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Blog: स्वप्न मेरे ...

Blogger: दिगम्बर नासवा
मैं कई गन्जों को कंगे बेचता हूँ एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ काटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता  और माथे के तिलक तो साथ रखता  नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँ एक सौदागर हूँ ...धर्म का व्योपार मुझसे पल रहा है दौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है  यूँ नही... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   3:36am 9 Sep 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
धूल कभी जो आँधी बन के आएगी पल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगी अक्षत मन तो स्वप्न नए सन्जोयेगाबीज नई आशा के मन में बोयेगा खींच लिए जायेंगे जब अवसर साधन सपनों की मृत्यु उस पल हो जायेगी पल दो पल फिर ...बादल बूँदा बाँदी कर उड़ जाएँगे चिप चिप कपडे जिस्मों से जुड़ जाएँगे चाट के ठेले जब ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   1:44am 2 Sep 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
क्या मिला सचमुच शिखर ?मिल गए ऐश्वर्य कितने अनगिनत पञ्च-तारा जिंदगी में हो गया विस्मृत विगत घर गली फिर गाँव फिर छूटा नगर क्या मिला सचमुच ...कर्म पथ पर आ नहीं पाई विफलता मान आदर पदक लाई सब सफलता मित्र बिछड़े चल न पाए साथ अपनेइस डगर क्या मिला सचमुच ...एकला चलता रहा शुभ लक्ष्य पा... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   4:51am 26 Aug 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
गीत प्रेम के गाता है हर दमजाने क्यों आँखें रहती नम नम नाच मयूरी हो पागल अम्बर पे छाए बादल बरसो मेघा रे पल पल बारिश की बूँदें करतीं छम छम जाने क्यों आँखें ...सबके अपने अपने गम कुछ के ज्यादा कुछ के कम सह लेता है जिसमें दम सुन आँसूं पलकों के पीछे थम जाने क्यों आँखें ... हिस्स... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   3:58am 19 Aug 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
हम कहाँ कहते हैं केवल स्वयं का ही त्राण हो रोज़ प्रातः बोलते हैं विश्व का कल्याण होहै सनातन धर्म जिसकी भावना मरती नहीं निज की सोचें ये हमारी संस्कृति कहती नहीं हो गुरु बाणी के या फिर बुद्ध का निर्वाण हो   राम को ही है चुनौती राम के ही देश मेंशत्रु क्या घर में छुपा है मि... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   4:24am 12 Aug 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
धड़ धड़ धड़ बरसा सावनभीगे, फिसले कितने तन घास उगी सूखे आँगन प्यास बुझी ओ बंजर धरती तृप्त हुईनीरस जीवन से तुलसी भी मुक्त हुई, झींगुर की गूँजे गुंजन घास उगी ...घास उगी वन औ उपवनगीले सूखे चहल पहल कुछ तेज हुई हरा बिछौना कोमल तन की सेज हुई दृश्य है कितना मन-भावन घास उगी ... हरियाया है ... Read more
clicks 54 View   Vote 1 Like   3:04am 5 Aug 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
 आशा की आहट का घोड़ासरपट दौड़ रहासुखमय जीवन-हार मिलासाँसों में महका स्पंदनमधुमय यौवन भार खिलानयनों में सागर सनेह कासपने जोड़ रहा सरपट दौड़ रहा ...खिली धूप मधुमास नयाखुले गगन में हल्की हल्कीवर्षा का आभास नयामन अकुलाया हरी घास परझटपट पौड़ रहासरपट दौड़ रहा ...सागर लह... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   5:01am 22 Jul 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
मेघ हैं आकाश में कितने घनेलौट कर आए हैं घर में सब जने  चिर प्रतीक्षा बारिशों की हो रही   बूँद अब तक बादलों में सो रही हैं हवा में कागजों की कत-रने मेघ हैं आकाश में ...कुछ कमी सी है सुबह से धूप में आसमां पीला हुआ है धूल में  रेड़ियाँ लौटी घरों को अन-मने मेघ हैं आकाश में ...नग... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   7:53am 15 Jul 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
आँखें से निकली बातें यहाँ वहां बिखरी बातें अफवाहें, झूठी, सच्ची  फ़ैल गईंकितनी बातें मुंह से निकली खैर नही  जितनेमुहउतनीबातें फिरती हैं आवारा सीकुछ बस्ती ,बस्तीबातें बातों को जो ले बैठा सुलझें नाउसकीबातें  जीवनमृत्यूसब किस्मतबाकीबस रहतीबातें  कानों... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   5:03am 8 Jul 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
कौन मेरे सपनों में आके रहता है जिस्म किसी भट्टी सा हरदम दहता है यादों की झुरमुट से धुंधला धुंधला सादूर नज़र आता है साया पतला सा  याद नहीं आता पर कुछ कुछ कहता है कौन मेरे सपनों ...बादल होते हैकाले से दूर कहीं  रीता रीता मन होता है पास वहीं आँखों से खारा सा कुछ कुछ बहता है क... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   12:43pm 1 Jul 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
अंधेरों को मिलेंगे आज ठेंगे ये दीपक रात भर यूँ ही जलेंगे  जो तोड़े पेड़ से अमरुद मिल कर  दरख्तों से कई लम्हे गिरेंगे किसी के होंठ को तितली ने चूमा किसी के गाल अब यूँ ही खिलेंगे गए जो उस हवेली पर यकीनन दीवारों से कई किस्से झरेंगे समोसे, चाय, चटनी, ब्रेड पकोड़ा न होंगे यार तो ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   2:45am 24 Jun 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
धूप की बैसाखियों को भूल जा  दिल में हिम्मत रख दियों को भूल जाव्यर्थ की नौटंकियों को भूल जा मीडिया की सुर्ख़ियों को भूल जा उस तरफ जाती हैं तो आती नहीं इस नदी की कश्तियों को भूल जाटिमटिमा कर फिर नज़र आते नहीं रास्ते के जुगनुओं को भूल जा हो गईं तो हो गईं ले ले सबक जिंदगी की गल... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   1:39pm 17 Jun 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
अपने शहर की खुशबू भी कम नहीं होती ... अभी लौटा हूँ अपने कर्म क्षेत्र ... एक गज़ल आपके नाम ...झुकी पलकें दुपट्टा आसमानीकहीं खिलती तो होगी रात रानीवजह क्या है तेरी खुशबू की जाना  कोई परफ्यूम या चिट्ठी पुरानीमिटा सकते नहीं पन्नों से लेकिन  दिलों से कुछ खरोंचे हैं मिटानीलड़ाई, ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   11:46am 12 Jun 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
जितनी बार भी देश आता हूँ, पुराने घर की गलियों से गुज़रता हूँ, अजीब सा एहसास होता है जो व्यक्त नहीं हो पाता, हाँ कई बार कागज़ पे जरूर उतर आता है ... अब ऐसा भी नहीं है की यहाँ होता हूँ तो वहां की याद नहीं आती ... अभी भारत में हूँ तो ... अब झेलिये इसको भी ...   कुल्लेदार पठानी पगड़ी, एक पज... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   4:42am 14 May 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
जितनी बार भी देश आता हूँ, पुराने घर की गलियों से गुज़रता हूँ, अजीब सा एहसास होता है जो व्यक्त नहीं हो पाता, हाँ कई बार कागज़ पे जरूर उतर आता है ... अब ऐसा भी नहीं है की यहाँ होता हूँ तो वहां की याद नहीं आती ... अभी भारत में हूँ तो ... अब झेलिये इसको भी ...   कुल्लेदार पठानी पगड़ी, एक... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   4:42am 14 May 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
मील के पत्थर थे ये जलते रहे कुछ मुसफ़िर यूँ खड़े जलते रहे पास आ, खुद को निहारा, हो गया फुरसतों में आईने जलते रहे कश लिया, एड़ी से रगड़ा ...पर नहीं “बट” तुम्हारी याद के जलते रहेमग तेरा,कौफी तेरी,यादें तेरी होठ थे जलते रहे, जलते रहे रोज़ के झगड़े, उधर तुम, मैं इधर  मौन से कुछ रास्ते जल... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   2:25am 29 Apr 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
कभी वो भूल से आए कभी बहाने से  मुझे तो फर्क पड़ा बस किसी के आने से नहीं ये काम करेगा कभी उठाने से ये सो रहा है अभी तक किसी बहाने से लिखे थे पर न तुझे भेज ही सका अब-तक मेरी दराज़ में कुछ ख़त पड़े पुराने से कभी न प्रेम के बंधन को आज़माना यूँके टूट जाते हैं रिश्ते यूँ आज़माने से तुझे छ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:49am 22 Apr 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
हुस्नो-इश्क़, जुदाई, दारू पीने पर मन करता है लिक्खूं नज़्म पसीने पर  खिड़की से बाहर देखो ... अब देख भी लो  क्यों पंगा लेती हो मेरे जीने पर  सोहबत में बदनाम हुए तो ... क्या है तो  यादों में रहते हैं यार कमीने पर     लक्कड़ के लट्टू थे, कन्चे कांच के थेदाम नहीं कुछ भी अनमोल ... Read more
clicks 116 View   Vote 1 Like   2:01am 15 Apr 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
हज़ार काम उफ़ ये सोच के थक लेता हूँ में बिन पिए जनाब रोज़ बहक लेता हूँ   ये फूल पत्ते बादलों में तेरी सूरत है वहम न हो मेरा में पलकें झपक लेता हूँकभी न पास टिक सकेगी उदासी मेरे तुझे नज़र से छू के रोज़ महक लेता हूँहरी हरी वसुंधरा पे सृजन हो पाए  में बन के बूँद बादलों से टपक ले... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   8:15am 8 Apr 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
प्रेम के कुछ दाग तन में रह गएइसलिए हम अंजुमन में रह गए सब तो डूबे चुस्कियों में और हमनर्म सी तेरी छुवन में रह गए चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर कुछ निभाने की जतन में रह गए छा गए किरदार कुछ आकाश पर कुछ सिमट के पैरहन में रह गएटूट कर सपने नहीं आए कभी  कुछ गुबारे भी गगन में रह गए ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   6:22am 1 Apr 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
सुनों छोड़ो चलो अब उठ भी जाएँ कहीं बारिश से पहले घूम आएँयकीनन आज फिर इतवार होगा उनीन्दा दिन है, बोझिल सी हवाएँहवेली तो नहीं पर पेड़ होंगेचलो जामुन वहाँ से तोड़ लाएँनज़र भर हर नज़र देखेगी तुमकोकहीं काला सा इक टीका लगाएँ पतंगें तो उड़ा आया है बचपनचलो पिंजरे से अब पंछी उड़ाएँकहर... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:25am 25 Mar 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
तेरी हर शै मुझे भाए, तो क्या वो इश्क़ होगा  मुझे तू देख शरमाए, तो क्या वो इश्क़ होगा   हवा में गूंजती है जो हमेशा इश्क़ बन कर   वो सरगम सुन नहीं पाए तो क्या वो इश्क़ होगा  पिए ना जो कभी झूठा, मगर मिलने पे अकसर  गटक जाए मेरी चाए, तो क्या वो इश्क़ होगा  सभी से हँस के बोले, पी... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   7:26am 18 Mar 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
सहारा बे-सहारा ढूंढ लेंगे मुकद्दर का सितारा ढूंढ लेंगेजो माँ की उँगलियों में था यकीनन वो जादू का पिटारा ढूंढ लेंगे गए जिस जिस जगह जा कर वहीं हमहरा बुन्दा तुम्हारा ढूंढ लेंगे मेरे कश्मीर की वादी है जन्नत वहीं कोई शिकारा ढूंढ लेंगेअभी इस जीन से कर लो गुज़ारा अमीरी में शर... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   3:46am 11 Mar 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
बसइतनाकहनाहैदेश के बन्दों से सबकोबचकररहनाहै जय चन्दों से राजनीतिजोकरतेहैंबलिदानोंपरढूंढकेउनकोघरकेबाहरकरदेनागद्दारोंकासाथसदाजोदेतेहैं  कानखोलकरमेरीबातेंसुनलेना  औरनहींकुछऔरनहींअबसहनाहैसबको बच कर रहना है ...   सीमाओंपे देश कीसैनिकडटेहुएकफ़नबाँधकर... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   7:36am 20 Feb 2019
Blogger: दिगम्बर नासवा
इस नज़र से उस नज़र की बात लम्बी हो गईमेज़ पे रक्खी हुई ये चाय ठंडी हो गईआसमानी शाल ने जब उड़ के सूरज को ढकागर्मियों की दो-पहर भी कुछ उनींदी हो गईकुछ अधूरे लफ्ज़ टूटे और भटके राह में     अधलिखे ख़त की कहानी और गहरी हो गईरात के तूफ़ान से हम डर गए थे इस कदरदिन सलीके से उगा दिल को ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   4:15am 11 Feb 2019
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