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Blog: Bol Skhee Re ( साहित्यिक सरोकारों से प्रतिबद्ध )

Blogger: Aparna Bajpai
भारत में झरिया को कोयले की सबसे बड़ी खान के रूप में जाना जाता है जो की ईंधन का एक बड़ा श्रोत है। ये देश में ऊर्जा के क्षेत्र से  होने वाले आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परन्तु वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार इस खान में लगभग ७० से अधिक् स्थानों पर आग लगी ... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   12:02pm 8 Oct 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
रांची से जमशेदपुर आने में यही कोई दो- ढाई घंटे लगते थे हमेशा। सोचा था १०- ११ बजे रात तक घर पंहुच जाऊंगा। उस दिन जैसे ही चांडिल पार किया ट्रकों की लम्बी लाइन लगी थी रोड पर। लोगों से पूछा तो पता चला आगे २ किलोमीटर तक ऐसे ही जाम है। किसी भी सूरत में आगे जाना नामुमकि... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   5:32am 5 Oct 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
आज मोचीराम ने जूतों पर पोलिश नहीं की, चेहरे  पर पोलिश लगाए घूम रहे हैं,हंस रहे हैं....हे हे हे हो हो हो .....जूतों को क्या चमकाना! जब चेहरों की चमक गायब है,फटे जूतों को सिलकर क्या होगा:उतने में नए खरीद लो चाइना माल है न; एक का दस, एक का दस .......हम!अरे हम तो कामगार हैं,मशीनों के आगे बे... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   9:23am 3 Oct 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
चाहता हूँ तुम्हे लिपिबद्ध कर लूं न जाने कब छिटक कर दूर हो जाओकिसी भूले-भटके विचार की मानिन्द,मै खोजता ही रहूँ तुम्हेचेतना की असीमित परतों में....तुम्हारी लंबित मुलाकातों मेंतुमसे ज्यादा;तुम्हारी अल्लहड़ हंसी होती है,वो बेसाख्ता मुस्कुराती हुयी पलकेंजैसे थाम लेती हैं ... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   6:03am 1 Oct 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
बेआवाज़ लड़कियों !उठों न, देखो तुम्हारे रुदन में........कितनी किलकारियां खामोश हैं.कितनी परियां गुमनाम हैंतुम्हारे वज़ूद में.तुम्हारी साँसेलाशों को भीज़िंदगी बख़्श देती हैं....ओ बेआवाज़ लड़कियों!एक बार कहोजो तुमने अब तक नहीं कहा........कहो जो बंद पड़ा हैतुम्हारे तहखाने में.......कहो कि द... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   8:02am 27 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
  1. आज उसने अपना दर्द रोटी पर लगाया और चटकारे ले-ले कर खाया,गुस्से को चबा-चबा कर हज़म कर गयी,भूख इतनी थी कि निगल गयी अपना अस्तित्व चुपचाप,अब बंद पड़ी है बोतल के अन्दर;जब कोई ढक्कन खोलेगा;समझ जाएगा उसके होने के मायने।२.चौखट पर बिखरी है धूप बन.... घर को रौशन करने को आतुर... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   10:51am 21 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
ये कहानी पहले रचनाकार पर प्रकाशित हो चुकी है. नीचे इसका लिन्क दिया गया है. मेरे ब्लोग पर भी इसे  पढ़ सकते हैं.http://www.rachanakar.org/2017/06/blog-post_19.html?m=1http://www.rachanakar.org/2017/06/blog-post_19.html?m=1कहानी-बहुत दिनों बाद आज जीन्स पहन कर घर से निकली थी। जीन्स में जो कम्फर्ट मिलता था वो किसी और ड्रेस में नहीं था। मन थोड़ा ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   7:46am 20 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
मेरे शब्दों  का रंग लाल है रक्तिम लाल!जैसे झूठी मुठभेड़ में मरे  निर्दोष आदमी का रक्त....जैसे रेड लाइट एरिया में पनाह ली हुई....... औरत के सिन्दूर का रंग. जैसे टी बी के मरीज का खून .....जो उलट देता है अपनी गरीबी....हर खांसी के साथ.ये रक्तिम शब्द भी इतने बेज़ान हैं......बस पड़े रहत... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   5:08pm 18 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
वो जो चली गयी है अभी अभी तुम्हे छोड़कर,है बड़ी हसीन !जैसे नए बुनकर की उम्मीद,उँगलियों से बुने महीन सूत के जोड़ सी। जब भी तुम चूमना चाहते हो मुझे,उसके होंठ..... मुझे तुम्हारे होठों पर नज़र आते हैं;और उसके गालों का गुलाबीपन .....छा जाता है मेरे वजूद पर.उसके इत्र की खुशबू .......कमबख... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   6:45pm 17 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
आज तुम्हारी रजिस्ट्री मिली है मुझे,कुछ प्यार के आभूषण हैं कुछ सपनों की पोशाकें,वही जो तुमने अपनी दहलीज़ के नीचे दबा रखी थीं. मैंने तुम्हारे उपहार पहन लिए है,देखो न कैसी लग रही हूँ?वैसी ही न!जैसी एक शाम...... कॉफ़ी की अंतिम बूँद में छोड़ आये थे मुझे.....या जैसी दबा आये थे......पार्क मे... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   7:14pm 15 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
1.ये जो तुमने मौत ओढ़ाई है मुझेकितनी लाचार है अपनी कोशिशों में.मै तो अब भी ज़िंदा हूँ तुम्हारे खून से सने हाथों में ,तुम्हारे दुधमुहे बच्चे की बोतल में मेरी साँसे बंद हैंऔर तुम्हारी पत्नी की मुस्कान :ज़रा गौर से देखो! मेरी खिलखिलाहट नज़र नहीं आ रही.स्कूल के बाथरूम में जब रेत ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   7:43am 13 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
तुम्हारा जाना बहुत अखर रहा है माँ!अनुपस्थिति है फिर भी है उपस्थिति का एहसास. होने न होने के बीच डोलते मनोभाव!कैसे कहूँ! तुम थीं तो सोचता था कब आयेगा तुम्हारा वक्त,बिस्तर साफ़ करना,धोना, पोछना, नहलाना, खिलाना, पिलाना उकता गया था मै तुम्हारे इन कामों से,तंग आ गया था तुम्ह... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   10:28am 12 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
pic credit google कुछ हल्की- फुल्की बातें हों कुछ नेह भरी बरसातें हों कुछ बीते जीते लम्हे हों कुछ गहरी- उथली बातें हों.कभी हम रूठा -रूठी खेलें कभी हम थोड़ीे मनुहार करें कभी आपा -धापी भूल  चलें कभी एक -दूजे का हाँथ गहें।कभी एक कदम मै और बढ़ूँ  कभी तुम थोड़ा अभिमा... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   4:53am 11 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
आओ न थोड़ी सादगी ओढ़ लेंथोड़ी सी ओढ़ लें मासूमियतकाले काले चेहरों पर थोड़ी पॉलिश पोत लेंनियत के काले दागों हो सर्फ़ से धो लें.उतार दें उस मज़दूर का कर्जजो कल से हमारे उजाले के लिए आसमान में टंगा हैभूखा प्यासा होकर भी काम पर लगा है.खेतों में अन्न उगाकर दाना दाना दे जाता हैबाद ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   11:59am 8 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
तुमने एक सच को मारना चाहा वो तुम्हे मरकर भी अंगूठा दिखा रहा है!कलम है, रुक नहीं सकती शब्द मौन नहीं हो सकते कितनी ही कर लो कोशिश दबा लो गला काट दो नाड़ी विक्षिप्त घोषित कर दो ओढा दो कफ़न दफ़न नहीं कर सकते सच्चाई.खुश भले हो लो दो-चार को मार कर कॉलर खड़ी कर लो अपने आप खुद की वाह वाही ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   5:29pm 6 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
लौट कर आओ ज़रा सा मुस्कुराओचाँद- तारों को हंथेली में छुपाओ और कह दो रात ये सूनी न होगीउन नयन में दीप्ति मेरी गुनगुनाओ तुम मेरा मधुमास बन कर लौट आओ.मै अकेला ही रुका था बाँध पर जब तुम नदी सी बह चली थी भोर के संगसाथ मेरे थम गया था द्वेष सारा तुम हवा सी उड़ चली थी रीत पर सब.था सघन न... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   9:17am 6 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
pic- googleआपको देखकर उस दिन  बहुत डर लगा था मुझे. पता है क्योँ ? मुझे लगा आप मेरी पूरे दिन की मेहनत नाले में फेंकने आये है. आपके घर के पास खाली बोतलें, प्लास्टिक की थैलियाँ, कुछ कबाड़ में बिकने वाली चीजे चुन रही थी. मुझे लगा आप मुझे आभी डाट कर या मार कर भगा देंगे जैसे और लोगों ने कई ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   7:28am 4 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
picture - google मेरे चहरे पर ये जो उदासी देख रहे होमेरी ही पीड़ा नहीं है इसमेमेरी आँखों में थोड़े से आंसू सीरिया के उन बच्चों के भी है;जिन्होंने पैदा होने  के बाद सिर्फ बारूद का धुंआ देखा है,मेरी उफ़्फ़ में उन लाखों औरतों का दर्द हैजो अनचाहे ही बिस्तरों पर पटक दी जाती हैं,मेरी सू... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   11:13am 3 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
एक था सागर भरा लबालबप्यास के मारे तड़प रहा था,इतनी थाती रखकर भी वोबूंद - बूंद को मचल रहा था,नदिया ने फ़िर हाथ मिलाया,घूंट-घूंट उसको सहलाया,उसके खारे पानी में भीअपना मीठा नीर मिलाया.दोनो मिलकर एक हुए जबमीठा जल भी खारा हो गया.दुनिया कहती नदी बनो तुम,सारे जग की प्यास हरो तुम.स... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   5:44pm 2 Sep 2017 #
Blogger: Aparna Bajpai
(चित्र साभार शिवानंद रथ फेसबुक वाल )हर रोज गुजरती हूँ इस राहकभी डर नहीं लगा.फिर भी कहते हैं लोगसंभल कर जाना,न जाने कब धमक पड़े बनबिलाव सरे आम,भूख मिटाने के लिए तोड़ने लगे तुम्हारा जिस्म।हाथ में पिसी मिर्च जरूर रखना,दिखे कोई जंगली जानवर!भागना मत, सीधे आँखों में झोंक देन... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   9:52am 2 Sep 2017 #
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