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जीवन यात्रा , एक दृष्टिकोण

 आज मामूली सी कहासुनी भी वाद-विवाद में बदल जाती है। राह चलते जरा सी झड़प भी कब हिंसा में तब्दील हो जाती है कि अन्जाम काबू से बाहर हो जाता है , कह नहीं सकते। इस भागती-दौड़ती दुनिया में हर कोई व्यस्त भी है और कई तरह की समस्याओं से जूझ रहा है। लगातार बढ़ते हुए ट्रैफिक और पार्किं...
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  October 10, 2017, 2:16 pm
वो बिज़ आने तलक ग्लास पर ग्लास चढ़ाता जा रहा था। आज की युवा पीढ़ी या किशोरावस्था के बच्चे एल्कोहल , ड्रग्स या नशे के लिए प्रयोग की जाने वाली दूसरी वस्तुओं को बड़ी आसानी से से ग्रहण कर लेती है। उसे सब्जबाग दिखाये जाते हैं कि पार्टी करना , मौज-मस्ती करना ही जीवन का ध्येय है।  औ...
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  August 15, 2017, 1:15 pm
सभी लोग छुट्टियों का भरपूर लुत्फ़ उठाते हैं। पहाड़ों की हसीन वादियों का सफर हो या गोवा , महाराष्ट्रा , दक्षिण भारत या देश-विदेश के समुद्री तटों की सैर हो ; हर बार किसी नई जगह को नापने की इच्छा मन में जागती है। तरह-तरह के लज़ीज व्यँजन और रैस्टोरेन्ट्स का स्वाद मन को लुभाता है। ...
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  June 26, 2017, 10:28 pm
हम सभी लोग ज्यादातर अपनी अपनी परिस्थितियों के गुलाम हैं। ऐसा क्यों होता है कि कई बार किसी से बात करते हैं तो वो अचनाक ऐसी प्रतिक्रिया देता है जो हमारी आशा के विपरीत होती है। हमें हैरान कर देने वाले नतीजों का सामना करना पड़ता है। किसी के दिल में क्या चल रहा है , कोई नहीं जा...
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  June 21, 2017, 2:21 pm
न साथ चलने के सौ बहाने साथ चलने का बहाना एक नहीं  जब रिश्ते में दरारें पड़ने लगतीं हैं तो ऐसा ही होता है। प्यार का पौधा भी पानी माँगता है। वही रिश्ता जो सबसे हसीन था वही कब चुभने लगता है कि नश्तर बन जाता है , पता ही नहीं चलता। वही साथी जिसके बिना रहा नहीं जाता था आज सा...
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  May 26, 2017, 11:37 am
सफर में साथी , समां और सामाँ सब तय है , सब वही रहेगा ; अब ये समन्दर की मर्जी है के वो भँवर में तुझे गर्क कर दे या ज़िन्दगी के किनारों पर ला पटके।  इस सारी छटपटाहट को अर्थपूर्ण बना। किस ओर तेरी मन्जिल और किधर जा रहा है तू। ऐ नादान मुसाफिर , अनमोल तेरा जीवन , कौड़ियों के भाव जा रहा ...
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  February 16, 2017, 3:00 pm
समाज में अपराधों का बढ़ता ग्राफ लगातार ये कह रहा है कि आदमी मन के तल पर बीमार है। उपचार भी मन के तल पर ही करना होगा। प्राण-शक्ति की कमी या तो उसे भरमा कर , भटका कर अपराध की दुनिया में सुकून या कहो मजा तलाशने धकेल देती है या अवसाद की तरफ धकेल देती है। लगातार बदलती हुई इस दुनि...
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  March 26, 2015, 7:14 am
दिल दिमाग बुद्धि के लिये अंग्रेजी के शब्द-कोष में शब्द हैं , मगर मन के लिये कोई शब्द नहीं है।  इसी तरह सँस्कार व सँस्कार-शीलता के लिये के लिये  भी अंग्रेजी में कोई सटीक शब्द नहीं है।  हर भाषा की अपनी विशेषता होती है , बात कहने का अपना अन्दाज़ होता है ;दूसरी भाषा में अनुव...
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  January 10, 2015, 1:24 pm
क़ैद में है बुलबुल , सैय्याद मुस्कुराये फँसी है जान पिंजरे में , हाय कोई तो बचाये कोई तो हाथ-पैर छोड़ कर दुबक कर बैठ जाता है और कोई सारी रात टुक-टुक कर पिंजरे की तारों को या हाथ आई हुई लकड़ी की सतह या कपड़े को सारी रात कुतर-कुतर कर काटता रहता है ;जिस रोटी के टुकड़े के लिये व...
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  December 13, 2014, 2:41 pm
बड़ी कोशिशों से पासपोर्ट रिन्यू करवाने के लिए अपोइन्टमेंट मिला था। सारी औपचारिकताएँ पूरी हुईं तो एक एफ़िडेबिट बनवाने की क्वैरी निकल ही आई।  टीना काउन्टर से एफ़िडेबिट कहाँ से और कैसे बनेगा पूछ कर जैसे ही मुड़ी , ऑफिसर पास ही खड़ी दूसरी लड़की के लिए कह रहा था कि इन मैडम को भ...
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  October 29, 2014, 2:30 pm
नारी अबला नहीं है।  वहशी दिमागों का जोर किसी पर भी उतना ही कारगर है , चाहे वो नर हो या नारी हो ; क्योंकि वो तो उनका सुनियोजित मकड़जाल होता है , बिना तैय्यारी जिसमें कोई भी फंस सकता है।  नारी उपभोग की वस्तु नहीं है।  पुरुष अपने अहम पर चोट बर्दाश्त नहीं करता , इसे ताकत नहीं ...
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  September 8, 2014, 10:29 am
किसी शायर ने सटीक कहा है।  'हम अपने -अपने खेतों में 'गेहूँ की जगह , चावल की जगह ,ये बन्दूकें क्यूँ बोते हैं 'नफ़रत की चिन्गारी को हवा देते ही शोले भड़क उठते हैं।  चन्द लोगों के सीने की नफ़रत व्यवसाय का रूप क्यों ले लेती है ? कम उम्र का युवा मन जिसे कच्ची मिट्टी की तरह जिधर च...
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  July 9, 2014, 4:42 pm
सड़क पर गुजरते हुए कुछ अठारह-बीस साल के लड़कों को बातें करते सुना।  वो अपनी भाषा में गालियों का प्रयोग बड़ी हेकड़ी के साथ कर रहे थे ; जैसे ये उनकी शान बढ़ा रही हों।  कम पढ़े-लिखे लोगों के साथ-साथ सभ्य बुद्धि-जीवी कहे जाने वाले लोग भी कम उद्दण्ड नहीं हैं।  हमारे फिल्म-जगत ने...
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  April 24, 2014, 3:20 pm
 अपने एक ब्लॉग का अवलोकन कर रही थी कि ट्रैफिक स्त्रोत देखा , कि किस किस जरिये से कोई उस ब्लॉग तक पहुँचा था ; गूगल सर्च पर की-वर्ड 'आत्महत्या कैसे करूँ 'लिख कर कोई मेरे उस ब्लॉग तक पहुँचा था , हालाँकि  मेरे ब्लॉग पर उसे मन को उठाने वाली सामाग्री ही मिली होगी।  बहुत दुख ...
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  April 3, 2014, 3:52 pm
वो दोनों प्रिन्टर्स बुक-फेयर में एक ही स्टॉल शेयर कर रहे थे , मगर एक-दूसरे को कितना सहयोग दे रहे थे , इस बात से जाहिर है कि जब एक को दूसरे की किताब के विमोचन के अवसर पर किसी एक मेहमान के आने पर हॉल न. बताने के लिये कहा गया तो उसने साफ़ इन्कार कर दिया कि उसे याद नहीं रहेगा।  और...
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  March 27, 2014, 2:41 pm
मौसम में छाया कोहरा और अस्पतालों में डिप्रेशन के मरीजों की बढ़ती सँख्या , चिन्ता का विषय है।  आज आदमी बाहर के मौसमों को अपने अन्दर उतार बैठा है।  बाहर खराब मौसम तो उदास , बाहर खिली धूप तो चेहरे पर भी मुस्कान , अहम् को पुष्ट करने वाला सामान तो आदमी खुश , नीचा दिखाने वाली ...
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  February 26, 2014, 10:30 am
हम जब अपनों से झगड़ा करते हैं तो सिर्फ उसके अवगुण देखते हैं ,गुणों को भूल जाते हैं।  लिस्ट बनाने बैठेंगे तो उसके गुणों की या फेवर्स की लिस्ट लम्बी होगी , मगर हमें तो वही दुर्गुण दिखता है।  A few drops of yogurt curdles the milk or a single drop of poison is sufficient to deteriorate the substance. जब भी कोई गुस्सा करता है ,  तब उसके दिल ...
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  December 30, 2013, 4:54 pm
गुरु सँभाल के कीजिये। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि गुरु के बिना गति नहीं होती है। ऐसा इसलिये कहा गया है कि गुरु हमारा हमारे अपने ही असली स्वरूप यानि एक अदृश्य सत्ता से जुड़े होने का परिचय करवाता है।  राम-रहीम तो माध्यम भर हैं ; क्योंकि साकार में मन टिकता है ,इसलि...
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  September 22, 2013, 4:51 pm
जल प्रलय से उपजी स्थितियाँ बड़ी विकट हैं। जान-माल की हानि के साथ समस्या सिर्फ पुनर्वास की नहीं है , बल्कि पीछे बचे लोगों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की भी है। त्रासदी में जान गँवा चुके लोगों की लाशों के ढेर किसी महामारी का रूप भी ले सकते हैं। जो लोग इस त्रासदी के मूक गव...
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  July 4, 2013, 10:16 pm
न जाने कितनी दामिनियाँ , गुड़ियाँ आदमी की कुत्सित सोच की भेंट चढ़ गईं। कहते हैं कि विध्वंस के लिये आदमी जितनी जल्दी एकजुट होता है , उतनी जल्दी सृजन के लिए नहीं होता। दामिनी की बदनसीबी देखिये कि उन छह दरिंदों में से एक ने भी इस काण्ड को अंजाम देने से रोकने के लिये विरोध तक ...
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  April 28, 2013, 8:01 am
गाँव शहर एक होने लगेदुनिया ग्लोबलाइज़ होने लगीअन्तर्जाल की दुनिया ने हजारों मील दूर बैठे व्यक्ति के भी अन्तरंग पलों में झाँक लेने की सुविधा हमें दी है। गूगल सर्च तो जैसे हर मर्ज का इलाज हो। कैसा भी विषय हो हर सम्भव जानकारी और हल के सारे औप्शन्स  बस एक क्लिक के साथ हाजि...
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  March 17, 2013, 12:00 am
उसने अपनी माँ से पूछा कि " माँ , हमारे रिश्तेदारों को तो इस बारे में पता नहीं  चला है ?" उसे क्या पता कि कितने प्रदर्शन , धरने , मौन सभाएँ व कैंडल-मार्च उसके लिए किये गये हैं । अखबारों में , टेलीविजन , नेट सारी दुनिया की ख़बरों में है वो । उसकी वेदना सारे देश की वेदना है ।...
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  January 10, 2013, 6:25 pm
किसी भी दुख का इलाज प्यार हो सकता है । मगर शरीर से या रिश्ते से प्यार तो भुलावा है ...छलावा है । जी तो  आप बाहरी आधार पर ही रहे हो , जो कभी भी आप के हाथ से फिसल सकता है । इसलिए ऐसा आधार जो अपने क़दमों चलना सिखाये , अभ्यास में लाना जरुरी है । ये आधार है अपनी चेतना के अनुभव का । जै...
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  November 6, 2012, 10:36 pm
आज फिर अख़बार के साथ साईं बाबा के पर्चे बांटने पर महिमा व पर्चे न बाँटने पर होने वाले नुक्सान के बारे में  लिखे हुए पर्चे बाँटे गये । ये उनकी महिमा का प्रचार प्रसार नहीं है , ये तो एक झूठी आस्था का प्रचार है , निसन्देह ये किसी एक के ऐसा ही परचा पाने पर पैदा हुए डर का प्रतिफल ...
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  October 5, 2012, 4:38 pm
अरे भई ये तो कैमिकल लोचा है ।  खुदा ने जब इन्सान की मिट्टी को गूंथा होगा , किस अनुपात से रन्ज का रँग मिलाया होगा । आज भी डैस्टिनी के जरिये कभी थोड़ा कम कभी थोड़ा ज्यादा फ्लो करता रहता है हमारी मिटटी में ।कोई बेवजह उदास है , कोई बहुत तीव्र प्रतिक्रियाएँ देता है । हम तो इसे ...
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  September 27, 2012, 11:30 am
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