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Blog: अनकहे किस्से

Blogger: Amit Mishra
मेरेमनकीसारीमुश्किलोंकोकितनाआसानबनादेतीहोतुमअपनेमुस्कानकेअनोखेजादूसेकुछतोहैकरिश्माईतुम्हारेभीतरजोहारीहुईमुरझाईसाँसोंमेंताजीहवाकाझोंकाभरताहैतुमबिल्कुलउनतितलियोंजैसीहोजोअनजानहैंअपनोंमोहकरंगोंसेजिन्हेंनहीपताकिउनकोछूनेकीतमन्नालिएकितनेबच्... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   9:21am 18 Jan 2021 #
Blogger: Amit Mishra
कुछ तस्वीरें हम अपने पास नही रख सकते क्योंकि उन तस्वीरों को देखने का हक़ हम खो चुके होते हैं। कुछ सपनों की तस्वीरें नही बनाई जा सकती क्योंकि उनका कोई आकार नही होता। ऐसे में सिर्फ़ एक ही ज़रिया बचता है उन सबको देखने का और वो हैं बंद आँखें।जिन्हें हम खुली आँखों से सबके सामने ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   12:00pm 9 Jan 2021 #
Blogger: Amit Mishra
विकसित और विकासशील बनने की होड़ के बीच मैंने खोजी बनना चुना। जहाँ लोग बातें बनाना सीख रहे थे वहीं मैं चुप रहकर बातों के मतलब खोजने में लगा रहा। जब आगे बढ़ने के लिए लोग आवाज़ को ताकत बना रहे थे तब मैं ख़ुद में सुनने की क्षमता को विकसित करने में लगा हुआ था।ग़ुस्सैल और झल्लाई हुई... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   6:58am 5 Jan 2021 #
Blogger: Amit Mishra
दुःखों का कोई तय ठिकाना नही होताहम सुख ढूँढ़ते हैं, दुःख तक पहुँच जाते हैं ।सुख बंजारे हैं भटकते रहते हैंदुःख जगह ढूँढ़ते हैं और बस जाते हैं ।सुख के दिन छोटे हुआ करते हैंदुःख के हिस्से लंबी रातें हैं ।हम सुख में कितना कुछ भूलने लगते हैंदुःख आते ही सब कुछ पहचानते हैं ।सुख ... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   11:32am 27 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
सपने तब तक आकर्षक होते हैं जब तक वो पूरे ना हो जाएं और जो सच हो जाए वो सपना कैसा।ये बात सच है कि पार्क की बेंच पर बैठे हुए तुमने अपना सिर मेरे कंधे पर झुका दिया था और तुम्हारे नर्म हाथों को अपने हाथों में लेते हुए मैंने हमेशा के लिए उन्हें थामने का वादा किया था। पर मैं अपने ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   12:00pm 25 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
जब तक हम साथ थे तब तक तो तुमने कभी इतनी ख़ूबसूरत कविताएं नही लिखीं और जहाँ तक मैं समझती हूँ कि मुझसे पहले और मेरे बाद अभी तक कोई और ऐसा नही आया जिसे सोचकर तुम कविताएं लिखते हो (बातों ही बातों में उसने मुझसे सवाल किया)मैं जो पिछले दस मिनट से उसे अपलक निहारे जा रहा था (अब क्यों... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   11:30am 11 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
सड़कें हमें कहीं नही पहुँचातीहम सड़क पर चलते हैं और गलत जगह पहुँच जाते हैं।दुःख भी हम तक चल कर नही आतेकुछ अलग होता है और हम दुःखी हो जाते हैं।हम किसी को याद नही करतेपर कुछ लोग याद आ जाते हैं।भूलने का कोई फॉर्मूला नही होताजिसे हम सोचते नही उसे हम भूल जाते हैं।अमित 'मौन'P.C.: GOOGLE... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   11:30am 7 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
पुरानी किताबों के पन्ने पलटते हुए एक मोरपंख हाथ लगा। उसे देखते ही मन जैसे ख़ुद बख़ुद फ्लैशबैक में चला गया। ये फ़्लैशबैक शब्द मैंने पहली बार फिल्मों में सुना था और वो फ़िल्म भी शायद इस मोरपंख को देने वाले के साथ ही देखी थी।अचानक ये मोरपंख वाला किस्सा याद आया। किसी ने कहा था ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   11:30am 3 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
सुख और दुःख एक सिक्के के दो पहलू हैं। पर विडम्बना ये है कि कभी कभी हमारे हिस्से वो सिक्का आता है जिसके दोनों पहलू में दुःख ही छिपे होते हैं।ऐसे में भाग्य का सिर्फ़ इतना महत्व होता है कि वो सिक्के को उछालने के बाद ज़मीन पर गिरने ही ना दे।मैं अपने जीवन में सिर्फ़ इतना भाग्यशा... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   11:22am 28 Nov 2020 #
Blogger: Amit Mishra
चलते चलते अचानकरास्ता बदल लोगेतो भुलक्कड़ लगोगे।दोस्तों को देखोगेऔर मुँह फेर लोगेहर पल तन्हा रहोगे।किताबें खोल के बैठोगेऔर कुछ नही पढ़ोगेतो अनपढ़ दिखोगे।सुबह शाम बिना वजहकिसी भी गली भटकोगेतुम आवारा बनोगे।साइकल खड़ी रहेगीऔर तुम पैदल चलोगेवक़्त बर्बाद करोगे।कितना क... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   12:02pm 20 Nov 2020 #
Blogger: Amit Mishra
तुमने भूख लिखीकिसी भूखे ने नही पढ़ीभूखे को रोटी चाहिए कविता नहीकहो रोटी दे सकते हो क्या?तुमने बेरोजगारी लिखीवो किसी काम की नहीआदमी को काम और पैसे चाहिएकाग़ज पर छपी कविता नहीकहो काम दे सकते हो क्या?तुमने व्यंग्य लिखापर किसी को हँसी नही आईसुधार हँसी ठिठोली से नही आतेमिल ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   11:38am 9 Nov 2020 #
Blogger: Amit Mishra
क्या बात हुई वो बात कहोआओ बैठो और बात करोहैं नाज़ुक लब क्यों सिले हुएअब शिकवों की बरसात करो।जो बीत गया वो जाने दोबातों को बाहर आने दोइस मन का बोझ उतारो भीकर लो गुस्सा और ताने दो।यूँ चुप रहने से क्या होगाघुट कर सहने से क्या होगाअब कह भी दो ये बिन सोचेआख़िर कहने से क्या होगा... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   7:10am 2 Nov 2020 #
Blogger: Amit Mishra
मुझे शुरू से ही ख़ामोशियों से बड़ा लगाव था और तुम्हें चुप्पियों से सख़्त नफ़रत थी। हमारे बीच हर बार हुई घंटों लंबी बातचीत में सबसे ज्यादा योगदान तुम्हारा ही हुआ करता था। माँ-बाबा से मिली डाँट, भाई से हुई नोक-झोंक और टीचर से मिली शाबाशी से लेकर सहेलियों के साथ हुई कानाफूसी त... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   7:31am 21 Oct 2020 #
Blogger: Amit Mishra
एक बात के कई मतलब निकालने वाली इस दुनिया ने कई बार उन शब्दों के भी मतलब निकालने चाहे जिनका अर्थ समझाने के लिए शब्द बन ही नही सके। कई बार हम समझ ही नही पाते कि कुछ अर्थों को शब्दों से नही भावनाओं से समझा जाता है।हम बहुत ख़ुश होते हैं तो ख़ुशी बयान नही कर पाते और दुःखी होते हैं... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   7:05am 7 Oct 2020 #
Blogger: Amit Mishra
कभी कभी ये जीवन एक आखेट की भाँति प्रतीत होता है और मैं ख़ुद को एक असफल आखेटक के रूप में पाता हूँ। मेरी चाहतें, मेरी ख़्वाहिशें, मेरा लक्ष्य एक मृग की भाँति है। एक ऐसा मृग जो दिखाई तो देता है पर जब मैं उसे पकड़ने जाता हूँ तब वो गायब हो जाता है। मैं वर्षों से उसके पीछे भाग रहा हूँ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   2:18pm 27 Sep 2020 #
Blogger: Amit Mishra
कभी कभी लगता है कि अब आगे बढ़ जाना चाहिए। अब यहाँ रुकने का कोई औचित्य नही है। ऐसा कुछ नही है जिसके लिए रुका जाए। मैं गठरी बाँध कर आगे बढ़ने ही वाला होता हूँ कि एक ख़्याल आता है जो कहता है कि अगर तुम वापस आयी और मैं यहाँ ना मिला तो क्या होगा, तुम क्या सोचोगी, कहीं तुम मुझे गलत तो न... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   12:07pm 12 Sep 2020 #
Blogger: Amit Mishra
आज खोया आसमां हैकाले मेघों से घिरा हैरोक दो इन बारिशों कोडूबी जाए अब धरा है।आँसुओं की उठती लहरेंनयन का सागर भरा हैशूल बन कर चुभती यादेंघाव अब तक वो हरा है।और फ़िर ऐसे समय मेंआ बसी हो तुम हृदय मेंअस्त होती हैं उम्मीदेंकोई रुचि है ना उदय में।घटती साँसें पूछे मुझसेवक्त कि... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   10:53am 24 Aug 2020 #
Blogger: Amit Mishra
 जाना ज़रूरी होता है ना चाहते हुए भीठीक वैसे ही जैसे जीना ज़रूरी होता हैबिना किसी जरूरत के भी।लौट आना भी उतना ही ज़रूरी हैजितना लौटने की उम्मीद लगाए रखनातुम भी लौट आना एक दिनउम्मीदों की उम्र लंबी रहेगी।लौट आना तुम भी ठीक वैसे हीजैसे बुढ़िया लौटती है अपनी खाट परजैसे नदी ल... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   11:01am 20 Aug 2020 #
Blogger: Amit Mishra
ये जो प्यारा मुखड़ा हैक्यों ऐसे उखड़ा उखड़ा हैप्यार, मोहब्बत और ये शिक़वेहर प्राणी का दुखड़ा हैनही अकेला तू ही भोगीसबको ग़म ने रगड़ा हैकौन सही है कौन ग़लत हैसदियों से ये झगड़ा हैछोड़ उदासी ख़ुशी ओढ़ लेदुःख क्यों कस के पकड़ा हैहँसी सजा ले चेहरे पर क्योंगुस्से में यूँ अकड़ा हैशेष अभी ... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   11:19am 10 Aug 2020 #
Blogger: Amit Mishra
कुछ सोचते सोचते अचानक मुस्कुरा दोगीतो पागल लगोगी।नींद में सपने से डर करअचानक उठ जाओगीतो बीमार दिखोगी।काम-काज छोड़ करखिड़की पर टिकी रहोगीतो कामचोर बनोगी।कोई भी बहाना बनाकरसहेलियों से अलग चलोगीतो पक्का झूठी लगोगी।किताबों में छुपाकरकिसी के संदेश रखोगीकितनी डरपोक ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   5:32am 31 Jul 2020 #
Blogger: Amit Mishra
शाम के 5 बज चुके हैं। मैं अभी भी बिस्तर पर औंधे मुंह पड़ा हुआ जाने क्या सोच रहा हूँ। घड़ी के टिक टिक का शोर मानों हथौड़ा बनकर मेरे सिर पर वार कर रहा है। हर पल एक नया ख़्याल मन के दरवाजे को धक्का मारता हुआ मेरे दिमाग़ में घुसता आ रहा है। मेरी सोच भी एक ख़्याल से होती हुई दूसरी ख़्याल ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   5:09am 29 Jul 2020 #
Blogger: Amit Mishra
एक शिक्षक हमें पढ़ना सिखा सकता है पर हमें क्या पढ़ना है वो हमें स्वयं तय करना है। हम सीखना चाहें तो हर पल हमको कुछ सिखाता है और ना चाहें तो किताबें भी निर्जीव वस्तु हैं।क्योंकि इंसान को सबसे ज्यादा बुद्धिमान जीव माना गया है इसीलिए इंसान की हर दशा एक सीख देकर जाती है।पाबंद... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   2:19pm 28 Jun 2020 #
Blogger: Amit Mishra
तुम्हे सिर्फ़ नीला रंग पसंद था क्योंकि आसमान अनंत है।तुम्हे बालियाँ बहुत पसंद थीक्योंकि दुनिया गोल और बड़ी है।तुम बालों को खुला रखती थीक्योंकि पक्षियों को उड़ना पसंद है।तुम काजल ऊपर तक लगाती थी क्योंकि काली रातें लंबी होती हैं।तुम कितना बोलती थीक्योंकि नदियों की ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:07pm 20 Jun 2020 #
Blogger: Amit Mishra
हम जैसे जैसे आगे बढ़ते जाते हैं वैसे वैसे हमारे आस पास की भीड़ कम होती जाती है क्योंकि हर कोई उस दुर्गम रास्ते पर चल नही पाता या यूँ कहें कि किस्मत उन्हें बढ़ने नही देती। आगे जाते जाते बस गिनती के लोग बचते हैं और वो भी ऐसे लोग जिन पर बस किसी तरह आगे निकलने का जुनून रहता है। उन... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   2:44pm 14 Jun 2020 #
Blogger: Amit Mishra
ये लोग होते कौन हैं मुझे जज करने वाले...ये आख़िर जानते ही क्या हैं मेरे बारे में... क्या में सच में ऐसी लगती हूँ... तुम तो जानते हो मुझे...और तुम तो बहुत बड़े समझदार बनते हो.. सच सच बताना क्या तुम्हें भी ऐसा ही लगता है? (लगभग झल्लाती हुई राधा कृष से बोली)कृष- सबसे पहले तो तुम्हे बता दू... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:38pm 10 Jun 2020 #
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