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Blog: बुन्देली संस्कृति - बुन्देलखण्ड

Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
देवेन्द्र सिंह जी - लेखक केशवराव ने ब्राउन के पत्र को कोई महत्व नहीं दिया और जिले का प्रशासन संभाल कर अपने आदमियों को नियुक्त करना शुरू कर दिया। केशवराव तो शुरू से ही जालौन का राज प्राप्त करना चाहता था। जब जालौन राज की गोद का मामला 1840में आया मगर अंग्रेजों ने इनकी मांग ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   12:33pm 13 Jun 2018
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
देवेन्द्र सिंह जी - लेखक झाँसी में सब अंग्रेजों के मारे जाने की सूचना मिलने के बाद अब वहाँ सहायता भेजने का कोई औचित्य नहीं रह गया था अत: ब्रॉउन ने कोसर्ट को उरई लौटने का संदेश भेजा क्योंकि उरई में भी विद्रोह के लक्षण दिखने लगे थे। सैनिक, कस्टम कर्मचारी और पुलिस अधिकारि... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   12:13pm 13 Jun 2018
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
देवेन्द्र सिंह जी - लेखक वर्ष 1857 में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध जो विस्फोट हुआ उसकी तपन को जालौन में भी महसूस किया गया। मंगल पांडे की शहादत और उसके बाद मेरठ में 10 मई को जो कुछ हुआ उसके बाद भी तुरन्त जालौन से लगे जिलों कानपुर और झाँसी में इसकी कोई भी प्रतिक्रिया नही... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   8:51am 9 Jun 2018
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
देवेन्द्र सिंह जी - लेखक जालौन में १८५७ की क्रांति के कारण मेजनी ने कहा है कि स्वतन्त्रता प्रत्येक का निसर्गदत्त अधिकार है अत: इस निसर्गदत्त अधिकार का अपहरण करने वाले प्रत्येक अत्याचारी का उच्छेदन करना भी निसर्गदत्त कर्तव्य है। 1857के स्वतन्त्रता संग्राम के पीछे भी ... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   9:24am 8 Jun 2018
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
1853तक यहाँ पर अंग्रेजों ने अपने पैर मजबूती से जमा कर जब जिले का गठन कर लिया तब उनके सामने यह प्रश्न आया कि जालौन की देशी रियासतों के साथ किस प्रकार का संबंध रखा जाय। जिले का बन्दोबस्त करने में इन राज्यों के गांवों को भी लिया जाय या छोड़ दिया जाय। कानून इनके यहाँ पुराने ही च... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   8:44am 8 Jun 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक पिछली पोस्ट में मैंने कहा था कि जालौन के डिप्टी कमिश्नर ह्वाइट साहब ने भी जालौन के मेमोयर्स लिखे थे और उनको अपनी बन्दोबस्त रिपोर्ट में शामिल किया था। उसको मैं पोस्ट कर रहा हूँ लेकिन दो शब्द इनके बारे में भी सुन लीजिए। जिले के लोगों ने इनके नाम ... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   8:58am 7 Jun 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक इर्श्किन के कार्यकाल में जालौन में बहुत से ऐसे कार्य हुए जो यहाँ के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। संक्षेप में उनका विवरण देखें। अभी तक सरकारी खजाने में जो टैक्स जमा होता था वह देशी सिक्कों में होता था। इर्श्किन ने आदेश किये कि अब वह क... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   6:24am 7 Jun 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक पिछली पोस्ट से आपको पता चल गया होगा कि कालपी के भाग में अंग्रेजों ने किस प्रकार से शासन किया। अब देखे कि जालौन के मराठा राज पर 1840में जालौन के राजा के मर जाने के बाद जब कंपनी सरकार ने अधिकार किया तब यहाँ पर किस प्रकार की व्यवस्था की और कौन-कौन से अध... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   4:59am 6 Jun 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक कालपी और कोंच के शासन में महत्वपूर्ण बदलाव कंपनी सरकार ने 1818में किया जब बुंदेलखंड जिले को दो भागों में विभाजित करके कालपी को उत्तरी बुंदेलखंड का मुख्यालय बना दिया। कुछ परिवर्तन और देखने को मिलते हैं। 1818 में, भदेख परगना जिसको अंग्रेजों ने कानप... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   4:33am 6 Jun 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक कंपनी सरकार ने नाना गोविंदराव सर एक नई संधि करने को कहा। इस संधि में 10धाराएं थीं। इस संधि के अध्ययन से एक बात पता चलती है और उसको ध्यान में भी रखना पड़ेगा कि इसी तिथि से ही जालौन के मराठा शासकों को राजा का पद प्राप्त हुआ। पहले ये पेशवा के यहाँ मु... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   4:29am 6 Jun 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक पिछली पोस्ट में मैंने बतलाया था कि अब यहाँ पर दो शक्तियों का शासन शुरू हुआ। जालौन में मराठा राजा गोविंदराव नाना का और कोंच तथा कालपी में कंपनी सरकार का। आइए पहले देखें कि अंग्रेजों ने अपने जीते भाग कालपी और कोंच में किस प्रकार की शासन व्यवस्थ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   7:07pm 26 May 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक कल की पोस्ट अमीर खां के सलैया पहुँचने पर समाप्त की थी। उससे आगे का इतिहास यह है कि सलैया और अमीटा के जमीदारों ने अपने पांच सौ आदमी अमीर खां को कंपनी की फ़ौज से लड़ने के लिए दिए। कंपनी की फ़ौज कोंच पहुँचती उससे पहले ही अमीर खां ने रात्रि में ही अपनी फ़... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   4:14am 26 May 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि हार जाने के बाद जालौन नरेश नाना गोविंदराव को अंग्रेजों के कैम्प में हाजिर होना पड़ा। यह घटना 18 फ़रवरी1804की है जब नाना अपने सहायकों के साथ अंग्रेजों के कैम्प में हाजिर हुए थे। कूटनीति के चतुर खिलाडी अंग्रेजों ने नाना गो... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   7:00pm 18 May 2018
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
देवेन्द्र सिंह जी - लेखक आपको पता चल गया होगा कि जालौन के मराठा राज में अंग्रेजों ने किस प्रकार से अधिकार किया, लेकिन यह जानकारी अभी अधूरी ही है क्योंकि पिछली किसी पोस्ट में मैंने लिखा था कि कालक्रम को बनाए रखने के लिए मराठा राजवंश के इतिहास को अभी आगे लिखता हूँ। कालपी... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   11:07am 12 May 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक लक्ष्मीबाई तो खुद अभी कम उम्र की ही थी। अपने भाई को जालौन की गद्दी पर बैठाने पर तो सफल हो गई उसकी संरक्षिका भी बन गई पर राजकाज चलाने का कोई अनुभव नहीं था। चौदह वर्ष की लक्ष्मीबाई पर लोग अपना प्रभाव डालने लगे। राज के पुराने अनुभवी दीवान भाष्कररा... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   8:59am 1 May 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक पिछली पोस्ट में इस जनपद जालौन में लेसली के अभियान की चर्चा हुई थी। इससे आगे का इतिहस यह है कि जब अंग्रेजी सेना यहाँ से निकल गई अंग्रेजों ने कालपी का किला गंगाधर राव को वापस कर दिया। इस प्रकार यहाँ पर मराठों का राज बना रहा। 1898तक गंगाधरराव बल्लाल ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   8:30am 1 May 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक गंगाधरराव ने कालपी सहित अपने सब राज में फिर से अधिकार तो कर लिया मगर उनकी परेशानी खत्म होने वाली नही थी। जवाहर सिंह जाट को जैसे ही गंगाधरराव द्वारा कालपी पर अधिकार करने की सुचना मिली उसने अपने दीवान दाना शाह को गंगाधरराव को सबक सिखाने के लिए इ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   7:36am 21 Apr 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक इतिहासकारों ने जब पानीपत के युद्ध में मराठों की हार का विश्लेषण किया तो उसमें एक कारण गोविन्द पंत की अक्षमता को भी बतलाया। उनके अनुसार पेशवा ने एक बड़ी गलती यह की थी कि उसने गोविन्द पंत के विरुद्ध, जिस पर भाऊ की आर्थिक कठिनाइयों को दूर करने का द... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   7:26am 21 Apr 2018
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देवेन्द्र सिंह जी- लेखक 14मार्च, 1760को पेशवा बालाजी ने अपने चाचा भाऊ को अब्दाली का मुकाबला करने के लिए सेना की कमान सौंप कर पूना से दिल्ली के लिए भेजा। जालौन के गोविन्द को भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। उनमे से प्रमुख थी मराठी सेना के लिए रसद और धन की व्यवस्था तथ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   7:16am 21 Apr 2018
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक आपने जाना कि गोविन्द पन्त बल्लाल खेर अपने छोटे पुत्र गंगाधर गोविन्द के साथ कालपी आए और किले में अपना मुख्यालय बनाया। आज वहाँ से आगे की कुछ बातें आपसे साझा करता हूँ। गोविन्द पन्त को शुरू में जो इलाका मिला था मगर हीरा लाल के मध्य प्रदेश के इतिहा... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   8:35am 12 Apr 2018
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