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स्वप्न मेरे ...

सुकून अगर मिल सकता बाज़ार में तो कितना अच्छा होता ... दो किलो ले आता तुम्हारे लिए भी ... काश की पेड़ों पे लगा होता सुकून ... पत्थर मारते भर लेते जेब ... क्या है किसी के पास या सबको है तलाश इसकी ...नहीं चाहता प्यार करना के जीना चाहता हूं कुछ पल सुकून के अपने आप से किये वादों से परे उड़ना ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जीवन
  June 27, 2017, 8:55 am
सुलगते ख्वाब ... कुनमुनाती धूप में लहराता आँचल ... तल की गहराइयों में हिलोरें लेती प्रेम की सरगम ... सतरंगी मौसम के साथ साँसों में घुलती मोंगरे की गंध ... क्या यही सब प्रेम के गहरे रिश्ते की पहचान है ... या इनसे भी कुछ इतर ... कोई जंगली गुलाब ... झर गई दीवारें खिड़की दरवाजों के किस्से ह...
स्वप्न मेरे ......
Tag :प्रेम
  June 19, 2017, 9:30 am
समय की पगडण्डी पे उगी मुसलसल यादें, इक्का दुक्का क़दमों के निशान ... न खत्म होने वाला सफ़र और गुफ्तगू तनहाई से ... ये लम्हे कभी गोखरू, कभी फूल ... तो कभी चुभता हुआ दंश, जंगली गुलाब का ...    मेहनत की मुंडेर पे पड़ा होता है कामयाबी का एक टुकड़ा जरूरी है नसीब का होना सौ मीटर की इस रेस ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जंगली गुलाब
  June 6, 2017, 7:21 pm
धाड़ धाड़ चोट मारते लम्हे ... सर फट भी जाये तो क्या निकलेगा ... यादों का मवाद ... जंगली गुलाब का कीचड़  ... समय की टिकटिक एक दुसरे से जुड़ी क्यों है ... एक पल,यादों के ढेर दूसरे पल को सौंपे, इससे पहले सन्नाटे का पल क्यों नहीं आता ... फंस के रह गया है ऊँगली से उधड़ा सिरा जंगली गुलाब के काँटों...
स्वप्न मेरे ......
Tag :आंसू
  May 29, 2017, 10:19 am
सम्मोहन, बदहवासी ... पर किस बात की ... जैसे कुछ पकड़ में नहीं आ रहा ... चेहरे ही चेहरे या सारे मेरे चेहरे ...  फिसल रही हो तुम या मैं या जिंदगी या कुछ और ... सतह कहाँ है ... बेवजह बातें के लिए  लंबी रात का होना जरूरी नहीं मौन का संवाद कभी बेवजह नहीं होता हालांकि रात कई कई दिन लंबी हो जा...
स्वप्न मेरे ......
Tag :तस्वीर
  May 23, 2017, 9:35 am
पहली सांस का संघर्ष शायद जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है ... हालांकि उसके बाद भी जीवन का हर पल किसी सग्राम से कम नहीं ... साँसों की गिनती से नहीं ख़त्म होती उम्र ... उम्र ख़त्म होती है सपने देखना बंद करने से ... सपनों की खातिर लड़ने की चाह ख़त्म होने से ...  मौसम बदला पत्ते टूटे कहते हैं पतझ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :संघर्ष
  May 8, 2017, 9:23 am
नीव का पहला पत्थर पर कितना ज़रूरी ... क्यों नहीं होता उसका नाम ... निर्माण का सतत साक्षी होने के बावजूद भी वो नहीं होता कहीं ... वर्ग जो दब के रह जाता है अपने सृजन के सौंदर्य में ...     लहू सिंचित हाथों से प्रखर तीरों का निर्माण करने वाले इतिहास की छाती पे क्रान्ति गान लिखन...
स्वप्न मेरे ......
Tag :Labour day
  May 1, 2017, 9:22 am
क्या सच में जीवन का अन्त नहीं ... क्या जीवन निरंतर है ... आत्मा के दृष्टिकोण से देखो तो शायद हाँ ... पर शरीर के माध्यम से देखो तो ... पर क्या दोनों का अस्तित्व है एक दुसरे के बिना ... छोड़ो गुणी जनों के समझ की बाते हैं अपने को क्या ...   अचानक नहीं आताज़िंदगी की क़िताब का आखरी पन्ना हां...
स्वप्न मेरे ......
Tag :दीमक
  April 24, 2017, 9:29 am
क्या बोलते रहना ही संवाद है ... शब्द ही एकमात्र माध्यम है अपनी बात को दुसरे तक पहुंचाने का ... तो क्या शब्द की उत्पत्ति मनुष्य के साथ से ही है ... अगर हाँ तो फिर ख़ामोशी ...ख़ामोशी टुकड़ा नहीं मुंह में डाला स्वाद ले लियाख़ामोशी पान भी नही चबाते रहे अंदर अंदर जब चाहा थूक दिया कोरी दीव...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कशमकश
  April 17, 2017, 8:55 am
बिन बोले, बिन कहे भी कितना कुछ कहा जा सकता है ... पर जैसा कहा क्या दूसरा वैसा ही समझता है ... क्या सच के पीछे छुपा सच समझ आता है ... शायद हाँ, शायद ना ... या शायद समझ तो आता है पर समय निकल जाने के बाद ...   एक टक हाथ देखने के बाद तुमने कहा  राजा बनोगे या बिखारी वजह पूछी तो गहरी उदासी क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कड़वा सच
  April 10, 2017, 10:29 am
बिन बोले, बिन कहे भी कितना कुछ कहा जा सकता है ... पर जैसा कहा क्या दूसरा वैसा ही समझता है ... क्या सच के पीछे छुपा सच समझ आता है ... शायद हाँ, शायद ना ... या शायद समझ तो आता है पर समय निकल जाने के बाद ...   एक टक हाथ देखने के बाद तुमने कहा  राजा बनोगे या बिखारी वजह पूछी तो गहरी उदासी क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  April 10, 2017, 10:29 am
सोचता हूँ फज़ूल है उम्मीद की चाह रखना ... कई बार गहरा दर्द दे जाती हैं ... टुकड़ा टुकड़ा मौत से अच्छा है  खुदकशी कर लेना ...कुछ आहटें आती है उम्मीद की उस रास्ते से छोड़ आए थे सपनों के सतरंगी ढेर जहां   आशाओं के रेशमी पाँव रहने दो पालने में की ज़मीन नहीं मिल पायगी तुम्हारी दहलीज़ क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :उम्मीद
  April 3, 2017, 11:37 am
वो एक ऐहसास था प्रेम का जिसकी कहानी है ये ... जाने किस लम्हे शुरू हो के कहाँ तक पहुंची ... क्या साँसें बाकी हैं इस कहानी में ... हाँ ... क्या क्या कहा नहीं ... तो फिर इंतज़ार क्यों ... हालांकि छंट गई है तन्हाई की धुंध समय के साथ ताज़ा धूप भी उगने लगी है  पर निकलने लगे हैं यादों के नुकीले ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कहानी
  March 27, 2017, 12:45 pm
मुसलसल रहे आज तो कितना अच्छा ... प्रश्नों में खोए रहना ... जानने का प्रयास करना ... शायद व्यर्थ हैं सब बातें ... जबरन डालनी होती है जीने की आदत आने वाले एकाकी पलों के लिए ... भविष्य की मीठी यादों के लिए  वर्तमान में कुछ खरोंचें डालना ज़रूरी है, नहीं तो समय तो अपना काम कर जाता है ... जि...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  March 20, 2017, 9:27 am
अपना अपना अनुभव है जीवन ... कभी कठोर कभी कोमल, कभी ख़ुशी तो कभी दर्द ... हालांकि हर पहलू अपना निशान छोड़ता है जीवन में ... पर कई लम्हे गहरा घाव दे जाते हैं ... बातें करना आसान होता है बस ...लोग झूठ कहते हैं दर्द ताकत देता हैआंसू निकल आएं तो मन हल्का होता है पत्थर सा जमा कुछ टूट कर पिघल ज...
स्वप्न मेरे ......
Tag :दर्द
  March 14, 2017, 8:44 pm
तलाश ... शब्द तो छोटा हैं पर इसका सफ़र, इसकी तलब, ख़त्म नहीं होती जब तक ये पूरी न हो ... कई बार तो पूरी उम्र बीत जाती है और ज़िन्दगी लौट के उसी लम्हे पे आ आती है जहाँ खड़ा होता है जुदाई का बेशर्म लम्हा ... ढीठता के साथ ...  उम्र के अनगिनत हादसों की भीड़ में दो जोड़ी आँखों की तलाश वक़्त के ठी...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  March 6, 2017, 8:50 am
कहाँ खिलते हैं फूल रेगिस्तान में ... हालांकि पेड़ हैं जो जीते हैं बरसों बरसों नमी की इंतज़ार में ... धूल है की साथ छोड़ती नहीं ... नमी है की पास आती नहीं ... कहने को रेतीला सागर साथ है ... मैंने चाहा तेरा हर दर्द अपनी रेत के गहरे समुन्दर में लीलना तपती धूप के रेगिस्तान में मैंने कोशिश ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :चाहत
  February 27, 2017, 9:39 am
उम्र के किसी एक पड़ाव पर कितना तंग करने लगती है कोई सोच ... ज़िन्दगी का चलचित्र घूमने लगता है साकार हो के ... पर क्यों ... समय रहते क्यों नहीं जाग पाते हैं हम ... आधुनिकता की दौड़ ... सब कुछ पा लेने की होड़ ... या कुछ और ...हाथ बढ़ाया तोड़ लिया इतने करीब तो नहीं होते तारे  उजवल भविष्य की राह चौ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :उज्वल भविष्य
  February 22, 2017, 8:29 am
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स्वप्न मेरे ......
Tag :
  February 7, 2017, 10:52 pm
रिश्तों में कब, क्यों कुछ ऐसे मोड़ आ जाते हैं की अनजाने ही हम अजनबी दीवार खुद ही खड़ी कर देते हैं ... फिर उसके आवरण में अपने अहम्, अपनी खोखली मर्दानगी का प्रदर्शन करते हैं ... आदमी इतना तो अंजान नहीं होता की सत्य जान न सके ...      क्योंकि लिपटा था तेरे प्यार का कवच मेरी जिं...
स्वप्न मेरे ......
Tag :अहम्
  January 30, 2017, 7:14 am
शोध कहाँ तक पहुँच गया है शायद सब को पता न हो ... हाँ मुझे तो बिलकुल ही नहीं पता ... इसलिए अनेकों  बेतुके सवाल कौंध जाते हैं ज़हन में ... ये भी तो एक सवाल ही है ... सिलसिला कितना लंबा खत्म होने का नाम नहीं अमीरों के जूठे पत्तल पे झपटते इंसान फिर कुत्ता-बिल्ली पंछी कीट-पतंगे दीमक बेक...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  January 23, 2017, 7:49 am
अजीब है ये सिलसिला ... चाहता हूँ पढ़ो पर कहता हूँ मत पढ़ो ... चाहता हूँ की वो सब करो जो नहीं कर सका ... कायर हूँ ... डरपोक हूँ या शायद ... (कवी का तमगा लगाते हुए तो शर्म आती है) ...    मत पढ़ो मेरी नज़्ममत पढ़ो की मेरी नज़्म आग उगलते शब्दों से चुनी बदनाम गलियों के सस्ते कमरे में बुनी ज़ुल्म क...
स्वप्न मेरे ......
Tag :आवरण
  January 16, 2017, 7:38 am
गज़लों के लम्बे दौर से बाहर आने की छटपटाहट हो रही थी ... सोचा नए साल के बहाने फिर से कविताओं के दौर में लौट चलूँ ... उम्मीद है आप सबका स्नेह यूँ ही बना रहेगा ...तुम्हें सामने खड़ा करके बुलवाता हूँ कुछ प्रश्न तुमसे ... फिर देता हूँ जवाब खुद को खुद के ही प्रश्नों का ... हालांकि बेचैनी ह...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  January 7, 2017, 4:58 pm
दोस्तों नव वर्ष की पूर्व-संध्या पे आप सभी को ढेरों शुभकामनाएं ... नव वर्ष सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि ले के आए ... सब को बहुत बहुत मंगल-कामनाएं ...   नए सालमें नए गुलखिलें, नईहोमहकनयारंगहोयूंहीखिलरहीहोयेचांदनीयूंहीहर फिज़ां मेंउमंगहोतेरीसादगीमेरीज़ि...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  December 31, 2016, 1:39 pm
इक उम्र लग गई है मगर मान तो गया मुझ को वो आज नाम से पहचान तो गया अब जो भी फैंसला हो वो मंज़ूर है मुझेजिसको भी जानना था वो सच जान तो गया  दीपक हूँ मैं जो बुझ न सकूंगा हवाओं से  कोशिश तमाम कर के ये तूफ़ान तो गया बिल्डर की पड़ गई है नज़र रब भली करे बच्चों के खेलने का ये मैदान तो गया...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  December 21, 2016, 8:53 pm
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