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My Poems/मेरी रचनाएँ : View Blog Posts
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My Poems/मेरी रचनाएँ

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My Poems/मेरी रचनाएँ...
Tag :
  September 7, 2012, 5:56 pm
हम तो भ्रष्टों केदीवाने                                                        हम तो भ्रष्टों के दीवाने                         चाहे अपने या बेगाने !!भ्रष्टों से माथा पच्ची कर हाथ नहीं आखिर कुछ आना   बेमतलब ही गला फाड़ना बहरों के आगे चिल्लाना                             ये हैं चिकने घड़े न इनको ...
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  September 3, 2012, 4:58 pm
दफ्तर का खेल दिखाता हूँ दफ्तर का खेल दिखाता हूँ तुमको सबसे मिलवाता हूँये रजनी कान्त ब्रह्मचारी इनके ऊपर शनि है भारी ये कुढ़ते रहते हैं दिन भर कुछ गुनते रहते हैं दिन भर आते हैं दफ्तर सोने को जीवन की समस्या रोने को शादी है अब तक हुई नहीं कहते हैं लडकी छुई नहीं ये ढूंढ रहे ...
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  September 3, 2012, 3:26 pm
यू पी की होलीहोली खेल रहे हैं नेता मार रहे पिचकारी किसी के घर है मातम पसरा किसी के घर किलकारीगाय बछेरू खुले घूमते ग्वाले जश्न मनातेजीत के रंग में सराबोर हो घूँट पे घूँट लगातेभगवा ध्वज है धूल चाटता भजता कृष्ण मुरारी ................ कोई राग- रंग में डूबा कोई गम में पीतावोटर घर में...
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  March 7, 2012, 1:41 pm
तो हम क्या करेंमुफ्त में मिल जाये जो सामान तो हम क्या करें हो रहे जो आप हालाकान  तो हम क्या करेंअपनी अपनी हैसियत से लूटने में सब जुटे आप कहते सिरफिरा इंसान तो हम  क्या करें********************************अख़बारों में नाम छपाना चाहें हमअवसर आया हाथ भुनाना चाहें हम हमको देश की क्या ये जाये र...
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  January 18, 2012, 2:12 pm
                                इलेक्शनआया समय इलेक्शन का जब तब तू  आया  हाथ पसारे चिट्ठी तार बिना भेजे तू आज अचानक आ धमका रेकैसी बुझी बुझी है सूरत कैसा दिखता लुटा पिटा तू क्षेत्र नहीं चमकाया तो क्या चेहरा तो चमका लेता रे !...
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  January 10, 2012, 4:52 pm
गुलाबआया हूँ दूर से आपको उपहार देने इसको स्वीकार करें मेरी इस तुच्छ भेंट को न इंकार करें .तोड़ा था मैंने जबइनको उद्यान सेये भी सुरभित थे  ताजे मनमोहक थेबगिया के रौनक  थेठीक तुम्हारे सदृश ये भी इठलाते थेअल्हड़ बल खाते थेहलके से झोंके पर भीअलकें लहराते थे.पर ये गुलाब ह...
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  November 2, 2011, 2:21 pm
राजभाषा समारोहमैंने सोचा कि मै भी एक कविता बनाऊं और चलकर उसे अपने कार्यालय के राजभाषा समारोह में सुनाऊं सो मैंने कल रात ये कविता लिखी पर मुझे हर शब्द में केवल तू ही दिखी और मै फिर बड़े जोर-शोर से शब्दों को तराशने लगा एक एक हर्फ़ में तुझे उतारने लगा ये सोचकर कि इससे तू और ज...
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  September 19, 2011, 12:56 pm
तुम अनशन कर मरोतुम अनशन कर मरो तुम्हारे साथ रहेंगे हम बाबापुलिस का घूसा-लात तुम्हारे साथ सहेंगे हम बाबाआंधी हो तूफ़ान हो तपती धूप हो या फिर बारिश बिना टेंट विश्राम तुम्हारे साथ करेंगे हम बाबा. इतने दिन जी लिए बहुत इस देह का क्या अब करना इस नश्वर संसार में बाबा सबको एक दि...
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  September 16, 2011, 3:15 pm
हम तो भ्रष्टों के दीवाने हम तो भ्रष्टों के दीवाने अपने ये जाने पहचाने !!भ्रष्टों से माथा पच्ची कर हाथ नहीं आखिर कुछ आना बेमतलब ही गला फाड़ना बहरों के आगे चिल्लानाये हैं चिकने घड़े न इनको हया तनिक है आनीबड़े बड़े दिग्गज इनके आगे भरते हैं पानी बिना डकारे निगल जाएँ ये देश क...
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  August 23, 2011, 5:02 pm
अगर तू मुझे न मिली होती कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है कि अगर तू मुझे न मिली होती तो क्या होता न मेरी तुझसे शादी होती न मैं रोता तू किसी और को ब्याही जाती और मैं चैन से सोता मगर ये हो न सका. मगर ये हो न सका और अब ये आलम है कि तू तो है पर मैं नहीं हूँ तेरे माँ-बाप हैं मेरे नहीं ...
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  August 23, 2011, 2:48 pm
अब बचा ही क्या जो बोलें हम अब बचा ही क्या जो बोलें हमक्यों ज़हर हवा में घोलें हम .नक्सलियों की मारी जनताबेहाल घूमती फटेहालसबकी अपनी- अपनी डफलीसबके हैं अपने अलग तालसुननेवाला कोई भी नहींदुःख जितना चाहे रो लें हमअब बचा ही क्या जो बोलें हम नेता जब-तब मुंह खोल रहेजो आता मन म...
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  September 15, 2010, 4:03 pm
सोचता हूँ कि तुमसे मिल के सारी बात कहूँदिल के राज कहूँ, मन के ख़यालात कहूँकि कैसे-कैसे लोग फ़िकरे मुझपर कसते हैंझेलता हूँ जिन्हें मुश्किल से वो हालात कहूँ...
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  September 13, 2010, 1:57 pm
हमारी बातों को तुम यूँ हंसी में टाल देते होमेरे टूटे पैमाने में भी मदिरा ढाल देते होछलकने भी नहीं देते हो मेरी आँख से आंसूक्यों अपनी आँख से तुम मेरे दिल का हाल देते हो...
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  September 13, 2010, 1:50 pm
उनको हमारी बात का ऐतबार ही नहींकहते हैं कि ये प्यार मेरा प्यार ही नहींअब क्या करूँ कि मुझपर उनको यकीन हो मेरा तो उनके दिल पर अख्तियार ही नहीं...
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  September 13, 2010, 1:35 pm
अगर तू मुझे न मिली होती कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है कि अगर तू मुझे न मिली होती तो क्या होता. न मेरी तुझसे शादी होती न मैं रोता तू किसी और को ब्याही जाती और मैं चैन से सोता. मगर ये हो न सका. मगर ये हो न सका और अब ये आलम है कि तू तो है पर मैं नहीं हूँ तेरे माँ-बाप हैं मेरे नहीं ...
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  September 10, 2010, 5:49 pm
इस प्रेत से मुझे बचा लोएक बात पूछूंबुरा तो नहीं मानोगेसच बताओरुदन तो नहीं ठानोगेतुम जब कहते होमर कर भी तुमको चाहूँगातो मन में क्या विचार आता हैआदमी मरकर आखिर कहाँ जाता हैस्वर्ग या नरकया फिर कहीं औरतुम्हें कहाँ मिलेगा ठौरअब कोई कहे या न कहेस्वर्ग तो तुम जाने से रहेनर...
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  September 5, 2010, 10:59 am
हम तुम्हारे लिए तुम हमारे लिएहम तुम्हारे लिए तुम हमारे लिए बातें करती नहीं तू अघाती प्रियेसात जन्मों का नाता बताती बहुत तो अभी साथ क्यों न निभाती प्रियेथे गए तुम कहाँ, थे कहाँ अब तलक, प्रश्न करके मेरा सिर क्यों खाती प्रियेमुझको ये चाहिए, मुझको वो चाहिए करके बाज़ार घर को ...
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  September 5, 2010, 10:36 am
हम तुम्हारी याद मेंहमतुम्हारीयादमेंकुछइसतरहथेखोगएध्यानहीआयानहींकिकबतुम्हारेहोगएजिनपरअपनेसेअधिकऐतबारहमनेथाकियावेहीसबएहबाबअपनीराहकांटेबोगए...
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  September 3, 2010, 4:39 pm
तुम हमारे होतुम हमारे होजान से प्यारे होमैं बहती नदी हूँतुम उसके किनारे होमैं चाँद हूँतुमसितारे होसारे जहाँ में तुमसबसे न्यारे होये सब सही हैपर कब तक?जब तक क्वाँरे हो...
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Tag :
  September 1, 2010, 6:11 pm
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