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Amit Mishra

प्यार में धोखा बात पुरानीग़म काहे को  करता प्यारेनदी, धरा और  ऊँचे पर्वतसब के सब ही ग़म के मारेबरखा, बारिश, ओस की बूंदेंनम  ç...
Amit Mishra...
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  June 24, 2019, 9:54 am
अक़्सर ही मैं दिल को अपने, ये समझाया करता हूँतू मरता है जिस पर पगले, मैं भी उस पर मरता हूँसाँझ सवेरे उसी चौक पर, जाने मैं क्यों जाता हूँयार मेरे हों या हों दुश्मन, सबसे मैं छुप जाता हूँचौराहे पर बैठा अक़्सर, राह उसी की तकता हूँतू मरता है जिस पर पगले, मैं भी उस पर मरता हूँमीर से ...
Amit Mishra...
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  June 20, 2019, 6:00 am
लड़के अक़्सर लापरवाह होते हैं, उन्हें फ़र्क नही पड़ता समाज के किसी नियम-कानून से..उनके लिए समाज उनका सबसे बड़ा पक्षधर है...वो ख़ुद को सुरक्षित महसूस करते हैं....मगर प्यार में पड़े हुए लड़के समझदार हो जाते हैं, उन्हें ज्ञान हो जाता है समाज में फैली हर बुराई का..वो समाज में फैली उस बुर...
Amit Mishra...
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  June 18, 2019, 4:13 pm
तिल काला  गोरे गालों पे, उस पर  होंठों की लालीचले तो ऐसी कमर हिले, हो जैसे गुड़हल की डालीनैन कटीले जिगर को चीरें, पास बुलाए ह&#...
Amit Mishra...
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  June 10, 2019, 12:57 pm
सहनशीलता की सीलन धीरे धीरे दिल की दीवारों को कमजोर बना देती है..समझदारी का सीमेंट बार बार लगाने पर अविश्वास की एक मोटी पर...
Amit Mishra...
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  June 9, 2019, 2:04 pm
विडंबना:एक इंसान के लिए सबसे ज़्यादा मुश्किल काम है उदासी में किसी अपने के ''क्या हुआ ??''पूछने पर ''कुछ नही''वाला जवाब देना...वो भी...
Amit Mishra...
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  June 1, 2019, 10:44 am
आकर्षण का पहला पड़ाव पार कर के पुरुष ढूंढ़ता हैअपनी प्रेमिका में मातृत्व का अनोखा स्पर्श..वो देखना चाहता है उसकी आँखों मेæ...
Amit Mishra...
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  May 31, 2019, 9:07 am
सोशल मीडिया मोहल्ले के उस पार्क की तरह है जहाँ हम सुबह या शाम को अपना खाली वक़्त बिताने जाते हैं या यूँ कहें दिन भर की थकान औ...
Amit Mishra...
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  May 28, 2019, 9:51 am
अस्थायी रिश्ते:कुछ रिश्ते गमले में उगी घास की तरह होते हैं...घास जो अचानक ही पेड़ के आस पास उग आती है उसके चारों ओर एक सुंदर हë...
Amit Mishra...
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  May 20, 2019, 10:00 am
आजकल मार्केट में एक नई खेप आयी है मोटिवेशनल स्पीकर्स की जो बच्चों को सिखाते हैं कि आप अपने मार्क्स पर ध्यान मत दीजिए... बिन&...
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  May 16, 2019, 11:17 am
एक लड़की प्यारी  सुंदर परियों  के जैसी ना जाने क्यों वो बस मुझ पर ही मरती हैमैं टूटा बिखरा  ख़ुद में खोया रहता हूँवो उसपे भी...
Amit Mishra...
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  May 14, 2019, 9:29 am
प्रेम पथिक बनने की मैंने, वजह को ऐसे ढूंढ़ लियाचाँद सितारों से जाकर के, पता तुम्हारा पूछ लियापाकर तुमको ये जाना है-2, मैंने ख़...
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  May 3, 2019, 10:39 am
जो वक़्त की बिसात पे तू हौसले बिछाएगाफ़लक नही है दूर फिर सितारे तोड़ लाएगाआँधियों के वेग में अडिग खड़ा रहा अगररुख़ हवाओं का त...
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  April 28, 2019, 10:02 am
आदतन रो लेता हूँ अबउदासी  खूब  भाती  हैतन्हाई माशूका है  मेरीदूर जा जाके लौट आती हैदिल के दरिया से निकलकोई  नदी  सी  आती...
Amit Mishra...
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  April 23, 2019, 11:21 am
सुबह ने कान मेंकुछ कह दिया उधर सूरज सेझाँकने लगी है किरणेंइधर खुली खिड़कियों सेदीवारें चीख रही हैं शायद कोई किस्सा लिए ब...
Amit Mishra...
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  April 19, 2019, 2:52 pm
तन्हाई के तकिये तले जलती रही एक आस की लौ आँसुओं की ओस में भीग रही दो अधखुली आँखेंपलकों के दरवाजे पर दस्तक दे रही है नींदइं&#...
Amit Mishra...
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  April 17, 2019, 12:50 pm
लंका दहन के पश्चात जब हनुमान जी श्रीराम एवं सुग्रीव जी के पास शिविर में वापस आये तो सभी ने हर्षोल्लास के साथ उनका स्वागत ...
Amit Mishra...
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  April 2, 2019, 11:22 pm
रेगिस्तान ढक दिए जाएंगे समंदर के पानी सेमछलियाँ साहिल पे गुफा बना कर रहने लगेंगीतितलियाँ पेड़ों पर अपने घोसलें बना लें&...
Amit Mishra...
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  March 26, 2019, 9:37 am
कोई प्रेमी जब चाँद को ज़मीन पर ले आएगाप्रेमिकाएं सितारों को अपने जूड़े में बांधेंगीशराबी मयखाने ना जाकर आँखों से नशा करे...
Amit Mishra...
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  March 26, 2019, 9:36 am
एक आशिक़ को इस तरह बेचारा नही करतेबाद  जुदाई  के  प्यार  से  पुकारा नही करतेकुछ  तो  खौफ़  ख़ुदा  का  तुम  भी रखोकरके  वादे&nbs...
Amit Mishra...
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  March 19, 2019, 10:59 am
मैं तुम्हे बाँधना नही चाहता थामैं तुम्हे रोकना चाहता थातुम कल कल करती एक नदी की मानिंद बह जाना चाहती थी अन्जान दिशा में ...
Amit Mishra...
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  March 10, 2019, 9:32 pm
प्रेम पर रची गयी हर कविता में मैं तुम्हे पढ़ता हूँविरह के हृदय भेदी शब्दों को महसूस करता हूँपरिस्थितियों को परिभाषित कर...
Amit Mishra...
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  March 8, 2019, 11:59 am
टूटे  इस  रिश्ते  में, आ  कर के  गिरह  दे दोशिकवों को संग लाओ, लंबी सी जिरह दे दोअश्कों  से  भरी आँखें, ग़मगीन  सी  हैं  रातेæ...
Amit Mishra...
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  February 27, 2019, 9:32 am
रब से कोई दुआ थी माँगीफल में जिसके  पाया ग़मसबके हिस्से आई खुशियाँमेरे   हिस्से   आया   ग़मभोर दोपहर या हो संध्याबदली बन ...
Amit Mishra...
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  February 24, 2019, 3:27 pm
यादें....याद है तुम्हें जब थोड़ी सी बारिश में भी मैं बहुत ज्यादा भीग जाया करता था..क्योंकि मैं जानता था घर पहुँचने पर तुम डाँट...
Amit Mishra...
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  February 23, 2019, 9:52 am
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