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Blog: पथराये सपने

Blogger: Amit Anand
समाज कीठिठुरती ठंढ मेफूट पड़ते हैंलड़कियों के फूलमटियालीहरी डंडियों परकोमलपीले सरसों के सेकन्या पुष्प,महकने लगता हैपूरा सीवानखेत खलिहानगमक उठते हैं,आसमान से बरसती ठंढऔरगहरे कुहासों के बीचखिलखिलातीरहती हैलड़कियों कीपौध,कुछनन्हे फूलरौंद दिए जाते हैंआवारा जंग... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   11:28am 20 Jan 2013 #
Blogger: Amit Anand
बड़ा निर्लज्ज है मेरा मकान मालिक मांगने को तो माचिस की तीलियाँ तक उधार मांग लेता है हाँ मगर देने को दुआ तक नहीं देता सरकारी मुलाजिम है "मकान मालिक"**------------------------------------------(यथा राजा तथा प्रजा )... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   4:33pm 26 Dec 2012 #
Blogger: Amit Anand
अरसा पहलेजब मंदिरों मे हुआ करती थीसच मुच की आरती ,मस्जिदें अजान मे गुनगुनाती रहती थीं,तबजबकि भूख ...माँ के हाथों की लज्जत मे हुआ करती थी,उसी दौर मेएकाएक पागल हों गया था आदमीकलाईयों मे राखी की जगहतलवारें आ गयी थींऔरतें -बच्चे काट डाले गए थेजानवरों की तरह,हाँ एक दम उसी दरमि... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   12:28pm 15 Nov 2012 #
Blogger: Amit Anand
मैं दंगाई नहींमैं आज तकनहीं गयाकिसी मस्जिद तककिसी मंदिर के अन्दर क्या हैमैंने नहीं देखा,सुनोरुकोमुझे गोली न मारोभाईतुम्हे तुम्हारे मजहब का वास्तामत तराशो अपने चाक़ूमेरे सीने पर,जाने दो मुझेमुझेतरकारियाँ ले जानी हैंमाँरोटिया बेल रही होंगी!*amit anand ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   12:27pm 15 Nov 2012 #
Blogger: Amit Anand
बरसती दुपहरियों मे बरामदे पर चारपाई डाले हुए मन .... हवाओं के साथ बहती आती हुयी बूंदों मे भीगता ... सिहरता अतीत की ओर भागता है!बीते दिन याद आते हैं.... एक अनदेखी लेकिन चम्पई एहसास समेटे हुए एक लड़की... जिसकी सांस सांस मे कविता के शब्द झरा करते थे.... मंदिर की घंटियों के से शब्द!याद ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   12:26pm 15 Nov 2012 #
Blogger: Amit Anand
बारिश की प्रतीक्षा मे चिपचिपे हुए दिन मे मन होता है कि झरबेरियाँ खायी जाएँ, खट-मीठी झरबेरियाँ ....मन छुट्टी की घंटी के बाद के बच्चे सा भाग उठता है अतीत की ओर स्मृतियों का बस्ता टाँगे...नदी पर बना पीपे का डग-मग पुल.... किनारों पर खड़े कास के झुरमुट .... जामुन के जंगलों मे चरती हुयी ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   12:25pm 15 Nov 2012 #
Blogger: Amit Anand
vQzhdk }kjk vius lwjt dh gR;kdsu ljks&fook ¼1941---1995½dsu ljks&fook dk tUe ukbthfj;k es gqvk FkkA mudh f”k{kk bcknku fo”ofo|ky; es gqbZ FkhA mUgksus ukbthfj;k ds fo”ofo|ky;ksa es f”k{k.k dk;Z fd;k] ljdkjh lsokes jgs] vkSj O;kikj ls Hkh tqMs jgsAmudk igyk dgkuh&laxzg ^, QkjsLV vkQ ¶ykolZ*¼1987½ dkeuosYFk jkbVlZ izkbt ds fy, ukfer gqvk FkkA mudh vU; jpuk,a ^lkstkCok; % , ukosy bu jkVsu bafXy”k* ¼1985½] ^cklh ,s.M dEiuh% , ekMuZ vQzhdu QksdVsy* ¼1987½] ^fiztulZ vkQ tsCl* ¼1988½ rFkk dforklaxzg ^lkaXl bu , Vkbe vkQ okj*¼1985½ FkhaAos ukbthfj;k d sys[kd&la?k ds v/;{k FksA mUgsa 1995 es rRdkyhu ljdkj }kjk Qkalh ns nh x;h FkhAfiz; tksys]        rqedk... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   12:24pm 19 Oct 2012 #
Blogger: Amit Anand
आज-कलबड़ेएहतियात सेघोलते होंतुमरंगमाटी के दीये मे,औरलाल रंगतुम्हारी उँगलियों के पोर छूमहावर बन जाता है,मेरेआँगन मेतुम्हारे शुभ पाँवउभर आते हैं!*amit anand... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   2:26pm 24 May 2012 #
Blogger: Amit Anand
बजबजाते कचरे से पन्नियाँ खींचते टीन -टप्पर बटोरते हुएबिधनुआ अनाथ गुनगुनाता है हरामीपन का राग ,कल कचरे में गिफ्ट वाली रंगीन पन्नियाँ निकलेंगी आज FATHER'S DAY जो है !!... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   2:25pm 24 May 2012 #
Blogger: Amit Anand
गुजरे समय कीवो "रुमाल"जिसमे ...बाँध करतुमनेअपनी सुधियाँ दी थीं,जिन्दगी की भाग दौड़ मेगुम गयी...गुम हों गया उसका कढाई दार किनाराउसकी गमकती महकउसमे लुभाती हुयीतुम्हारी नेहसब...शायद मैं उसेकिसी जाती हुयी ट्रेन मे भूल आया,तुम्हारी सुधियाँ मुझसे दूर भागती जा रही हैंशायदस... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   2:24pm 24 May 2012 #
Blogger: Amit Anand
दूरवहाँ पलाश के पास सेमुड गयी हैनयी बनी सड़क,अब इस सूनी पगडण्डी परकोई नहीं आता,दूर पहाड़ों की ओर सेबांसुरी बजातायदा कदा आनेवालाचरवाहा भी नहीं आयाअरसा हुआ,फिर भीशाम ढलते हीवोसूनी पगडण्डी परजला देती हैएक दीप,गाते हुएएक पहाड़ी गीत-"कोई ...आखिर क्यूँ आएगा"!!*amit anand... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   2:23pm 24 May 2012 #
Blogger: Amit Anand
अरसे सेनहीं आयाकोई "बहेलिया"जाल बिछाने / दाना डालने,वर्त्तमान का मैदानसूना पड़ा है,मन के पाखीआतुर होंछटपटाते हैं....बंधन ................ Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   2:21pm 24 May 2012 #
Blogger: Amit Anand
क्या कभीकांच के गिलासों को भी लगती होगी "प्यास"नंगी सड़क परचिलचिलाती लू ने भोगी होगी भला "चिपचिपाती उमस"क्या कभीसाहब के झबरे कुत्ते को भी ...लगी होगी "भूख"क्या कभी किसी कुर्सी ने भी पूंछा होगा ये "प्रश्न" *amit anand... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   11:10am 7 May 2012 #
Blogger: Amit Anand
बड़े स्कूलों की दीवाल भीहड़प लेते हैंबड़े बड़े चेहरे ,उड़ती मछलियाँ गीत गाती तितलियाँमटकते बौने / सेब /आम/अनारगुम जाते हैं बचपन के  की तरह .....उनपे टंग जाते हैंखिचड़ी बालों वाले न्यूटन अजीब सी मूंछों वाले मार्क्स ....बड़े का अदब हमें बड़ा बनाता हों शायद! *amit anand... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   11:09am 7 May 2012 #
Blogger: Amit Anand
मैंअतिक्रमण करता हूँ"अपनी सीमाओं का"मैं लांघ जाता हूँ जाति धर्म की दीवारमैं भाषाओं के पार जाता हूँ,मैं मुखर हों उठता हूँदमन के खिलाफमैं सच बोलता हूँमैं सच सुनना चाहता हूँमुझ पर प्रतिबन्ध लगना चाहिएमैं पश्छिमी बंगाल से हूँ!*amit anand ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   11:03am 21 Apr 2012 #
Blogger: Amit Anand
आज बाज़ार से खरीदनी है एक अदद दरातीकुछ खंजर छूरियाँ... ब्लेड नश्तर ,सभी तेज मगर छुपाये जा सकनेवाले कुछ लुभावने से इतर /परफ्यूम की शीशियाँदो चार मीठे जुमले बाजारू लटके-झटके,औरकल विशिष्टता का मुखौटा लगा कर"मैं महान बनने वाला हूँ"*amit anand... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   7:20am 20 Apr 2012 #
Blogger: Amit Anand
मन के कच्चे प्लास्टर पर साल दर सालजबरिया चढ़ जाता है नया रंगनीला/पीला/ टेराकोटा /वेदारप्रूफ़कभी कभी तो ऐन पिछला वाला ही, हाँ लेकिनभीतर की असल ईंटें हमेशा "सुर्ख लाल" रहती हैं!*amit anand... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   7:19am 20 Apr 2012 #
Blogger: Amit Anand
प्रिये!मैं अगर "मैं" ना होता तो "तुम" होतामैं रचता नित नए अवरोधदरवाजे की क्यारियों पर उजाता तुम्हारे लिए नए नए अपराधबोध ,नए तानो-फिकरों की फसल उगता बात बात पर प्रतिरोध करता,प्रिये!सोचो अगर "मैं" मैं ना होता तो मैं भी टाँगता अपना वजनी भीगा क्रोध तुम्हारी नेह की महीन डोर पर, ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   7:18am 20 Apr 2012 #
Blogger: Amit Anand
दुद्धी घुली दवातें कहाँ गयींकहाँ गयीं -कलमुही तख्तीमासाब की छपकी...गोल चक्केवाला "भोपूबाजा"फिरंगियों का खेल कागज के रंगीन चश्मे कहाँ गए? ओहतुम सही थे दादातुम्ही ने कहा था उस रोज़भाप उगलती रेल गाडी को उंगली दिखा कर ..बादलों की सी आवाज मे"छुटके"एक रोज़ मैं चला जाऊँगा इन पट... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   4:02am 17 Apr 2012 #
Blogger: Amit Anand
बार बार मन मे हुलासें भर, आँगन की किलकारियों के सपने देखती "नौगावां वाली भौजी" आज भोर मे चल बसीं!पैंतीस- चालीस साल की जिंदादिल हंसमुख भौजी की गोद अभी तलक सूनी ही थी! साल दर दर साल से बार बार उनकी कोख मे मौसमी बादलों की तरह एक अंखुआ पनपता और कोंपलें फूटने से पहले ही ... आसमान सू... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:25pm 9 Jan 2012 #
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