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Blog: अनंत अपार असीम आकाश

Blogger: vivek mishra
चाहतो, ख्वाहिसों, हसरतो के महल में , लोभ, लिप्सा,वासना ही सदा पलती रही । काम, क्रोध, मद, लोभ ही , इस महल के शहंशाह । चौपड़ की बिसात बिछाकर , वो बुलाते सबको यहाँ । चाहतो, ख्वाहिसों, हसरतो...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   5:55pm 19 Jun 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
क्या लिखू क्या ना लिखूँ  , कुछ समझ पाता नहीं ।  भाव हैं मन में बहुत , पर  उन्हें समेट पाता नहीं । कुछ भाव हैं बस प्यार के , कुछ है तेरे अहंकार के । कुछ भाव तुझसे...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टिया... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   7:07pm 16 Jun 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
सिलसिले जो आपने , शुरू बेबफाई के किये । बनकर वो काँटे नुकीले , राहों में मुझको मिले । आपने सोंचा भी है , हम क्यों वफ़ा करते रहे ? यार भले नाखुश रहे , याराना तो चलता रहे । आप भले नाराज...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तु... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   3:20pm 14 Jun 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
मानव जीवन नदी का पानी , गुजरे घाट ना ठहरे पानी । घाट घाट का रूप निहारे , न बँधे किसी बंधन में पानी । माँ की कोख है इसका उदगम , किलकारे बचपन का पानी । मदमाती लहरे यौवन की , ना सहे किसी का...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्त... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   8:50am 11 Jun 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
आचरण का अर्थ तो , आ-चरण में ही छिपा । आ-चरण सीखे बिना , आचरण किससे सधा ।  आचार्य है वो लोग जो , आ-चरण को जानते । आ-चरण को साध कर , आचरण को बाँटते । आचरण को जानना ,  है...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   7:47am 11 Jun 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
क्यों जिद करते मुझसे आप, असली चेहरा दिखलाने को । है नहीं सामर्थ अभी तुममे , मेरा असली रूप पचाने को । तुम अभी कमल के आदी हो , कीचड़ में करते वास अभी । तुम क्या...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टिया... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   3:54pm 6 Jun 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
सदियों पहले आदिवासी इलाको में , चलन था कुछ कुरूप से मुखौटो का। ज्यादातर ख़ुशी में और कुछ दुखो में , पहनते थे लोग मुखौटो को चहरे पर। पहनकर उसे ख़ुशी से नाचते थे अक्सर , या फिर दुखो में...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   6:32am 1 Jun 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
यूँ तो जिंदगी में ऐसे  बहुत से अवसर होते है ,  जब हम किसी कथाकार की तरह जीने का अवसर पाते है। और जब जब ऐसा  होता है , हम अपनी कल्पनाओ को मूर्त रूप देते है। और हम खींचने...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रवि... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   8:00am 28 May 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
"औरंगजेब"  कल झेल़ा इसे, एकदम थर्ड क्लास बकवास मूवी , सिवाय सिर्फ एक बेहतरीन डायलाग के - "सपनों से ज्यादा अपनो की कीमत होती है" , बात तो सच है पर क्या ये बात नहीं अधूरी...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताज... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   6:27am 20 May 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
कहे कबीर बुलाकर मुझको , एक अजूबा होए । धरती बरसे अम्बर भींजे , बूझे बिरला कोय । मैंने कहा सुना है गुरूजी , ये गजब अजूबा होय । एक अजूबा मैं भी देखा , अब बूझे उसको कोय । प्यासा बैठे...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत ह... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   1:06pm 19 May 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
( एक दशक पुरानी रचना है ये...पर शायद नही है बदले हालत अभी..) नशा शराब का होता उतर जाता कब का ।  नशा चढ़ा है मुझ पर मेरी रवानी का ।             ...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टियाँ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   11:55am 19 May 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
जब बेईमान व्यक्ति सफल होता है तो यह उसकी बेईमानी की सफलता नहीं वरन यह उसमे पाए जाने वाले अच्छे  गुणों की सफलता होती है । यह जरूरी नहीं है की एक ईमानदार आदमी सभी योग्यताओं से युक्त हो । हो...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   2:46pm 12 May 2013 #निन्यान्वे का फेर
Blogger: vivek mishra
तन प्यासा है मन प्यासा है ,                       जीवन को पाने की आशा है । अब तक जो कुछ पाया है ,         ...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टियाँ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   7:25am 10 May 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
रिश्तो की डोर कोई , उलझ गयी ऐसी , ना तोडे से टूटे , ना सुलझाई जाए ही.. रिश्ता भी ऐसा , जिसे दिल ही निभाए , ना छोड़े से छूटे , ना अपनाया जाए ही..  सांप और छछुंदर सी ,...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टिय... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   9:14am 7 May 2013 #बस तेरे लिये
Blogger: vivek mishra
ये नहीं है जगत वो , जिसको चाहा था मैंने । वो सपनों का महल था , ये है खण्डहर विराना । सोंचा था मैंने कुछ , हरे भरे बाग़ होंगे । फूलो की खुशबू और , फलो की मिठास होगी । सुबह शाम ठंडी-ठंडी...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   8:20am 7 May 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
धरती प्यासी, नदिया प्यासी , प्यासा सारा अम्बर है । तन प्यासा है , मन प्यासा है , प्यासा सारा जीवन है । प्यास लगे जब धरती को तो , नदियाँ उसकी प्यास बुझाये । प्यास लगे जब नदियों को तो , अम्बर उसकी...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   11:23am 5 May 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
जीवन में कभी कभी , कुछ पल ऐसे आते है । जहाँ हम प्रायः: अपनी , मर्यादाओ को भूल जाते है । और भुलाकर मर्यादाओ को , जो कुछ भी हम करते है । आज नहीं तो कल हम , कही न कही उसकी भरपाई करते है...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है त... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   10:37am 5 May 2013 #प्रबंधन
Blogger: vivek mishra
जब कभी होगी जरूरत , फिर नए विशवास  की । जिन्दगी को उलझनों के , जाल में हम डाल देंगे । उलझनों के जाल से , जब निकल कर आयेंगे । एक नए विशवास का , आधार लेकर आयेंगे...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टियाँ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   8:30am 3 May 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
जीवन के उन क्षणों को , चाहूँगा बार बार । तुझको अपने दिल में , बुलाऊँगा बार बार । तेरे ओंठो की तपिश , जगाऊँगा बार बार । तुझसे मिलने के लिए , आऊँगा बार बार । जीवन के उन क्षणों को ,...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ता... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   9:31am 29 Apr 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
वो स्वपन ही था जो वर्षो पहले , खुली आँख से देखा था । जब वही हकीकत में बदला , तो नींद नहीं अब आती है । खाना पीना छूट  गया और , काम भी सारे भूल गया । यादो के मँझधार में अब , जीवन...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   9:26am 26 Apr 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
बस कर्म है अधिकार तुम्हारा ,  पीछे ना हटो कर्त्तव्य से । होकर अधीर ना रुक जाना, निष्फल होते किसी कर्म से । ज्यों बूँद बूँद से सागर बनता , संचित होते कर्म सभी । यदि आज नहीं निश्चय कल ,...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्त... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   8:31am 25 Apr 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
खोल दो तुम द्वार सारे ,जीवन के अभी जो बंद हैं । राह दो तुम पवन को , साँसे अभी कुछ तंग है । उठने दो तुम ज्वार को , भावना के सागर में । तोड़ दो बंधन सभी , मन ना रहे एक गागर में । संसार क्या सन्यास...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   9:15am 20 Apr 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
अब चलते चलते पाँव थके , तलुओ में पड़  गए छाले है । हम इतनी दूर निकल आये , अब नहीं पास घर वाले है । सोंचा था यूँ चलते चलते , पहचान स्वयं को जायेंगे । चाह रहा क्या मन बौरा , यह...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   9:15am 14 Apr 2013 #मेरी कविताएँ
Blogger: vivek mishra
क्या करे क्या ना करे... कुछ समझ आता नहीं... नींद भी आती नहीं , चैन भी आता नहीं । सोंचता था सब निबटाकर , चैन से मै सो सकूँगा । जो था होना हो चुका , अब चैन से मै जी सकूँगा । पर...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्र... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   8:24am 14 Apr 2013 #राग-रंग
Blogger: vivek mishra
एक जाम तो पीने दो मुझको , मन मेरा खाली-खाली है । बेगानों सा लगता ये जग , यह रोज मनाता दिवाली है । मेरी समाधि मिटाकर के , वो चाह रहे हैं भवन बनाना । तुम उन्हें बता दो जाकर के ,...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   9:05am 9 Apr 2013 #मेरी कविताएँ
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