POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: जीवन सन्दर्भ

Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
गीत मेरी चीख सुनेगा कौन?मैं तो बादल सा आवारा ,गाँव शहर की गलियों गलियों ,फिरता हूँ पागल ,नाकारा ,मुझको लेकर उम्मीदों के सुंदर स्वप्न बुनेगा  कौन?इस जीवन के चन्दन वन में ,कदम कदम पर सर्प मिले,अपनों को ही डंसने वाले ,अपनों के ही दर्प मिले ,अंधियारों को उजियारों का नेता रोज च... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   7:22am 25 Jun 2013 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
टूटता है मन,मनोबल टूटता है/कोई अपना जब अचानक रूठता है //दर्द का सागर सुनामी पालता है /अभिव्यक्ति का ज्वालामुखी जब फूटता है //दूर तक देखें कहाँ है ताब किसकी/आजकल रहबर ही घर को लूटता है//\रेल के पहियों सरीखी ज़िंदगी है /प्लेट फोर्म पर सिफ़र ही छूटता है//यह अज़ब अनुभूति है अपनी ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   5:37pm 29 Jan 2013 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
बात की बात में ............................................बात की बात में कहानी लिख /उम्र को दर्द की जवानी लिख //मां  ने पाला  जिसे तपस्या से /उसी बचपन को अब जवानी लिख//आग से कैसे बचे अब बस्ती?ऐसी कुछधूल ,रेत  ,पानी लिख//लोग खंजर लिए हुए हैं मन में/उन्ही के रहमोकरम लिख ,तू राजधानी लिख //जो पैर पेट में दे सोत... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:16pm 29 Jan 2013 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
ग़ज़ल टूटे मन से और बहुत भी टूटा हूँ/औरों को क्या कहूं जो खुद ही झूठा हूँ//जग में कितने अपनों को दी पीडाएं /औरों से ठोकर खाई तो रूठा हूँ//संगम की रेती पर पर चल जीवन काटा /पर अब लगता है बगलोलों  का फूफा हूँ//इतना हम से कभी पूछ तो लेते तुम/इतना लूटी दुनिया फिर क्यों भूखा हूँ ?सबके ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:01pm 29 Jan 2013 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
हवाओं  के  उलटे ही हम बोलते हैं /उडने के पहले ही पर तौलते हैं//रही जंगलों में है रहने की आदत/मगर  मन में इसको ही घर बोलते हैं//अंधेरों में काफी है नन्हा   दिया भी /वे अंधों को रोशन नज़र बोलते हैं//दरवाज़े  दिल के हैं  बन्द इसलिए बस /मेरे  हमसफ़र इस  कदर बोलते हैं//... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   5:15pm 4 Oct 2012 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
तेरी  इक निगाह के  कमाल से,मेरा मन ये सावन हो गया ,तेरी मीठी-मीठी छुवन भली , कि ये दर्द पावन  हो गया //कहाँ रोशनी की मज़ाल थी,जो वो छू सके तम के शिखर ,तेरी जुस्तजू का  असर हुआ ,कि जो धूप सा मन हो गया //चले हम हज़ार कदम यहाँ ,तेरी इक हंसी लिये साथ में ,वही याद भर को  नमी भी है,,वही मन भ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   7:10am 18 Jul 2012 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
कई दिनों से मन में एक विचार बार बार आ रहा है कि हम वास्तव में कितने सुविधा भोगी हो गए हैं/अब हम किताबें पढने का सुख (यदि आज के लोग ऐसा मान सकें)भी नहीं उठाना चाहते,कौन खरीदें पुस्तकें,फिर पढ़े,इतना वक़्त ही कहाँ है आज/अपनी जगह से उठ कर टी.वी.चलाना ,चैनल बदलना भी भारी होने लग... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   2:05pm 20 Jun 2012 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
012कई दिनों से मन में एक विचार बार बार आ रहा है की हम वास्तव में कितने सुविधा भोगी हो गए हैं/अब हम किताबें पढने का सुख (यदि आज के लोग ऐसा मान सकें)भी नहीं उठाना चाहते,कौन खरीदें पुस्तकें,फिर पढ़े,इतना वक़्त ही कहाँ है आज/अपनी जगह से उठ कर टी.वी.चलाना ,चैनल बदलना भी भारी होने ल... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   2:05pm 20 Jun 2012 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
कई दिनों से मन में एक विचार बार बार आ रहा है की हम वास्तव में कितने सुविधा भोगी हो गए हैं/अब हम किताबें पढने का सुख (यदि आज के लोग ऐसा मान सकें)भी नहीं उठाना चाहते,कौन खरीदें पुस्तकें,फिर पढ़े,इतना वक़्त ही कहाँ है आज/अपनी जगह से उठ कर टी.वी.चलाना ,चैनल बदलना भी भारी होने लगा ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   4:06am 3 Apr 2012 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
आप फिर याद आने लगे हैं/जख्म फिर मुस्कुराने लगें हैं //धुप की बढ़ रही है तपिश /फूल फिर गुनगुनाने लगें हैं //उम्र ज्यों होगई आइना /अक्स खुद को डराने लगे हैं//जान बक्शी की किस से अरज ?दोस्त छूरे चलाने लगे हैं//मुद्दतों बाद देखा है घर /पर नयन डबदबाने लगे हैं //किस से मन की कहें दास्त... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:42am 2 Feb 2012 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
दीवाली के जगमग दिए ,जीवन को रोशन कर जाएँ ,जो कुछ भी अब तक मिला नहीं ,वह सबकुछ अब जीवन में पायें ,निर्मल हो मन ,तन स्वस्थ रहे ,हरपग पर नए उजाले हों ,कितने तूफ़ान चलें फिर भीसौ दीप जलाने वाले हों //दीवाली मंगलमय हो बंधु जन सपरिवार आप सभी कोसस्नेह !... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:52am 10 Nov 2011 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
मन खो गया है यह तन  खो गया है ,तुमको दिया हर वचन खो गया है //     उदासी की शामों में खोई हैं रातें ,ज़माने की सरगोशियों  की हैं बातें ,ज़वानी का सब जोश भी खो गया है //उलझे सितारों की उलझी कहानी ,हँसे जा रहीं हैं ये किरणों की रानी ,मुस्कराहट भरा हर नयन खो गया है //उम्मीदों से कितने ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   12:17pm 25 Oct 2011 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
-पहचान ले जो जिंदगी ,वो नजर कहाँ से  लाऊं ?                                   ये है आंसुओं की मंडी,यहाँ कैसे मुस्कराऊँ ?ये दबी -दबी सी आहें ,उफ़ ,ये नजर का कुहासा ,जहाँ ग़म के सिलसिले हैं वहां कैसे गुनगुनाऊँ ,यहाँ भूख का सफ़र है ,वहां रोशनी का जलवा ,जहाँ इत्र उड़  रहा हो वहां प्यास क्या बुझाऊ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:36pm 15 Sep 2011 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
अन्ना जी के लिए ............जब जुल्म की ताकत टूटेगी ,जब ताज धरा पर आएगा ,जब सच का सूरज चमकेगा ,जब हर जर्रा मुस्काएगा ,जब कोटि-कोटि जन सड़कों पर खुद ही आकर छा जायेंगे ,तब तुम्हे नमन करने को जग के सब मस्तक झुक जायेंगेजब इन रोशन दीवारों पर सच नयी इबारत लिक्खेगा ,तब ताप समय के सूरज का सच... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   3:47pm 28 Aug 2011 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
जब जुल्म की ताकत टूटेगी ,जब ताज धरा पर आएगा ,जब सच का सूरज चमकेगा ,जब हर जर्रा मुस्काएगा ,जब कोटि-कोटि जन सड़कों पर खुद ही आकर छा जायेंगे ,तब तुम्हे नमन करने को जग के सब मस्तक झुक जायेंगेजब इन रोशन दीवारों पर सच नयी इबारत लिक्खेगा ,तब ताप समय के सूरज का सच्चाई जैसा दिक्खेगा ,... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   6:17pm 25 Aug 2011 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
होश में आगया हूँ इधर/खुद की करने लगा हूँ कदर //मिल गयी इतनी ज्यादा ख़ुशी /डबदबाने लगी है नज़र//रात तकियों ही तकियों कटी /बज रहा है सुबह का गज़र //जिनको पूजा था बुत मान कर /उनसे ही लग रहा आज डर//रण में कूदे ही जिनके लिए /शास्त्र लेकर भगे वे ही घर //उम्र भर जिनपे चलते रहे/अजनबी क्यों... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:04pm 12 Jun 2011 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
आज फिर नभ में खिला है एक पूरा चाँद ,पर तुम्हारे बिन लगा मुझको अधूरा चाँद,बादलों के बीच करता है चहलकदमी ,नापता है जिंदगी की ढेर सी दूरी ,उम्र जिस आइने में देखती चेहरा ,बस उसी आइने सा लगने लगा है चाँद//मुश्किलें हैं ढेर सी पर प्यार भी तो है ,कोई माने या न माने,फर्क क्या पड़ना ?र... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:19pm 18 May 2011 #
Blogger: dr.bhoopendra kumar singh
लिखता हूँ मैं ,दिखता हूँ मैं ,टुकड़ों -टुकड़ों बिकता हूँ मैं ,फिर भी छोड़ कहाँ जाऊं सब ?इस माटी की सिकता हूँ मैं //ओढ़ भ्रमों का चोला-बाना,खुद-खुद से रह गया अजाना ,भले रहा नन्हा सा तिनका ,तूफानों में टिकता हूँ मैं //ऊब गया पर जूझ रहा हूँ ,कठिन पहेली बूझ रहा हूँ ,बार-बार अपने अंधि... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   5:57pm 28 Apr 2011 #
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3991) कुल पोस्ट (194987)