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शशि कपूर रायपुर आए थे । इस बार प्रभाकर चौबे उन्हीं की स्मृति को साझा कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि हाल ही में मशहूर अभिनेता शशिकपूर का निधन हुआ । बहुत कम लोगों को पता होगा कि शशि कपूर रायपुर आए थे । निधन पर अखबारों या सोशल मीडिया  में भी   इस बात का ज़िक्र नहीं दिखा । इस ...
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  December 8, 2017, 9:52 am
        रायपुर शहर एक छोटे से कस्बे से धीरे धीरे आज छत्तीसगढ़ की राजधानी के रूप में लगातार विकसित हो रहा है । इत्तेफाक ये भी है कि इस वर्ष हम अपने नगर की पालिका का150 वॉ वर्ष भी मना रहे हैं ।         हमारी पीढ़ी अपने शहर के पुराने दौर के बारे में लगभग अनभि...
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  December 3, 2017, 11:25 am
      वरिष्ठ पत्रकार गौरी शंकर लंकेश की हत्या अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक बर्बर हमले के साथ ही लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने के लिए फासीवादी ताकतों द्वारा की गई  कायराना हत्या है । गौरी शंकर लंकेश ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया । कर्नाटक में सांप्रदायिकता व क...
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  September 6, 2017, 5:23 pm
जब प्रेम, शांति और सहिष्णुता के संभव होने पर विश्वास टूटने लगे, जब घृणा, क्रूरता, असत्य और रक्त का उन्मादस्वीकृति पाकर विजयी या निर्णायक होने लगे, तब रचनाकार के अंदर की रचनात्मकता टूटना शुरु होती है । एक रचनाकार के लिये ये संकट और संघर्ष के क्षण होते हैं । चारों ओर हिंसक ...
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  August 24, 2017, 7:26 pm
        रायपुर शहर एक छोटे से कस्बे से धीरे धीरे आज छत्तीसगढ़ की राजधानी के रूप में लगातार विकसित हो रहा है । इत्तेफाक ये भी है कि इस वर्ष हम अपने नगर की पालिका का150 वॉ वर्ष भी मना रहे हैं ।         हमारी पीढ़ी अपने शहर के पुराने दौर के बारे में लगभग अनभिज्...
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  August 17, 2017, 6:17 pm
    रायपुर शहर एक छोटे से कस्बे से धीरे धीरे आज छत्तीसगढ़ की राजधानी के रूप में लगातार विकसित हो रहा है । इत्तेफाक ये भी है कि इस वर्ष हम अपने नगर की पालिका का 150 वॉ वर्ष भी मना रहे हैं ।  हमारी पीढ़ी अपने शहर के पुराने दौर के बारे में लगभग अनभिज्ञ से हैं । वो दौर वो ज़मान...
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  July 31, 2017, 10:01 am
      कुछ इसी तर्ज़ पर चलाया जा रहा है मोदी व भाजपा के एजेण्डे का प्रचार प्रसार.. ...एक बात तो माननी होगी कि मोदी केप्रचार तंत्र में संलग्न प्रोफेशनल्स अपनी पूरी प्रतिभा पूरे देश को मोदीमय करने में लगा रहे हैं और काफी हद तक कामयाब हो रहे हैं......मीडिया तो अपने व्यवसायिक ल...
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  July 19, 2017, 4:18 pm
गजानन माधव मुक्तिबोध का यह जन्म शताब्दी वर्ष है । पिछली आधी सदीसे हिन्दी साहित्य मे मुक्तिबोध की गंभीर उपस्थिति एक  गहन बौद्धिक आवरण की तरह छाई हुई है । मुक्तिबोध एक चिंतनशील व जागरूक रचनाधर्मी के रूप में जाने जाते हैं । वे  गहन मानवीय संवेदना के कवि तथा कल्पनाशील ...
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  June 20, 2017, 9:34 am
http://sangamankar.com/आइनाघर-5हमने अपनी वेबसाइट में वरिष्ठ साहित्यकार व अकार के संपादक प्रियंवद का कॉलम “आइनाघर ” शुरु किया है जो पाक्षिक हैपहले व तीसरे हफ्ते में वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाता है।इस बार...आइनाघर-5सतह से उठता हुआ गांधीसंदर्भ : 'पहला गिरमिटिया'उपन्यास का गांधी : प्रिय...
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  March 28, 2017, 4:01 pm
संगमनकार में – प्रियंवद का “आइनाघर ”   आइनाघर-4 में “बुत हमको कहें कांफिर ”Log on to-- http://sangamankar.com/हमने अपनी वेबसाइट में वरिष्ठ साहित्यकार व अकार के संपादक प्रियंवद का कॉलम “आइनाघर ” शुरु किया है जो पाक्षिक है और प्रतिमाह के पहले व तीसरे हफ्ते में वेबसाइट पर प्रकाशित किया ज...
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  February 21, 2017, 10:02 am
http://sangamankar.com/हमारी वेबसाइय संगमनकार में दो नए कॉलम----1 प्रियंवद का कॉलम “आइनाघर ” -----इस कॉलम में विगत वर्षों में उनके द्वारा लिखी गई रम्य रचनाएं और प्रमुख हस्तियों से साक्षात्कार पुनः प्रकाशित किए जायेंगे ।ये क़ॉलम प्रतिमाह पहले व तीसरे हफ्ते में वेबसाइट पर प्रकाशित किया ...
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  February 10, 2017, 2:00 pm
इस बार कविता ----  मुझे कदम कदम पर      (मुक्तिबोध )मुझे कदम-कदम परचौराहे मिलते हैंबाँहे फैलाए !!एक पैर रखता हूँकि सौ राहें फूटतीं,व मैं उन सब पर से गुजरना चाहता हूँबहुत अच्छे लगते हैंउनके तजुर्बे और अपने सपने...सब सच्चे लगते हैं;अजीब सी अकुलाहट दिल में उभरती हैमैं कुछ...
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  January 18, 2017, 3:21 pm
इस बार कविता--पूंजीवादी समाज के प्रति----------------------------------इतने प्राण, इतने हाथ, इनती बुद्धिइतना ज्ञान, संस्कृति और अंतःशुद्धिइतना दिव्य, इतना भव्य, इतनी शक्तियह सौंदर्य, वह वैचित्र्य, ईश्वर-भक्तिइतना काव्य, इतने शब्द, इतने छंद –जितना ढोंग, जितना भोग है निर्बंधइतना गूढ़, इतना ग...
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  December 31, 2016, 6:46 pm
    सर एक कार्यक्रम कर रहे हैं आपका सहयोग व मार्गदर्शन चाहिए .... आप कभी भी मोबाइल पर कहें और हमेशा जवाब आता , आ जाओ घर पर । चाहे कोई भी हो, सर . यानि सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार विनोद शंकर शुक्ल हर हमेशा साहित्यिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए हर तरह के सहयोग को तत्पर रहते। उनक...
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  December 10, 2016, 9:11 am
विकल्प विमर्श की मुक्तिबोध स्मरण श्रंखला-2 काठ का सपना ः गजानन माधव मुक्तिबोध भरी, धुआँती मैली आग जो मन में है और कभी-कभी सुनहली आँच भी देती है। पूरा शनिश्‍चरी रूप।वे एक बालिका के पिता हैं, और वह बालिका एक घर के बरामदे की गली में निकली मुँडेर पर बैठी है, अपने पिता को दे...
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  December 4, 2016, 1:02 pm
मैं सड़क पार कर लेता हूँ। जंगली, बेमहक लेकिन खूबसूरत विदेशी फूलों के नीचे ठहर-सा जाता हूँ कि जो फूल, भीत के पासवाले अहाते की आदमकद दीवार के ऊपर फैले, सड़क के बाजू पर बाँहें बिछा कर झुक गए हैं। पता नहीं कैसे, किस साहस से व क्‍यों उसी अहाते के पास बिजली का ऊँचा खंभा - जो पाँच-छ...
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  November 15, 2016, 9:39 am
अबके दीपावली में मिली पुरानी डायरी से एक कविता----सभी मित्रों को दीपावली की शुभकामनाओं के साथ---गोवर्धन पर्वत-बारिश मे तान लियाअपने सर पर छाताकड़कड़ाती ठंड मेबचाता रहा अपनी चमड़ीऔर गर्मियों मेअपने घर पर ही लगा लिया कूलर ।बस इतना ही करता रहामौसम दर मौसम साल दर साल सालऔर सोच...
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  November 2, 2016, 11:42 am
एक प्रसिद्ध शेर है _कुछ तो मजबूरियां रही होगी ;यूँ ही कोई बेवफा नही होता ,,,,इसी तर्ज़ पर कहा जा सकता है कि......कुछ तो वजह रही होगी यूँ ही कोई बदज़ुबां नही होता ... गुजरात मे गो रक्षक गो हत्या के कथित आरोप लगाते हुए दलित युवकों को सरेआम रास्तों पर पीटते हुए थाने तक ले जाते हैं और को...
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  July 27, 2016, 11:51 am
राजकमल नायक रंगकर्म के क्षेत्र में एक जाना पहचाना और सम्मानित नाम है । यदि वे कोई नई प्रस्तुति पेश करते हैं तो दर्शकों में उत्सुकता और अपेक्षा बनी रहती है । एक लम्बे अंतराल के पश्चात इस बार वे स्वलिखित ,निर्देशित व् संगीतबद्ध एक पात्रीय नाटक "अलग मुलुक का बाशिंदा "लेकर ...
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  June 21, 2016, 11:39 am
कई दिनो से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है । यह निहायत ही शर्म की बात है कि देश के प्रधानमंत्री जैसे गरिमामयी पद पर आसीन व्यक्ति की डिग्री को लेकर देशभर में हल्ला मचा हुआ है और खुद प्रधानमंत्री मौन हैं ।         वाचाल म...
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  June 2, 2016, 9:31 am
तो रोहित की मां ओर भाई ने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया । सामाजिक न्याय और समानता के संघर्ष का आदर्श माने जाने वाले बाबा साहेब आंबेडकर की 125 वीं जयंती पर दोनो ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया ।  बहुत से लोग खुश हैं। ठीक है। यह उनका निजि फैसला है तब तक इस पर पर कुछ कहा नहीं जा सकता औ...
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  April 15, 2016, 3:31 pm
( तसल्लियों के इतने साल बाद अपने हाल परनिगाह डाल सोच और सोचकर सवाल कर....)एक कन्हैया से इतने सवाल जवाब? पता नहीं कौन कौन कन्हैया से क्या क्या सवाल कर रहा है और किस किस के जवाबमांग रहा है । लगातार वाटस एप पर गंदी और घटिया भाषा के साथतथाकथित देशभक्त सवाल कर रहे हैं । गालियां दे...
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  March 5, 2016, 6:29 pm
ये दाग दाग उजाला , ये शब-गज़ीदा सहरवो इंतज़ार था जिसका, ये वो सहर तो नहीं...फैज़ साहब की रचना लगातार मस्तिष्क में गूंज रही है । आज, आजादी के  70 साल बाद भी, हैदराबाद में एक युवा छात्र ,रोहित वेमुला, विश्वविद्यालयीन कुशासन,प्रशासनिक अक्षमता  अकर्मण्यता और लाल फीताशाही से क...
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  January 20, 2016, 10:12 am
संकट सचमुच गंभीर और बड़ा ही है ।बड़े बड़े विद्वान रचनाकार , जो मेरे पसंदीदा रचनाकारों में शुमार रहे हैं, अपने सम्मान और पुरस्कार लौटा रहे हैं। मुझ जैसै थोड़ा बहुत पढ़ने वाले भी अब इसे महसूस करने लगे हैं । एक लोकतांत्रिक प्रणाली में , जो शायद अभी थोड़ी बहुत बाकी है , बौद...
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  October 13, 2015, 9:06 pm
सभी कलाप्रेमियों को यह समझना भी जरुरी है कि केवल लोक रंगमंच या लोक संस्कृति ही सर्वोपरी नहीं है, आधुनिक रंगमंच भी एक उच्च स्तरीय कलाकर्म है, जो भाषा को गढ़ने और उसकी प्रौन्नति में अपनी महती भूमिका निभाता है| समकालीनता, प्रस्तुतीकरण का ढंग, नयी व्याख्या, खोज, रूप एवं कथ...
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  June 29, 2015, 7:20 pm
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