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Blog: आरामकुर्सी से-

Blogger: Jaydeep Shekhar
पाँचवी तक घर से तख्ती लेकर स्कूल गए थे...स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत थी इस पापबोध के साथ कि विद्यामाता नाराज न हो जायें,कक्षा के तनाव में पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर ही हमनें तनाव मिटाया था।स्कूल में टाट-पट्टी की अनुपलब्धता में घर से बोरी का ट... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   11:58am 12 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
आजकल कोई गर्मियों में घर के बाहर यानी आँगन में या छत पर नहीं सोता।नगाँवों में, न कस्बों में और न ही शहरों में। न गाँव पहले जैसे रहे, नकस्बे और न शहर। हर तरफ चोरी-डकैती का डर, गुंडों का डर। वन्यप्राणियों को जंगलों में चारे -पानी की तकलीफ हो रही है तो वे गाँवों की ओरआने लगे है... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   3:57pm 1 May 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
स्कूल जाने के लिए घर के पिछवाड़े के खेत की मेड़ से जाना होता।बना में सबसेपहले बरगद का विशाल पेड़ पड़ता, जिसके नीचे गर्मी के दिन बीतते।बरगद केचबूतरे पर शीष नवाकर बच्चों की टोली खेतों के मेड़ों से होती हुई रामाधीन केबना पहुँचती।फिर स्कूल आ जाता।बप्पा पिछवाड़े के खेत में भदैल... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   12:42pm 22 Sep 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
बचपन में पढ़ा था कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। अब इस उम्र में आकर प्रतीत होता है, भारत कृषि के साथ साथ पर्व प्रधान देश भी है।आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। कल सेघर के बच्चे जन्माष्टमी की झाँकी की तैयारी में लगे थे। कुछ पैसा हमसेलिया,कुछ अपनी दादी,चाची,चाचा ,मम्मी से लिया बा... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   2:58pm 4 Sep 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
यों ही एक पोस्ट पर कॉमेन्ट डालते कुछ याद आया। और मैं हस्बे आदत बह सा गया माज़ी की तरफ़, अतीत की ओर!            मुद्दा था ओशो की एक लम्बी सी पोस्ट जिसका क़द्दावर आकार देख एकबारगी मेरेभी होश फ़ाख़्ता हो लिए। तब याद आये वे दिन जब हम टेस्ट मैच वाली पत्रकारिताकरते थे। ... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   2:52pm 4 Sep 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
दिसम्बरका वक्त था। छठी में दाखिला हुआ था। आज भी याद है वो रविवार का दिन था।सहारनपुर के हकीकत नगर में हम रहते थे। करीब जीरो डिग्री सेल्सियस की सर्दहवाओं के चलते पतंगबाजी करना मेरे लिए प्रतिबंधित था। चोरी-छिपे मैंने एकखास जगह छिपाई हुई पंतग और मांझा निकाला और दबे पांव छ... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:29pm 12 Jul 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
हम लोग सिक्रेट एजेंट हैं, यह बात सिर्फ दो ही लोगों को पता थी, एक तो मुझे, और दूसरा गुड्डू को।सिक्रेट मेंटेन करना ही सिक्रेट एजेंटों का सबसे बड़ा दायित्व है, और हम इस बात को खूब जानते थे।किसी को पता नहीं था कि हमारा गुप्त दफ्तर कहां है। दफ्तर के खुलने और बंदहोने का समय क्या ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   5:24pm 12 Jul 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
मिडिल स्कूल में गणित के मास्टर श्री राम दुलार सिंह क्षेत्र के जानेमाने अध्यापक थे. शिक्षा और चरित्र को वह एक सामाजिक मिशन के रूप में लेतेथे. सुबह दोपहर शाम मास्टर साहब के दरवाजे सभी छात्रों के लिए समान रूप सेखुले रहते. बिना भवन के स्कूल में  मास्टर साहब पीपल के पेड़ के ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   11:55am 16 Jun 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
बहुत छोटी सी थी मैं, लगभग साढ़े तीन वर्ष की, घर हमारा शिवाजी पार्क सेमात्र 20 क़दम की दूरी पर है. बहुत बड़े चौराहे को पार करते ही एक बुक स्टॉलथा, काफ़ी बड़ा सा.हिंदी, अंग्रेज़ी, मराठी, गुजराती अख़बार, पत्र पत्रिकायें, कॉमिक्स की एक रंग बिरंगी दुनिया थी मानो.घर में सबसे छोटी होने कीव... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   3:13pm 23 May 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
(भूमिकागुरुवार को भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रारिपब्लिक टीवी न्यूज चैनलपर बैठे बाकी हिंदुओं पर चिल्ला रहे थे, ‘आप लोग सूडो हिंदू हो’, ‘आप लोगों को हिंदू बोलने में शर्म आती है’,‘नकली हिंदू’.और फिर घनश्याम तिवारी जो कि समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता हैं ‘मौलानाघनश्याम’ ब... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   2:59pm 23 May 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
बात थोड़ी संजीदा है। भारतीय रेल से हम सबका थोड़ा-बहुत लगाव है। कुछ भावनात्मक रिश्ता जैसा भी है। बचपन में हम सब कतारबद्धहोकर रेल का खेल खेलते थे। अगूंठे और उँगलियों के बीच समकोण बनाकर सीटीबजाई जाती थी। छोटी जगहों पर तो आज भी लोग नियमित रूप से टहलने के लिएस्टेशन ही जाते है... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   1:46am 21 Apr 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
... कल परिवार की शादी में सम्मिलित होने जब हम होटल पहुँचे,तोदूल्हा-दुल्हन स्टेज़ से नदारद थे।मालूम हुआ कि दुल्हन सहित परिवार की सभीमहिलाएँपार्लरसे तब तक होटल नही पहुँचीहैं। आजकल सभी शादियों में अमूमन आखरी दिन तक यही हाल होता है। शादी केदिन घर की सभी गाडियाँ पार्लर, बुट... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   2:26pm 20 Apr 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
'मुसलमानों के यहाँ से रवायतें ख़त्म हो रही हैं..पहले मुसलमान ख़ुद रंग खेलते थे.आज के दौर में होली के रंग की छींट पड़ जाने सेकई बार दंगे तक हो चुके हैं.हमारे आज़मगढ़ के गांवों के मुसलमान किसानोंका एक त्योहार होता था 'ऊख बुवाई'मतलब खेतों में गन्ना बोनेकात्योहार..शारिक़ ने ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   2:24pm 20 Apr 2018 #
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