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Blog: स्वप्न मेरे

Blogger: दिगम्बर नासवा
एक और पन्ना कोशिश, माँ को समेटने की से ... आपका प्रेम मिल रहा है इस किताब को, बहुत आभार है आपका ... कल पुस्तक मेले, दिल्ली में आप सब से मिलने की प्रतीक्षा है ... पूरा जनवरी का महीना इस बार भारत की तीखी चुलबुली सर्दी के बीच ...  लगा तो लेता तेरी तस्वीर दीवार पर जो दिल के कोने वाले ह... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   1:27am 6 Jan 2020 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा
मेरी ही नज़्म से किरदार मेरा गढ़ लेंगेकभी छपेंगे तो हमको भी लोग पढ़ लेंगे ...और मेरी किताब यहाँ भी मिलेगी अगर आप आस-पास ही हों और पढ़ना चाहें. वैसे 7 जनवरी मैं भी रहूँगा ... इसी स्टाल पर मिलूँगा.स्टॉल 94, हाल: 12A, बोधि प्रकाशन, प्रगति मैदान, नई दिल्लीजनवरी 4 से 12, 2020#कोशिश_माँ_को_समेट... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   9:23am 29 Dec 2019 ##माँ
Blogger: दिगम्बर नासवा
आज अचानक ही उस दिन की याद हो आई जैसे मेरी अपनी फिल्म चल रही हो और मैं दूर खड़ा उसे देख रहा हूँ. दुबई से जॉब का मैसेज आया था और अपनी ही धुन में इतना खुश था, की समझ ही नहीं पाया तू क्या सोचने लगी. लगा तो था की तू उदास है, पर शायद देख नहीं सका ...  मेरे लिए खुशी का दिन ओर तुम्हारे लिए ...... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   1:57am 17 Dec 2019 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा
एक समीक्षा मेरी किताब कोशिश,माँ को समेटने की ... आदरणीय मीना जी की कलम से ... जो सन 2015 से अपने ब्लॉग "मंथन"पे लगातार लिख रही हैं ... https://www.shubhrvastravita.com/ 'कोशिश माँ को समेटने की'एक संवेदनशील चार्टेड एकाउटेंट श्री दिगम्बर नासवा जी पुस्तक है, जो घर -परिवार से दूर विदेशों में प्रव... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   7:11am 13 Dec 2019 #अमेज़न
Blogger: दिगम्बर नासवा
#कोशिश_माँ_को_समेटने_कीबहुत आभार बोधि प्रकाशन का, आदरणीय मायामृग जी का, सभी मित्र, पत्नी, बच्चे, भाई-बंधुओं का और माँ का (जो जहाँ भी है, मेरे करीब है) ... जिनके सहयोग और प्रेरणा के बिना ये संभव न होता ... ये हर किसी के मन के भाव हैं मेरी बस लेखनी है ... हाँ एक बात और ... अगर इस किताब को ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:38am 5 Dec 2019 #अमेज़न
Blogger: दिगम्बर नासवा
“कोशिश – माँ को समेटने की” तैयार है ... कुछ ही दिनों में आपके बीच होगी. आज एक और “पन्ना” आपके साथ साझा कर रहा हूँ ... आज सोचता हूँ तो तेरी चिर-परिचित मुस्कान सामने आ जाती है ... मेरे खुद के चेहरे पर ...  कहते हैं गंगा मिलन मुक्ति का मार्ग है कनखल पे अस्थियाँ प्रवाहित करते समय इक प... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   4:05am 2 Dec 2019 #अम्मा
Blogger: दिगम्बर नासवा
लिखे थे दो तभी तो चार दाने हाथ ना आएबहुत डूबे समुन्दर में खज़ाने हाथ ना आएगिरे थे हम भी जैसे लोग सब गिरते हैं राहों मेंयही है फ़र्क बस हमको उठाने हाथ ना आएरकीबों ने तो सारा मैल दिल से साफ़ कर डाला समझते थे जिन्हें अपना मिलाने हाथ ना आएसभी बचपन की गलियों में गुज़र कर देख आया हू... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   3:41am 25 Nov 2019 #धक्का
Blogger: दिगम्बर नासवा
आने वाली किताब “कोशिश ... माँ को समेटने की” का एक अन्श ... अक्सर जब बेटियाँ बड़ी होती हैं, धीरे धीरे हर अच्छे बुरे को समझने लगती हैं ... गुज़रते समय के साथ जाने अनजाने ही, पिता के लिए वो उसकी माँ का रूप बन कर सामने आ जाती हैं ... ऐसे ही कुछ लम्हे, कुछ किस्से रोज़-मर्रा के जीवन में भी ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   4:39am 18 Nov 2019 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा
आने वाली किताब “कोशिश ... माँ को समेटने की” में सिमटा एक पन्ना ...तमाम कोशिशों के बावजूद उस दीवार पे तेरी तस्वीर नहीं लगा पाया तूने तो देखा था चुपचाप खड़ी जो हो गई थीं मेरे साथ फोटो-फ्रेम से बाहर निकल के एक कील भी नहीं ठोक पाया था    सूनी सपाट दीवार पे हालांकि हाथ चलने स... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   4:26am 11 Nov 2019 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा
ठँडी मीठी छाँव कभी तीखा “सन” है जीवन आपा-धापी “एजिटे-शन” है इश्क़ हुआ तो बस झींगालाला होगा“माइंड” में कुछ ऐसा ही “इम्प्रे-शन” है मिलने पर तो इतने तल्ख़ नहीं लगतेपर “सोशल” मंचों पर दिखती “टेन्शन” हैबतलाता है अब “इस्टेटस” “सेल्फी” का खुश है बच्चा या कोई “डिप्रे-शन” है नव ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   1:32am 4 Nov 2019 #इन्स्टा
Blogger: दिगम्बर नासवा
आज अपनी पहली पुस्तक का कवर पेज आपके सम्मुख है ... शीघ्र ही किताब आपके बीच होगी ... आपके आशीर्वाद की आकाँक्षा है ... ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   3:48pm 31 Oct 2019 #डायरी
Blogger: दिगम्बर नासवा
दिन उगा सूरज की बत्ती जल गईरात की काली स्याही ढल गईसो रहे थे बेच कर घोड़े, बड़ेऔर छोटे थे उनींदे से खड़ेज़ोर से टन-टन बजी कानों में जब  धड-धड़ाते बूट, बस्ते, चल पड़े   हर सवारी आठ तक निकल गईरात की काली ...कुछ बुजुर्गों का भी घर में ज़ोर थासाथ कपड़े, बरतनों का शोर थामाँ थी सीधी ये सम... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   1:33am 28 Oct 2019 #घोड़े
Blogger: दिगम्बर नासवा
मूल मन्त्र इस श्रृष्टि का ये जाना है खो कर ही इसजीवन में कुछ पाना हैनव कोंपल उस पल पेड़ों पर आते हैंपात पुरातन जड़ से जब झड़ जाते हैं    जैविक घटकों में हैं ऐसे जीवाणू  मिट कर खुद जो दो बन कर मुस्काते हैं दंश नहीं मानो, खोना अवसर समझो यही शाश्वत सत्य चिरंतन माना है खो कर ... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   4:48am 8 Oct 2019 #कुदरत
Blogger: दिगम्बर नासवा
घर मेरा टूटा हुआ सन्दूक है हर पुरानी चीज़ से अनुबन्ध है       पर घड़ी से ख़ास ही सम्बन्ध है रूई के तकिये, रज़ाई, चादरें    खेस है जिसमें के माँ की गन्ध है ताम्बे के बर्तन,कलेंडर,फोटुएँ जंग लगी छर्रों की इक बन्दूक है घर मेरा टूटा ..."शैल्फ"पे  चुप सी कतारों में खड़ी &nbs... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   2:45am 30 Sep 2019 #घर
Blogger: दिगम्बर नासवा
माँ का आँचल शीतल पीपल देख रहामौन तपस्वी अविचल पीपल देख रहा शरद, शिशिर हेमंत गीष्म बैसाखी वर्षा ऋतु परिवर्तन प्रतिपल पीपल देख रहा कोयल की कू कू कागा की कोलाहल उत्पाती पक्षी दल पीपल देख रहा शैशव की किलकारी यौवन की आशावृद्ध निराशा पल पल पीपल देख रहा  पञ्च-तत्व अग्नि तर्... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:36am 16 Sep 2019 #तपस्वी
Blogger: दिगम्बर नासवा
मैं कई गन्जों को कंगे बेचता हूँ एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ काटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता  और माथे के तिलक तो साथ रखता  नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँ एक सौदागर हूँ ...धर्म का व्योपार मुझसे पल रहा है दौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है  यूँ नही... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   3:36am 9 Sep 2019 #देश
Blogger: दिगम्बर नासवा
धूल कभी जो आँधी बन के आएगी पल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगी अक्षत मन तो स्वप्न नए सन्जोयेगाबीज नई आशा के मन में बोयेगा खींच लिए जायेंगे जब अवसर साधन सपनों की मृत्यु उस पल हो जायेगी पल दो पल फिर ...बादल बूँदा बाँदी कर उड़ जाएँगे चिप चिप कपडे जिस्मों से जुड़ जाएँगे चाट के ठेले जब ... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   1:44am 2 Sep 2019 #गीत
Blogger: दिगम्बर नासवा
क्या मिला सचमुच शिखर ?मिल गए ऐश्वर्य कितने अनगिनत पञ्च-तारा जिंदगी में हो गया विस्मृत विगत घर गली फिर गाँव फिर छूटा नगर क्या मिला सचमुच ...कर्म पथ पर आ नहीं पाई विफलता मान आदर पदक लाई सब सफलता मित्र बिछड़े चल न पाए साथ अपनेइस डगर क्या मिला सचमुच ...एकला चलता रहा शुभ लक्ष्य पा... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   4:51am 26 Aug 2019 #गीत
Blogger: दिगम्बर नासवा
गीत प्रेम के गाता है हर दमजाने क्यों आँखें रहती नम नम नाच मयूरी हो पागल अम्बर पे छाए बादल बरसो मेघा रे पल पल बारिश की बूँदें करतीं छम छम जाने क्यों आँखें ...सबके अपने अपने गम कुछ के ज्यादा कुछ के कम सह लेता है जिसमें दम सुन आँसूं पलकों के पीछे थम जाने क्यों आँखें ... हिस्स... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   3:58am 19 Aug 2019 #नव-गीत
Blogger: दिगम्बर नासवा
हम कहाँ कहते हैं केवल स्वयं का ही त्राण हो रोज़ प्रातः बोलते हैं विश्व का कल्याण होहै सनातन धर्म जिसकी भावना मरती नहीं निज की सोचें ये हमारी संस्कृति कहती नहीं हो गुरु बाणी के या फिर बुद्ध का निर्वाण हो   राम को ही है चुनौती राम के ही देश मेंशत्रु क्या घर में छुपा है मि... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   4:24am 12 Aug 2019 #बाणी
Blogger: दिगम्बर नासवा
धड़ धड़ धड़ बरसा सावनभीगे, फिसले कितने तन घास उगी सूखे आँगन प्यास बुझी ओ बंजर धरती तृप्त हुईनीरस जीवन से तुलसी भी मुक्त हुई, झींगुर की गूँजे गुंजन घास उगी ...घास उगी वन औ उपवनगीले सूखे चहल पहल कुछ तेज हुई हरा बिछौना कोमल तन की सेज हुई दृश्य है कितना मन-भावन घास उगी ... हरियाया है ... Read more
clicks 74 View   Vote 1 Like   3:04am 5 Aug 2019 #झींगुर
Blogger: दिगम्बर नासवा
 आशा की आहट का घोड़ासरपट दौड़ रहासुखमय जीवन-हार मिलासाँसों में महका स्पंदनमधुमय यौवन भार खिलानयनों में सागर सनेह कासपने जोड़ रहा सरपट दौड़ रहा ...खिली धूप मधुमास नयाखुले गगन में हल्की हल्कीवर्षा का आभास नयामन अकुलाया हरी घास परझटपट पौड़ रहासरपट दौड़ रहा ...सागर लह... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   5:01am 22 Jul 2019 #गीत
Blogger: दिगम्बर नासवा
मेघ हैं आकाश में कितने घनेलौट कर आए हैं घर में सब जने  चिर प्रतीक्षा बारिशों की हो रही   बूँद अब तक बादलों में सो रही हैं हवा में कागजों की कत-रने मेघ हैं आकाश में ...कुछ कमी सी है सुबह से धूप में आसमां पीला हुआ है धूल में  रेड़ियाँ लौटी घरों को अन-मने मेघ हैं आकाश में ...नग... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   7:53am 15 Jul 2019 #नवगीत
Blogger: दिगम्बर नासवा
आँखें से निकली बातें यहाँ वहां बिखरी बातें अफवाहें, झूठी, सच्ची  फ़ैल गईंकितनी बातें मुंह से निकली खैर नही  जितनेमुहउतनीबातें फिरती हैं आवारा सीकुछ बस्ती ,बस्तीबातें बातों को जो ले बैठा सुलझें नाउसकीबातें  जीवनमृत्यूसब किस्मतबाकीबस रहतीबातें  कानों... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:03am 8 Jul 2019 #झूठी
Blogger: दिगम्बर नासवा
कौन मेरे सपनों में आके रहता है जिस्म किसी भट्टी सा हरदम दहता है यादों की झुरमुट से धुंधला धुंधला सादूर नज़र आता है साया पतला सा  याद नहीं आता पर कुछ कुछ कहता है कौन मेरे सपनों ...बादल होते हैकाले से दूर कहीं  रीता रीता मन होता है पास वहीं आँखों से खारा सा कुछ कुछ बहता है क... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   12:43pm 1 Jul 2019 #गीत
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