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Blog: कविता "जीवन कलश"

Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
वो चाँद चला, छलता, अपने ही पथ पर!बोल भला, तू क्यूँ रुकता है?ठहरा सा, क्या तकता है?कोई जादूगरनी सी, है वो  स्निग्ध चाँदनी,अन्तः तक छू जाएगी,यूँ छल जाएगी!वो चाँद चला, छलता, अपने ही पथ पर!कुछ कहता, वो भुन-भुन-भुन!कर देता हूँ मैं, अन-सुन!यथासंभव, टोकती है उसकी ज्योत्सना,यथा-पूर्व जब... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   6:26am 7 Sep 2020 #चाँद
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
पल भर को, रुक जरा, ऐ मेरे मन यहाँ,चुन लूँ, जरा ये खामोशियाँ!चुप-चुप, ये गुनगुनाता है कौन?हलकी सी इक सदा, दिए जाता है कौन?बिखरा सा, ये गीत है!कोई अनसुना सा, ये संगीत है!है किसकी ये अठखेलियाँ,कौन, न जाने यहाँ!पल भर को, रुक जरा, ऐ मेरे मन यहाँ,चुन लूँ, जरा ये खामोशियाँ!उनींदी सी हैं, कि... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:14pm 31 Aug 2020 #खामोशियाँ
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
यूँ भड़क उठती है, कहीं पीड़ बड़ी!ज्यूँ, विध्वंस की है घड़ी!शून्य चेतना, गगनभेदी सी गर्जना,टूटती शिला-खंड सी, अन्तहीन वेदना,चुप-चुप, मूक सी पर्वत खड़ी,विध्वंस की, है ये घड़ी!यूँ भड़क उठती है, कहीं पीड़ बड़ी!हर तरफ, सन्नाटों की, इक आहट,गुम हो चली, असह्य चीख-चिल्लाहट,अनवरत, आँसू... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   5:09am 9 Aug 2020 #चेतना
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
दो बूँद बनकर, आँखों में उतरे,मन की, सँकरी गली से, वो जब भी गुजरे!वो, भिगोते थे, कभी बारिशों में,लरजते थे, कभी सुर्ख फूलों पे हँस कर,यूँ, सिमट आते थे, दबे पाँव चलकर,अब वो मिले, दो बूँद बनकर,और, नैनों में उतरे!यूँ मन की गली से, वो गुजरे!दो बूँद बनकर, आँखों में उतरे.......यूँ अनवरत, बहती ह... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   6:08pm 2 Aug 2020 #किनारा
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
सिमट रहे, ये दलीचे उम्र के,ख्वाब कोई, अब, आए ना मुड़ के!मन के फलक, धुंधलाए हैं, हल्के-हल्के,दूर तलक, साए ना कल के,सांध्य प्रहर, कहाँ किरणों का गुजर,बिखरे हैं, टूट कर ख्वाब कई,रख लूँ चुन के!सिमट रहे, ये दलीचे उम्र के,ख्वाब कोई, अब, आए ना मुड़ के!हम-उम्र कोई होता, तो ख्वाब पिरो लेता,प... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   2:23am 18 Jul 2020 #उम्र
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
यूँ संग तुम्हारे,देर तक, तकता हूँ, मैं भी तारे,हो, तुम कहीं,एकाकी हूँ, मैं कहीं,हैं जागे,रातों के, पल ये सारे!यूँ तुमको पुकारे,शायद तुम मिलो, नभ के किसी छोर पर,कहीं, सितारों के कोर पर,मिलो, उस पल में, किसी मोड़ पर,एकाकी पल हमारे,संग तुम्हारे,व्यतीत हो जाएंगे, सारे!यूँ बिन तुम्ह... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   3:40am 12 Jul 2020 #चंचल
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
धुंधले हुए, स्वप्न बहुतेरे,धुंधलाए,नयनों के घेरे,धुंधला-धुंधला, हर मौसम,जागा इक, चेतन मन!मौन अपनापन,वो ही,सपनों के घेरे!धूमिल, प्रतिबिम्बों के घेरे,उलझाए,उलझी सी रेखाएं,बदलते से एहसासों के डेरे,अल्हड़, वो ही मन,तेरा अपनापन,तेरे ही,ख्यालों के घेरे!बदली छवि, तुम न बदले,तु... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   2:35am 8 Jul 2020 #छवि
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
निष्क्रिय हुए, आकर्षण,विलक्षणताओं से भरे वो क्षण,गुम हैं कहीं!सहज हों कैसे, विकर्षण के ये क्षण!ये दिल, मानता नहीं,कि, हो चले हैं, वो अजनबी,वही है, दूरियाँ,बस, प्रभावी से हैं फासले!यूँ ही, हो चले, तमाम वादे खोखले!गुजरना था, किधर!पर जाने किधर, हम थे चले,वही है, रास्ते,पर, मंजिलों स... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   3:04am 7 Jul 2020 #अरमान
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
रह जाए जैसे, जिज्ञासा!रह गए हो तुम, वैसे ही, जरा सा!नजर में समेटे, दिव्य आभा,मुखर, नैनों की भाषा,चुप-चुप, बड़े ही, मौन थे तुम,न जाने, कौन थे तुम?हौले-हौले, प्रकंपित थी हवा,विस्मित, थे क्षण वहाँ,कुछ पल, वहीं था, वक्त ठहरा,जाने था, कैसा पहरा!हैं तेज कितने, वक्त के चरण,न ओढ़े, कोई आवरण,... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   5:46pm 23 Jun 2020 #जज्बात
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
बिन पिता!जलती है जैसे,जीवन की भट्ठी में, जीते जी!इस जीवन की,इक चिता!है आँखों में मेरी, जीवन्त चेहरा तुम्हारा,है ख्यालों पर मेरी, तेरा ही पहरा,पर, दर्शन वो अन्तिम तेरा,मेरे ही, भाग्य न आया!अन्त समय, पापा, मैं तुझको देख न पाया!यूँ तो, संग रहे तुम, करुणामय यादों में,है गूंज तुम्हा... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   2:50am 22 Jun 2020 #चिता
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
मेरी सुसुप्त संवेेेेदनाओं को फिर पिरोने,वो कौन आया?मन हो चला पराया!लचकती डाल पर,जैसे, छुप कर, कूकती हो कोयल,कदम की ताल पर,दिशाओं में, गूंजती हो पायल,है वो रागिनी या है वो सुरीली वादिनी!वो कौन है?जो लिए, संगीत आया!जग उठी, सोई सी संवेदनाएँ,मन हो चला पराया!आँखें मूंद कोई,कुछ कह ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   11:30pm 18 Jun 2020 #गिरह
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
जब ताकती हो, शून्य को, मेरी आँखें,रुक सी गई हों, ये मेरी, चंचल सी पलकें,ठहरा वहीं हो, बादल गगन पे,तो, समझना, वो तुम हो,और, याद तुझको, मैंने किया है!विचलित हो जब, कभी मन तुम्हारा,जब लेना पड़े, तुम्हें तन्हाईयों का सहारा,लगे कोई बुलाए, हलके-हलके,तो, समझना, वो मैं हूँ,और, याद तुझको, मै... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   1:51am 17 Jun 2020 #कल
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
हँस उठी, कोख!मूर्त हो उठी, अधूरी कोई कल्पना!हँस उठी, कोख!तब, कोख ने जना,एक सत्य, एक सोंच, एक भावना,एक भविष्य, एक जीवन, एक संभावना,एक कामना, एक कल्पना,एक चाह, एक सपना,और, विरान राहों में,कोई एक अपना!हँस उठी, कोख!वो हँसीं, एक जन्मी,विहँस पड़ी, संकुचित सी ये दिशाएँ,जगे बीज, हुए अंकुरि... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   6:43pm 10 Jun 2020 #गर्भ
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
वो, जो गौण था!जरा, मौन था!वो, तुम न थे, तो वो, कौन था?मंद सी, बही थी वात,थिरक उठे थे, पात-पात,मुस्कुरा रही, थी कली,सज उठी, थी गली,उन आहटों में, कुछ न कुछ, गौण था!वो, तुम न थे, तो वो कौन थासिमट, रही थी दिशा,मुखर, हो उठी थी निशा,जग रही थी, कल्पना,बना एक, अल्पना,उस अल्पना में, कुछ न कुछ, गौण था!व... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   2:17am 2 Jun 2020 #आहट
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
देती रही, आहटें,धूल-धूल होती, लिखावटें,बिखर कर,मन के पन्नों पर!अकाल था, या शून्य काल?कुछ लिख भी ना पाया, इन दिनों....रुठे थे, जो मुझसे वे दिन!छिन चुके थे, सारे फुर्सत के पल,लुट चुकी थी, कल्पनाएँ,ध्वस्त हो चुके थे, सपनों के शहर,सारे, एक-एक कर!देती रही, आहटें,धूल-धूल होती, लिखावटें,ब... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   2:24pm 25 May 2020 #कचोट
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
COVID 19:अविस्मरणीय संक्रमण के इस दौर में, कोरोना से खौफजदा जिन्दगियों की चलती फिरती लाशों के मध्य, जिन्दगी एक वीभत्स रूप ले चुकी है। हताशा में यहाँ-वहाँ भटकते लोग, अपनी कांधों पे अपनी ही जिन्दगी लिए, चेतनाशून्य हो चले हैं । मर्मान्तक है यह दौर। न आदि है, ना ही अंत है! हर घड़ी... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   12:37am 20 May 2020 #अंत
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
उड़ चले विहग, क्षितिज पे कहीं दूर!उन्हीं, असीम सी, रिक्तताओं में,हैं कुछ, ढ़ूंढ़ने को मजबूर,मुट्ठी भर आसमां, कहीं गगन पे दूर,या, अपना, कोई आकाश,लिए, अंतहीन सा, इक तलाश!उड़ चले विहग, क्षितिज पे कहीं दूर!गुम हैं कहीं, पंछियों के कलरव,कहीं दूर जैसे, उन से हैं रव,शून्य में घुला, व... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   10:03am 8 May 2020 #आकाश
Blogger: पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
कल तलक, छलक ही जाते थे ये प्याले,होठों तलक, यूँ आते-आते!कोलाहल, वो कल के,खन-खन वो, हल्के-हल्के से,ठहाकों के गूंज, थे जो दो पल के,विस्मित से, कर गए वो पल,विस्तृत हुए ये अस्ताचल,सिमटने लगे फलक!चुप भी करो, बस यूँ ही, तसल्ली न दो,हो चले हैं, खाली ये प्याले,छलकेंगे, अब ये कैसे,छू लूँ, तो ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   10:58am 6 May 2020 #अस्ताचल
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