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स्वप्न मेरे ... : View Blog Posts
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स्वप्न मेरे ...

फूलों की कैद से पराग लेने दो इन तितलियों से कुछ सुराग लेने दो इस दौड़ में कहीं पिछड़ न जाएं हम मंजिल अभी है दूर भाग लेने दोराजा हो रंक पेट तो सताएगा उनको भी तो चूल्हे से आग लेने दोनज़दीक वो कभी नज़र न आएंगेसोए हुए हैं शेर जाग लेने दो हम आस्तीन में छुपा के रख लेंगे इस शहर में हमक...
स्वप्न मेरे ......
Tag :चराग
  December 11, 2017, 9:53 am
लहू का रंग है यकसाँ कहा शमशीर भालों ने लगा डाली है फिर भी आग बस्ती के दलालों ने  यकीनन दूर है मंज़िल मगर मैं ढूंढ ही लूंगा झलक दिखलाई है मुझको अँधेरे में उजालों नेवो लड़की है तो माँ के पेट में क्या ख़त्म हो जाए  झुका डाली मेरी गर्दन कुछ ऐसे ही सवालों ने अलग धर्मों के भूखे न...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  December 4, 2017, 9:44 am
अपने मन मोहने सांवले रंग में श्याम रँग दो हमें सांवरे रंग में मैं ही अग्नि हूँ जल पृथ्वी वायु गगनआत्मा है अजर सब मेरे रंग में ओढ़ कर फिर बसंती सा चोला चलोआज धरती को रँग दें नए रंग में थर-थराते लबों पर सुलगती हंसीआओ रँग दें तुम्हें इश्क के रंग मेंआसमानी दुपट्टा छलकते नयन स...
स्वप्न मेरे ......
Tag :आत्मा
  November 28, 2017, 10:32 am
हम बुज़ुर्गों के चरणों में झुकते रहे पद प्रतिष्ठा के संजोग बनते रहे वो समुंदर में डूबेंगे हर हाल में  नाव कागज़ की ले के जो चलते रहे इसलिए बढ़ गईं उनकी बदमाशियाँहम गुनाहों को बच्चों के ढकते रहे आश्की और फकीरी खुदा का करम डूब कर ज़िन्दगी में उभरते रहे धूप बारिश हवा सब से मह...
स्वप्न मेरे ......
Tag :तरक्की
  November 20, 2017, 9:49 am
बस वही मेरी निशानी, है अभी तक गाँव में बोलता था जिसको नानी, है अभी तक गाँव में खंडहरों में हो गई तब्दील पर अपनी तो है  वो हवेली जो पुरानी, है अभी तक गाँव में चाय तुलसी की,पराठे,मूफली गरमा गरम धूप सर्दी की सुहानी, है अभी तक गाँव में याद है घुँघरू का बजना रात के चोथे पहर क्या च...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गाँव
  November 13, 2017, 9:11 am
जुगनुओं से यूँ न दिल बहलाइएजा के पुडिया धूप की ले आइएपोटली यादों की खुलती जाएगीवक़्त की गलियों से मिलते जाइएस्वाद बचपन का तुम्हें मिल जाएगाफिर उसी ठेले पे रुक के खाइएहोंसला मजबूत होता जाएगाइम्तिहानों से नहीं घबराइएफूल, बादल, तितलियाँ सब हैं यहाँबेवजह किब्ला कभी मुस...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  November 6, 2017, 9:51 am
लिक्खी है गज़ल ताज़ा खामोश इबारत में दिन रात इसे रखना, होठों की हिफाज़त में हंसती है कहीं पायल, रोते हैं कहीं घुँघरूलटकी हैं कई यादें जालों सी इमारत मेंतारीफ़ नहीं करते अब मुझपे नहीं मरतेआता है मज़ा उनको दिन रात शिकायत मेंछलके थे उदासी में, निकले हैं ख़ुशी बन करउलझे ही रहे हम ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :इमारत
  October 31, 2017, 11:25 am
बारूद की खुशबू है, दिन रात हवाओं में देता है कोई छुप कर, तकरीर सभाओं में इक याद भटकती है, इक रूह सिसकती है घुंघरू से खनकते हैं, खामोश गुफाओं में बादल तो नहीं गरजे, बूँदें भी नहीं आईंकितना है असर देखो, आशिक की दुआओं मेंचीज़ों से रसोई की, अम्मा जो बनाती थी देखा है असर उनका, देखा ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :अहिल्या
  September 18, 2017, 9:20 am
भुगतान हो गया तो निकल कर चले गए नारे लगाने वाले अधिकतर चले गएमाँ बाप को निकाल के घर, खेत बेच कर बेटे हिसाब कर के बराबर चले गए सूखी सी पत्तियाँ तो कभी धूल के गुबारखुशबू तुम्हारी आई तो पतझड़ चले गए खिड़की से इक उदास नज़र ढूंढती रही पगडंडियों से लौट के सब घर चले गए  बच्चे थे तुम...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  September 11, 2017, 10:16 am
हुआ है हादसा इतना बड़ा वीरान तो होगाअभी निकला है दहशत से शहर सुनसान तो होगा घुसे आये मेरे घर में चलो तस्लीम है लेकिन  तलाशी की इजाज़त का कोई फरमान तो होगा बिमारी भी है भूखा पेट भी हसरत भी जीने कीजरूरत के लिए घर में मेरे सामान तो होगा   अकेले नाव कागज़ की लिए सागर में उतरा...
स्वप्न मेरे ......
Tag :नुक्सान
  September 5, 2017, 9:33 am
बहरों का है शहर ये संभल जाइए हुजूर क्यों कह रहे हैं अपनी गज़ल जाइए हुजूरबिखरे हुए जो राह में पत्थर समेट लो  कुछ दूर कांच का है महल जाइए हुजूरजो आपकी तलाश समुन्दर पे ख़त्म है दरिया के साथ साथ निकल जाइए हुजूर क्यों बात बात पर हो ज़माने को कोसते अब भी समय है आप बदल जाइए हुज़ूरम...
स्वप्न मेरे ......
Tag :देश
  August 28, 2017, 6:20 am
वो रौशनी का हर हिसाब लिए बैठा हैजो घर में अपने आफताब लिए बैठा है इसी लिए के छोड़नी है उसे ये आदत  वो पी नहीं रहा शराब लिए बैठा है पता है सच उसे मगर वो सुनेगा सब की  वो आईने से हर जवाब लिए बैठा है वो अजनबी सा बन के यूँ ही निकल जाएगा वो अपने चहरे पे नकाब लिए बैठा है दिलों के खेल...
स्वप्न मेरे ......
Tag :इन्कलाब
  August 21, 2017, 8:44 am
सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ-कामनाएं ... इस पावन पर्व की पूर्व संध्या पर आज के हालात पे लिखी गज़ल प्रस्तुत है ... आशा है सबका स्नेह मिलता रहेगा ...जब तलक नापाक हरकत शत्रु की सहते रहेंगेदेश की सीमाओं पर सैनिक सदा मरते रहेंगेपत्थरों से वार कर उक्सा रहे हैं देश-द्रोही औ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :ओजस्वी
  August 14, 2017, 8:48 am
कविता के लम्बे दौर से निकलने का मन तो नहीं था, फिर लगा कहीं गज़ल लिखना भूल तो नहीं गया ... इसलिए आज ग़ज़ल के साथ हाजिर हूँ आपके बीच ... आशा है सबका स्नेह मिलता रहेगा ... डूबे ज़रुर आँख के काजल नहीं हुए कुछ लोग हैं जो इश्क में पागल नहीं हुए  है आज अपने हाथ में करना है जो करो कुछ भी न क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :काजल
  August 2, 2017, 12:10 pm
क्या सही क्या गलत ... खराब घुटनों के साथ रोज़ चलते रहना ज़िंदगी की जद्दोजहद नहीं दर्द है उम्र भर का ... एक ऐसा सफ़र जहाँ मरना होता है रोज़ ज़िंदगी को ... ऐसे में ... सही बताना क्या में सही हूँ ...फुरसत के सबसे पहले लम्हे में बासी यादों की पोटली लिए  तुम भी चली आना टूटी मज़ार के पीछे सुख द...
स्वप्न मेरे ......
Tag :रचना
  July 25, 2017, 11:15 am
यादें यादें यादें ... क्या आना बंद होंगी ... काश की रूठ जाएँ यादें ... पर लगता तो नहीं और साँसों तक तो बिलकुल भी नहीं ... क्यों वक़्त जाया करना ...मिट्टी की कई परतों के बावजूद हलके नहीं होते कुछ यादों की निशान हालांकि मूसलाधार बारिश के बाद साफ़ हो जाता है आसमानसाफ़ हो जाती हैं गर्द की...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जंगली गुलाब
  July 19, 2017, 9:12 pm
नींद और यादें ... शायद दुश्मन हैं अनादी काल से ... एक अन्दर तो दूजा बाहर ... पर क्यों ... क्यों नहीं मधुर स्वप्न बन कर उतर आती हैं यादें आँखों में ... जंगली गुलाब भी तो ऐसे ही खिल उठता है सुबह के साथ ...  सो गए पंछी घर लौटने के बाद   थका हार दिन, बुझ गया अरब सागर की आगोश में  गहराती ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :आगोश
  July 11, 2017, 9:40 am
तुम ये न समझना की ये कोई उलाहना है ... खुद से की हुई बातें दोहरानी पढ़ती हैं कई बार ... खुद के होने का  एहसास भी तो जरूरी है जीने के लिए ... हवा भर लेना ही तो नहीं ज़िंदगी ... किसी का एहसास न घुला हो तो साँसें, साँसें कहाँ ...कितनी बार सपनों को हवा दे कर यूं ही छोड़ दिया तुमने वक्त की तन्ह...
स्वप्न मेरे ......
Tag :एहसास
  July 5, 2017, 11:08 am
सुकून अगर मिल सकता बाज़ार में तो कितना अच्छा होता ... दो किलो ले आता तुम्हारे लिए भी ... काश की पेड़ों पे लगा होता सुकून ... पत्थर मारते भर लेते जेब ... क्या है किसी के पास या सबको है तलाश इसकी ...नहीं चाहता प्यार करना के जीना चाहता हूं कुछ पल सुकून के अपने आप से किये वादों से परे उड़ना ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जीवन
  June 27, 2017, 8:55 am
सुलगते ख्वाब ... कुनमुनाती धूप में लहराता आँचल ... तल की गहराइयों में हिलोरें लेती प्रेम की सरगम ... सतरंगी मौसम के साथ साँसों में घुलती मोंगरे की गंध ... क्या यही सब प्रेम के गहरे रिश्ते की पहचान है ... या इनसे भी कुछ इतर ... कोई जंगली गुलाब ... झर गई दीवारें खिड़की दरवाजों के किस्से ह...
स्वप्न मेरे ......
Tag :प्रेम
  June 19, 2017, 9:30 am
समय की पगडण्डी पे उगी मुसलसल यादें, इक्का दुक्का क़दमों के निशान ... न खत्म होने वाला सफ़र और गुफ्तगू तनहाई से ... ये लम्हे कभी गोखरू, कभी फूल ... तो कभी चुभता हुआ दंश, जंगली गुलाब का ...    मेहनत की मुंडेर पे पड़ा होता है कामयाबी का एक टुकड़ा जरूरी है नसीब का होना सौ मीटर की इस रेस ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जंगली गुलाब
  June 6, 2017, 7:21 pm
धाड़ धाड़ चोट मारते लम्हे ... सर फट भी जाये तो क्या निकलेगा ... यादों का मवाद ... जंगली गुलाब का कीचड़  ... समय की टिकटिक एक दुसरे से जुड़ी क्यों है ... एक पल,यादों के ढेर दूसरे पल को सौंपे, इससे पहले सन्नाटे का पल क्यों नहीं आता ... फंस के रह गया है ऊँगली से उधड़ा सिरा जंगली गुलाब के काँटों...
स्वप्न मेरे ......
Tag :आंसू
  May 29, 2017, 10:19 am
सम्मोहन, बदहवासी ... पर किस बात की ... जैसे कुछ पकड़ में नहीं आ रहा ... चेहरे ही चेहरे या सारे मेरे चेहरे ...  फिसल रही हो तुम या मैं या जिंदगी या कुछ और ... सतह कहाँ है ... बेवजह बातें के लिए  लंबी रात का होना जरूरी नहीं मौन का संवाद कभी बेवजह नहीं होता हालांकि रात कई कई दिन लंबी हो जा...
स्वप्न मेरे ......
Tag :तस्वीर
  May 23, 2017, 9:35 am
पहली सांस का संघर्ष शायद जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है ... हालांकि उसके बाद भी जीवन का हर पल किसी सग्राम से कम नहीं ... साँसों की गिनती से नहीं ख़त्म होती उम्र ... उम्र ख़त्म होती है सपने देखना बंद करने से ... सपनों की खातिर लड़ने की चाह ख़त्म होने से ...  मौसम बदला पत्ते टूटे कहते हैं पतझ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :संघर्ष
  May 8, 2017, 9:23 am
नीव का पहला पत्थर पर कितना ज़रूरी ... क्यों नहीं होता उसका नाम ... निर्माण का सतत साक्षी होने के बावजूद भी वो नहीं होता कहीं ... वर्ग जो दब के रह जाता है अपने सृजन के सौंदर्य में ...     लहू सिंचित हाथों से प्रखर तीरों का निर्माण करने वाले इतिहास की छाती पे क्रान्ति गान लिखन...
स्वप्न मेरे ......
Tag :Labour day
  May 1, 2017, 9:22 am
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