआ था। यह धर्म के बारे में कम्युनिस्ट पार्टी की नीति क्या होनी चाहिए इसे स्पष्ट करता है और एक महत्वपूर्ण आलेख है। वर्तमान स... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   11:11am 23 Nov 2018 #Lenin
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3950) कुल पोस्ट (195984)