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Blog: हिंदी साहित्य मंजिरी

Blogger: Upendra Gughane
संदेसो दैवकी सों कहियौ।`हौं तौ धाय तिहारे सुत की, मया करति नित रहियौ॥जदपि टेव जानति तुम उनकी, तऊ मोहिं कहि आवे।प्रातहिं उठत तुम्हारे कान्हहिं माखन-रोटी भावै॥तेल उबटनों अरु तातो जल देखत हीं भजि जाते।जोइ-जोइ मांगत सोइ-सोइ देती, क्रम-क्रम करिकैं न्हाते॥सुर, पथिक सुनि, मो... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   3:00pm 17 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
फिर फिर कहा सिखावत बात।प्रात काल उठि देखत ऊधो, घर घर माखन खात॥जाकी बात कहत हौ हम सों, सो है हम तैं दूरि।इहं हैं निकट जसोदानन्दन प्रान-सजीवनि भूरि॥बालक संग लियें दधि चोरत, खात खवावत डोलत।सूर, सीस नीचैं कत नावत, अब नहिं बोलत॥- सूरदास... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   3:00pm 16 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
खेलत नंद-आंगन गोविन्द।निरखि निरखि जसुमति सुख पावति बदन मनोहर चंद॥कटि किंकिनी, कंठमनि की द्युति, लट मुकुता भरि माल।परम सुदेस कंठ के हरि नख, बिच बिच बज्र प्रवाल॥करनि पहुंचियां, पग पैजनिया, रज-रंजित पटपीत।घुटुरनि चलत अजिर में बिहरत मुखमंडित नवनीत॥सूर विचित्र कान्ह की ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   3:00pm 15 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
रे मन, राम सों करि हेत।हरिभजन की बारि करिलै, उबरै तेरो खेत॥मन सुवा, तन पींजरा, तिहि मांझ राखौ चेत।काल फिरत बिलार तनु धरि, अब धरी तिहिं लेत॥सकल विषय-विकार तजि तू उतरि सागर-सेत।सूर, भजु गोविन्द-गुन तू गुर बताये देत॥- सूरदास... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   3:00pm 14 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
ऐसैं मोहिं और कौन पहिंचानै।सुनि री सुंदरि, दीनबंधु बिनु कौन मिताई मानै॥कहं हौं कृपन कुचील कुदरसन, कहं जदुनाथ गुसाईं।भैंट्यौ हृदय लगाइ प्रेम सों उठि अग्रज की नाईं॥निज आसन बैठारि परम रुचि, निजकर चरन पखारे।पूंछि कुसल स्यामघन सुंदर सब संकोच निबारे॥लीन्हें छोरि चीर ते... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   3:00pm 13 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
ऊधौ, कर्मन की गति न्यारी।सब नदियाँ जल भरि-भरि रहियाँ सागर केहि बिध खारी॥उज्ज्वल पंख दिये बगुला को कोयल केहि गुन कारी॥सुन्दर नयन मृगा को दीन्हे बन-बन फिरत उजारी॥मूरख-मूरख राजे कीन्हे पंडित फिरत भिखारी॥सूर श्याम मिलने की आसा छिन-छिन बीतत भारी॥- सूरदास ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   3:00pm 12 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
सरन गये को को न उबार्‌यौ।जब जब भीर परीं संतति पै, चक्र सुदरसन तहां संभार्‌यौ।महाप्रसाद भयौ अंबरीष कों, दुरवासा को क्रोध निवार्‌यो॥ग्वालिन हैत धर्‌यौ गोवर्धन, प्रगट इन्द्र कौ गर्व प्रहार्‌यौ॥कृपा करी प्रहलाद भक्त पै, खम्भ फारि हिरनाकुस मार्‌यौ।नरहरि रूप धर्‌यौ कर... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   3:00pm 11 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
व्रजमंडल आनंद भयो प्रगटे श्री मोहन लाल।ब्रज सुंदरि चलि भेंट लें हाथन कंचन थार॥जाय जुरि नंदराय के बंदनवार बंधाय।कुंकुम के दिये साथीये सो हरि मंगल गाय॥कान्ह कुंवर देखन चले हरखित होत अपार।देख देख व्रज सुंदर अपनों तन मन वार॥जसुमति लेत बुलाय के अंबर दिये पहराय।आभूषण ब... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   3:00pm 10 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
रानी तेरो चिरजीयो गोपाल ।बेगिबडो बढि होय विरध लट, महरि मनोहर बाल॥उपजि पर्यो यह कूंखि भाग्य बल, समुद्र सीप जैसे लाल।सब गोकुल के प्राण जीवन धन, बैरिन के उरसाल॥सूर कितो जिय सुख पावत हैं, निरखत श्याम तमाल।रज आरज लागो मेरी अंखियन, रोग दोष जंजाल॥- सूरदास  ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:00pm 9 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
कहां लौं बरनौं सुंदरताई।खेलत कुंवर कनक-आंगन मैं नैन निरखि छबि पाई॥कुलही लसति सिर स्याम सुंदर कैं बहु बिधि सुरंग बनाई।मानौ नव धन ऊपर राजत मघवा धनुष चढ़ाई॥अति सुदेस मन हरत कुटिल कच मोहन मुख बगराई।मानौ प्रगट कंज पर मंजुल अलि-अवली फिरि आई॥नील सेत अरु पीत लाल मनि लटकन भा... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   3:00pm 7 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
सोइ रसना जो हरिगुन गावै।नैननि की छवि यहै चतुरता जो मुकुंद मकरंद हिं धावै॥निर्मल चित तौ सोई सांचो कृष्ण बिना जिहिं और न भावै।स्रवननि की जु यहै अधिकाई, सुनि हरि कथा सुधारस प्यावै॥कर तैई जै स्यामहिं सेवैं, चरननि चलि बृन्दावन जावै।सूरदास, जै यै बलि ताको, जो हरिजू सों प्री... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   3:00pm 6 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
तुम्हारी भक्ति हमारे प्रान।छूटि गये कैसे जन जीवै, ज्यौं प्रानी बिनु प्रान॥जैसे नाद-मगन बन सारंग, बधै बधिक तनु बान।ज्यौं चितवै ससि ओर चकोरी, देखत हीं सुख मान॥जैसे कमल होत परिफुल्लत, देखत प्रियतम भान।दूरदास, प्रभु हरिगुन त्योंही सुनियत नितप्रति कान॥- सूरदास... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   3:00pm 5 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
बदन मनोहर गातसखी री कौन तुम्हारे जात।राजिव नैन धनुष कर लीन्हे बदन मनोहर गात॥लज्जित होहिं पुरबधू पूछैं अंग अंग मुसकात।अति मृदु चरन पंथ बन बिहरत सुनियत अद्भुत बात॥सुंदर तन सुकुमार दोउ जन सूर किरिन कुम्हलात।देखि मनोहर तीनौं मूरति त्रिबिध ताप तन जात॥- सूरदास... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   3:00pm 4 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
निरगुन कौन देश कौ बासी।मधुकर, कहि समुझाइ, सौंह दै बूझति सांच न हांसी॥को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि को दासी।कैसो बरन, भेष है कैसो, केहि रस में अभिलाषी॥पावैगो पुनि कियो आपुनो जो रे कहैगो गांसी।सुनत मौन ह्वै रह्यौ ठगो-सौ सूर सबै मति नासी॥- सूरदास ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:00pm 3 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
जोग ठगौरी ब्रज न बिकैहै।यह ब्योपार तिहारो ऊधौ, ऐसोई फिरि जैहै॥यह जापै लै आये हौ मधुकर, ताके उर न समैहै।दाख छांडि कैं कटुक निबौरी को अपने मुख खैहै॥मूरी के पातन के केना को मुकताहल दैहै।सूरदास, प्रभु गुनहिं छांड़िकै को निरगुन निरबैहै॥- सूरदास ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:00pm 2 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
जसुमति दौरि लिये हरि कनियां।आजु गयौ मेरौ गाय चरावन, हौं बलि जाउं निछनियां॥मो कारन कचू आन्यौ नाहीं बन फल तोरि नन्हैया।तुमहिं मिलैं मैं अति सुख पायौ,मेरे कुंवर कन्हैया॥कछुक खाहु जो भावै मोहन. दैरी माखन रोटी।सूरदास, प्रभु जीवहु जुग-जुग हरि-हलधर की जोटी॥- सूरदास... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   3:00pm 1 Jul 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
अबिगत गति कछु कहति न आवै।ज्यों गूंगो मीठे फल की रस अन्तर्गत ही भावै॥परम स्वादु सबहीं जु निरन्तर अमित तोष उपजावै।मन बानी कों अगम अगोचर सो जाने जो पावै॥रूप रैख गुन जाति जुगति बिनु निरालंब मन चकृत धावै।सब बिधि अगम बिचारहिं, तातों सूर सगुन लीला पद गावै॥- सूरदास... Read more
clicks 151 View   Vote 1 Like   3:00pm 29 Jun 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
सबसे ऊँची प्रेम सगाई।दुर्योधन की मेवा त्यागी, साग विदुर घर पाई॥जूठे फल सबरी के खाये बहुबिधि प्रेम लगाई॥प्रेम के बस नृप सेवा कीनी आप बने हरि नाई॥राजसुयज्ञ युधिष्ठिर कीनो तामैं जूठ उठाई॥प्रेम के बस अर्जुन-रथ हाँक्यो भूल गए ठकुराई॥ऐसी प्रीत बढ़ी बृन्दाबन गोपिन नाच नच... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:00pm 28 Jun 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
मेरो मन अनत कहाँ सुख पावे।जैसे उड़ि जहाज की पंछि, फिरि जहाज पर आवै॥कमल-नैन को छाँड़ि महातम, और देव को ध्यावै।परम गंग को छाँड़ि पियसो, दुरमति कूप खनावै॥जिहिं मधुकर अंबुज-रस चाख्यो, क्यों करील-फल खावै।'सूरदास'प्रभु कामधेनु तजि, छेरी कौन दुहावै॥- सूरदास... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   3:00pm 27 Jun 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
पिया बिन नागिन काली रात ।कबहुँ यामिन होत जुन्हैया, डस उलटी ह्वै जात ॥यंत्र न फुरत मंत्र नहिं लागत, आयु सिरानी जात ।'सूर'श्याम बिन बिकल बिरहिनी, मुर-मुर लहरें खात ॥- सूरदास... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   3:00pm 26 Jun 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
प्रीति करि काहु सुख न लह्यो।प्रीति पतंग करी दीपक सों, आपै प्रान दह्यो॥अलिसुत प्रीति करी जलसुत सों, संपति हाथ गह्यो।सारँग प्रीति करी जो नाद सों, सन्मुख बान सह्यो॥हम जो प्रीति करि माधव सों, चलत न कछु कह्यो।'सूरदास'प्रभु बिनु दुख दूनो, नैननि नीर बह्यो॥- सूरदास... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   3:00pm 25 Jun 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
निसिदिन बरसत नैन हमारे।सदा रहत पावस ऋतु हम पर, जबते स्याम सिधारे।।अंजन थिर न रहत अँखियन में, कर कपोल भये कारे।कंचुकि-पट सूखत नहिं कबहुँ, उर बिच बहत पनारे॥आँसू सलिल भये पग थाके, बहे जात सित तारे।'सूरदास'अब डूबत है ब्रज, काहे न लेत उबारे॥- सूरदास... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   3:00pm 24 Jun 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
सखी, इन नैनन तें घन हारे ।बिन ही रितु बरसत निसि बासर, सदा मलिन दोउ तारे ॥ऊरध स्वाँस समीर तेज अति, सुख अनेक द्रुम डारे ।दिसिन्ह सदन करि बसे बचन-खग, दुख पावस के मारे ॥सुमिरि-सुमिरि गरजत जल छाँड़त, अंसु सलिल के धारे ॥बूड़त ब्रजहिं 'सूर'को राखै, बिनु गिरिवरधर प्यारे ॥- सूरदास... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   6:12pm 23 Jun 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
है हरि नाम कौ आधार।और इहिं कलिकाल नाहिंन रह्यौ बिधि-ब्यौहार॥नारदादि सुकादि संकर कियौ यहै विचार।सकल स्रुति दधि मथत पायौ इतौई घृत-सार॥दसहुं दिसि गुन कर्म रोक्यौ मीन कों ज्यों जार।सूर, हरि कौ भजन करतहिं गयौ मिटि भव-भार॥- सूरदास... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   3:00pm 23 Jun 2018 #
Blogger: Upendra Gughane
डॉक्टर :-तबियत कैसी है..? मरीज़ :-पहले से ज्यादा खराब है... डॉक्टर :-दवाई खा ली थी.? मरीज़ :-खाली नहीं थी भरी हुई थी... डॉक्टर :- मेरा मतलब है दवाई ले ली थी.? मरीज़ :-जी आप ही से तो ली थी... डाक्टर :-बेवक़ूफ़ !! दवाई पी ली थी.? मरीज़ :-नहीं जी,, दवाई नीली थी... डॉक्टर :-अबे गधे !! दवाई को पी लि... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   3:00pm 26 May 2018 #
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