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फिरकी

सचिवालयकी टंकी पर कबूतर उड़ रहा था। कभी इधर, कभी उधर। जैसे आज उसने तय कर लिया था कि सरकार को सबक सिखा कर ही रहेगा। जैसे ही कबूतर के उडऩे पर फडफ़ड़ की आवाज आती तो सचिवालय परिसर में टहल रहे कर्मचारी उसकी तरफ देख लेते। अब भला कबूतर तो कबूतर होता है वह टाइगर तो है नहीं, जो सबको ...
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  July 3, 2017, 12:51 pm
सवाल 'उठाना'अक्लमंदी का परिचायक है। यह एक कला भी है। किसी काम में संवेदनशीलता और कर्तव्यबोध होता है तब ही सवाल 'उठाया'जाता है। पर यह सवाल 'सो'कैसे जाता है। सवालों को भी इंसानों की तरह ही सोने की आदत है। 'उठता'सवाल है, पर उसका श्रेय उठाने वाले को दिया जाता है। उठने का मतलब एक...
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  April 8, 2017, 1:49 pm
चुनाव भी बोझ से कम नहीं हैं और इस बोझ को उठाने का दायित्व नेता बखूबी निभाते हैं। चुनावी दौर बहुत लंबा चलता है, ऐसे में यह भारी भरकम बोझ कई दफा नेताओं से संभल नहीं पाता। इसे संभालने के लिए कोने-कोने से बड़ी तादाद में कार्यकता बुलाए जाते हैं। उसमें कुछ कार्यकर्ता तो भाड़े ...
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  February 28, 2017, 1:05 pm
हमारेएक मित्र सबको खुश रहने का ज्ञान बांटते फिरते हैं, लेकिन आज वो खुद दुखी हैं। जब भी वो किसी को थोड़ी-सी मुस्कान देते थे तो हम सोचते थे कि इनता जीवन तो सार्थक हो गया। इनको जरूर जन्नत नसीब होगी, पर जन्नत से पहले आज वो नरक क्यों भोगने पर तुले हैं।पूछा तो कहने लगे, 'या तो हमा...
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  February 20, 2017, 1:03 pm
चार दिन से मित्र रंगलाल से बार-बार यह पूछ रहा हूं कि रेनकोट पहन कर कैसे नहाया जाता है। चूंकि वह हर काम में अपनी कुशलता दिखाते हैं। हो सकता है यह काम भी उसने करके देखा हो। आखिरी बार जब उससे यह पूछा था तब अनायस ही मित्र रंगलाल के मुंह से मिसाइल की तरह बातें छूटने लगीं।उसने क...
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  February 13, 2017, 1:19 pm
चुग्गा स्थल तो देखा ही होगा। जहां पक्षी पेट की आग शांत करने के लिए चुग्गे की तलाश में आते हैं। ऐसे ही एक 'चुनावी चुग्गा' भी होता है। यहां 'चुनाव' ऐसा 'चुग्गा स्थल' है, जहां पर मतदाता को पक्षी समझा जाता है और माननीय नेताजी को चुग्गा डालने वाला। जिस तरफ से सबसे अधिक चुग्...
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  February 10, 2017, 10:35 am
राजनीतिकदलों के सिंबलों की वार्षिक गुप्त बैठक चल रही थी। हाथी ने सबसे पहले संबोधन दिया। हाथी बोला-अपनी बिरादरी में रह कर कितना सुकून था। यही बोल कमल, साइकिल, लालटेन, पंजा, ताला-कूंची, छाता वगैहर-वगैहर के मुख से भी फूट रहे थे।सब एक-दूसरे से बड़े प्यार और स्नेह से अपना दुख-...
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  February 8, 2017, 12:25 pm
चुनाव में घी का दांव खेला गया है। यह वही घी है, जिसकी सुगंध भी गरीब किस्म या इस रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को मयस्सर नहीं। ऐसे घी से बेहतर खाद्य उत्पाद और कोई हो ही नहीं सकता था। उत्तर प्रदेश के चुनावी घोषणा-पत्र देख लें या पंजाब के, घी ने प्रमुखता से अपनी जगह ब...
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  February 6, 2017, 11:21 am
कुर्ताऔर चरखे का सदियों पुराना रिश्ता है। जब भी चरखे की बात शुरू होती है तो कुर्ता खुद-ब-खुद चर्चा में आ जाता है। अन्यथा युवराज का फटा कुर्ता जग जाहिर होने से पहले चरखा सुर्खियां नहीं बंटोरता। आखिर फटा कुर्ता पहनना कहां की मजबूरी हो सकती है। क्या वे हमेशा फटा कुर्ता ही ...
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  February 4, 2017, 1:50 pm
नारी सुंदरता देख आंखें फडफ़ड़ाना बंद कर देती हैं तो कान मधुर धुन सुनने के आदी हो जाते हैं। किसी को सुंदर कहना गलत नहीं है, लेकिन एक की सुंदरता की तुलना दूसरे की सुंदरता से करना, एक तरह से सुंदरता का उपहास समझा जाता है। चूंकि सुंदरता कुदरत की देन है। इसमें हस्तक्षेप करना ...
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  February 4, 2017, 11:03 am
परिवारवादया वंशवाद राजनीति में एक कल्याणकारी योजना है, जो सीधे-सपाट ढंग से नेताओं से जुड़ी है। अघोषित तौर पर लागू इस योजना का उद्देश्य नेता और उनके परिवारजनों का कल्याण और विकास करना है। नेतागण इसे राष्ट्रहित से जोड़कर देखते हैं, क्योंकि 'राष्ट्रहित'उनके लिए 'सर्वोप...
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  February 4, 2017, 11:00 am
शहरों में कितनी ही रफ्तार से मोटर गाडिय़ां चलती हों, पर आज इन तेज दौड़ते भांति-भांति के वाहनों के बीच साइकिलें दिख जाती हैं। हर साल महंगे से महंगे वाहनों की डिमांड बढ़ रही हो, लेकिन अभी साइकिल के दीवानों की कमी नहीं है। साइकिल चलाने का भी कुछ अपना मजा है। सड़क पर कितना ही...
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  February 4, 2017, 10:56 am
भीमनामक मोबाइल एप के कारण अंगूठे ने एक बार सबका ध्यान अपनी तरफ  खींचा है। क्योंकि समाज भले ही अंगूठे को दुत्कारता रहा हो, लेकिन सरकार निरंतर इसे बढ़ावा दे रही है। मसलन, ज्यादा पढ़-लिख लेनेवाले लोग अनपढ़ और कम पढ़े- लिखे वालों को अंगूठा छाप मानते हैं। कई बार उनकी उलाहना...
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  February 3, 2017, 1:57 pm
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