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Blog: मन के पाखी

Blogger: Sweta sinha
गुन-गुन छेड़े पवन बसंतीधूप की झींसी हुलसाये रे, वसन हीन वन कानन मेंजोगिया टेसू मुस्काये रे।ऋतु फाग के स्वागत में धरणी झूमी पहन महावर, अधर हुए सेमल के रक्तिमसखुआ पाकड़ हो गये झांवर,फुनगी आम्र हिंडोले बैठीकोयलिया बिरहा गाये रे,निर्जन पठार की छाती परजोगिया टेसू मुस्... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   5:20am 25 Feb 2021 #
Blogger: Sweta sinha
कुछ भी लिखने कहने का दौर नहीं हैं।अर्थहीन शब्द मात्र,भावों के छोर नहीं हैं।उम्मीद के धागों से भविष्य की चादर बुन लेते हैंविविध रंगों से भ्रमित कोई चटक चित्र चुन लेते हैंसमय की दीर्घा में बैठे गुज़रती नदी की धार गिनतेबेआवाज़ तड़पती मीनों को नियति की मार लिखतेभेड़ों में ह... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   4:31pm 22 Feb 2021 #
Blogger: Sweta sinha
मैं प्रकृति के प्यार में हूँ...।किसी उजली छाँह की तलाश नहीं हैकिसी मीठे झील की अब प्यास नहीं है,नभ धरा के हाशिये के आस-पासधडक रही है धीमे-धीमे -साँस,उस मीत के सत्कार में हूँ।मैं प्रकृति के प्यार में हूँ...।सृष्टि की निभृत पीड़ाओं से मुक्त होदिशाओं के स्वर पाश से उन्मुक्त ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   5:08am 11 Feb 2021 #
Blogger: Sweta sinha
शताब्दियों सेविश्व की तमाम सभ्यताओं केआत्ममुग्ध शासकों के द्वाराप्रजा के लिए बनाये नियमऔर निर्गत विशेषाधिकार के समीकरणों से असंतुष्ट,असहमति जीभ पर उठायेउद्धारक एवं प्रणेता...शोषित एव शासकों,छोटे-बड़े का वर्गीकरण करते समाजिक चेतना कीमहीन रेखाओं की गूढ शब्दा... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   5:18pm 6 Feb 2021 #
Blogger: Sweta sinha
 व्यक्ति से विचारऔर विचार से फिरवस्तु बनाकर भावनाओं के  थोक बाज़ार में ऊँचे दामों में में बेचते देख रही हूँ।चश्मा,चरखा,लाठी,धोती,टोपीखादी,बेच-बेचकर संत की वाणीव्यापारी बहेलियों कोशिकार टोहते देख रही हूँ।सत्य से आँखें फेर,आँख,कान,मुँह बंद किये आदर्शो... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   4:31pm 30 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
उड़ती गर्द मेंदृश्यों को साफ देखने की चाहत मेंचढ़ाये चश्मों सेपरावर्तित होकरबनने वाले परिदृश्यअब समझ में नहीं आते तस्वीरें धुंधली हो चली हैनिकट दृष्टि में आकृतियों कीभावों की वीभत्सता सेपलकें घबराहट सेस्वतः मूँद जाती हैं,दूर दृष्टि मेंविभिन्न रंग केसारे चेहर... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   5:32pm 28 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
राष्ट्रीय त्योहार पर कर अर्पित सुमनअनाम बलिदानियों को नमन करती है,धन्य धरा,माँ नमन तुम्हें करती हैधन्य कोख,सैनिक जो जन्म करती है।-----शपथ लेते, वर्दी देह पर धरते ही साधारण से असाधारण हो जातेबेटा,भाई,दोस्त या पति से पहले,माटी के रंग में रंगकर रक्त संबंध,रिश्ते स... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   5:34am 26 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
(१)सर्द रातगर्म लिहाफ़ मेंकुनमुनाती,करवट बदलतीछटपटाती नींदपलकों से बगावत करबेख़ौफ़ निकल पड़ती हैकल्पनाओं के गलियारों में,दबे पाँव चुपके से खोलते हीसपनों की सिटकनीआँगन में कोहरा ओढ़े चाँद माथे को चूमकरमुस्कुराता हैऔर नींद मचलकरमाँगती है दुआकाश!!पीठ पर उग आए रेश... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   4:29pm 23 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
धरती की गहराई कोमौसम की चतुराई कोभांप लेती है नन्ही चिड़ियाआगत की परछाई को।तरू की हस्त रेखाओं कीसरिता की रेतील बाहों कीबाँच लेती है पाती चिड़ियाबादल और हवाओं की।कानन की सीली गंध लिएतितली-सी स्वप्निल पंख लिएनाप लेती है दुनिया चिड़ियामिसरी कलरव गुलकंद  लिए।सृष्टि मे... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   2:19pm 19 Jan 2021 #प्रकृति कविता
Blogger: Sweta sinha
हरी-भूरी छापेवालीवर्दियों में जँचताकठोर प्रशिक्षण से बनालोहे के जिस्म मेंधड़कता दिल,सरहद की बंकरों मेंप्रतीक्षा करता होगामेंहदी की सुगंध में लिपटे कागज़ों की,शब्द-शब्दबौराये एहसासों कीअंतर्देशीय, लिफ़ाफ़ों की।उंगलियां छूती होंगी रह-रहकरमाँ की हाथों से बँधी ताबी... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   8:43am 15 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
कभीपूछना अंतर्मन सेचमड़ी के रंग के लिएनिर्धारित मापदंड काशाब्दिक विरोधीहैंं हम भी शायद...?आँखों के नाखून सेचमड़ी खुरचने के बादबहती चिपचिपी नदी कारंग श्वेत है या अश्वेत...? नस्लों के आधार परमनुष्य की परिभाषातय करते श्रेष्ठता के खोखले आवरण में बंदघोंघों को अपनी आ... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   9:57am 11 Jan 2021 #
Blogger: Sweta sinha
बुहारकर फेंके गयेतिनकों के ढेर चोंच में भरकर चिड़ियाउत्साह से दुबारा बुनती हैघरौंदा। कतारबद्ध,अनुशासित नन्हीं चीटियाँ बिलों के ध्वस्त होने के बादगिड़गिड़ाती नहीं,दुबारा देखी जा सकती हैं निःशब्द गढ़ते हुएजिजीविषा की परिभाषा।  नन्ही मछलियाँ भीपहचानती है... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   6:30pm 31 Dec 2020 #
Blogger: Sweta sinha
मन पर मढ़ीख़्यालों की जिल्दस्मृतियों की उंगलियों केछूते ही नयी हो जाती है,डायरी के पन्नों पर जहाँ-तहाँबेख़्याली में लिखे गयेआधे-पूरे नाम पढ़-पढ़कर ख़्वाब बुनतीअधपकी नींद, एहसास की खुशबू सेछटपटायी बेसुध-सीमतायी तितलियों की तरह जम चुके झील के  एकांत तट परउग आती ... Read more
Blogger: Sweta sinha
चित्र:मनस्वीसदियों से एक छविबनायी गयी है,चलचित्र हो या कहानियांहाथ जोड़े,मरियल, मजबूरज़मींदारों की चौखट पर मिमयाते,भूख से संघर्षरतकिसानों के रेखाचित्र...और सहानुभूति जताते दर्शक  अन्नदाताओं कोबेचारा-सा देखना कीआदत हो गयी है शायद...!!अपनी खेत का समृद्ध मालिकपढ़ा-लि... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   4:41am 16 Dec 2020 #
Blogger: Sweta sinha
कोहरे की रजाई मेंलिपटा दिसंबर,जमते पहाड़ों परसर्दियाँ तो हैंपर, पहले जैसी नहीं...।कोयल की पुकार परउतरता है बसंत आम की फुनगी सेमनचले भौंरे महुआ पीकरफूलों को छेड़ते तो हैंपर, पहले जैसा नहीं...।पसीने से लथपथ,धूप से झुलसता बदनगुलमोहर की छाँव देखसुकून पाता तो हैपर,पहले जैसा... Read more
Blogger: Sweta sinha
पकड़ती हूँ कसकर उम्र की उंगलियों मेंऔर फेंक देती हूँ गहरे समंदर में ज़िंदगी के जाल एक खाली इच्छाओं से बुनी..तलाश मेंकुछ खुशियों की।भारी हुई-सी जाल  निकालती हूँ जब उत्सुकतावश,आह्लाद से भर  अक़्सर जाने क्योंकरफिसल जाती हैं सारी खुशियाँ।और .. रह जाती है... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   12:27pm 9 Dec 2020 #
Blogger: Sweta sinha
चित्र: मनस्वी प्रांजलधान ,गेहूँ,दलहन,तिलहनकपास के फसलों के लिएबीज की गुणवत्ताउचित तापमान,पानी की मापमिट्टी के प्रकार,खाद की मात्रानिराई,गुड़ाई या कटाई कासही समयमौसम और मानसून का प्रभावभूगोल की किताब मेंपढ़ा था मैंने भीपर गमलों में पनपतेबोनसाईकी तरह जीने कीविवशता न... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   3:40pm 6 Dec 2020 #
Blogger: Sweta sinha
ठिठुरती रात,झरती ओस कीचुनरी लपेटेखटखटा रही हैबंद द्वार कासाँकल।साँझ से हीछत की अलगनीसे टँगाझाँक रहा हैशीशे के झरोखे सेउदास चाँदतन्हाई का दुशाला ओढ़े।नभ केनील आँचल सेछुप-छुपकरझाँकता आँखों कीख़्वाबभरी अधखुलीकटोरियों कीसारी अनकही चिट्ठियों की स्याही पीकर बौर... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   4:41pm 30 Nov 2020 #प्रकृति की कविताएँ
Blogger: Sweta sinha
सृष्टि के प्रारंभ से हीब्रह्मांड के कणों मेंघुली हुईनश्वर-अनश्वर कणों की संरचना के अनसुलझेगूढ़ रहस्यों की पहेलियों की  अनदेखी करज्ञान-विज्ञान,तर्कों के हवाले सेमनुष्य सीख गयापरिवर्तित करनाकर्म एवं मानसिकता सुविधानुसारआवश्यकता एवंपरिस्थितियों काराग... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   3:13am 28 Nov 2020 #
Blogger: Sweta sinha
मुझे डर नहीं लगतात्रासदी के घावों सेकराहती,ढुलमुलातीचुपचाप निगलतीसमय कीखौफ़नाक भूख से।मुझे डर नहीं लगताकफ़न लेकरचल रही हवाओं केदस्तक से खड़खड़ातेसाँकल केभयावह पैगाम से।मुझे डर नहीं लगताआग कोउजाला समझकरभ्रमित सुबह कीउम्मीद के लिए टकटकी बाँधेनिरंतर जागती जिजीव... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   12:19pm 26 Nov 2020 #
Blogger: Sweta sinha
(१)कर्तव्य, सद् आचरण,अहिंसामानवता,दया,क्षमासत्य, न्याय जैसे'धारण करने योग्य''धर्म'का शाब्दिक अर्थहिंदू या मुसलमान कैसे हो सकता है?विभिन्न सम्प्रदायों के समूह,विचारधाराओं की विविधतासंकीर्ण मानसिकता वाले शब्दार्थ से बदलकरमानव को मनुष्यता का पाठ भुलाकर स्व के... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   5:37pm 5 Nov 2020 #
Blogger: Sweta sinha
 २७ जून २०१८ को आकाशवाणी जमशेदपुरके कार्यक्रम सुवर्ण रेखा में पहली बार  एकल काव्य पाठ प्रसारित की गयी थी। जिसकी रिकार्डिंग २२ जून २०१८ को की गयी थी। बहुत रोमांचक और सुखद अवसर था। अति उत्साहित महसूस कर रही थी,मानो कुछ बहुमूल्य प्राप्त हो गया होउसी कार्यक्रम में... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   12:37pm 31 Oct 2020 #
Blogger: Sweta sinha
मैं नहीं सुनाना चाहती तुम्हेंदादी-नानी ,पुरखिन या समकालीनस्त्रियों की कुंठाओं की कहानियां,गर्भ में मार डाली गयीभ्रूणों की सिसकियाँस्त्रियों के प्रति असम्मानजनक व्यवहारसमाज के दृष्टिकोण मेंस्त्री-पुरूष का तुलनात्मकमापदंड।मैं नहीं भरना चाहतीतुम्हारे हृदय में... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   4:42pm 18 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
उज्जवल चरित्र उदाहरणार्थजिन्हें लगाया गया थासजावटी पुतलों की भाँतिपारदर्शी दीवारों के भीतरलोगों के संपर्क से दूरप्रदर्शनी मेंपुरखों की बेशकीमती धरोहर की तरह,ताकि ,विश्वास और श्रद्धा से नत रहे शीश,किंतु सत्य की आँच सेदरके भारी शीशों सेबड़े-बड़े बुलबुले स्वार्थपरत... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   4:10pm 15 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
विश्व की प्राचीन एवं आधुनिक सभ्यताओं,पुरातन एवं नवीन धर्मग्रंथों में,पिछले हज़ारों वर्षों के इतिहास की किताबों में,पिरामिड,मीनारों,कब्रों,पुरातात्त्विक अवशेषों के साक्ष्यों में,मानवता और धर्म की स्थापना के लिए,कभी वर्चस्व और अनाधिकार आधिपत्य कीक्षुधा त... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   11:42pm 11 Jul 2020 #शांति...बुकमार्क
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