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Blog: दिनेश दधीचि - बर्फ़ के ख़िलाफ़

Blogger: Dinesh Dadhichi
नए शिखर छू लिये मगर वे सारे निर्झर किधर गये ? नयी सदी की भाषा में से ढाई आखर किधर गये ? जिनके घर में होने से घर अपना-अपना लगता था हमको अपने ही घर में वो करके बेघर किधर गये ? हर मुश्किल में साथ रहेंगे ये वादा करने वाले संग हमारे चलते-चलते जाने मुड़ कर किधर गये ?अपने पथ में पथरील... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   12:05pm 22 May 2013 #नयी सदी
Blogger: Dinesh Dadhichi
राजनीति का मंजा खिलाड़ी हाथ जोड़ता आया.एक नए वोटर से उसका परिचय जब करवाया,वोटर बोला, 'अक्सर आपके बारे में सुनते हैं,'उत्तर मिला, 'मगर साबित तो कुछ भी नहीं हो पाया!'... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   7:51am 10 May 2013 #घोटाला
Blogger: Dinesh Dadhichi
17 मई 1988 की रात को पंजाब में रोपड़ के निकट एस वाई एल नहर के निर्माण में लगे इकतीस मजदूरों की आतंकवादियों द्वारा हत्या के बाद शेष मज़दूर बिहार आदि अपने प्रान्तों को लौटने लगे. इस प्रकार के समाचारों से प्रेरित थी यह कविता!हम तो आये थे बाबूजी, लिंक नहर बनवाने कोबहता देखा खून, ... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   2:11pm 9 Apr 2013 #मज़दूर
Blogger: Dinesh Dadhichi
बचपन में जो पत्रिकाएँ या अखबार हम चाव से पढते थे, उनमें "फलों के नाम ढूंढिए" या "देशों के नाम ढूँढिये" जैसी पहेलियाँ बहुत पसंद की जाती थीं. आज पुराने कागज़ों में एक कागज़ पर स्वयं अपनी बनाई हुई ऐसी पहेलियाँ मिली हैं. आप भी इनका आनंद उठाएं और कुछ समय के लिए अपने बचपन में लौट च... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   12:22pm 27 Mar 2013 #
Blogger: Dinesh Dadhichi
Dear friends, if I were to show you some newspaper clippings regarding cases of violence against women in different forms, you would in all probability remind me that piling up evidence for something everyone accepts was totally unnecessary and uncalled for. As a matter of fact, such news till recently evoked little emotional or intellectual response, since these incidents, which I choose to describe as violent manifestations of gender discrimination, were hardly ever considered to be shocking, but (and also, maybe, because) they form an enormously sizeable component of the total crimes committed. Undoubtedly, representing such acts as contemptible and shameful in literary writings as well a... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   1:18pm 24 Dec 2012 #gender discrimination
Blogger: Dinesh Dadhichi
कालिदास के ऋतुसंहार (सर्ग ४, श्लोक ८५) में हेमंत ऋतु का वर्णन:प्रभूतशालिप्रसवैश्चितानिमृगांगनायूथविभूषितानिमनोहरक्रौंचनिनादितानिसीमांतरान्युत्सुकयन्ति चेतः(श्लोक की अंतिम पंक्ति में एक अशुद्धि है. कम्प्यूटर की विवशता समझें.)अब इसका हिंदी में भावानुवाद देखिय... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   3:32pm 18 Dec 2012 #ऋतु
Blogger: Dinesh Dadhichi
शुक्र है कि बच्चे अभी लड़ते हैंवे खूब गुस्सा करते हैंआपस में ही नहीं, माँ-बाप से भीदूसरों से ही नहीं, अपने आप से भीउन्हें गुस्सा आता हैअंदर से निकलता है,चेहरे पर बिखर जाता हैआँखों में, हाथों मेंसाफ़ दिख जाता है.कितनी खुशी की बात हैकि हमारे नन्हे-मुन्नेनहीं होते हमारी तर... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   8:32am 12 Dec 2012 #गुस्सा
Blogger: Dinesh Dadhichi
ओ मेरी अलिखित कविते!अनिश्चित है तुम्हारा रूप, पर संभावनाएँ अनगिनत हैं.शब्द, भाषा, छंद के बंधन नहीं तुम पर,कि तुमने कागज़ों की खुरदरी, मैली, कंटीली-सी ज़मीनों परनहीं रक्खे हैं अपने पाँव अब तक,नहीं तुम जानतींउड़ते हुए, स्वच्छंद, बन्धनहीन भावों कोपकड़ कर पंक्तियों में खड़... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   7:20am 21 Nov 2012 #अलिखित
Blogger: Dinesh Dadhichi
दीपावली का पर्व अपने प्रियजनों, पत्नी और बच्चों के साथ मनाया जाता है. पर कोई-कोई परदेसी किसी मजबूरी के चलते दीवाली पर भी अपने घर नहीं लौट पता. ऐसे समय में वह अपनी पत्नी के नाम क्या सन्देश देता है? प्रस्तुत है कविता:अब की बार भला तुम कैसी दीपावली मनाओगी?साँझ ढले कल छत के ऊपर... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   1:13pm 8 Nov 2012 #दीवाली
Blogger: Dinesh Dadhichi
यह कविता मैंने कॉलिज के दिनों में लिखी थी. आज एक पुरानी डायरी में मिल गयी. 'जैसी है, जहाँ है' आधार पर आप के लिए प्रस्तुत है :फैली हुई चाँदनी में ये मैली-सी परछाइयाँबिखर गयी हैं मौन झील के वक्षःस्थल पर काइयाँमस्त झूमते पत्तों के सर-सर स्वर से भी, देखो तो --अनजानी-सी खड़ी हुई है... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   7:06am 13 Sep 2012 #चाँदनी
Blogger: Dinesh Dadhichi
भूख है, तो सब्र कर .....  "भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ?आजकल दिल्ली में है ज़ेरे-बहस ये मुद्दआ !"दुष्यंत भाई, आपको शिकायत थी कि मुद्दे केवल बहस तक सीमित रह जाते हैं.  हमने तो वह काम कर दिया है कि 'न रहेगा बांस, न बजेगी बाँसुरी.' कुछ भी ज़ेरे-बहस नहीं! दूर हो गयी आपकी शिकायत? ... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   3:49am 27 Aug 2012 #दुष्यंत
Blogger: Dinesh Dadhichi
मेरे अनुरागी मन में ...सत्तर के दशक में एक फिल्म आयी थी -- रजनीगन्धा, जिसमें नायिका विद्या सिन्हा को अमोल पालेकर (मध्यवर्गीय क्लर्क) और दिनेश ठाकुर (ग्लैमरस मीडियाकर्मी) में से एक को चुनना होता है. आज अगर उस फिल्म का नया वर्शन बने, या, नवयुग के अनुरूप 'रजनीगन्धा-२' बने, तो स... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   4:23am 21 Aug 2012 #रजनीगन्धा
clicks 66 View   Vote 0 Like   8:44am 30 May 2012 #mother's day
Blogger: Dinesh Dadhichi
गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर उन दिनों बहुत अस्वस्थ थे. अपने अंतिम जन्म-दिवस से पहले उन्होंने ६ मई १९४१ की सुबह यह कविता लिखी. इसके इकहत्तर वर्ष बाद कल ६ मई २०१२ कों यह कविता पढ़ कर मुझे इसका हिंदी में काव्यानुवाद करने की प्रेरणा हुई. ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   5:15pm 7 May 2012 #टैगोर
Blogger: Dinesh Dadhichi
अगर कोई स्वभाव से ‘अनागत-विधाता’न हो, उसमें ‘प्रत्युत्पन्न-मति’वाली क्षमता भी न हो, तो ‘यद्भविष्य’के रूप में जीने के अलावा वह और क्या कर सकता है? क्या कोई चौथी सम्भावना भी होती है?... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   4:13am 2 May 2012 #
Blogger: Dinesh Dadhichi
(एक झकाझक साफ़-सुथरा तौलिया शोरूम से निकला और बाथ-रूम मेंनहीं पहुंचा. बल्कि वह यक-ब-यक ऐसी हालत में देखा गया कि पानी-पानी हो गया. ऐसा लगा मानो खुद को ढकने के लिए कोई तौलिया ढूँढ रहा हो. दर-असल हुआ यूँ कि टीवी के बीसियों कैमरों की चुंधियाती रोशनियाँ उस पर पड़ राही थीं और उसे किस... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   1:51pm 20 Apr 2012 #
Blogger: Dinesh Dadhichi
Why is the younger generation losing interest in literature? This question and some others related to this were posed to me by Mr. Parveen K. Modi of Haryana Review. My answers in that interview have been published in April 2012 issue of Haryana Review. Here are the questions and answers:Q1: The younger generation is gradually losing interest in literature. Being the Seniormost Professor in the English Department of Kurukshetra University, do you agree with this assessment?Ans.: The expression ‘younger generation’ is quite a broad one, but one cannot fail to notice that the lure of well-paid jobs in areas like computers and management has weaned away the younger generation from the pursu... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   4:22am 9 Apr 2012 #education
Blogger: Dinesh Dadhichi
साठ के दशक में जब मैं स्कूल में पढ़ता था, तब हमारी हिन्दी की पुस्तक में थी वह कविता। आज मुझे उसकी पहली दो पंक्तियाँ ही याद हैं। शायद यह सामान्य-सी कविता ही रही होगी। पर आज मन चाहता है पूरी कविता पढ़ने को। जहां तक मुझे याद है, यह विख्यात छायावादी कवि श्री सुमित्रानंदन पंत की ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   7:55am 10 Jan 2012 #इंटरनेट
Blogger: Dinesh Dadhichi
तुम जानते हो---- यह सब कैसे होता है?कैसे भीड़ पहली बार ऐसी घटना से उत्तेजित होती हैविरोध में नारे लगते हैं जुलूस निकलते हैं.घटना फिर होती है --- इस बार शिष्ट-मंडल जुटते हैं बहसें-चर्चाएं होती हैं.घटना एक बार फिर होती है किसी और स्थान पर किसी और समय पर थोड़े-से परिवर्तन के साथ.अब ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   11:41am 9 Oct 2011 #भ्रष्टाचार
Blogger: Dinesh Dadhichi
ऐसा अक्सर होता है तुम्हें कमरे में बैठे-बैठे घुटन-सी महसूस होती है और तुम उठ कर खिड़की की चिटकनी खोल देते हो तुम्हारा समूचा अस्तित्व बाहर को छिटका-सा पड़ता है तुम बाहर की हवाओं के प्रति भिक्षा-पात्र बन जाते हो. कभी-कभी कोई झोंका भी आता है बाहरी हवाओं के नंगेपन की छुअन-सा रो... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   11:06am 25 Sep 2011 #मौसम
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