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Blog: अनकहे किस्से

Blogger: Amit Mishra
मुझे शुरू से ही ख़ामोशियों से बड़ा लगाव था और तुम्हें चुप्पियों से सख़्त नफ़रत थी। हमारे बीच हर बार हुई घंटों लंबी बातचीत में सबसे ज्यादा योगदान तुम्हारा ही हुआ करता था। माँ-बाबा से मिली डाँट, भाई से हुई नोक-झोंक और टीचर से मिली शाबाशी से लेकर सहेलियों के साथ हुई कानाफूसी त... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   7:31am 21 Oct 2020 #
Blogger: Amit Mishra
एक बात के कई मतलब निकालने वाली इस दुनिया ने कई बार उन शब्दों के भी मतलब निकालने चाहे जिनका अर्थ समझाने के लिए शब्द बन ही नही सके। कई बार हम समझ ही नही पाते कि कुछ अर्थों को शब्दों से नही भावनाओं से समझा जाता है।हम बहुत ख़ुश होते हैं तो ख़ुशी बयान नही कर पाते और दुःखी होते हैं... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   7:05am 7 Oct 2020 #
Blogger: Amit Mishra
कभी कभी ये जीवन एक आखेट की भाँति प्रतीत होता है और मैं ख़ुद को एक असफल आखेटक के रूप में पाता हूँ। मेरी चाहतें, मेरी ख़्वाहिशें, मेरा लक्ष्य एक मृग की भाँति है। एक ऐसा मृग जो दिखाई तो देता है पर जब मैं उसे पकड़ने जाता हूँ तब वो गायब हो जाता है। मैं वर्षों से उसके पीछे भाग रहा हूँ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   2:18pm 27 Sep 2020 #
Blogger: Amit Mishra
कभी कभी लगता है कि अब आगे बढ़ जाना चाहिए। अब यहाँ रुकने का कोई औचित्य नही है। ऐसा कुछ नही है जिसके लिए रुका जाए। मैं गठरी बाँध कर आगे बढ़ने ही वाला होता हूँ कि एक ख़्याल आता है जो कहता है कि अगर तुम वापस आयी और मैं यहाँ ना मिला तो क्या होगा, तुम क्या सोचोगी, कहीं तुम मुझे गलत तो न... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   12:07pm 12 Sep 2020 #
Blogger: Amit Mishra
आज खोया आसमां हैकाले मेघों से घिरा हैरोक दो इन बारिशों कोडूबी जाए अब धरा है।आँसुओं की उठती लहरेंनयन का सागर भरा हैशूल बन कर चुभती यादेंघाव अब तक वो हरा है।और फ़िर ऐसे समय मेंआ बसी हो तुम हृदय मेंअस्त होती हैं उम्मीदेंकोई रुचि है ना उदय में।घटती साँसें पूछे मुझसेवक्त कि... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   10:53am 24 Aug 2020 #
Blogger: Amit Mishra
 जाना ज़रूरी होता है ना चाहते हुए भीठीक वैसे ही जैसे जीना ज़रूरी होता हैबिना किसी जरूरत के भी।लौट आना भी उतना ही ज़रूरी हैजितना लौटने की उम्मीद लगाए रखनातुम भी लौट आना एक दिनउम्मीदों की उम्र लंबी रहेगी।लौट आना तुम भी ठीक वैसे हीजैसे बुढ़िया लौटती है अपनी खाट परजैसे नदी ल... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   11:01am 20 Aug 2020 #
Blogger: Amit Mishra
ये जो प्यारा मुखड़ा हैक्यों ऐसे उखड़ा उखड़ा हैप्यार, मोहब्बत और ये शिक़वेहर प्राणी का दुखड़ा हैनही अकेला तू ही भोगीसबको ग़म ने रगड़ा हैकौन सही है कौन ग़लत हैसदियों से ये झगड़ा हैछोड़ उदासी ख़ुशी ओढ़ लेदुःख क्यों कस के पकड़ा हैहँसी सजा ले चेहरे पर क्योंगुस्से में यूँ अकड़ा हैशेष अभी ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   11:19am 10 Aug 2020 #
Blogger: Amit Mishra
कुछ सोचते सोचते अचानक मुस्कुरा दोगीतो पागल लगोगी।नींद में सपने से डर करअचानक उठ जाओगीतो बीमार दिखोगी।काम-काज छोड़ करखिड़की पर टिकी रहोगीतो कामचोर बनोगी।कोई भी बहाना बनाकरसहेलियों से अलग चलोगीतो पक्का झूठी लगोगी।किताबों में छुपाकरकिसी के संदेश रखोगीकितनी डरपोक ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   5:32am 31 Jul 2020 #
Blogger: Amit Mishra
शाम के 5 बज चुके हैं। मैं अभी भी बिस्तर पर औंधे मुंह पड़ा हुआ जाने क्या सोच रहा हूँ। घड़ी के टिक टिक का शोर मानों हथौड़ा बनकर मेरे सिर पर वार कर रहा है। हर पल एक नया ख़्याल मन के दरवाजे को धक्का मारता हुआ मेरे दिमाग़ में घुसता आ रहा है। मेरी सोच भी एक ख़्याल से होती हुई दूसरी ख़्याल ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   5:09am 29 Jul 2020 #
Blogger: Amit Mishra
एक शिक्षक हमें पढ़ना सिखा सकता है पर हमें क्या पढ़ना है वो हमें स्वयं तय करना है। हम सीखना चाहें तो हर पल हमको कुछ सिखाता है और ना चाहें तो किताबें भी निर्जीव वस्तु हैं।क्योंकि इंसान को सबसे ज्यादा बुद्धिमान जीव माना गया है इसीलिए इंसान की हर दशा एक सीख देकर जाती है।पाबंद... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   2:19pm 28 Jun 2020 #
Blogger: Amit Mishra
तुम्हे सिर्फ़ नीला रंग पसंद था क्योंकि आसमान अनंत है।तुम्हे बालियाँ बहुत पसंद थीक्योंकि दुनिया गोल और बड़ी है।तुम बालों को खुला रखती थीक्योंकि पक्षियों को उड़ना पसंद है।तुम काजल ऊपर तक लगाती थी क्योंकि काली रातें लंबी होती हैं।तुम कितना बोलती थीक्योंकि नदियों की ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   3:07pm 20 Jun 2020 #
Blogger: Amit Mishra
हम जैसे जैसे आगे बढ़ते जाते हैं वैसे वैसे हमारे आस पास की भीड़ कम होती जाती है क्योंकि हर कोई उस दुर्गम रास्ते पर चल नही पाता या यूँ कहें कि किस्मत उन्हें बढ़ने नही देती। आगे जाते जाते बस गिनती के लोग बचते हैं और वो भी ऐसे लोग जिन पर बस किसी तरह आगे निकलने का जुनून रहता है। उन... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   2:44pm 14 Jun 2020 #
Blogger: Amit Mishra
ये लोग होते कौन हैं मुझे जज करने वाले...ये आख़िर जानते ही क्या हैं मेरे बारे में... क्या में सच में ऐसी लगती हूँ... तुम तो जानते हो मुझे...और तुम तो बहुत बड़े समझदार बनते हो.. सच सच बताना क्या तुम्हें भी ऐसा ही लगता है? (लगभग झल्लाती हुई राधा कृष से बोली)कृष- सबसे पहले तो तुम्हे बता दू... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   2:38pm 10 Jun 2020 #
Blogger: Amit Mishra
ये लोग होते कौन हैं मुझे जज करने वाले...ये आख़िर जानते ही क्या हैं मेरे बारे में... क्या में सच में ऐसी लगती हूँ... तुम तो जानते हो मुझे...और तुम तो बहुत बड़े समझदार बनते हो.. सच सच बताना क्या तुम्हें भी ऐसा ही लगता है? (लगभग झल्लाती हुई राधा कृष से बोली)कृष- सबसे पहले तो तुम्हे बता दू... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:38pm 10 Jun 2020 #
Blogger: Amit Mishra
दिया गया दान और किया गया स्नेह कभी वापस नही माँगा जाता।समुद्र का पानी और माँ का प्यार कभी नापा नही जा सकता।अध्यापक का ज्ञान और आपका आत्मसम्मान कोई चुरा नही सकता।टूटता हुआ तारा और भागता हुआ समय किसी के लिए नही रुकता।बीता हुआ मौसम और दिया गया दुःख लौटकर जरूर आते हैं।हवा... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   2:41pm 27 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
दिया गया दान और किया गया स्नेह कभी वापस नही माँगा जाता।समुद्र का पानी और माँ का प्यार कभी नापा नही जा सकता।अध्यापक का ज्ञान और आपका आत्मसम्मान कोई चुरा नही सकता।टूटता हुआ तारा और भागता हुआ समय किसी के लिए नही रुकता।बीता हुआ मौसम और दिया गया दुःख लौटकर जरूर आते हैं।हवा... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   2:41pm 27 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
दिया गया दान और किया गया स्नेह कभी वापस नही माँगा जाता।समुद्र का पानी और माँ का प्यार कभी नापा नही जा सकता।अध्यापक का ज्ञान और आपका आत्मसम्मान कोई चुरा नही सकता।टूटता हुआ तारा और भागता हुआ समय किसी के लिए नही रुकता।बीता हुआ मौसम और दिया गया दुःख लौटकर जरूर आते हैं।हवा... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   2:41pm 27 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
चार बातें असल में सिर्फ़ चार बातें नही होती। चार बातों में बहुत सी बातें छिपी होती हैं। चार बातों की तह में जाने पर कई परतें खुलती हैं और फ़िर इन्ही चार बातों से लोग कितनी बातें बनाते हैं।किसी से चार बातें कर लेने से मन हल्का हो जाता है।किसी की चार बातें सुनकर कोई छोटा नही ... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   7:16am 19 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
है इश्क़ अगर तो जताना ही होगादिलबर को पहले बताना ही होगापसंद नापसंद की है परवाह कैसीतोहफ़े को पहले छुपाना ही होगाधड़कन हृदय की सुनाने की ख़ातिरउसको गले तो लगाना ही होगाआँखों ही आँखों में जब हों इशारेओ पगली लटों को हटाना ही होगाछूकर तुम्हें अब है महसूस करनाहोठों को माथे ल... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   4:13am 15 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
है इश्क़ अगर तो जताना ही होगादिलबर को पहले बताना ही होगापसंद नापसंद की है परवाह कैसीतोहफ़े को पहले छुपाना ही होगाधड़कन हृदय की सुनाने की ख़ातिरउसको गले तो लगाना ही होगाआँखों ही आँखों में जब हों इशारेओ पगली लटों को हटाना ही होगाछूकर तुम्हें अब है महसूस करनाहोठों को माथे ल... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   4:13am 15 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
जीवन की वृहद यात्रा के दौरान मनुष्य विविध प्रकार की परिस्थितियों से गुजरता है। कई प्रकार के सुख-दुःख, उतार-चढ़ाव मनुष्य को ढेर सारे खट्टे-मीठे अनुभव प्रदान करते हैं। अबोध बालक से अनुभवी वृद्ध तक का सफ़र तय करते हुए हम परिपक्वता की ओर बढ़ते चले जाते हैं। समय के बदलते चक्र क... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   7:11am 2 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
जीवन की वृहद यात्रा के दौरान मनुष्य विविध प्रकार की परिस्थितियों से गुजरता है। कई प्रकार के सुख-दुःख, उतार-चढ़ाव मनुष्य को ढेर सारे खट्टे-मीठे अनुभव प्रदान करते हैं। अबोध बालक से अनुभवी वृद्ध तक का सफ़र तय करते हुए हम परिपक्वता की ओर बढ़ते चले जाते हैं। समय के बदलते चक्र क... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   7:11am 2 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
जीवन की वृहद यात्रा के दौरान मनुष्य विविध प्रकार की परिस्थितियों से गुजरता है। कई प्रकार के सुख-दुःख, उतार-चढ़ाव मनुष्य को ढेर सारे खट्टे-मीठे अनुभव प्रदान करते हैं। अबोध बालक से अनुभवी वृद्ध तक का सफ़र तय करते हुए हम परिपक्वता की ओर बढ़ते चले जाते हैं। समय के बदलते चक्र क... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   7:11am 2 May 2020 #
Blogger: Amit Mishra
पृथ्वी को चोट पहुँचाने वाली हर त्रासदी की वजह एक आह बनी। आह जिस किसी भी जीव के भीतर से निकली, उसका असर उतना ही भयावह रहा जितना एक बदले की भावना का होता है।नावों के तलों से घायल हुई मछलियों के आँसू बाढ़ बनकर कितने ही किनारों को निगल गए।आसमान में शोर करते जहाजों से डरकर जितन... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   6:23am 23 Apr 2020 #
Blogger: Amit Mishra
पृथ्वी को चोट पहुँचाने वाली हर त्रासदी की वजह एक आह बनी। आह जिस किसी भी जीव के भीतर से निकली, उसका असर उतना ही भयावह रहा जितना एक बदले की भावना का होता है।नावों के तलों से घायल हुई मछलियों के आँसू बाढ़ बनकर कितने ही किनारों को निगल गए।आसमान में शोर करते जहाजों से डरकर जितन... Read more
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