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Blog: Nayekavi

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अत्याचार देख भागें,शांति शांति चिल्लाते,छद्म छोड़ अब तो जागें।***पीड़ा सारी कहता,नीर नयन से बहता,अंधी दुनिया हँसती।***बाढ कहीं तो सूखा है,उजड़ रहे वन सिसके,मनुज लोभ का भूखा है,***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया28-04-20... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   9:19am 20 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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122  122  122  12फकीरी हमारे हृदय में खिली।बड़ी मस्त मौला तबीयत मिली।।कहाँ हम पड़ें और किस हाल में।किसे फ़िक्र हम मुक्त हर चाल में।।वृषभ से रहें नित्य उन्मुक्त हम।जहाँ मन, बसेरा वहीं जाय जम।।बना हाथ तकिया टिका माथ लें।उड़ानें भरें नींद को साथ लें।।मिले जो उसीमें गुजारा करे... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   11:38am 16 Sep 2020 #शक्ति छंद
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भारी रोग निसड़्लो आयो, कोरोना,सगलै जग मैं रुदन मचायो, कोरोना,मिनखाँ नै मिनखाँ सै न्यारा, यो कीन्यो,कुचमादी चीन्याँ रो जायो, कोरोना।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया30-08-20... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   5:59am 9 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 212×4जगमगाते दियों से मही खिल उठी,शह्र हो गाँव हो हर गली खिल उठी।लायी खुशियाँ ये दीपावली झोली भर,आज चेह्रों पे सब के हँसी खिल उठी।आप देखो जिधर नव उमंगें उधर,हर महल खिल उठा झोंपड़ी खिल उठी।सुर्खियाँ सब के गालों पे ऐसी लगे,कुमकुमे हँस दिये रोशनी खिल उठी।आज छोटे बड़े के म... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:38am 5 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(1222   1222   1222   1222)नहीं जो चाहते रिश्ते अदावत और हो जाती,न होते अम्न के कायल सियासत और हो जाती,दिखाकर बुज़दिली पर तुम चुभोते पीठ में खंजर,अगर तुम बाज़ आ जाते मोहब्बत और हो जाती।घिनौनी हरकतें करना तुम्हारी तो सदा आदत,बदल जाती अगर आदत तो फ़ितरत और हो जाती।जो दहशतगर्द हैं ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   6:30am 5 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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शारद वंदन:-वंदन वीणा वादिनी,मात ज्ञान की दायिनी,काव्य बोध का मैं कांक्षी।***राम नाम:-राम नाम है सार प्राणी,बैल बना तू अंधा,जग है चलती घाणी।***सरयू के तट पर बसी,धूम अयोध्या में मची,ज्योत राम मंदिर की जगी।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया12-08-20... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   11:39am 22 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बेवज़ह सी ज़िंदगी में कुछ वज़ह तो ढूंढ राही,पृष्ठ जो कोरे हैं उन पर लक्ष्य की फैला तु स्याही,सामने उद्देश्य जब हों जीने की मिलती वज़ह तब,चाहतें मक़सद बनें गर हो मुरादें पूर्ण चाही।(2122*4)**********वैशाखियों पे ज़िंदगी को ढ़ो रहे माँ बाप अब,वे एक दूजे का सहारा बन सहे संताप सब,सन्तान इतनी ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   5:46am 18 Aug 2020 #शब्द विशेष मुक्तक
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एक गली का कुत्ता यक दिन, कोठी में घुस आया।इधर उधर भोजन को टोहा, कई देर भरमाया।।तभी पिंजरा में विलायती, कुत्ता दिया दिखाई।ज्यों देखा, उसके समीप आ, हमदर्दी जतलाई।।हाय सखा क्या हालत कर दी, आदम के बच्चों ने।बीच सलाखों दिया कैद कर, तुझको उन लुच्चों ने।।स्वामिभक्त बन नर की से... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   4:25am 12 Aug 2020 #सार छंद
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212×4रोज ही काम को टालते आलसी,ज़िंदगी बोझ में काटते आलसी।आसमां में बनाते किले रेत के,व्यर्थ की सोच को पालते आलसी।लौट वापस कभी वक्त आता न जो,छोड़ कल पे गवाँ डालते आलसी।आदमी के लिए कुछ असंभव नहीं,पर न खुद पे यकीं राखते आलसी।हाथ पे हाथ धर यूँ ही'बैठे 'नमन',भाग्य को दोष दे कोसते आल... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   5:18am 7 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र :- 122*4बुझी आग फिर से जलाने लगे हैं,वे फितरत पुरानी दिखाने लगे हैं।गुलों से नवाजा सदा जिनको हम ने,वे पत्थर से बदला चुकाने लगे हैं।जबाब_उन की हिम्मत लगी जब से देने,वे चूहों से हमको डराने लगे हैं।दुनाली का बदला मिला तोप से जब,तभी होश उनके ठिकाने लगे हैं।मजा आ रहा देख अब उ... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   5:05am 7 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(1-7 और 7-1) आरोही अवरोही(रिश्ते नाते)येनयेपुरानेरिश्ते नातेजो बन गये।हिचकोले खातेदिलों में सज गये।कभी तो हँसाते हैंकभी रुलाते ये।अब तो बसधीरे धीरेजा रहेखोतेये।*****(भारत देश)येदेशहमारादुनिया मेंसबसे न्यारा।प्राणों से भी ज्यादाये है हमको  प्यारा।धर्म भेरी  गूंजाईज... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   4:31am 22 Jul 2020 #वर्ण पिरामिड
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कोनी सीख्या म्हे पीहर मँ रोटी पोणो सासुजी।कोड कोड मँ ही सीख्या चून छाणनो सासुजी।।दो भोजायाँरी म्हे लाडो नखराली म्हे बाई सा,न्हेरा म्हारा मा काडै तो चिड़ी चुगावै ताई सा।कोनी सीख्या म्हे पीहर मँ जीमण जिमाणो सासुजी,कोड कोड मँ ही सीख्या थाल सजाणो सासुजी।।बिरध्यो दर्जी ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   2:35am 16 Jul 2020 #राजस्थानी गीत
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सरिता दूषित हो रही,व्यथा जीव की अनकही,संकट की भारी घड़ी।***नीर-स्रोत कम हो रहे,कैसे खेती ये सहे,आज समस्या ये बड़ी।***तरसै सब प्राणी नमी,पानी की भारी कमी,मुँह बाये है अब खड़ी।***पर्यावरण उदास है,वन का भारी ह्रास है,भावी विपदा की झड़ी।***जल-संचय पर नीति नहिं,इससे कुछ भी प्रीति नहिं,स... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   4:49am 11 Jul 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 22  22  22  22  22  2खुशियों ने जब साथ निभाना छोड़ दिया,हमने भी अपने को तन्हा छोड़ दिया।झेल गरीबी को हँस जीना सीखे तो,गर्दिश ने भी साथ हमारा छोड़ दिया।हमें पराई लगती ये दुनिया जैसे,ग़ुरबत में अपनों ने पल्ला छोड़ दिया।थोड़ी आज मुसीबत सर पे आयी तो,अहबाबों ने घर का रस्ता छोड़ द... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   7:12am 4 Jul 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(1-7 और 7-1) आरोही अवरोहीजोतुमआँखों सेकह  देतेतो मान जाते।हम भी जुबाँ पेकोई बात ना लाते।अब ना हो सकेगीवापस बात वो।कह जाती हैखामोशियाँना सकेजुबाँजो।*****जोबातनयनकह देतेचुप रह के।वहीं रहे लाखशब्द बौने बन के।जो कभी हुए नहींआँखों से घायल।नैनों की भाषाक्या  समझेवे  रूखे... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   2:12pm 21 Jun 2020 #वर्ण पिरामिड
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देखिए इंसान की कैसे शराफत मर गई,लंतरानी रह गई लेकिन सदाकत मर गई,बेनियाज़ी आदमी की बढ़ गई है इस कदर,पूर्वजों ने जो कमाई सब वो शुहरत मर गई।आदमी के पेट की चित्कार हैं ये रोटियाँ,ईश का सबसे बड़ा उपहार हैं ये रोटियाँ।मुफलिसों के खून से भरतें जो ज़ाहिल पेट को,ऐसे लोगों के लिये व्या... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   2:56am 13 Jun 2020 #शब्द विशेष मुक्तक
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मूर्खों की पीठों पर चढ़कर, नित चालाक बनाते काम।मूर्ख जुगाली करते रहते, मग्न भजे अपने ही राम।सिर धुन धुन फिर भाग्य कोसते, दूजों को वे दे कर दोष।नाम कमा लेते प्रवीण जो, रह जाते हैं मूर्ख अनाम।।मूर्खों के वोटों पर करते, नेता सत्ता-सुख का पान।इनके ही चंदे पर चलते, ढोंगी बाबा क... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   2:28am 9 Jun 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  2122  2122  212इश्क़ के चक्कर में ये कैसी फ़ज़ीहत हो गयीक्या किया इज़हार बस रुस्वा मुहब्बत हो गयी।उनके दिल में भी है चाहत, सोच हम थे खुश फ़हम,पर बढ़े आगे, लगा शायद हिमाकत हो गयी।खोल के दिल रख दिया जब हमने उनके सामने,उनकी नज़रों में हमारी ये बगावत हो गयी।देखिये जिस ओर नकली ही... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   4:12am 3 Jun 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(तर्ज--न जाओ सैंया)12122 अरकान पर आधारित।मैं भर के आहें तकूँ ये राहें,सजन तु आजा सता न इतना, सता न इतना।सिंगार सोलह मैं कर के बैठी,बिना तिहारे क्या काम इनका, क्या काम इनका।।तु ही है मंदिर तु मेरी मूरत,बसी है मन में ये एक सूरत,सजा के पूजा का थाल बैठी,मैं घर की चौखट पे, दर्श अब दे, द... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   2:53pm 18 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(फारूक अब्दुल्ला के जिन्ना-प्रेम पर व्यंग)भारत का अबदुल्ला, जिन्ना पे पराये आज,हुआ है दिवाना कैसा, ध्यान आप दीजिए।खून का असर है या, गहरी सियासी चाल,देशवासी हलके में, इसे नहीं लीजिए।लगता है जिन्ना का ही, जिन्न इसमें है घुसा,इसका उपाय अब, सब मिल कीजिए।जिन्ना वहाँ परेशान, ये... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   7:46am 13 May 2020 #मनहरण घनाक्षरी
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देवों की भाषा से जन्मी हिन्दी।हिन्दुस्तां के माथे की है बिन्दी।।दोहों, छंदों, चौपाई की माता।मीरा, सूरा के गीतों की दाता।।हिंदुस्तानी साँसों में है छाई।पाटे सारे भेदों की ये खाई।।अंग्रेजी में सारे ऐसे पैठे।हिन्दी से नाता ही तोड़े बैठे।।भावों को भाषा देती लोनाई।भाष... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   3:05am 10 May 2020 #शोभावती छंद
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2122/1122   1122   1122   112/22दिल में दरिया-ए- मुहब्बत को उफनता देखो,इसका आँखों की हदें तोड़ उमड़ना देखो।इश्क़ का ऐसा भी होता है असर था न पता,किस कदर बन गये हम सब के तमाशा देखो।जन्नत-ए-दुनिया थी जो पहले कभी,दौर-ए-दहशत ने उसे कैसा उजाड़ा देखो।ले के जायेगी कहाँ होड़ तरक्की की हमें,कितन... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   4:15am 5 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  1212  22दिल में कैसी ये बे-क़रारी है,शायद_उन की ही इंतिज़ारी है।इश्क़ में जो मज़ा वो और कहाँ,इस नशे की अजब खुमारी है।आज भर पेट, कल तो फिर फाका,हमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है।दौर आतंक, लूट का ऐसा,साँस लेना भी इसमें भारी है।जिससे मतलब उसी से बस नाता,आज की ये ही होशियारी है।अब तो ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   4:03am 5 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बहर 1222 1222 1222 1222नया आया है संवत्सर, करें स्वागत सभी मिल के;नये सपने नये अवसर, नया ये वर्ष लाया है।करें सम्मान इसका हम, नई आशा बसा मन में;नई उम्मीद ले कर के, नया ये साल आया है।लगी संवत् सत्ततर की, चलाया उसको नृप विक्रम;सुहाना शुक्ल पखवाड़ा, महीना चैत्र तिथि एकम;मिलाएँ हाथ सब से ही, ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   3:34am 25 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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दोस्तो दिल का सदर घर का सदर होने को है,बा-बहर जो थी ग़ज़ल वह बे-बहर होने को है,हम मुहब्बत के असर में खूब पागल थे रहे,जिंदगी की असलियत का अब असर होने को है।(2122×3  212)*********उल्टे सीधे शब्द जोड़ कर, कुछ का कुछ लिख लेता हूँ,अंधों में काना राजा हूँ, मन मर्जी का नेता हूँ,व्हाट्सेप के ग्रूपो... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   6:35am 12 Mar 2020 #हास्य व्यंग्य मुक्तक
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