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कूड़ा-करकट

आज है 18 जुलाई यानी अपने-अपने क्षेत्र के तीन महारथियों का जन्मदिन, जिनमें रंगभेद नीति के विरोध के प्रतीक नेल्सन मंडेला, ग़ज़ल के शहंशाह मेहदी हसन जिनकी गायकी को आज भी लोग बहुत पसंद करते हैं और राजेश जोशी जिन्होंने 'मारे जाएँगे', 'बच्चे काम पर जा रहें है', 'समरगाथा'आदि जैसी व्य...
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Tag :नेल्सन मंडेला
  July 18, 2017, 12:28 am
आज है 9 जुलाई यानी हिंदी सिनेमा जगत की ऐसी दो महान,बहुआयामी व्यक्तित्व से ओत-प्रोत प्रतिभाओं का जन्मदिवस। जिन्हें सामान्यत: हम सभी प्यासा, कागज़ के फ़ूल,आर-पार,साहब बीवी और गुलाम,चौदहवीं का चाँद तथा दस्तक,कोशिश,सीता और गीता,शोले,आंधी,अर्जुन पंडित इत्यादि फिल्मों के मा...
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Tag :
  July 9, 2017, 1:30 am
आज है 8 जुलाई यानी साहित्य अकादेमी,पद्मश्री,व्यास तथा भारतेंदु आदि पुरस्कार से समादृत उपन्यासकार,कहानीकार,नाटककार और आलोचक श्रीयुत "गिरिराज किशोर" का जन्मदिवस। तो आइए कूड़ा-करकट ब्लॉग समूह की ओर से जन्मदिवस तथा पुण्यतिथि ...
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  July 8, 2017, 1:44 am
आज है 7 जुलाई यानी प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि पर 'उसने कहा था' नामक कहानी लिखने वाले श्रीयुत 'चंद्रधर शर्मा गुलेरी' का जन्मदिवस।तो आइए जन्मदिवस की इस कड़ी में कूड़ा-करकट समूह की ओर से देखते हैं कुछ चित्र जो edit किये ...
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  July 7, 2017, 1:19 pm
        ‘उड़ता दरवाज़ा’ नक्शा नवीस ने बना दी खिड़कीझाँक सके अंदरदेख सके स्त्री की निजता कोदिखाई दे सके स्त्री को खिड़की जितना ही बाहर जैसे नही दिखता काली शीशे लगी गाडी में बाहर सेदंभी लोग भौक रहे हैंरच रहे हैं षडयंत्र                         आखिर गलती बाँ...
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Tag :काव्य
  July 6, 2017, 4:20 pm
आज है 5 जुलाई यानी  साहित्य की वह ऐतिहासिक तारीख़ जिसने हिंदी साहित्य-संसार को दो ऐसे मूर्धन्य साहित्यकार दिए जिन्हें हम असग़र वजाहत और अब्दुल बिस्मिल्लाह के नाम से जानते हैं। कूड़ा-करकट टीम की ओर से दोनों ही लेखकों को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई के साथ-साथ पढ़ते है असग़र वज...
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Tag :असग़र वजाहत
  July 5, 2017, 8:18 am
आज है 2 जुलाई यानी "महज जन्म देना ही स्त्री होना नहीं है"जैसी आदि बहुमूल्य काव्य पंक्ति लिखकर आधुनिक हिंदी कवियों में एक प्रमुख स्थान बनाने वाले हम सब के प्रिय कवि श्रीयुत'आलोक धन्वा' का जन्मदिवस। तो इस अव...
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Tag :आलोक
  July 2, 2017, 2:46 pm
प्रो.तुलसीराम जी के जन्म दिवस पर उनको याद करते हुए .....उन्ही के द्वारा लिखी हुई आत्मकथा मणिकर्णिका का एक अंश ।।।1 जुलाई, 1969 को दो ऐसी घटनाएं घटीं, जिन्हें मैं कभी नहीं भूल  पाऊंगा  सर्टिफिकेट के अनुसार 1 जुलाई 1949 को मेरा जन्मदिन पड़ता है। उस दिन मैं 20 साल का...
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Tag :तुलसीराम
  July 1, 2017, 9:11 pm
आज है 30 जून यानी "जनता मुझसे पूछ रही है क्या बतलाऊं,जनकवि हूँ मैं साफ़ कहूँगा क्यों हकलाऊं" जैसी पंक्तियाँ कहने वाले  आधुनिक हिंदी साहित्य के अमर काव्य -शिल्पी वैद्यनाथ मिश्र अर्थात बाबा नागार्जुन का जन्मदिवस। तो आइ...
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Tag :कवि।
  June 30, 2017, 7:47 pm
आज है 24 जून यानी भाग्यवती उपन्यास तथा ओम जय जगदीश हरे... जैसी उत्तर भारत में प्रसिद्ध आरती लिखने वाले श्रीयुत श्रद्धाराम फिल्लौरी की पुण्यतिथि | तो पढ़ते हैं डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा 'अरुण'द्वारा लिखित लेख |  डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’पूरे विश्व में अपनी कालजय...
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Tag :
  June 24, 2017, 10:31 am
  ग़ज़ल मिर्ज़ा ग़ालिब की और फोटों खींचे हैं  मैंने                                                                                        -  आमिर'विद्यार्थी'                                           &...
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Tag :ग़ज़ल
  June 23, 2017, 6:52 pm
'जूता' कविता ओमप्रकाश वाल्मीकि एक ऐसा नाम है जो अपने रचनाकर्म से गहराई तक हमे प्रभावित करता है | इनका साहित्य चाहे वह कहानी हो या फिर कविता हो आदि सब में किसी भी प्रकार का दुराव-छिपाव दिखाई नही देता तो इस लिहाज से इनका साहित्य एक 'सत्य साहित्य'की श्रेणी में आता है | (जूत...
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Tag :कविता
  June 17, 2017, 10:48 am
                                    जिया न जलइयों रे ....खुद को दस बार शीशे में देखने के बाद जब उसे तसल्ली हो गई कि वो ठीक लग रहा है | उसने अपना बैग उठाया और सीढियों से नीचे उतरने लगा | सीढ़ियों पर ही एक्स का डीयो लगाया और फिर चलता बना | डीयो की खुशबू कुछ ऐसे फैली लग...
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  June 14, 2017, 7:25 pm
                                                                डायरी एक रात की वो रात बहुत चमकीली थी मानो आसमान से सितारे चू रहे थे | सड़के सुनसान जरुर थी पर न जाने क्यों लगता था 'वो जहां है वही ठहरी हुई है, कि यही सड़क का अंतिम छोर है उस और न जाने क्या ...
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  June 12, 2017, 9:29 pm

  फूलों को मसलने वाले खूनी पांवों को शायद यह पता नहीं था फूल जितने रौंदे जाएंगे                          खुशबू उतनी तेज होगी!        मदन कश्यप देखा जाए तो भारतीय संस्कृति में फूलों का बड़ा ही महत्त्व रहा है और अभी भी है | देवताओं के चेहरे आखिर फूल ही खिल...
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Tag :
  June 10, 2017, 9:51 pm
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