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Amit Mishra

गिरा है जो उठा ना हो, जो उठ गया गिरा नहीजो पास है तेरा ही है, जो ना  मिला  तेरा नहीआदि है अनंत है, प्रयत्न का ना  अंत हैमार्ग जो...
Amit Mishra...
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  January 15, 2019, 1:21 pm
विश्वास हमारी गाड़ी में लगे पहिये के मानिंद है.. पहिया जो कि निरंतर चलता रहता है बिना रुके और हम मानते हैं कि वो पहिया पहुंच&...
Amit Mishra...
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  January 15, 2019, 1:19 pm
आकर्षण एक नवजात शिशु की मानिंद होता है जो शुरू में तो बहुत निर्मल, निश्छल, प्यारा और मोहक लगता है क्योंकि वो अभी अभी हमारे &...
Amit Mishra...
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  January 15, 2019, 1:17 pm
रात अमावस गहरी कालीजाने क्यों ना  आया  चाँदओढ़ी बदरी सोया फिर सेथोड़ा सा  अलसाया  चाँदसहमी चिड़िया डरी गिलहरीथोड़ा  और  इ&...
Amit Mishra...
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  January 6, 2019, 7:13 pm
क्यों माई मुझे  अब बुलाती नही हैक्या तुझको मेरी याद आती नही हैबड़ी बेरहम है  शहर की ये दुनियाजो भटके तो रस्ता दिखाती नही ह...
Amit Mishra...
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  January 6, 2019, 7:09 pm
चाँद रात्रि का बड़ा बेटा है और ये सितारे उसके छोटे भाई बहन...दिन का समय इनका खेलने और सीखने का समय होता है तो ये घर से बाहर निक...
Amit Mishra...
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  December 28, 2018, 10:11 am
बरसात में नदी का भर जाना प्रेम होना है...फिर समंदर की तरफ तेजी से बढ़ना और उस तक पहुंचने का प्रयत्न करना प्रेम में पागल होना ह...
Amit Mishra...
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  December 28, 2018, 10:09 am
रात  ठहरी  है  उस  पहर सेवो जब से गया इस शहर सेना हुआ दीदार आख़िरी उसकागिर गया हूँ अपनी ही  नज़र से ना रही  मंज़िल की ख़्वाहिश...
Amit Mishra...
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  December 10, 2018, 8:52 am
देख  अमावस  डर  के  मारेसोया चाँद और छुप गए तारेछोड़ छाड़ के दाना तिनकापंछी आ  गए  घर को  सारेसूनी सड़कें चुप चौराहेतन्हाई...
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  December 10, 2018, 8:51 am
गाँव वाले घर के सामने जो जगह खाली पड़ी थी वहाँ धूप बहुत आती थी। दिन में उसका कोई उपयोग होता नही था पर शाम को अक्सर छोटे बच्चे...
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  December 7, 2018, 11:25 am
सपनों की चादर और पलकों का पहराजो  नैनों  ने  देखा  वो  तेरा  था  चेहराथा  जाड़ों का मौसम  और रात सुहानीएक भीनी सी ख़ुशबू ज्...
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  December 1, 2018, 9:09 am
खुल के जियो तो मजा है ज़िंदगीगिनो ग़म को तो  सजा है ज़िंदगीवादों कसमों को भुला सको तोसंग हालातों के रजा है ज़िंदगीदिन रात बदë...
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  December 1, 2018, 9:08 am
चला था  जहाँ से  वहीं हूँ  खड़ा हैं कदम मेरे छोटे या रस्ता बड़ा उठाया  जिसे  और  सहारा  दिया उसी का था धक्का जो मैं गिर पड़ा&...
Amit Mishra...
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  November 22, 2018, 9:33 am
मैं ख़ुश हूँ जो मैं आहिस्ता  चल रहा हूँवो हैरां हैं फ़िर भी आगे निकल रहा हूँवक़्त लेता है करवट कई थमने से पहलेये  गुमां है  मì...
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  November 19, 2018, 9:52 am
दायरों से निकलकर तुझे ख़ुद ही को आना होगा बदन पे  जमी धूल तुझे  ख़ुद ही को हटाना होगा परिंदों को सिखाता नहीं कला कोई उड़ान क&...
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  November 2, 2018, 11:16 am
गहरा  ज़ख़्म है  दिखाऊं मैं कैसेये लंबा है क़िस्सा बताऊं मैं कैसेसड़कें शहर की जकड़े हैं बैठीवापस  मेरे गाँव  जाऊं  मैं कैसí...
Amit Mishra...
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  October 24, 2018, 10:09 am
घर  से  निकले  हैं  पढ़ने  कोजीवन  के पथ  पर  बढ़ने कोकदम  है अगला आज बढ़ायाएक रोज शिखर पर चढ़ने कोना  पहले  सी शामें  होंगीन...
Amit Mishra...
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  October 12, 2018, 4:33 pm
ग़र इश्क़ का कोई सार लिखूंउसको ही बारंबार लिखूंजो प्रेमपाश का वर्णन होउसकी बाहों का हार लिखूंकविता की पहली पंक्ति वोजब लय में कोई गज़ल लिखूंमैं एक सरोवर हो जाऊंऔर उसको अपना कमल लिखूंउसे अल्हड़ मस्त बयार कहूँमौसम की कोई बहार कहूँलिख दूँ बरखा की बूँद उसेसावन का पहला प्यार...
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  September 20, 2018, 5:23 pm
यूँ  तन्हा  हर  रात  सुलाया  ना  करोफ़िर ख़्वाबों में मिलने आया ना करोकुछ  अरमान  सुलगने  लगते हैंयूँ बातों में इश्क़ जता...
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  September 17, 2018, 10:40 am
आज सोमवार है....पुष्पा आज जल्दी उठ गई है...उसे व्रत जो रखना है...तो चार बजे उठ कर दैनिक कार्यों से निवृत होकर नहा धोकर मंदिर में प...
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  September 4, 2018, 11:09 am
ये आज का इंसान इतना सयाना क्यों हैअब आदमी ही आदमी से अनजाना क्यों हैझूठों की बस्ती है क़ीमत लहू की सस्ती हैफिर सच बयानी पे जान का जुर्माना क्यों हैतकनीक से बच्चे हुए हम बाप बन गएदुलार में बिगाड़ें और पूछें बेटा मनमाना क्यों है बातें लाज शरम की दो टके की हो चलीबेटी माँ से...
Amit Mishra...
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  August 31, 2018, 5:09 pm
आज फिर इतवार है...वही इतवार जिसका छोटू और बबली बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करते हैं...करें भी क्यों ना? इतवार के दिन उन्हें जलेबी जí...
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  August 19, 2018, 12:43 pm
मुल्क के सिपहसालारों को भी कुछ काम दिया जाएसफेदपोशों को दग़ाबाज़ी का  अब इनाम दिया जाएख़्वाहिशे अधूरी  हैं  जिनकी  ये  मु...
Amit Mishra...
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  August 16, 2018, 9:38 am
माहताब की लाली को बादलों में छुपाया ना करोयूँ  बेवजह  रूखसारों  पे जुल्फें  गिराया  ना करोबाहों  के  घेरों  में सिमटो  तो  नज़रें  झुका लोरंग-ए-हया के चिलमन से बाहर आया ना करोगुफ़्तगू  वस्ल  की बेशकीमती खजाना है जानांशब-ए-इश्क के किस्से सरेआम सुनाया ना ...
Amit Mishra...
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  August 13, 2018, 2:36 pm
धरोहर.. हाँ यही नाम दिया है मैंने तुम्हारी यादों और तुम्हारे वादों को...यादों की अलमारी में मैंने रखे हैं वो सारे पल जो हमने...
Amit Mishra...
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  July 28, 2018, 10:54 am
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