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स्वप्न मेरे ...

बारूद की खुशबू है, दिन रात हवाओं में देता है कोई छुप कर, तकरीर सभाओं में इक याद भटकती है, इक रूह सिसकती है घुंघरू से खनकते हैं, खामोश गुफाओं में बादल तो नहीं गरजे, बूँदें भी नहीं आईंकितना है असर देखो, आशिक की दुआओं मेंचीज़ों से रसोई की, अम्मा जो बनाती थी देखा है असर उनका, देखा ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :अहिल्या
  September 18, 2017, 9:20 am
भुगतान हो गया तो निकल कर चले गए नारे लगाने वाले अधिकतर चले गएमाँ बाप को निकाल के घर, खेत बेच कर बेटे हिसाब कर के बराबर चले गए सूखी सी पत्तियाँ तो कभी धूल के गुबारखुशबू तुम्हारी आई तो पतझड़ चले गए खिड़की से इक उदास नज़र ढूंढती रही पगडंडियों से लौट के सब घर चले गए  बच्चे थे तुम...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  September 11, 2017, 10:16 am
हुआ है हादसा इतना बड़ा वीरान तो होगाअभी निकला है दहशत से शहर सुनसान तो होगा घुसे आये मेरे घर में चलो तस्लीम है लेकिन  तलाशी की इजाज़त का कोई फरमान तो होगा बिमारी भी है भूखा पेट भी हसरत भी जीने कीजरूरत के लिए घर में मेरे सामान तो होगा   अकेले नाव कागज़ की लिए सागर में उतरा...
स्वप्न मेरे ......
Tag :नुक्सान
  September 5, 2017, 9:33 am
बहरों का है शहर ये संभल जाइए हुजूर क्यों कह रहे हैं अपनी गज़ल जाइए हुजूरबिखरे हुए जो राह में पत्थर समेट लो  कुछ दूर कांच का है महल जाइए हुजूरजो आपकी तलाश समुन्दर पे ख़त्म है दरिया के साथ साथ निकल जाइए हुजूर क्यों बात बात पर हो ज़माने को कोसते अब भी समय है आप बदल जाइए हुज़ूरम...
स्वप्न मेरे ......
Tag :देश
  August 28, 2017, 6:20 am
वो रौशनी का हर हिसाब लिए बैठा हैजो घर में अपने आफताब लिए बैठा है इसी लिए के छोड़नी है उसे ये आदत  वो पी नहीं रहा शराब लिए बैठा है पता है सच उसे मगर वो सुनेगा सब की  वो आईने से हर जवाब लिए बैठा है वो अजनबी सा बन के यूँ ही निकल जाएगा वो अपने चहरे पे नकाब लिए बैठा है दिलों के खेल...
स्वप्न मेरे ......
Tag :इन्कलाब
  August 21, 2017, 8:44 am
सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ-कामनाएं ... इस पावन पर्व की पूर्व संध्या पर आज के हालात पे लिखी गज़ल प्रस्तुत है ... आशा है सबका स्नेह मिलता रहेगा ...जब तलक नापाक हरकत शत्रु की सहते रहेंगेदेश की सीमाओं पर सैनिक सदा मरते रहेंगेपत्थरों से वार कर उक्सा रहे हैं देश-द्रोही औ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :ओजस्वी
  August 14, 2017, 8:48 am
कविता के लम्बे दौर से निकलने का मन तो नहीं था, फिर लगा कहीं गज़ल लिखना भूल तो नहीं गया ... इसलिए आज ग़ज़ल के साथ हाजिर हूँ आपके बीच ... आशा है सबका स्नेह मिलता रहेगा ... डूबे ज़रुर आँख के काजल नहीं हुए कुछ लोग हैं जो इश्क में पागल नहीं हुए  है आज अपने हाथ में करना है जो करो कुछ भी न क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :काजल
  August 2, 2017, 12:10 pm
क्या सही क्या गलत ... खराब घुटनों के साथ रोज़ चलते रहना ज़िंदगी की जद्दोजहद नहीं दर्द है उम्र भर का ... एक ऐसा सफ़र जहाँ मरना होता है रोज़ ज़िंदगी को ... ऐसे में ... सही बताना क्या में सही हूँ ...फुरसत के सबसे पहले लम्हे में बासी यादों की पोटली लिए  तुम भी चली आना टूटी मज़ार के पीछे सुख द...
स्वप्न मेरे ......
Tag :रचना
  July 25, 2017, 11:15 am
यादें यादें यादें ... क्या आना बंद होंगी ... काश की रूठ जाएँ यादें ... पर लगता तो नहीं और साँसों तक तो बिलकुल भी नहीं ... क्यों वक़्त जाया करना ...मिट्टी की कई परतों के बावजूद हलके नहीं होते कुछ यादों की निशान हालांकि मूसलाधार बारिश के बाद साफ़ हो जाता है आसमानसाफ़ हो जाती हैं गर्द की...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जंगली गुलाब
  July 19, 2017, 9:12 pm
नींद और यादें ... शायद दुश्मन हैं अनादी काल से ... एक अन्दर तो दूजा बाहर ... पर क्यों ... क्यों नहीं मधुर स्वप्न बन कर उतर आती हैं यादें आँखों में ... जंगली गुलाब भी तो ऐसे ही खिल उठता है सुबह के साथ ...  सो गए पंछी घर लौटने के बाद   थका हार दिन, बुझ गया अरब सागर की आगोश में  गहराती ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :आगोश
  July 11, 2017, 9:40 am
तुम ये न समझना की ये कोई उलाहना है ... खुद से की हुई बातें दोहरानी पढ़ती हैं कई बार ... खुद के होने का  एहसास भी तो जरूरी है जीने के लिए ... हवा भर लेना ही तो नहीं ज़िंदगी ... किसी का एहसास न घुला हो तो साँसें, साँसें कहाँ ...कितनी बार सपनों को हवा दे कर यूं ही छोड़ दिया तुमने वक्त की तन्ह...
स्वप्न मेरे ......
Tag :एहसास
  July 5, 2017, 11:08 am
सुकून अगर मिल सकता बाज़ार में तो कितना अच्छा होता ... दो किलो ले आता तुम्हारे लिए भी ... काश की पेड़ों पे लगा होता सुकून ... पत्थर मारते भर लेते जेब ... क्या है किसी के पास या सबको है तलाश इसकी ...नहीं चाहता प्यार करना के जीना चाहता हूं कुछ पल सुकून के अपने आप से किये वादों से परे उड़ना ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जीवन
  June 27, 2017, 8:55 am
सुलगते ख्वाब ... कुनमुनाती धूप में लहराता आँचल ... तल की गहराइयों में हिलोरें लेती प्रेम की सरगम ... सतरंगी मौसम के साथ साँसों में घुलती मोंगरे की गंध ... क्या यही सब प्रेम के गहरे रिश्ते की पहचान है ... या इनसे भी कुछ इतर ... कोई जंगली गुलाब ... झर गई दीवारें खिड़की दरवाजों के किस्से ह...
स्वप्न मेरे ......
Tag :प्रेम
  June 19, 2017, 9:30 am
समय की पगडण्डी पे उगी मुसलसल यादें, इक्का दुक्का क़दमों के निशान ... न खत्म होने वाला सफ़र और गुफ्तगू तनहाई से ... ये लम्हे कभी गोखरू, कभी फूल ... तो कभी चुभता हुआ दंश, जंगली गुलाब का ...    मेहनत की मुंडेर पे पड़ा होता है कामयाबी का एक टुकड़ा जरूरी है नसीब का होना सौ मीटर की इस रेस ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जंगली गुलाब
  June 6, 2017, 7:21 pm
धाड़ धाड़ चोट मारते लम्हे ... सर फट भी जाये तो क्या निकलेगा ... यादों का मवाद ... जंगली गुलाब का कीचड़  ... समय की टिकटिक एक दुसरे से जुड़ी क्यों है ... एक पल,यादों के ढेर दूसरे पल को सौंपे, इससे पहले सन्नाटे का पल क्यों नहीं आता ... फंस के रह गया है ऊँगली से उधड़ा सिरा जंगली गुलाब के काँटों...
स्वप्न मेरे ......
Tag :आंसू
  May 29, 2017, 10:19 am
सम्मोहन, बदहवासी ... पर किस बात की ... जैसे कुछ पकड़ में नहीं आ रहा ... चेहरे ही चेहरे या सारे मेरे चेहरे ...  फिसल रही हो तुम या मैं या जिंदगी या कुछ और ... सतह कहाँ है ... बेवजह बातें के लिए  लंबी रात का होना जरूरी नहीं मौन का संवाद कभी बेवजह नहीं होता हालांकि रात कई कई दिन लंबी हो जा...
स्वप्न मेरे ......
Tag :तस्वीर
  May 23, 2017, 9:35 am
पहली सांस का संघर्ष शायद जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है ... हालांकि उसके बाद भी जीवन का हर पल किसी सग्राम से कम नहीं ... साँसों की गिनती से नहीं ख़त्म होती उम्र ... उम्र ख़त्म होती है सपने देखना बंद करने से ... सपनों की खातिर लड़ने की चाह ख़त्म होने से ...  मौसम बदला पत्ते टूटे कहते हैं पतझ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :संघर्ष
  May 8, 2017, 9:23 am
नीव का पहला पत्थर पर कितना ज़रूरी ... क्यों नहीं होता उसका नाम ... निर्माण का सतत साक्षी होने के बावजूद भी वो नहीं होता कहीं ... वर्ग जो दब के रह जाता है अपने सृजन के सौंदर्य में ...     लहू सिंचित हाथों से प्रखर तीरों का निर्माण करने वाले इतिहास की छाती पे क्रान्ति गान लिखन...
स्वप्न मेरे ......
Tag :Labour day
  May 1, 2017, 9:22 am
क्या सच में जीवन का अन्त नहीं ... क्या जीवन निरंतर है ... आत्मा के दृष्टिकोण से देखो तो शायद हाँ ... पर शरीर के माध्यम से देखो तो ... पर क्या दोनों का अस्तित्व है एक दुसरे के बिना ... छोड़ो गुणी जनों के समझ की बाते हैं अपने को क्या ...   अचानक नहीं आताज़िंदगी की क़िताब का आखरी पन्ना हां...
स्वप्न मेरे ......
Tag :दीमक
  April 24, 2017, 9:29 am
क्या बोलते रहना ही संवाद है ... शब्द ही एकमात्र माध्यम है अपनी बात को दुसरे तक पहुंचाने का ... तो क्या शब्द की उत्पत्ति मनुष्य के साथ से ही है ... अगर हाँ तो फिर ख़ामोशी ...ख़ामोशी टुकड़ा नहीं मुंह में डाला स्वाद ले लियाख़ामोशी पान भी नही चबाते रहे अंदर अंदर जब चाहा थूक दिया कोरी दीव...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कशमकश
  April 17, 2017, 8:55 am
बिन बोले, बिन कहे भी कितना कुछ कहा जा सकता है ... पर जैसा कहा क्या दूसरा वैसा ही समझता है ... क्या सच के पीछे छुपा सच समझ आता है ... शायद हाँ, शायद ना ... या शायद समझ तो आता है पर समय निकल जाने के बाद ...   एक टक हाथ देखने के बाद तुमने कहा  राजा बनोगे या बिखारी वजह पूछी तो गहरी उदासी क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कड़वा सच
  April 10, 2017, 10:29 am
बिन बोले, बिन कहे भी कितना कुछ कहा जा सकता है ... पर जैसा कहा क्या दूसरा वैसा ही समझता है ... क्या सच के पीछे छुपा सच समझ आता है ... शायद हाँ, शायद ना ... या शायद समझ तो आता है पर समय निकल जाने के बाद ...   एक टक हाथ देखने के बाद तुमने कहा  राजा बनोगे या बिखारी वजह पूछी तो गहरी उदासी क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  April 10, 2017, 10:29 am
सोचता हूँ फज़ूल है उम्मीद की चाह रखना ... कई बार गहरा दर्द दे जाती हैं ... टुकड़ा टुकड़ा मौत से अच्छा है  खुदकशी कर लेना ...कुछ आहटें आती है उम्मीद की उस रास्ते से छोड़ आए थे सपनों के सतरंगी ढेर जहां   आशाओं के रेशमी पाँव रहने दो पालने में की ज़मीन नहीं मिल पायगी तुम्हारी दहलीज़ क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :उम्मीद
  April 3, 2017, 11:37 am
वो एक ऐहसास था प्रेम का जिसकी कहानी है ये ... जाने किस लम्हे शुरू हो के कहाँ तक पहुंची ... क्या साँसें बाकी हैं इस कहानी में ... हाँ ... क्या क्या कहा नहीं ... तो फिर इंतज़ार क्यों ... हालांकि छंट गई है तन्हाई की धुंध समय के साथ ताज़ा धूप भी उगने लगी है  पर निकलने लगे हैं यादों के नुकीले ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कहानी
  March 27, 2017, 12:45 pm
मुसलसल रहे आज तो कितना अच्छा ... प्रश्नों में खोए रहना ... जानने का प्रयास करना ... शायद व्यर्थ हैं सब बातें ... जबरन डालनी होती है जीने की आदत आने वाले एकाकी पलों के लिए ... भविष्य की मीठी यादों के लिए  वर्तमान में कुछ खरोंचें डालना ज़रूरी है, नहीं तो समय तो अपना काम कर जाता है ... जि...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  March 20, 2017, 9:27 am
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