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Blog: सीमा बंगवाल की कविताएं

Blogger: seema bangwal
मौलश्री की डाल परउसके ककहरे मेंसुनाई देती कृष्ण की बाँसुरी से निकलती पण्डित हरि प्रसाद चौरसिया की फूँकलाल रत्ती की तरह उसकी आंखों मेंतुलती काक की धूर्तताअपने कलेजे के टुकड़ों को डाल देती है उसके घोंसले मेंजैसे पन्नाधाय ने सुला दिया था अपना लाल तलवार की धार पर... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   1:00pm 17 Jun 2020 #
Blogger: seema bangwal
जो फूल बसन्त का इंतज़ार किये बिना मुझसे मिलने चले आए थेमेरी साँसों की चौखट पर आज भी पड़े हैंउनकी ताज़गी भी जाती रहीतुम्हारे नासमझी में रूठने सेप्रेम जाने किस दिशा में उड़ गयाजैसे प्यासे पंछी मुख मोड़ लेते हैंपोखर सूखने की आशंका सेअभी भी दीवार पर टंगी हैअल्हड़ उम्र की एक... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:44pm 11 Jun 2020 #
Blogger: seema bangwal
तुम्हारी आवाज़ की खनक सुनकरहवा साज़ में बदल जाती हैबजने लगते हैं सुरहौले से मेरे कानों में घोलते मधुरस भरे गीतजीत लेना चाहती हूँतुम्हारी निःशब्दताअपने शब्दों के रूप सेजैसे विंग्स की कहानी का मौनविजित करताएक ऑस्कर प्रतिमातुम्हारी नींद में जागना चाहती हूँ लम्बी ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   3:25pm 4 Jun 2020 #
Blogger: seema bangwal
जब जीवन स्थिर हो जाता हैजब दुनिया शांत हो जाती हैएक गाँव की तरह दिखने वाला संसारछोटे छोटे मोहल्लों में बंटा नज़र आता हैशेष बचता है डरजो हम सबके मन के अंदर हैवो ही बाहर बेख़ौफ़ सड़कों पर घूमता हैये ज़हर उस प्याले में नहीं जिसे सुकरात ने पियादहशत का सायनाइड अपनी मिठास सेस... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:03pm 3 Jun 2020 #
Blogger: seema bangwal
अदालतों के अहाते मेंपेड़ की छांव के नीचेबरसों से पड़ी बेंचतारीखों के इंतज़ार में हैवह देख रही हैअदालतों का मुख्य द्वारदिवानी व फ़ौजदारी मुकद्दमों परवकीलों का मेला लग चुका हैकानून की देवी की आँखों परकाली पट्टी बांध दी गयी हैउसकी दृष्टि में हैं वे स्त्रियाँजिन्हें ज्ञा... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   11:41am 31 May 2020 #
Blogger: seema bangwal
गगन और वसुधा की दूरी पूर्णता का बोध करातीआधे होकर ही अच्छे हैंपूरे होते तो हम न होते.....सपनों की गठरी को बांधेएक एक सपना टूटा मेराख़्वाब हैं तो ही अच्छे हैंसच होते तो हम न होते....प्रभा -निशा के बंधन जैसे दुनिया में सुख दुःख हैं होतेशोक है मन में तो ही अच्छा हैखुशियाँ होत... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   8:35am 29 May 2020 #
Blogger: seema bangwal
समय के लिए जब बीत जाने जैसा कोई शब्द नहीं थाउसे मापा जाना भी सम्भव नहीं थामनुष्य की नियति में वह गुज़रता गयासूर्य के अस्त होने से पहलेलंबे हो चले पेड़ों के सायेअँधेरे के आग़ोश में समाने लगेसुबह होते ही फिर वे जन्म लेते बढ़ते घटतेऔर फिर शाम तक लुप्त हो जातेबरसों बाद इसी ज... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   10:58am 26 May 2020 #
Blogger: seema bangwal
धरती आसमान===========तुम जब मेरे आसमान बन जाते होऔर मैं तुम्हारी धरतीतुम्हें गर्व होता है कितुम दिग दिगन्त तक फैले हुए होतुम्हारे पास स्वर्ग हैजहाँ देवता वास करते हैंतुम अपने अहम मेंदेवताओं से भी आगे बढ़ जाते होलेकिन तुम भूल जाते होआसमान केवल एक शब्द हैउसका कोई अस्तित्व नह... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   4:35pm 23 May 2020 #
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