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Blog: गिरीश पंकज

Blogger: गिरीश पंकज
इस बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार अमरीकी गीतकार और गायक बॉब डिलेन को मिला, यह खबर सकून देने वाली है, इसलिए कि दुनिया में गीत प्रतिष्ठित हुआ है। गीत के प्रति कुछ लोगों की तथाकथित आधुनिक-दृष्ठि अलगाववादी है. छंदमुक्त कविता के दौर में गीत को हाशिये पर डाला गया, जबकि गीत हमा... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   1:34pm 14 Oct 2016 #
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दाना मांझी,तुम्हारे कंधे पर पत्नी का शव नहीं मर चुके समाज की लाश है। पत्नी की आत्मा तो सिधार गई परलोक किन्तु कंधे पर छोड़ गई समाज का वो चेहरा जो बताता है कि सम्वेदना अब केवल सोशल मीडिया में विमर्श की चीज भर है। शव को चार कन्धे भी नहीं मिलते जब तक आत्मा को झकझोरा न जाए।काला... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   12:31pm 26 Aug 2016 #
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'साक्षी''ने देश का दिल जीत लिया। बेटी ने वो काम किया जो बेटे न कर पाए. बेटियों को समर्पित एक रचनासुंदर है, दुलारी हैं, मधुबन हैं बेटियाँमहका रही है आँगन चन्दन हैं बेटियाँ'साक्षी मलिक'नहीं ये उपहार देश काबोलेंगे हम समूचा गुलशन है बेटियाँइनको जतन से रखिए इनको संवारिएवरदान... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   3:37pm 18 Aug 2016 #
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---------------------------------------------------------अनामी शरण बबल युवा भी हैं और वरिष्ठ पत्रकार भी। अनेक महत्वपूर्ण अखबारों में वे काम कर चुके हैं। अपनी महत्वपूर्ण पत्रिका का प्रकाशन भी कर रहे हैं। फेसबुक के माध्यम से वे मुझसे और अधिक गहरे तक जुड़ गए हैं। उनके मन में मेरी रचनात्मकता के प्रति काफी आ... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   6:43pm 24 May 2016 #
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पानी से जब बाहर आईइक मछली कित्ता पछताईपानी से जब दूर हुई तो मछली तूने जान गँवाईमछली बच गई मगरमच्छ से इंसानों से ना बच पाईहै शिकार पर बैठी दुनिया मछली बात समझ न पाईस्वाद की मारी इस दुनिया मेंमछली ज़्यादा जी ना पाईसावधान रहना तू मछली जाल बिछा बैठे हरजाईनदी तेरा घर है ओ मछल... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   2:38pm 23 May 2016 #
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 चाहे कह लो तुम 'मदर', या 'माता'सब एक। हो चाहे जिस देश की, माँ है मतलब नेक।।एक दिवस काफी नहीं, हर दिन माँ का होय. जिसको माँ का सुख नहीं, वह जीवन भर रोय।।उसका है आँचल बड़ा, जिसमे विश्व समाय।दुःख भागे जब माँ कभी, हमको गले लगाय।।धरती से भी है बड़ा, माँ का हृदय विशाल। अपने हिस्से क... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   11:49am 8 May 2016 #
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जिस देश में हो श्रम का वंदन, उस देश में ही उजियारा है .आदर हो उन सब लोगों का, जिनने यह जगत संवारा है.मजदूर न होते दुनिया में, निर्माण न कोई कर पाते.ये भवन, नदी, तालाब, सड़क, कैसे इनको हम गढ़ पाते ?श्रमवीरों के बलबूते ही, अपना ये वैभव सारा है .जिस देश में हो श्रम का वंदन हो, उस द... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   4:29am 1 May 2016 #
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भयंकर गर्मी और जल संकट. यह सिलसिला बढ़ता जा रहा है. आज नहीं चेते तो भविष्य प्यासा मरने के विवश होगा. वर्तमान समय की जल-त्रासदी पर एक गीत।नीर भरी रहती थी नदिया, लेकिन अब खुद प्यासी है। देख कंठ प्यासे लोगों के,मन में बड़ी उदासी है।हरी-भरी धरती को हमने, लूट लिया बन कर ज्ञानी। सू... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   5:05pm 30 Apr 2016 #
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अंबेडकर चालीसा।। दोहा ।।अठारह सौ इक्यानवे, वर्ष हो गया धन्य।दिन चौदह अप्रैल को, जन्मा लाल अनन्य।।'बाबा साहब'नाम था, दलितों का भगवान।जिनके चिंतन से बना, भारत देश महान।।।। चौपाई ।।महू की धरती धन्य कहाई, हर्षित हो गई 'भीमाबाई'। 1घर में आया लाल मनोहर, बना बाद में विश्व धरोहर... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:11am 14 Apr 2016 #
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झांसे का दूसरा नाम बजटगिरीश पंकज वित्त मंत्री उस जीव को कहते हैं जो अपने चित्त से बजट पेश करके जनता को चित कर देता है. जिसके कारण जनता पित्त रोग से परेशान हो जाती है. शरीर को खुजाने लगती है. देश की जनता महंगाई  नामक डायन से पहले से ही डरी होती है, पर जैसे ही बजट ... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   5:39am 2 Mar 2016 #
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1विरोध का ये भयानक हिंसक तरीका है किकिसी के चेहरे पर उड़ेल दो तेज़ाब फूंक दो घर किसी का / सबक सिखाने के नाम पर माँ-बहिनों के साथ करते रहो दुराचार एक बेहद निर्लज्ज समय में जीते हुए डर लगता है कि न जाने कब कौन हमारे लिए दे दे किसी को सुपारी सिर्फ इसलिए कि हम उनके साथ ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   12:59pm 25 Feb 2016 #
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बाहर के दुश्मन से लड़ लें या घर के गद्दारों से हम तो घिरे हुए है अब तो कदम-कदम हत्यारों सेदेशप्रेम की बाते मत कर लोग यहाँ पर हँसते हैं रोज सामना होता है अब कुछ सनकी बीमारों सेकौन है असली, कौन है नकली देशभक्त क्या बोलें हम पता लगाना मुश्किल है अब टीवी या अखबारों सेअगर देश को ... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   3:36pm 23 Feb 2016 #
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बहुत हो गया अब भारत में गद्दारों की खैर नहीं मानवता के दुश्मन हैं, उन हत्यारों की खैर नहीं.पापी हैं वे लोग कि जिनको देश न अपना भाता है 'भारत को हम नष्ट करेंगे', पागल ही चिल्लाता है. जिस भूमि ने हम सबको इतना सुंदर परिवेश दिया. रहो प्रेम से मिलजुल कर के संतों ने उपदेश दिया. उसी ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   2:51pm 12 Feb 2016 #
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ज्ञान - रश्मि से अंतरतम काे,जिसने दूर भगाया है।उस मां का वंदन करते हैं,जिसकी हम पर छाया है।।माता जग-कल्याणी है वाेदुख हरती, सुख भरती है।सच्चे लाेगाें के जीवन काे,वह अमृतमय करती है।उसके लिए काेई ना अपना,और न यहां पराया है।।निर्मल मन से ध्यान लगाकर,मॉ काे अगर बुलाएंगे।... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   1:02pm 11 Feb 2016 #
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मैं सीमा का इक फ़ौजी हूँ, आज हृदय को खोल रहा हूँमातृभूमि ही माता मेरी, सच्चे मन से बोल रहा हूँ.धर्म है मेरा देश की रक्षा, चाहे जान चली जाए.लेकिन मेरी माँ दुश्मन के हाथों नहीं छली जाए.मेरे देश के लोग चैन से सोएं, बस ये चाहत है ।हरदम मेरी माँ मुस्काए,जिससे मुझे महब्बत है.दुशमन क... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   3:37pm 6 Jan 2016 #
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करुणा होगी अंतर्मन में तो जीवन गुलजार मिलेगा जिस दिन सच्चा प्यार जगेगा ये सुन्दर संसार मिलेगा ।दहशत या आतंक कभी भी पाक नहीं हो सकते हैं जैसा हम बोते हैं वैसा हमको भी हर बार मिलेगाकिस मज़हब के लिए यहां कुछ पागल खून बहाते हैंछोडो तुम हथियार तुम्हे फिर वो 'सच्चा दरबार'मिले... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   3:42pm 16 Nov 2015 #
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करवा चौथ के पावन-पर्व पर संस्कृति का सम्मान करने वाली दुनिया की समस्त स्त्रियों को समर्पित त्याग है नारी, प्यार है नारी ईश्वर का उपहार है नारी पार लगाती जो दुनिया कोवो अद्भुत पतवार है नारी देह नहीं है ये नादानोहम सब पे उपकार है नारी सबका दुःख बन जाता उसकाएक ... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   5:54am 30 Oct 2015 #
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आज़ादी का मतलब ये है जन-जन को अधिकार मिलेऔर यहाँ जो कुर्सी पर है उसका सबको प्यार मिले.मगर यहाँ तो रीत है उल्टी सच पर सौ-सौ पहरे हैं किस न्यायलय में जाएं हम जख्म हमारे गहरे हैं .जिनको अपना दर्द बताओ, अनदेखा कर देता है.और हमारे अंतर्मन को पीड़ा से भर देता है. कैसा लोकतंत्र है अप... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   2:09pm 16 Aug 2015 #
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जैसे बदले रिंगटोन'वे रिश्ते भी बदले हैं वैसे।मोबाइल का सेट क़ीमती खुद को बड़ा रईस दिखाते।जो हैं बड़े लुटेरे वे सब हल्केपन से बच ना पाते. 'कवरेज'से बाहर का जीवन, धरती पर आएंगे कैसे ?सारे इंकलाब दिखते है फेसबुक और व्हाट्सऐप में,वक्त पड़े तो घुस जाते है,कहाँ न जाने किस 'गेप'में.एक... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   2:06pm 16 Aug 2015 #
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मृत्यु नहीं, यह उत्सव हैदुनिया में जो आता है इक दिन वापस जाता है .कौन रहा चिरकाल यहाँ, काल यही समझाता है. अमर आत्मा हम सबकी,प्रतिपल जैसे अभिनव है..मृत्यु नहीं, यह उत्सव हैजिसने मृत्यु को जीता,वो ही है इंसान बड़ा . वही करेगा जीवन में, सचमुच कर्म महान बड़ा.मृत्यु और क्या? जीवन का, ... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   3:22pm 3 Aug 2015 #
Blogger: गिरीश पंकज
मन क्यों डरता इस दुनिया से, जब ईश तुम्हारे अंदर है यह ज्ञान सदा समझो सच्चा, संतोषी मन ही सुन्दर है .भगवान हमें न दिख पाएं ,पर वे रहते हैं साथ सदा.हम लाख मुसीबत में आएं, मन में रक्खे विश्वास सदा.हम ध्यान करें करबद्ध रहें,वह आएगा सुखसागर है... मन क्यों डरता इस दुनिया से, जब ईश तु... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   1:57pm 4 Jul 2015 #
Blogger: गिरीश पंकज
हमको भी तो कुछ मिल जाते, खेल-खिलौने साहबजीहम निर्धन बच्चे भी देखें सपन-सलोने साहबजीआपके बच्चे सोने-चांदी हम बेशक टूटे-फूटे हैं निर्धन भी इस दुनिया के सुन्दर कोने साहबजीकिस्मत में सबकी ना होता उजियाला इस दुनिया में अगर आप चमका देंगे तो हम हैं सोने साहबजीबच्चो में भगवा... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   1:54pm 28 May 2015 #
Blogger: गिरीश पंकज
यवतमाळ जिले के किसानो के बीच रह कर लौटा हूँ . यह ''चेतना पदयात्रा ''है, जो पूरे देश में चलेगी, यवतमाळ जिले से यात्रा इसलिए शुरू हुयी कि यहाँ सर्वाधिक किसानो ने आत्महत्याएं की. एक लेखक-पत्रकार के नाते मैं यात्रा में शामिल हुआ ताकि उनकी समस्याओं को निकट से समझ सकूँ, किसानो क... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   4:29am 24 Apr 2015 #
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