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Blog: मन के पाखी

Blogger: Sweta sinha
चित्र:मनस्वीमृदुल मुस्कान औरविद्रूप अट्टहास काअर्थ और फ़र्क़ जानते हैंकिंतु जिह्वा को टेढ़ाकरशब्दों को उबलने केतापमान पर रखनाजरूरी है।हृदय की वाहिनियों मेंबहते उदारता और प्रेमकी तरंगों कोतनी हुई भृकुटियों  और क्रोध से सिकुड़ी मांसपेशियों नेसोख लिया हैं।ठह... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   12:05pm 9 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
चित्र:मनस्वीमृदुल मुस्कान औरविद्रूप अट्टहास काअर्थ और फ़र्क़ जानते हैंकिंतु जिह्वा को टेढ़ाकरशब्दों को उबलने केतापमान पर रखनाजरूरी है।हृदय की वाहिनियों मेंबहते उदारता और प्रेमकी तरंगों कोतनी हुई भृकुटियों  और क्रोध से सिकुड़ी मांसपेशियों नेसोख लिया हैं।ठह... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   12:05pm 9 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
रोटी-दाल,चावल-सब्जी से इतरथाली में परोसी गयी पनीर या खीर देखखुश हो जाना,बहुत साधारण बात होती है शायद...भरपेट मनपसंद भोजन औरआरामदायक बिस्तर परचैन से रातभर सो पाने की इच्छा।जो मिला जीवन मेंकुछ शिकायतों के साथनियति मानकर स्वीकार करनाबिना फेर-बदल कियेरस्मों रिवाजों,प... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   4:19pm 6 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
वे पूछते हैं बात-बात परक्या आपके खून मेंदेशभक्ति का नमक है? प्रमाण दीजिए, मात्रा बताइयेनमक का अनुपात कितना है?एकदम ठंडा है जनाबखौलता क्यों नहीं कहिये नआपके रक्त का ताप कितना है?बारूद की गंध सूँघाते हैंकरते तोप और टैंकों की गणना सैन्य क्षमता का आकलन सनसनी रचते सम... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   2:36pm 2 Jul 2020 #
Blogger: Sweta sinha
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha
धरती के मानचित्र पर खींची गयीसूक्ष्म रेखाओं के उलझे महीन जाल,मूक और निर्जीव प्रतीत होतीअदृश्य रूप से उपस्थित  जटिल भौगोलिक सीमाएं अपने जीवित होने का भयावह प्रमाणदेती रहती हैं। सोचती हूँ अक्सर सरहदों कीबंजर,बर्फीली,रेतीली,उबड़-खाबड़,निर्जन ज़मीनों परजह... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:08pm 28 Jun 2020 #
Blogger: Sweta sinha
सुनो ओ!जंगल के दावेदारोंविकास के नाम परलालच और स्वार्थ की कुल्हाड़ी लिएतुम्हारी जड़ को धीरे-धीरे बंजर करते,तुम्हारी आँखों में सपने भरकरसंपदा से भरी भूमि कोकंक्रीट में बदलते,हवा में फैले जंगली फूलों की  सुगंध सोखकर,धान के खेतों मेंकारखानों की चिमनी का ज़हरीला धुँ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   9:29am 10 Jun 2020 #छंदमुक्त
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