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Blog: बाल सजग

Blogger: Bal Sajag
"हटाते हैं कचरों का ढेर "क्या आशा करके तूने छोड़ ये देश,जहाँ पड़ा है कचड़ों का ढेर | जिस को तूने आज़ाद कराया, उसने तुझे इसे मन से हटाया | प्रदूषित है यहाँ का हवा और पानी,बिलक - बिलक मर रहे प्राणी |  क्या आशा करके तूने छोड़ ये देश,यहाँ पड़ा है अत्याचारों का ढेर | हर इंसान है डरा सहमा,... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   1:05am 8 Oct 2019
Blogger: Bal Sajag
"रविवार "शब्द सुनकर ही मन में उल्लास आता है जब दिल , मन मनमौजी बनकर उछलता है | लेकिन रविवार की असहनीय सी शांति,कहीं ला न दे क्रांति | मुझे डर इसी बात का रहता है,क्योंकि अब तो हर शख्स यही कहता है | रविवार हमारा आरामदेह का दिन है, और हमें बस विश्राम ही करना है | जो करते हैं रविवा... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   12:42am 8 Oct 2019
Blogger: Bal Sajag
"बदल रही है इंसां की सोच "बदल रहा है जमाना,बदल रही है इंसां की सोच | बढ़ रही है जनसंख्या,बढ़ रही तकनीकी खोज | पुरानी सोच को भुलाकर,भीड़ - भाड़ की जिंदगी में आकर | जीवन की रेस में दौड़ रहे हैं, गिर रहे , फिसल रहे हैं और, वक्त आने पर संभल रहे | घड़ी की सुई बढ़ रही है,पल - पल वक्त बदल रहा है | मन त... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   12:25am 3 Oct 2019
Blogger: Bal Sajag
"सुहाना मौसम "यह सुहाना सा मौसम,करता है दिल को रौशन | ठण्डी हवाओं का झोका,जो बनाता मन को अनोखा |खुशबू से भरा आसमां,जो करते मन को खुशनुमा | हर पल जब यह बीतता,कुछ न कुछ उन पलों से सीखता | यह सुहाना सा मौसम,करता है दिल को रौशन |कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घरकवि परिचय :यह कवि... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   12:48am 23 Sep 2019
Blogger: Bal Sajag
"राजभाषा हिंदी "हिंदी हमारी राजभाषा कहलाए,पंजाबी हो या गुजराती |  सबको हिंदी बोलना सिखलाए,अपनी भाषा का महत्त्व बताए | मन कहता है हिंदी बोलूं, पर समझ में न आए कैसे बोलूं | बोल - बोलकर सीखूं मैं,सीख - सीखकर बोलूं मैं | हिंदी को मैं भूल न पाऊँ,सभी को मैं यह बात बतलाऊँ | हिंदी को क... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   1:46am 22 Sep 2019
Blogger: Bal Sajag
"हिंदुस्तान से ही हिंदी "हिन्द देश के निवासी हैं हम सभी,जहाँ हिंदी बोलते हैं हम सभी | चाहे हो बंगाली , या फिर गुजराती हिंदी हमें इतना ही बतलाती | ये सारी भाषाएँ भी हिंदी ही कहलाती | हिंदी से ही हिंदुस्तान बना है, हिंदुस्तान से ही हिंदी | दोनों ही एक दूसरे से बने हैं, एक दूसरे क... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   12:08am 21 Sep 2019
Blogger: Bal Sajag
"हिंदी दिवस गर्व का दिन "एक बार फिर गर्व का दिन आया पर कैसे मनाएँ हिंदी के बिन जो अपना सम्मान है, जो भारतवासियों की जान है | लब्ज़ों पर यह सजती है,पंक्तियों में यह जब अलग सा रस भरती है | अपना महत्व बताने में, ज़माने को सांस्कृतिक सिखाने में | कभी पीछे नहीं हठती है, रामायण।, म... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   11:56pm 20 Sep 2019
Blogger: Bal Sajag
"धूप ने लिया अवतार "गर्मी में हुए बेहाल,धूप ने लिया अवतार | पसीना भर -भर गिर रहा है, बच्चे घट -घट पानी पी रहा है | मन करता है तो नहा ले यूँ ठंडा होकर हो जाए तन | गर्मी से हुए बेहाल,धुप ने लिया अवतार | कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घरकवि परिचय :यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   12:13am 20 Sep 2019
Blogger: Bal Sajag
"हिंदी है हमारी शान "हिन्द देश के हैं हम वासी, हिंदी ही है हमारी साथी | हर पल है कंठ पर रहना, जो सोचूँ वो स्पष्ट कराती | साथ - साथ है इसके चलना, जब तक हमें है बढ़ते रहना | मात्रा भाषा है यह कहलाती, हिन्दी सांस्कृतिक हमें सिखाती | जब तक है हम में जान,न भूलेंगें हम हिंदी की शान | हिन्द ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   12:32am 17 Sep 2019
Blogger: Bal Sajag
"महान हिंदी "कैसे करूँ तेरा गुणगान,जिस देश में है तू महान | जहाँ राज्य का नेतृत्व लेकर बैठी है तू जुबाँ की मनचाही भाषा हिंदी है | लिपि के द्वारा तुझे लिख तो लेता हूँ,बिना सोचे समझे तुझे यूँ ही बोल देता हूँ | तू एक पवित्र ग्रन्थ की तरह उभरी है,तेरे हर एक वर्ण में लौह भरी है | ... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   12:36am 16 Sep 2019
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"खिलौना "यह खिलौना है मेले का,मन करता है लेने का | भीड़ - भाड़ लोगों के बीच में,धक्का मुक्के और दुकान के सटीक में | रंग बिरंगे खिलौने मन मोह लेता है,पर क्या करूँ कोई पैसा नहीं देता | तमाम विनती के बाद पैसे पता हूँ,इन्ही पैसों से खिलौने को लेता हूँ | यह खिलौना है मेले का,मन नहीं करत... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   12:44am 14 Sep 2019
Blogger: Bal Sajag
" Dazzling sound "While playing in the ground,I heard a dazzling sound.then I looked around but not evidence I found.I determine not to play I informed my team, and run along the way.this time it was going dark outside, I seen all but avoid. I took up my books,and went on the roof.Poet : Devraj kumar , class : 9th , Apnaghar Poet introduction : This poem is belongs to Devraj kumar who is very interested in writing poems. He basically writes the poems on recent topic which going in mind . he wants to become an engineer of chemical . He give his best efforts in his studies . I hope you would like this poem.... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   12:41am 4 Sep 2019
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"आज़ादी का दिन "अब आया फुल आज़ादी का दिन, जिओ जिंदगी 370 धरा के बिन | रोक जो था कश्मीर के जमीं पर जो था बंधन घूमने वालों पर, अब वह रह सकते है जिंदगी भर | खाना हैं वहां पेट भर | बिना किसी परेशानी और उदासी के बिन, अब आया फुल आज़ादी का दिन |  कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपनाघरकवि परिचय : यह ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   12:27am 3 Sep 2019
Blogger: Bal Sajag
"सेब "कश्मीर की सर जमीं पर,उगता हूँ बर्फ जमीं पर | ठण्ड की वजह से ख़राब नहीं हूँ,मैं तो एक लाल रसीला सेब हूँ,मीठा तो हूँ पर खट्टा नहीं,कश्मीर में तो हूँ , पर लोगों के पास नहीं | मेरी विशेषताएं कुछ ऐसी है,काफी हद तक राजा जैसी है | मेरे चाहने वाले इतने है की मुझे पता नहीं,सभी मुझे ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   12:02am 2 Sep 2019
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"पानी की बूँदें "ये पानी की बूँदें गिरती हुई कहती हैं,क्या मैं ही हूँ या पूरी दुनियां ऐसी है | मैं एक बून्द की तरह गिरती है, शरण न मिलने पर यूँ ही फिरती है | धूल में मिलूँगी या यूँ ही बून्द रहूंगी, यदि लक्ष्य पूरा हुआ यह बात सबसे कहूँगी | कवि : प्रांजुल कुमार , कक्षा : 10th , अपना घरकव... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   12:36am 29 Aug 2019
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"ऊँचे "ऊँचे है ये कितने ऊँचे हैं,सीधे हैं ये कितने सीधे हैं | पर ये है कितने फीके,इनसे हमको भी है सीखना,कठिनाइयों से है लड़ना | बस उनको तो है सिर्फ पढ़ना,ये हैं हिमालय बस आप से इतना है कहना | कवि : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घरकवि परिचय : यह कविता समीर के द्वारा लिखी गई है जो की प्रय... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   12:12am 28 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"राखी का पर्व "राखी का पर्व है भी बहनों का, सम्बन्ध है यह रक्षा बंधन का | भाइयों के कलाइयों में बांधकर,चली जाती है रक्षा माँगकर | ख़ुशियों का त्यौहार है, रक्षाबंधन सा का एक त्योहार है | प्यारे हाथों से मिठाई खिलाए, रक्षा सूत्र बांध जाए | राखी का पर्व है भी बहनों का,सम्बन्ध है य... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   12:31am 26 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"मन करता है पक्षी बनूँ "मन करता है पक्षी बनकर,खुले आसमान में उड़ जाऊँ हर एक पल  को मैं,अपनी यादों में बसाऊँ | हरी भरी सी डालियों पर,मैं अपनी चहचाहट सुनाऊँ | अपने को साबित करने को,हर मुश्किल को पार कर जाऊँ | खुले आसमान में पंख फैलाकर,अपनी परेशानियों को मैं बतलाऊँ | तूफान ह... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   12:16am 25 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
" मुस्कुराते फूल "हवाओं में हिलती हुई वह फूल जो कुछ कहना चाहती है | अपनी सजी हुई टहनियों को लेकर, हवाओं के साथ खेलना चाहती है | खुशबु से तन को महकाना चाहती है आस पास पेड़ पौधों से कहकर,अपनी खुशबू से मन को बहलाना चाहती है | यह फूल के पौधे हवाओं से खेलना चाहती है | | कवि : सुल्तान ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   12:38am 23 Aug 2019
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"बूँदे भी कुछ कहना चाहती है "ये बूँदे भी कुछ कहना चाहती है, कुछ बताना चाहती है | और कुछ सुनना चाहती है,जब मैं गिरूँ इस धरती पर,तो मुझे एक सरोवर में बचा लेना | या फिर तुम अपनी एक पात्र में,मुझे थोड़ी सी जगह दे देना | ऐसा बस लिए कुछ कर देना,मेरे अस्तित्व को ख़त्म मत कर देना | कवि : निती... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   12:36am 22 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"मेरे देश के शहीदों "मेरे देश शहीदों ने,करवाया हमें आज़ाद |  दुश्मनों से लड़कर,किया उनके परिवारों को बर्बाद | हम लोगों को मिली है आज़ादी, आज़ादी को मत करना बर्बादी | चाहे मेरे शहीदों के सामने, खड़ी कर दो सेना लेकिन शहीदों के मरने के बाद देश को अपने झुकने मत देना | तभी मेरे इस देश ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   12:30am 21 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
बाल सजग: कविता : मैं क्या बनूँ: "मैं क्या बनूँ "मैं क्या बनूँ, इस सवाल ने सताया | मैं क्या करूँ, किसी ने नहीं बताया | फिर मैं परिवार वालों से पूछा,...... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   12:30am 20 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"बूँद"जब भी पानी बरसता है, फिर बूँद जरूर बरसता है |  बूँद -बून्द से ही खेती है,जिसकी जरूरत हमको सदा होती है | बूँद -बूँद से बना है यह संसार, बिना बूँद नहीं होगी बड़ा पार | बूँद चीज है जो कभी मर नहीं सकती,बूँद के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती | बूँद से ही जीते हैं संसार,बूँद -बूँद ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   12:26am 20 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"बलिदान "बलिदान देकर अपनी जान,दिया हमें स्वतन्त्र जहान | न भूलेंगे हम उनके प्राण,जो दिया है हमको शान | दिन - रात उन्होंने लड़ी लड़ाई,तब जाकर हमें मिली रिहाई | संघर्ष भरा था हर समय,सोच में डूबा था हर नयन | वीर हुए इस देश में बहुत सारे,जिन्होंने दे दी जान वतन के हवाले | स्वतन्त्... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   12:31am 19 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"एक ख्वाईश"मेरी भी एक ख्वाईश है,तुम चाहे इसे ज़िद समझो | या फिर कोई अरमान समझो,किसी का न था साथ | मैं थी अकेली मासूम भोली और डरी, हवा के खिलाफ थी | बादल ने गरजते हुए दस्तक दी, मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही न रहा | फिर मैंने लम्बा सफर तय किया | | कवि : राज कुमार , कक्षा : 10th , अपना घर... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   10:15am 18 Aug 2019
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