POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: अच्युतम केशवम की कविताएँ

Blogger: 
हैं आँखे अभ्यस्त तिमिर की और उजाले गड़ते हैं.उल्लू के इंगित पर तोते दोष सूर्य पर मढ़ते हैं.-बोटी एक प्रलोभन वाली फेंक सियासत देती है .हम कुत्तों जैसे आपस में लड़ते और झगड़ते हैं.-यूँ तो है आजाद कलम बस पेशा करना सीख गयी.चारण विरुदावलियों को ही कविता कहकर पढ़ते हैं.-लेखपाल जी दस फ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   9:54am 14 Oct 2017 #
Blogger: 
क्या मेरी सामर्थ्य माँ ,रचूँ गजल या गीत .मैं तो तेरी बाँसुरी ,गुँजित तव संगीत ..-हिन्दी भाषा हिन्द की ,कल्याणी सुखधाम .जहाँ उपेक्षित यह रहे,वहाँ विधाता वाम ..-विश्व क्षितज पर देश का ,दिन-दिन बढ़े प्रताप .पर अवलम्बन अनुकरण ,त्याग सकें यदि आप ..-हिन्दी के उत्कर्ष में ,हम सबका उत्क... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   4:37am 10 Apr 2017 #
Blogger: 
शब्द मौथरे हो जाते हैं ,सांसे थकती हैं.भाषण कला तुम्हारे आगेपानी भरती है .मुंह से कुछ कहते तो उत्तरभी देते बनता,पानी की भाषा में आँखेंबातें करती हैं..... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   7:24am 22 Mar 2016 #
Blogger: 
अरे!धनुर्धर लक्ष्य वेध तब ही तो होगाजब खिंची हुई इच्छा की प्रत्यंचा छोड़ोगे-तबतक जप-तप और याग से क्या होना पूजा केशवम ,अच्युतम केशवम एवं छंद केशवम हैराग-द्वेष के बादल जबतक नहीं फटेंगेगंगा मैया कितने पापों को धोएगीअगर दिलों के खाई-खन्दक नहीं पटेंगेये दर-दर पर शीश झुका... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   6:55am 22 Mar 2016 #
Blogger: 
सूरज की मकडी नेकिरणों का जाल बुना .-हम शहरी सोये थे .सपनों में खोये थे.कपटी ने जानबूझबेढब सा समय चुना .सूरज की मकडी नेकिरणों का जाल बुना .-हरी-श्रंगार झड़ते थे.इन्दीवर बढ़ते थे .हम जागे टी.वी.परमौसम का हाल सुना .सूरज की मकडी नेकिरणों का जाल बुना .-हम ठहरे विज्ञानी .नवयुग के नवज्... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   6:52am 22 Mar 2016 #
Blogger: 
“सचं नेरसी अन्तान्म कन्सो उपहतो यथाएस पत्तो सि निब्बानं सारम्भो न विज्ज्ती “(धम्मपद गा.१३४)टूटे हुए कांसे के थाल को पीटने पर भी आवाज नहीं करता ,वैसे ही यदि तुमने स्वयम को निशब्द कर लिया तो एसा समझो कि तुम निर्वाण पा गये ,क्योंकि प्रतिक्रिया तुम्हारे लिए जाती रही .ये पंक... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   6:49am 22 Mar 2016 #
Blogger: 
अब तो अरुणोदय हो.नूतन सूर्य उदय हो.-उदयाचल से दिगदिगन्त तकफैली अभिनव लालिमादीप करो विश्राम ज्योति सेअधिक तुम्हारी कालिमाशरणापन्न तिमिर से रण काअब न अधिक अभिनय होअब तो अरुणोदय हो.नूतन सूर्य उदय हो.-अब तो धूप धरा पर उतरेचढ़ किरणों की पालकीफिर आँगन में सजे रंगोलीमोती और ... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   6:46am 22 Mar 2016 #
Blogger: 
मेरा संसार तुम्हीं से हैमुझको बस प्यार तुम्हीं से हैहै और बात उन्मुक्त गात होकरतुमसे कह सका नहींपर बिना कहे रह सका नहीं………………………….ये अहंकार की प्रतिमा साजो कुलिश गात पर्वत कठोरइसमें रहनी है शेष कहाँजीवन स्पंदन की हिलोरपर इसके अन्तर में जल हैजो करता कल-कल छल-छल हैहै ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   9:03am 9 Feb 2016 #
Blogger: 
खुशीयाँ बहुत गली में तेरी ,प्रतिबंधित प्रवेश है मेरा .-समय शेष रहता पतितों के, घावों पर मरहम मलने से .पग इंकार नहीं करते फिर ,तेरे मन्दिर तक चलने से .सुमिरन तजा सुमिरनी तोडी ,सच है ये अपराध किया है ,पर अनसुनी कराहें करना ,था कुछ कठिन तुझे छलने से .क्या वैकुण्ठ मुझे सुख देगा,ज... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   8:38am 9 Feb 2016 #
Blogger: 
मिला मोबायल पर संदेशलिखा था तुमने अपनापनतुम्हारी बातों की खुशबूभिगो सी गयी समूचा मन-तुम्हारी बातें शहद-शहदहँसो तो खिलने लगें प्रसूनसाथ तेरा है पुरवाईजून की लपट लगे सावन-फेर मुहँ पहले जाना दूरठिठकना फिर पीछे मुड़नादेखना पलक उठा चुपचापलगे रुक गया यहीं जीवन-वेणुधर्... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   8:37am 9 Feb 2016 #
Blogger: 
यह अधखिली कली पाटल कीइसको मेरा ह्रदय समझना।-सावन में बादल तो उमड़े,आँगन कभी भिगो ना पाये।मन-मन्थन के गीत-रतन वे,शायद ही ओठों तक आये।न्यास-ध्यान-मुद्रा तक सिमटीरही साधना प्रेमालय की।आवाहन के साम छंद का,प्राण न उच्चारण कर पाये।मौन-मुखर ध्वनि सी पायल की,मेरी भाषा-विनय सम... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   8:33am 9 Feb 2016 #
Blogger: 
वट नहींमैं दूब होना चाहता हूँ.-रातभर संचित करी जोअंजुरी में चाँदनीअर्घय प्रातःकाल दूँगा सूर्य कोसीख जाऊँ काश कुछ जादूगरीवंशियों में दूँ बदल रण तूर्य कोसिन्धु तट से प्यास प्यासी लौट आयीअतः मीठा कूप होना चाहता हूँवट नहींमैं दूब होना चाहता हूँ.-कह उठी शिशु के जनम कोदेख... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   8:32am 9 Feb 2016 #
Blogger: 
शूल-सुमन के साथ अगर हँसते गाते,रहना चाहो तो तुम मुझसे बात करो।-मत ढूड़ो उनके पद चिह्नों को भू पर,जो मानव रहते ऊँचे आकाशौं में।गौरवान्वित धरती माता के बेटे,निज गणना करवा देवों के दासों में।रार ठानकर नभ चुम्बित आवासों से,कुटिया में रह सको हमारा साथ करो।शूल-सुमन के साथ अग... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   8:31am 9 Feb 2016 #
Blogger: 
मन वीणा के तार बसंती,ढीठ हवा ने किस दिन छेड़े।स्मृति की मंजूषा में संचित,केवल लू के गर्म थपेड़े।पथ के शूलों को शोणित की,रोली से रँगता मैं आया।बनकर सपनों का अन्वेषी निज,मन को ठगता मैं आया।कविता का वरदान विधी ने,मेरी झोली में क्या डाला।और नेमतों से जगती की,जीवन को वंचित क... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   8:24am 9 Feb 2016 #
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3991) कुल पोस्ट (194986)