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Blog: SUFI BENAM

Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
दो चार रासते मिला, शहर बसा लिया तो क्या शहर-शहर दरिंदगी, है कोय भी नहीं सगाहूँ मुस्करा मैं यूं रहा कि उलझने तो आयेंगी कि मैं था कुछ झुका-झुका, न जाने क्यों उसे लगा है शायरी दवा मेरी, अकेलापन इलाज है ज़रा बताओ साथ में है, कौन किसके खुश रहा जो पांच तत्व से बने, मिलेंगे संग तत्व म... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   4:27pm 31 Mar 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
ये अंधड़ का अँधेरा है या खोया सब नसीबों में दिल-ए-रेगिस मिला हमको नफ़ी के इन सराबों में ज़रा अब सुरमें दानी से निकालो ख्वाब की हलकें कभी तो अस्ल की शकलें लगा दो इन शबाबों में कहीं नाहक अचानक से हों तुम से फिर मुलाक़ातेंन जाने क्यों छुपाता है शहर तुमको किताबों मेंवही नुख्ता ज... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   2:12am 28 Mar 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
रंग से रग को सींचा करतेमय से मधुरिम हौले- हौले हो कर मौसम-योगित शायर बहका करते गिरते-पड़तेएक जुमले में खुद को गूंथे रम्या-मोहन लीला करते मिथ्यावादी हो कर शायर खेलो स्याही में बहकर केसावन बीता, तन भरमाये देखो कैसी बदली लाये भूखी कलमें बहका शायर गजरी-पायल सब शरमायेवृन्दा... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   12:34am 14 Mar 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
आसमां से गिर कर खुद से ही खुद को बांधता हुआ,नायाब ग्रंथियों की पेचीदा गांठों में उलझा,अपनी तीव्रता से अपनी ताकतों को चीरता फलक की दूरियों को छू कर के लौटा, दरख्तों पर, टहनियों पर, तार के खम्बों पर, लटकता हुआ, छतों पे हवाओं के वेग से गर्द में सना हुआ, बेपरवाह एड़ियों को बेवजह ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   3:12am 5 Mar 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
मतला:प्यास में बरसों निभाने पड़ गये वस्ल के पोखर में कीड़े पड़ गये तिलमिलाया मैं जो आदम ज़ात तो रूह से रिश्ते बताने पड़ गये कोई वादा हमने कब उनको किया मुस्कराये तो, वो पीछे पड़ गये फूल से एहसास वो मुस्कान के मौसमों के बाद हलके पड़ गयेएक अधूरी शाम है कहती सुनो तेज़ जो दौड़े थे धीमे ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   1:40pm 1 Mar 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
वज़्न - 2122 1122 1122 22/112अर्कान - फाइलातुन फ़यलातुन फ़यलातुन फैलुन /फइलुनबह्र - बह्रे रमल मुसम्मन मख़्बून महज़ूफ़ो मक़्तूअकाफ़िया - आं (स्वर)रदीफ़ - होता हैगिरह :संग के फर्श पे कब कोई निशां होता है प्यार गर हो न तो घर सिर्फ़ मकां होता हैमतला:अर्श के बोसों का फिर दर्द अयां होता है जान ह... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   1:01am 27 Feb 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
गिरह :कर रही गुदगुदी वो निगाहें तेरी कुछ किया जाए इन चुप्पियों के लिएमतला :दर्द श्रृंगार है प्रेमियों के लिए हसरतें बुझ रही तल्खियों के लिए एक ग़ज़ल में जुड़े मिसरे दो शेर के फिर न हम तुम रहे बाज़ियों के लिए इत्र से लद गयी नाज़नी वो लहर ज़ुल्फ़ साधी जो थी बालियों के लिए फिर न आह... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   1:45am 25 Feb 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
वज़्न - 2122 2122 212अर्कान - फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुनबह्र - बहरे रमल मुसद्दस महज़ूफ़काफ़िया - आनारदीफ़ - चाहिएगिरह:उम्र को महसूस करना हो अगर ज़ख्म कोई फिर पुराना चाहिएमतला:लम्स को शादाब छाना चाहिए अब तो कुछ नज़दीक आना चाहिए पर कहो इस उम्र में हो क्यों मिले अब तो घर को ही बसाना ... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   1:43am 17 Feb 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
काफ़िया - आना रदीफ़ - भूल जाता है, वज़्न - 1222 1222 1222 1222 वो गुड़ सी बात करता है, निभाना भूल जाता है दिनों के फेर से खुद को, बिताना भूल जाता है कभी मिलता है खोया सा, कभी टूटा सा गलियों में कभी पूछो तो शायर है, बताना भूल जाता है ज़माने भर की रौनक को, बहा कर अश्क़ में अपने जगा रक्खा है आँखों को, ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   1:49am 14 Feb 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
वज़्न - 21222122212अर्कान - फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुनबह्र - बहरे रमल मुसद्दस महज़ूफ़काफ़िया - आ ( स्वर )रदीफ़ - हो गया अर्श का एक अश्क़ दरिया हो गया सीप में हर बूँद गहना हो गया फिर ज़रा साये को छूकर देखिये किस कदर अब ये अकेला हो गया दोस्त है मुफ़लिस अकेलापन मगर ज़िन्दगी अब खुद बहाना हो ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   12:15am 9 Feb 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
आदरणीय देवेन्द्र माँझी जी के मिसरे में गिरह की कोशिश :मरना आसान नहीं कसर के दागों को लिए लोग क्यों आए हैं मुट्ठी में चिराग़ों को लिएमतला:बह गये प्यार में हमसाज़ तरानों को लिए आप साहिल रहे रेग की मिसालों को लिए हुस्न की आंच को नज़दीक न पायें फिर भी दिल जले आज फ़क़त आप के ख़्वाब... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   3:09am 5 Feb 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
वज़्न - 2122 1212 22काफ़िया - आ (स्वर)रदीफ़ - जायेगेम किस्मत अगर लगा जाये नोट हर दावं पे बदा जायेशेर मुमकिन है जी सकें लेकिन वस्ल इंसान से मिला जायेताश के खेल की जमे बाज़ी शर्त ही आज कुछ जिता जायेसाथ को साथ संग चिंगारी बिन तराशे न रात वफ़ा जायेपैक में रंग सभी गुम इक्के हैं साथ जोकर ही... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   9:44pm 2 Feb 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
तुममें मुझको उसकी परछाईं दिखती है उसकी सौबत में रहती खुशबू कितनी है जलता दिन है तस्वीरों के छल का मारा करवट ने चाहत की सुनवाई रखली हैबदला बदला युग जीवन है मौसम सारा कुछ चहरों पे नयनों की सीढ़ी मिलती है आराइश है यौवन चितवन चित रग-धारा ढाढ़स लब-कोशों में निशचित भरती है तुम क... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   1:26am 1 Feb 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
वस्ल लब पे सजा बेखुदी के लिएरात बेताब थी उस नमी के लिए देवता बरहमन ज़ात वाले सभी इश्क़ के अर्श में इक सदी के लिए दिलशिकन आशना हमसुख़न रह गुज़र प्यार कर ज़िन्दगी है इसी के लिए तीरगी बेसुधी हुस्न आगोश हो लाज़मी ये रहा सादगी के लिए कमसिना दर्द देता है आवारगी ख्वाब टूटा मगर रौशनी ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   6:19am 22 Jan 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
वज़्न - 1222 1222 122 अर्कान - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फऊलुन बह्र - बह्रे हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़ काफ़िया - आना रदीफ़ - जानता है मतला :सदा पागल ज़माना जानता है मुहब्बत की हक़ीक़त जानता है ज़रा अंगुली को तुम बंदी बना लो खुली ज़ुल्फें फसाना जानता है हमें माथे की वो बिन्दी बनाकर रस्म दिल की निभाना ज... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   2:27am 19 Jan 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
वज़्न 2122--1212—22 / (112)अर्कान-- फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुनकाफ़िया— आरदीफ़ --- देनाज़िन्दगी की हमें दुआ देना हो सकेगा हमें भुला देना ?आस टूटी नहीं कभी तुम सेमत करीबी का मरहला देना ढूंढ कर रोज़ की ख़ुशी हम में प्यार को प्यार की सज़ा देना जिस्म है प्यास से लदी रिक़्क़त खुरदुरापन मेरा मिटा दे... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   9:57pm 18 Jan 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
इन्तेज़ारी सदी के बाद हवा में है आवाज़ तुम्हारी जिस्म की खरखराहट उम्र को रेशमी कर गयी है ग़ज़ल लब से नहीं अँगुलियों से बोलती है हकीकत की बेयक़ीनी में हमने भी कान अपनी हथेलियों पे ले रक्खे हैं आवाज़ें, कवितायेँ और वस्ल नाखूनों के कुरेदने से मेरी लकीरों की गलियों में घर ढ... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   3:41pm 17 Jan 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
हमारी अदीब शायरा पूजा कनुप्रिया जी के मिसरे में गिरह दे कर ग़ज़ल की कोशिश 122 122 122 122अरकान,,फ़ऊलुन, फ़ऊलुन ,फ़ऊलुन , फ़ऊलुनकाफ़िया.... ख़तावार(आर )रदीफ. = तुम भीगिरह:शराफत बनी रात में वो क़यामत ख़तावार मैं भी, ख़तावार तुम भी मतला:इरादे वस्ल के खतवार तुम भी न चाहत न सिलवट हो क्या यार तुम भी ज... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   4:09am 16 Jan 2017 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
बड़ा ही जीवट वो एक नन्हा बच्चा जिसको सज़ा-ए-नीलडाउन में नाचते हुए देख कर हम अपने भीतर के निःस्तब्ध बचपन को खंरोचते थे चाहते थे कि कहीं तो मेरे अंदर कुछ हलचल हो और उस सा चंचल हो जाऊंमेरा दोस्त था वो एक नन्हा बच्चा जिसे मैं बचपन से जानता था जीवन की दिल फरेबी से उम्र पैतालिस म... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   12:54am 31 Dec 2016 #
Blogger: Anand Khatri " Sufi Benam"
अब्दुल हमीद अदम के एक मिसरे में गिरह देकर ग़ज़ल में उतरने की कोशिश :वज़्न - 2122 1212 22 / 112 अर्कान - फाइलातुन मुफ़ाईलुन फैलुन बह्र - बह्रे खफी़फ मुसद्दस मख्बून काफ़िया - ए (स्वर) रदीफ़ - होतेगिरह :आस भर कर उफन उठी लहरें काश थोड़ी सी हम पिए होतेमतला :दिल शिकन चार तो दिए होते दर्द ले साथ हम ज... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   3:32am 23 Dec 2016 #
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