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Blog: मेरी जुबानी

Blogger: Sudha Singh
मजबूरी...वो जिनको पसंद नहींउनके साथ शामिल होना,उनसे राबता कायम करना,तो उन्हें दूर हो जाना चाहिए उनसे,जिनमें उन्हें एक भी ऐब नजर आता है!क्यों उनके साथ रहकर वे कुढ़ते हैंफैलाते हैं नकारात्मकताछलते हैं खुद को.....खुद को मजबूरबनाए रखने कीआवश्यकता भी उन्हेंक्यों होती है.... ... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   10:32am 6 Oct 2019 #
Blogger: Sudha Singh
मानसिकता         संजना ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी, बस इंटर पास थी ।पर आत्म विश्वास बिलकुल कम न था ।शादी से पहले उसने भी वही सपने देखे थे जो हर आम लड़की देखा करती है। मनीष से शादी करके जब अपने ससुराल आई तो उसने सोचा भी न था कि उसके ससुराल वाले इतने दकियानुसी विचारों वाले हों... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   2:42pm 4 Oct 2019 #मानसिकता
Blogger: Sudha Singh
प्रतीक्षा एक सदी से प्रतीक्षा कर रही हूँ ! कुछ उधड़ी परतें सिल चुकी हूँ!कुछ सिलनी बाकी है! कई- कई बार सिल चुकी हूँ पहले भी !फिर भी दोबारा सिलना पड़ता है !जहाँ से पहले शुरू किया था,फिर वहीं लौटना पड़ता है!भय है कि व‍ह कच्चा सूत, कहीं फ़िर से टूट न जाए !पक्का सूत खरीदना ह... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   6:12pm 23 Sep 2019 #प्रतीक्षा
Blogger: Sudha Singh
Daughters day माँ, माना कि तेरे आंगन की गौरैया हूँ मैं... कभी इस डाल कभी उस डाल, फुदकती रहती हूँ यहाँ- वहाँ! विचरती रहती हूँ निर्भयता से, तेरी दहलीज के आर पार! जानती हूँ मैं तू डरती बहुत है कि एक दिन मैं उड़ जाऊँगी  तुझसे दूर आसमान में! अपने नए आशियाने कीतलाश में!&n... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   11:32am 22 Sep 2019 #बेटियां
Blogger: Sudha Singh
Daughters dayमाँ, माना कि तेरे आंगन की गौरैया हूँ मैं... कभी इस डाल कभी उस डाल, फुदकती रहती हूँ यहाँ- वहाँ! विचरती रहती हूँ निर्भयता से, तेरी दहलीज के आर पार! जानती हूँ मैं तू डरती बहुत है कि एक दिन मैं उड़ जाऊँगी  तुझसे दूर आसमान में! अपने नए आशियाने कीतलाश में! ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   11:32am 22 Sep 2019 #बेटियां
Blogger: Sudha Singh
ऐ मेरे नन्हें से दिल, तू धड़कता है नअच्छा लगता है मुझे तेरा स्पन्दनचल ले चलती हूँ आज तुझेएक नई दुनिया मेंऔर कराती हूँ सैरअपनी उसी प्यारी सी दुनिया कीजिसके कोमल एहसासको जीने के लिएमैंने और तुमने भी तोन जाने कितनीरातें जग - जगकरकरवटों में गुजार दीइस बेरहम दुनियाकी निष्... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   12:07pm 31 Aug 2019 #
Blogger: Sudha Singh
काश    काश दूर दूर तकफैली सघन नीरवता, निर्जनता, हड्डियाँ पिघलाती जलाती धूप. सूखता कंठ, मृतप्राय शिथिल तन से चूता शोणित स्वेद अट्टहास करते, करैत से मरूस्थल की भयावहता सबकुछ निगल लेने को आतुर. परिलक्षित होती तब मृगमरीचिका,जिसकी स्पृहा मे... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   5:44pm 29 Aug 2019 #काश
Blogger: Sudha Singh
दर्द कहाँ सुंदर होता हैदर्द को भला कभी कोई अच्छा कहता हैदर्द सालता है दर्द कचोटता है, चुभता हैइसका रूप भयावह हैफिर दर्द को क्यों किसी को दिखानाइसे छुपाओ तकिये में, गिलाफों में, किसी काली अँधेरी कोठरी में या बंद कर दो दराजों में ताले चाबी से जकड़ दो कि कहीं किसी... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   12:11pm 17 Aug 2019 #
Blogger: Sudha Singh
कहाँ पाऊँ आपको, पापा...किन राहों में आपकी तलाश करूँकुछ भी तो सूझता नहीं है अबसब कुछ तो शून्य कर गये आप...कहकर 'बहिनी'एक बार फिर सेमुझे पुकार लीजिये न पापाकि आप के मुख से ये शब्दसुनने को कान तरस रहे हैं..लौट आइए पापा...कि छलकने लगता हैवक़्त बेवक्त आँखों का समंदरबिना आसपास देखे... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   6:20pm 30 Jul 2019 #
Blogger: Sudha Singh
बिखरते रिश्ते हे शीर्षस्थ घर के मेरेलखो तो टूट टूटकर सारे मोतीयहाँ वहाँ पर बिखर रहे कोई अपने रूप पर मर मिटा है स्वयंकिसी को हो गया परम ज्ञानी होने का भ्रम किसी को अकड़ है कि उसका रंग कितना खिला है किसी को बेमतलब का सबसे गिला है न जाने सबको कैसा कैसा द... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   6:45pm 29 Jun 2019 #poetry
Blogger: Sudha Singh
तलबसितारों के आगे जहाँ खोजता हूँ ।मैं धरती पर अपना मकां खोजता हूँ।। वो गुम है, मैं जिसका तलबगार हूँ ।मैं हर शय में अपना खुदा खोजता हूँ ।। दर्द किस्मत में मेरी कितना लिखा है ।मैं उस दर्द की इन्तेहाँ खोजता हूँ ।। जाम- ए - मोहब्बत में तिरता रहूं मैं ।ऐ साकी मेरे मयकदा ख... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   11:07am 29 Jun 2019 #ख्वाहिश
Blogger: Sudha Singh
Barish अमृत बनकर फिर से बरसो झम- झम बरसो बरखा रानी।अपना रूप मनोहर लेकर और सुघड़ बन जाओ रानी ।। बरसो तन पर, मन पर बरसो  खेतों - खलिहानों में बरसो।ताल - तलैया छूट न जाए बियाबान सरसाओ रानी।।सौंधी माटी फिर महकाओरिमझिम बूँदों से नहलाओ। पय सम बारिश के कतरों से कंठो... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   4:26pm 26 Jun 2019 #बारिश
Blogger: Sudha Singh
बरस जा ऐ बदरी..तेरे आने सेइस दरख्त को भीजीने की आस जगी है।बरस जा ऐ बदरीफिर से अनंत प्यास जगी है।।पपीहा बन तेरी बूंद को तरसता रहा है।बेरुखी तेरी पल - पल ये सहता रहा है।।बनके परदेसी तू तो भटकती रही है।बेवफा हर जगह तू बरसती रही है।।तेरी उम्मीद में, ये तो ठूँठ हो गया।भूला हरि... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   1:14pm 10 Jun 2019 #प्यास
Blogger: Sudha Singh
कनकपुष्प..जेठ की कड़कती दुपहरी मेंजब तपिश और गर्मी से सबलगते हैं कुम्हलाने ।नर नारी पशु पाखी सबकेबदन लगते हैं चुनचुनाने ।जब सूखने लगते हैं कंठऔर हर तरफ मचती है त्राहि त्राहि।तब चहुंँदिस तुम अपनीरक्तिम आभा लिए बिखरते हो ।सूरज की तेज प्रखररश्मियों में जल जलकरतुम और न... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   9:44am 27 May 2019 #गुलमोहर
Blogger: Sudha Singh
चुपके से यामिनीने लहराया था दामन. सागर की लहरों पर सवार होकर तरुवर के पर्णों के मध्य से, हौले हौले अपनी राहबनाता चाँद तब , मंथर गतिसे, उतर आया था मेरे मन के सूने आँगन में, अपनी शुभ्र धवलरूपहली रश्मियों कागलीचा बिछाए मीठीसुरभित बयारों के संग मुखमंडल पर मीठी&nb... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   7:39pm 24 May 2019 #चाँद
Blogger: Sudha Singh
इत्र सा महकता नाम तेरा, सुरभित समीर कर जाता हैकितनी है कशिश मोहब्बत में, मन बेखुद सा हो जाता है दिल में एक टीस सी जगती है जब नाम तुम्हारा आता है  विरहा की अग्नि जलाती है और तृषित हृदय अकुलाता है जब अधर तुम्हारे हास करे कांकर पाथर मुस्काता है उठती जब तुम्... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   12:17pm 19 May 2019 #मोहब्बत
Blogger: Sudha Singh
लक्ष्य साधो हे पथिक,हौसला टूटे नहीं।कठिन है डगर मगर, मंजिल कोई छूटे नहीं।।गिरोगे सौ बार पर, स्मरण तुम रखना यही।यत्न बिन हासिल कभी, कुछ भी तो होता है नहीं।।पग पखारेगा वो पथ भी, जो निराश न होगे कभी।काम कुछ ऐसा करो, मंजिल उतारे आरती।।संग उसको ले चलो,जो पंथ से भटका द... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   5:41pm 17 May 2019 #पथिक
Blogger: Sudha Singh
कभी अपनी फिक्र नहीं होती उन्हेंदूसरों की चिंता मेंअपने सुनहरे जीवन कीकुर्बानी देने से भीकभी घबराते नहीं वे.परायों को भी अपनाबना लेने का गुरकोई इनसे सीखे.इनका प्रयोजनकभी गलत नहीं थाफिर भी वे इल्जाम लगाते हैं,कि इनके ही कारण कईअपने प्राणों सेहाथ धो बैठे.कई जीवन उजड़ ग... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   4:24pm 11 May 2019 #लोग
Blogger: Sudha Singh
जाल बिछाता है और डालता है दाने#शिकारी बनकर के जीवन , शिकार करता है।कभी दुखों का प्रहार, कभी सुखों का उपहार#मदारी बन उंगलियों पर नाच नचाता है।मूस मांजर की क्रीड़ा में रंक होता राजा तोएक क्षण में दाता अकिंचन #भिखारी हो जाता है।पावों में डाल बंधन, हंटर से करके घायलकरके मनु... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   7:43am 11 May 2019 #
Blogger: Sudha Singh
तुम्हें नाचते हुए पहली बार देखा था मैंने जब मेरा सहोदर तुम्हारे जीवन में आया था.आँखों से भर भर आँसू गिरते रहे. और हम खड़े देखते रहे ओंठों की लंबाई भी दोगुनी हो गई थी. तुम्हारी खुशी हमें भी खुश कर गई थी पर समझ न आया कभी कि इसके पहले भी तो घर मेंकितनी ही बार किलकारियां गूंजी ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   11:27am 10 May 2019 #
Blogger: Sudha Singh
कितना बेहतरीन था भूत मेरारहते थे हम सब साथ सदा.न कोई अणु बमन परमाणु बम.न ईर्ष्या न द्वेषन  ही मन में कोई रोष.न थी कोई टेक्नोलॉजीन ही सीमाओं पर फौजी.न ये ऊंँची- नीची जातियाँये तरक्की नहीं,ये हैं तरक्की की घिनौनी निशानियांँ.गुम है कहीं,प्रकृति माँ की गोद का वो आनंदझरने और ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   6:46pm 8 May 2019 #तरक्की
Blogger: Sudha Singh
कातर स्वर  करे धरणि पुकार ।स्वार्थ वश मनुष्यअपनी जड़ें रहा काट।।संभालो, बचा लोमैं मर रही हूँ आज।भविष्य के प्रति हुआनिश्चिंत ये इन्सान।उजाड दिया काननपहाड़ दिए काट।।फैलाता रहा गंदगीनदियों को दिया बांध।निज कामनाओं हेतुकरता रहा अपराध।।न चिड़ियों की अब चहक हैन ... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   1:16pm 7 May 2019 #प्रकृति
Blogger: Sudha Singh
वाह रे चापलूसी, तुझमें भी बात है।तू जिसके पास होती,वह बन्दा बड़ा खास है।।दुम हीनों को दुम दे, तू श्वान बनाती है।जीभ लपलपाना , तू उसको सिखाती है।।यस मैम, जी हुजूरी, तू जिससे कराती है।कंगाल हो जो बंदा, मालामाल बनाती है।।धर्म, कर्म, शर्म को, तू मुंह न लगाती है।पास हो ये जिनके, ... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   1:06pm 5 May 2019 #चापलूसी
Blogger: Sudha Singh
ओ मेरी प्यारी मइया तुम धूप में हो छइयांँ तुम ही मेरी खुशी हो तुम जिन्दगी मेरी होगर्मी से तुम बचाती सर्दी से तुम बचाती तुम अलाव सी गुनगुनी हो किस मृदा से बनी हो गीला किया जो मैंने छाती लगाया तुमने तर भाग में तुम सोई करुणा से तुम भरी हो हर हाल में मैं खु... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   2:37am 5 May 2019 #ममता
Blogger: Sudha Singh
सुनो बटोही,तुम मुसाफिर हो, तुम्हें चलते ही जाना है।बहु बाधा, बहु विघ्नों से, तुम्हें निर्भय टकराना है।ये जीवन, हर पल खुशियों और दुख का ताना बाना है।कभी उठाओगे तुम किसी को, तो कभी किसी को तुम्हें उठाना है ।।सुनो बटोही,काल की हर क्रीड़ा से तुम्हें सामंजस्य बिठाना है ।इस च... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   6:39am 3 May 2019 #प्रेरक कविता
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