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Blog: बाल सजग

Blogger: Bal Sajag
"हिंदी दिवस " उन शब्दों की श्रृगार है हिंदी | जो हर हिदुस्तानियों के लब्जो पर भंडार है हिंदी ,गहनों में सजावट है हिंदी |  हर एक शब्दों में बनावट है हिंदी ,सहज तरीके से बोले जाने वाली | फूल की किलकारी वह हिंदी ,इस पावक दिवस पर | नई उंमग की उत्सव है हिंदी ,कवि : विक्रम कु... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   11:20am 20 Sep 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"आज मैं खुद को क्या कहु "आज मैं खुद को क्या कहु | न रहने का तरीका आता ,न बात करने का ढ़ग | पर हर कठिनाइयो में खड़े रहते हम ,न खाने  का खाना रहता |  न सोने के लिए घर ,फिर भी हौसलों से बढ़ते रहे हम | आज जो भी हूँ ,हर कठिनाइयो से गुजरा हूँ | मुझे माता -पिता और शिक्षक का साथ मिला ,आज... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   10:34am 8 Sep 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"किस्मत "किस्मत से है हारे ये |पर सपने है सवारे ये ,दूर -दूर पैदल चलकर | आँखों में उम्मीद को लेकर ,बढ़ रहे है मंजिल की ओर | दिन में पापा की सिर्फ एक रोजी ,जो लाता  घर शाम की रोटी | पर न है हारे ये ,पर सपनो को सवारे ये | समाज से आगे चलकर ,घर वाले से लड़कर | जाना चाहते है उस छोर ,द... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   3:26am 1 Sep 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"मन नहीं लग रहा "मन नहीं लग रहा | कुछ करने को ,मन को कैसे मनाओ | कुछ उपाय सोचने के लिए मन नहीं लग रहा ,कैसे मनाओ मन को | खेल कर या सो कर ,किसी में मन नहीं लग रहा | दिन भर सोचता रहता हो ,मन के बिना कुछ नहीं हो रहा काम | सिर्फ मन चाहता है आराम ,कवि : राहुल कुमार  , कक्षा : 8th अपना ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   2:11am 9 Aug 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"मंद -मंद बहती हवाएँ "मंद -मंद बहती हवाएँ | बारिस की ये बूँदे , और बादलो की साए | धम -धम कर बरस रहे है ,फुव्वारे की  तरह ये बूँदे | हर जहाँ खुशनुमा हो गया है ,खेतो में   धान बो गया है | जगह -जगह बर गया पानी ,उसमे तैरती मेढ़क रानी | हरा -भरा महौल हो गया ,कवि : कुल्दीप कुमार , कक्ष... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   3:44am 5 Aug 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"यह काले -काले बादलो ने कर दिया अंधेरा "यह काले -काले बादलो ने कर दिया अंधेरा | सुबह से शाम बरसा रहा है पानी का फव्वारा ,कभी टीपीर -टीपीर और कभी -कभी जोर से | कभी अचानक उजेला होता है ,सूरज काले बादलो में ढक जाता है | कभी बहुत गर्मी  होता है ,कभी अचानक मौसम बदल जाता है | यह क... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   4:29am 4 Aug 2021 #
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"मौसम"मौसम का क्या कहना | जो हसी खुशी का महौल बना दे ,सूख रहे पेड़ -पौधे | अब तो कुछ बूँद  गिरा दे ,मौसम का क्या करना | जो दूर -दूर तक बादल से घिरा दे ,लोंगो के चेहरें पर है मुस्कान |अब तो कुछ बूँद  गिरा दे ,मौसम का क्या कहना | जो चारों तरफ हरा भरा बना दे ,सूख गए सारे झील ताला... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   3:43am 2 Aug 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"जीओ खुलकर जीओ " जीने में  क्या बुराई हैं |  चाहें हम जैसे जीए ,पर जीना तो हम सब को |  चाहें खुश हो के जीए ,और चाहें दुखी हो के जीए |  जीना तो हर हाल में हैं ,ऐसे जीने से क्या फायदा |  जिसमे कोई मज़ा ही नहीं ,जीओ तुम खुलकर जीओ | बिना डर के , बिना शर्म के ,जीओ खुलकर जीओ | चाहे... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   8:03am 21 Jun 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"चेहरें की हॅंसी " चेहरें की हॅंसी | रूठती ही जा रहीं हैं , आँसु और गम दोनों | मिटटी हीं जा रहीं हैं ,चेहरें पर उदासी बनी हैं |  न चेहरें पर मुस्कुराहट है , न आँसुओ पर कोई छाया |न मन में कोई हिचकिचाहत , न गम पे कोई पैहरा | न पैरों में कोई बंधन ,ये दिन रुठती ही क्यों जा रहीं ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   5:00am 19 Jun 2021 #
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"ये काले -काले बादल "ये काले -काले बादल | मन को करतें घायल ,लेके अपने सांग बारिस के बूंदे |  यह देखकर किसान भी रूठे ,जब गिरना होता हैं तब | कहाँ निकल जाते हैं ये सब, जब गिरती तेरी बूंदे |तब सब तुझको ढूढ़े ,ये काले -काले बादल | मन को करते घायल ,कवि :  कुलदीप कुमार ,कक्षा : 10 अपन... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   4:11am 16 Jun 2021 #
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"जिंदगी की ही सुरवात" जिन्दगी की ही सुरवात |  सूर्य की चन्द  किरणों  से होता है ,नम: जो हवा चली पूर्ववाइया || तन -मन कर उठा ,ये जिंदगी की सुरवात | एक नए उमंग तरह होती है , जिंदगी की ही सुरवात | सूर्य की चन्द  किरणों से होता है ,कवि :गोविंदा कुमार ,कक्षा :5th "अपना घर "    &n... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   7:30am 13 Jun 2021 #
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"वो दिन भुलाया नहीं जा सकता "वो दिन भुलाया नहीं जा सकता | उस दिन की लगी आग सीने से ,बुझाया नहीं जा सकता | जीन वीरो ने हस कर चूमे थे, फ़ासी के फंदे | देशके आज़ादी के खातीर, उन महान वीरो को अपने दिल से |  उनका नाम हटाया नहीं जा सकता ,वो दिन भुलाया नहीं जा सकता | जिसने देश को आज़ा... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   3:58am 5 Jun 2021 #
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"  मोती सी चमक "   मोती सी चमक तेरी,घासों पर नजर आती है | वह  मखमली सी खुशबू , सिर्फ फूलों से महक आते हैं | चाँद की रोशनी में भी, तारे और सितारे नज़र आते हैं | वह ओस की बूँद ,जो सुबह  घासों में फैली होती है | मैं  रोज़ टहलता हूँ सुबह, कोहरा  ही कोहरा नजर आता है |इस हवाओं... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   1:04am 30 Apr 2021 #
Blogger: Bal Sajag
 "मौसम का क्या  कहना "मौसम का क्या  कहना , जो हसी -ख़ुशी का माहौल बना  दे |  सुखने लगे सारे  पेड़- पौधे ,अब तो बादलो से बून्द गिरा दे  |  मौसम का क्या कहना ,जो अंधकार  को उजाला में बदल दे | चारो तरफ ही अंधेरा -अंधेरा ,अब तो अंधेरे -अंधेरे में दीपक जला दे | मौसम का ... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   7:37am 19 Apr 2021 #asha trust
Blogger: Bal Sajag
 "  काश मै हवा बन जाऊ " काश मै हवा बन जाऊ ,हर गली -मोहल्ले  सेगुजर  जाऊ | बाग़ - बगीचे में सैर कर आऊँ  ,जब चाहे मन करता | तब मै  उड़ता फिरुँ  ,पेड़ -पौधे के साथ | खूब मौज -मस्ती करुँ , शाम डलने पर चुपचाप शांत हो जाऊँ | मै तो बस हवा हूँ ,मुझे पूरी दुनिया को जीवित है रखना |&... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   8:44am 11 Apr 2021 #asha trust
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"सुबह की  वह सुनहरी धुप "सुबह की वह  सुनहरी धुप ,जो बिना बोले चमक आती है |सही समय नहीं होने पर ,आपने आप गयाब हो जाती है |न लगती न चुभती है ,मन के भीतर तक है | सभी दिमाग के तार को ,फिर से एक्टिव करजाती है |ये सुनहरी धुप ,जिसके अनेक है रूप  | लेकिन मन को  मोह जाती है ,सुबह की वह... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   8:47am 9 Apr 2021 #asha trust
Blogger: Bal Sajag
 "मै अब भी याद करता हूँ उस पल को "मै अब भी याद करता हूँ उस पल को , जब मै घुठनो के बल चलता था | मुझे याद है वह दिन ,जब खटिए से गिर जाता था | मुझे याद है वह दिन ,जब  मैं  मिट्टी से सना रहता था | माँ को डर था कही हम गिर न जाए ,इसलिए उगंली पकड़कर चलता था | उन्हे मालूम था कही गिर ... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   6:02am 4 Apr 2021 #asha trust
Blogger: Bal Sajag
 कविता : "रंग की भरमार में "रंगो  की भरमार में ,होली  की त्योहर  में | हर व्यक्ति को रंग है लगाना ,बचने वालो को न  छोड़ना | अबीर उड़े गुलाल उड़े और जाकर सब पर पड़े ,बच्चे पिचकारी में रंग भरे |बाकी लोगो को रंगने के  लिए तंग करे ,होली में हर को  मिलकर हुड  डंग करे |जो होली ... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   6:24am 31 Mar 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"आसमान में तारे"आसमान में तारे। दिखते हैं बहुत सारे।।कुछ टिमटिमाते हुए। कुछ चमकते हुए।।उन अंधेरी रातों में। जुगनू की तरह।।आसमान में तारे।दिखते हैं बहुत सारे।।कविः- नवलेश कुमार, कक्षा- 6th, अपना घर, कानपुर,... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   6:34am 11 Mar 2021 #asha trust
Blogger: Bal Sajag
"होली आयी होली आयी"होली आयी होली आयी।अपने संग रंग भर लायी।।  लाल, गुलाबी, हरा और पीला। लगाएंगे रंग भर कर पतीला।। गलियों में दौड़ा दौड़कर। नालियों में पटक पटकर।। होली में रंग लगाना है।  जाकर दोस्तों के घर पर।। बैठ गुजिया खाना है। एक दूसरे से गले मिलकर।। रंग खूब लगाना है।... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   10:09am 7 Mar 2021 #asha trust
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"छोटी सी चिड़िया"छोटी सी चिड़िया।बहुत कुछ कह जाती है।।अपनी आवाजों से वो। सबको मोह लेती है।।छोटी सी चिड़िया। न जाने क्या कह जाती है।।यहाँ-वहाँ घूमती है। डाल-डाल पर जाकर।।सबको बुलाती है। अपने गीत गुनगुनाकर।।देख ली दुनिया घूम घूमकर।  छोटी सी चिड़िया।। क्या-क्या कह जाती ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   9:28am 6 Mar 2021 #
Blogger: Bal Sajag
"poem"   When I closed my eyes.I remember my all mistakeswhich I have  done in pastthen I open my eyes. I think this was  my luck.Which gave me another a chanceand don't I want to go there change out. Poet Name --Niranjan Kumar, Class-4th, Apna Ghar, Kanpur... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   6:53am 5 Mar 2021 #asha trust
Blogger: Bal Sajag
"सुहाने इस मौसम की घटाओ में" सुहाने इस मौसम की घटाओं में।  कुछ तो ऐसी बात है इस मौसम में।। जो हर किसी को भा जाता है।कभी काली घटा जो घिर आ जाता है।।किसानो के चहरे खुशी से भर जाता है।क्योकि उन्हें अपने खेतों की याद आता है।।खेत में बुआई कर खुशिओं की चाह आती है।बारिश के क... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   10:51am 3 Mar 2021 #asha trust
Blogger: Bal Sajag
"चिड़िया आया चिड़िया आया" चिड़िया आया चिड़िया आया।  चिड़िया ने दो दाना लाया।।साथ में अपने बच्चों को खिलाया। चिड़िया गया चिड़िया गया।।आसमान में चिड़िया गया। चोंच हैं उनके छोटे-छोटे।।पकड़ लाये कीड़े मोटे-मोटे।खाया उसे कर छोटे-छोटे।।चिड़िया आया चिड़िया आया।साथ में अपने दाना ल... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   3:28pm 28 Feb 2021 #asha trust
Blogger: Bal Sajag
"कवि सभा के मंच पर"कवि सभा के मंच पर।  सुना रहें हैं कविता।।पीछे से वाह-वाह किये जा रहें हैं। सुर और ताल दिए जा रहें हैं।।कवि सभा के मंच पर।  सुना रहे हैं  कविता।। तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी है। हर चेहरे पर खुशी की।। लहर झूम उठी है।कवि सभा के मंच पर।। कविता सुना रहे... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   3:48am 26 Feb 2021 #asha trust
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