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गीत-ग़ज़ल : View Blog Posts
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गीत-ग़ज़ल

मान-अपमान भी तय है ,वितृष्णा भरी आँख का सामान भी तय है न भटकना ऐ दिल , तुझको सहना है जो वो तूफ़ान भी तय है न राहों से गिला , न कश्ती से शिकायत मुझको तूफानों के समन्दर में , मेरा इम्तिहान भी तय है डूबेंगे कि लग पायेंगे किनारे से हम  है किसको पता ,मगर अपना अन्जाम भी तय ह...
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  September 21, 2017, 3:09 pm
आज फुर्सत में हूँ मैं ,कहाँ हो बोलो प्यारे तुमसे हैं बातें करनी,आ जाओ कान्हा प्यारे    सदियों से देखें रस्ता ,ये आँखें जागी-जागी राह में ऐसे लगीं हैं , जैसे हों कोई अभागी मुरली की तान सुनाने ,कुछ मेरी भी सुन जाने आ जाओ कान्हा प्यारे गये तुम कौन गली हो ,तुम्हारे ब...
गीत-ग़ज़ल...
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  August 14, 2017, 5:15 pm
ये मेरे साथ चल रहा है किसी आँच का धुआँ इतनी बदली हुई फ़िज़ाँ है के होशो-हवास में नहीं है समां ऐ वक़्त , इस ज़िल्लत का शुक्रिया ,ये पीड़ा जो मुझे ले आई है कसक के इस मुकाम तक सीखा गई है जीना , टूट जाने तलक ज़िन्दगी ने बड़ी भारी कीमत माँगी है जो राह पहुँचाती है ज़िन्दगी तक , उसक...
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  July 27, 2017, 2:11 pm
ये देश बदल रहा है , इतिहास रच रहा है गाँधी के सपनों का भारत , करवट बदल रहा है थोड़ी सी कस है खानी , थोड़ी सी परेशानी अपने हितों से बढ़ कर , पहचानो है देश प्यारा आओ हम आहुति दें , इक बेहतर कल का निर्माण चल रहा है ये देश बदल रहा है उग्रवाद , कालाबाजारी और जाली नोटों का धन्धा...
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  December 5, 2016, 7:48 am
दिल के बदले दिल चाहियेहमको सौदा खरा चाहियेमुश्किल नहीं है बहुतहमको रिश्ता सगा चाहियेआहें ही बसती रहींदिल दुआ से भरा चाहियेजी भर के रो लें मगरतेरा काँधा जरा चाहियेपतझड़ के मौसम में भीदिल हमको खिला चाहिये लाइये , शेख जी लाइये हमको मौसम हरा चाहिये ...
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  June 1, 2016, 1:03 pm
गुलाब को उसके काँटों की वजह से मत छोड़ो अवगुणों की वजह से गुणों को मत छोड़ो गुजारा है जो वक़्त साथ-साथ , वो बोलता ही मिलेगा खुशबुएँ साथ-साथ चलती हैं ,वरना दिल तन्हा ही मिलेगा सारी खरोंचें जायेंगी भर ,गुलाब सा चेहरा दमकता ही मिलेगा गुलाब को उसके काँटों की वजह से म...
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  March 10, 2016, 2:02 pm
ऐसे उठ आये तेरी गली से हमजैसे धूल झाड़ के कोई उठ जाता हैयादों की गलियों में थे अँधेरे बहुतवक़्त भी आँख मिलाते हुए शर्माता हैवक़्ते-रुख्सत न आये दोस्त भीगिला दुनिया से भला क्या रह जाता हैलाये थे जो निशानियाँ वक़्ते-सफर कीरह-रह कर माज़ी उन्हें सुलगाता है अब मेरे हाथ लग गया अ...
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  October 7, 2015, 5:14 pm
तू न देख के कितना है रन्ज रिश्ते में अपने,तू ये देख के क्या क्या है निभाया मैंने सारी दुनिया मिलती है किसे ,टुकड़ों में मिली धूप को कैसे गले लगाया मैंने तू मुझसे जुदा ही नहीं है ,कैसे समझाये कोई अपने ही जिगर को बोले जो कभी भी तुम सख़्त होकर ,दरक गया कुछ तो कैसे सँभाला म...
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  September 18, 2015, 4:24 pm
और हाँ नैनीताल जैसे ज़न्नत , और अब विदा लेने का वक्त आ चला है ....कोई मेरे हाथों से जन्नत को लिये जाता है मेरे ख्वाबों के फलक को , लम्हों में पिये जाता है घबरा के मुँह फेर लेती है आशना अक्सर अब ये आलम है के दिल दीवाना किये जाता है  अपने ही शहर में मुसाफिर की तरह रहे हम अप...
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  July 31, 2015, 6:07 pm
इतने साल इस शहर में बिता कर अब जाने का वक्त हो चला है , सँगी-साथियों से बिछड़ने का वक़्त …हम तेरे शहर से चले जायेंगे कितना भी पुकारोगे , नजर न आयेंगे अभी तो वक़्त है , मिल लो हमसे दो-चार बार और फिर ये चौबारे मेरे , मुँह चिढ़ायेंगे भूल जाना जो कभी , दिल दुखाया हो मैंने तेरा&n...
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  July 20, 2015, 11:16 am
तू जिसे ढूँढ रहा है , वो तो इश्क है हक़ीकी दुनिया की महफ़िलों में , मिलता है वो रिवाजी ज़माने की आँधियों में , रहना है तुझे साबुत मिले न भले कुछ भी , हर हाल में हो राजी ज़िन्दगी का है ये मेला , चाहे तो चल अकेला चाहे तो सजदा कर ले , चाहे तो रख नाराज़ी मिलती नहीं है दुनिया त...
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  June 17, 2015, 10:41 pm
लम्हों ने कीं ख़ताएँ सदियों ने पाईं सजाएँ सहर सी खिलीं फिज़ाएँ मरघट सी सूनीं खिज़ाएँ लफ़्ज़ों में क्या बताएँ हाल अपना क्यूँ सुनाएँ फूलों को जो दिखाएँ काँटों पे चल बताएँ ज़िन्दगी की हैं अदाएँ सहरां में फूल खिलाएँ बर्फ सी ठण्डी शिलाएँ चिन्गारी किस को दिख...
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  June 2, 2015, 1:44 pm
उठते हैं दुआओं में जब हाथ मेरे लब हिलते ही नहीं टूटा है भरोसा मेरा अल्फ़ाज़ निकलते ही नहीं पड़ गये छाले हैं चला जाता ही नहीं है कैसा सफर ये सूलियाँ दिखती ही नहीं और जाऊँ भी किधर रूह का शहर मिलता ही नहीं नहीं बनना है तमाशा मुझको साबुत हूँ , आँख में पानी भ...
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  May 12, 2015, 2:46 pm
आँतक-वाद की रोकथाम कैसे हो .....बदले के बदले चलते रहेंगे खुदा बन के खुद को छलते रहेंगे थोक में बिछी लाशें , क्या सुख है पाया जो भी गया है ,लौट के न आया जख्मीं हैं सीने तो , मरहम लगाओ गूँजती सदाओं को , न तुम भुलाओ कब तक यूँ ख़्वाबों को मसलते रहेंगे कराहता है कोई , नज...
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  April 18, 2015, 10:18 am
हम सब हैं किताब , पढ़ने वाला न मिला या खुदा ऐसा भी कोई ,चाहने वाला न मिला हाथ में हाथ लिये चलते रहे हम यूँ ही दूर तक कोई भी साथ निभाने वाला न मिला चलती रहती है सारी दुनिया यूँ तो दिल से फिर भी कोई पलकों पे बिठाने वाला न मिला गुनगुनाने के लिये चाहिये कोई तो फिजाँ ...
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  March 30, 2015, 10:59 am
व्यस्तता की वजह से होली पर लिखा गीत होली के मौके पर पोस्ट नहीं कर पाई  ....आँखें मलती उठ बैठी है , होली में मन रँग बैठी है एक उजास है अँगना में , चूनर अपनी रँग बैठी है सरक-सरक जाये है चुनरी ,गोरी खुद हल्कान हुई है दूर खड़े हैं कान्हा तब से , राधा जैसे मगन बैठी है ...
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  March 17, 2015, 2:57 pm
ये जो हाले-दिल तुम्हें हम सुना न सकेफासले दिलों के भी हैं ,जो मिटा न सकेतुम्हारे तरकश में तीर शब्दों के हैंज़ख्मी-जिगर निशाँ ,आज तक भुला न सकेउम्र भर पूछते रहे ज़िन्दगी का पता हीफूल तेरी चाहत के ,अरमान खिला न सके   धूप ही धूप उतर आई है शब्दों में छाया कितनी भी रही , ...
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  February 24, 2015, 11:24 am
वो आया तो ऐसे आया ,जैसे हो साँझ का कोई झुटपुट साया हाथ से फिसला वही लम्हा ,समझा था जिसे , जीने का सरमाया हमने देखे हैं गुलाब महकते हुए भी ,काँटों पे चल के , ये हमने क्या पाया सजी हुई थी चाँद तारों की महफ़िल ,फिर ये सानिहा सा क्यूँकर आया दाँव पर दिल ही लगा ,हर बार ,किसके पा...
गीत-ग़ज़ल...
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  February 8, 2015, 3:44 pm
ऐ मुहब्बत मेरे साथ चलो  के तन्हा सफ़र कटता नहीं    दम घुटता है केसाहिल का पता मिलता नहीं   जगमगाते हुए इश्क के मन्जर  रूह को ऐसा भी घर मिलता नहीं    तुम जो आओ तो गुजर हो जाए  मेरे घर में मेरा पता मिलता नहीं    लू है या सर्द तन्हाई है एक पत्...
गीत-ग़ज़ल...
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  February 2, 2015, 11:57 am
न बुलाओ हमें उस शहर में किताबों की तरह बयाँ हो जायेंगे हम जनाज़ों की तरह मुमकिन है खुशबुएँ जी उट्ठें किताबों में मिले सूखे गुलाबों की तरह जाने किस-किस के गले लग आयें हाथ से छूट गये ख़्वाबों की तरह यादों के गलियारे कहाँ जीने देते चुकाना पड़ता है कर्ज किश्तों मे...
गीत-ग़ज़ल...
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  January 21, 2015, 7:58 pm
जाओगे कहाँ कोई सत्कर्म करने तुम चेहरे पे खिला दो किसी के तुम कोई मुस्कान लो हो गया भजन , लो हो गया भजनघर में हों गर माँ-बाप दादा-दादी से बुजुर्ग तन-मन से करो सेवा ,अपना जनम सफल खिल जायेगा उनकी दुआओं का चमन लो हो गया भजन , लो हो गया भजनबन कर के किसी पेड़ से , तुम सह लो सार...
गीत-ग़ज़ल...
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  January 13, 2015, 12:06 pm
तुम्हारी आँखों में हौसला चमकता बहुत है तुम्हारे आस-पास समाँ महकता बहुत है तुम्हें छू कर जो आतीं हैं हवाएँ इनकी नमी से अपनापन टपकता बहुत है तुम्हारे आ जाने से आ जाती है रौनक यादों की क्यारी में तुम्हारा चेहरा दमकता बहुत है तुम्हारी पलकों पर रक्खे हैं जो ख़...
गीत-ग़ज़ल...
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  December 24, 2014, 6:20 pm
मुझको इस दुनिया ने दिया भी तो क्या मेरी निष्ठा पर है सवाल लगा , कद्र-दाँ न मिला सारा गगन है झुका , ज़मीं है नहीं क़दमों तले सो गये नज़ारे भी , ख़्वाबों के सितारे भी दो कदम चल के , मेरे अरमान सारे भीये मोहताजी है क्यूँकर , भीड़ में तन्हा है जहान सारा ही इम्तिहान की घड़ियाँ , व...
गीत-ग़ज़ल...
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  December 12, 2014, 3:16 pm
सपने ओढूँ ,सपने बिछाऊँमगर हकीकत से जी न चुराऊँकुछ ऐसी करनी कर मौला मेरी ज़िन्दगी में भी ,कोई रँग तो भर मौला कितना खोया , कितना पाया लाख सँभाला ,कहाँ टिक पाया चला-चली का मेला है बेशक मेरे हिस्से में भी , कोई रहमत तो कर मौला किसी ने दस्तर-खान बिछाया किसी ने पँखों क...
गीत-ग़ज़ल...
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  December 1, 2014, 11:53 am
है अदब भी फासले के दूसरा नाम होती है यूँ भी इबादत कभी-कभी जंजीरों की तरह रोक लेतीं हैं जो दीवारें भी बोलतीं हैं राहों की इबारत कभी-कभी चुप हो के भले बैठे दिखते हैं जो करते हैं वो भी बगावत कभी-कभी है आसाँ नहीं हवाओं का रुख मोड़ना करता है ज़मीर ही खिलाफत कभी-कभी&n...
गीत-ग़ज़ल...
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  November 16, 2014, 12:39 pm
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