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मेरी अभिव्यक्तियाँ

                       (चित्राभार इन्टरनेट)कब खोया तुम्हेजो तुम्हे 'मिस करूँ'साथ ही तो रहते हो,खाते हो,टहलते हो,सोते हो,,,,लगता ही नही तुमअब मुझसे दूर रहते हो!!!!जब तुम कर गुस्साआता है,,आटा अच्छा गुथजाता है,,जब तुम पर प्यारआता है,,सब्जी का स्वादबढ़ जाता है,,जब तुमकोबा...
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  April 20, 2018, 8:42 am
                        (चित्राभार इन्टरनेट)वो किसी,झूमते गाछ सी ,,,पुरवैयापछुवा के बयारी झोंकोंसे अह्लादित,,,,,,,अपनी शाखा-प्रशाखाओंसंग पनपती सूखती,,,कितने विहंगम् विहगोंके नीड़ सहेजे खुद में,,,रोध,वृष्टि,सहतीछाया,फल-पल्लवनकर्तव्यों को निभाती,,,जड़ की पकड़ सेबाधित,...
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  April 19, 2018, 12:23 pm
                             (चित्राभार इंटरनेट)आदम ज़ात की एक खूंखार प्रजाति का उद्भव हो चुका है शायद,,!!!,जो दिखने में मात्र आदमियों जैसे हैं,,,,,अंदर का हाड़-मांस #हैवानियत से बना है,,सोच #दरिन्दगी का कचड़ा खाना,,,और रक्त कोशिकाओं में,,#पिशाची द्रव्य,,और आंखों में #हव...
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  April 13, 2018, 10:40 am
आज अंधकार से बहुत गहरा सम्बंध पाया,,,,और अपनी इस नई खोज विस्मृत हूँ?,, या,, उत्साहित हूँ ?नही मालूम,,,पर हाँ इतना ज़रूर है कि,,उजाले के दाह से जनित पीड़ा को बहुत ठंडक पहुँच रही है।        जब भ्रूण रूप में मनुष्य माँ के गर्भ में होता है,,,वहाँ भी स्याह अंधकार होता है,,,तो,,,मैने पा...
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  April 12, 2018, 11:46 am
लो फिर हाज़िर हूँवक्त और हालात कीफैक्ट्री में,,,,तोड़ दो मुझे,,मरोड़ दो मुझे,,और,,एक नया आकारदे दो,,,इस बार भीबोलूँगीं कुछ नही,,हाँ,,, कुछ आहहहऔर कुछ आंसू निकलेगें,,,विचलित होकोई इनसे,,,,यहाँ,,,,कोई ऐसा नहीआस-पास,,,,,,,जो हैं सब चपेट में हैं,,बेरहम पकड़ कीमजबूत जकड़ में,,मशीनों के शोरमें स...
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  April 12, 2018, 10:57 am
मन के आकाशकी ये अंधेरी रातें ,,,,प्यार होने लगा है,,,,इनसे एकबार फिर,,,कितना उदार होता हैइनका हृदय,,,,ये छुपा लेती हैंमेरी पीड़ा,मेरी खुशी,मेरा विरोध,मेरा समर्पण,मेरी जीत,मेरी हार,,मेरे कुलुष,,मेरे विकार,,मेरा क्रोध,,मेरी पुचकारमेरी आशा,मेरी हताशा,मेरी जिजिवषा,मेरी कर्मनाशा,मे...
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  April 12, 2018, 10:51 am
                      (चित्राभार इन्टरनेट)हयात-ए-ग़ज़ल जब उठा की पी,थोड़ी छलकी,तो थोड़ी बचा के पी।मापनी की नापनी भी आज़मा के देखी,मज़ा आया बहुत जब,सब हटा के पी।काफ़िर सी फ़ितरत,फ़कीरी अदाएंये निखरी बहुत जब,सब लुटा के पी।महफ़िल की रौनक ,ना बने,,ना सही,करार आया जब, बत्...
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  April 10, 2018, 5:22 pm
                      (चित्राभार इन्टरनेट)प्राकृतिकता ईश्वर की देन है,और कृत्रिमता मानव की।वह ईश्वर प्रदत्त हर स्वाभाविक वस्तु को अपनी सुविधानुसार काट-छांट कर एक नया रूप दे देता है।      पैरों के नींचे नरम दूब का मखमली एहसास,,,किसको नही प्रिय!!!! तो दीजिए इंसा...
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  April 6, 2018, 11:05 am
                     (चित्राभार इन्टरनेट)एक शेर अर्ज़ है,ग़ज़ल से पहले,,,"ज़िन्दगी की हर शय में छुपी होती है कोई ग़ज़ल, कब अल्फ़ाज़ों में बिखर जाए,और पता भी ना चले।"हौले से सरक जा,ओ बूँद! आखिरी,तू टपक जाए ,और पता भी ना चले।कौन रखता है बूँदों का हिसाब,वो सूख जाए,और पत...
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Tag :भरम
  April 5, 2018, 10:14 am
                    (चित्राभार इन्टरनेट)उरभूमि,,मरूभूमि तो नही थी,,,,कुछ बीज बोए थे अपने हाथों से,,,तो कुछ,,खुद ब खुद उग आए थे,,,शायद चिड़ियों की करतूतया थी गिलहरियों कीउछल-कूद,,,देखते-देखते अंदर,एक जंगल खड़ा था,,,,कहीं ऊचें चिनार,,तो कहीं देवदारों काझुंड बना था,,उनपर लिपटी ...
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  April 3, 2018, 11:10 am
                      (चित्राभार इन्टरनेट)मन का घट खाली पड़ा,पथ पनघट इक ठौर,जो पाटे पथ कंकरी,तृप्त हृदय नहि और।भौतिकता व्याकुल करे,चैन कहीं ना आए,पनघट मोरे राम जी,व्याकुलता मिट जाए।।सब मिल पनघट को चलीं,बतियावैं चित खोल,दुख-सुख कह लेती सभी,पल कितने अनमोल।।पनिया भ...
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Tag :पनघट
  March 31, 2018, 8:14 pm
                      (चित्राभार इन्टरनेट)मन अरावली काबीहड़,,'तुम' छिटके टेसु के'जंगल'मेरी शुष्कता केभूरेपन को,अपनी चटखीलीरंगत से,रंगीन बनाते हुए,,,कटीले मनोभाव,सूखती टहनियों पे,चुभते हुए,,,तप्त अंतस चातक साअधीर,,धूल के, सतहीचक्रवात,,सड़कों पर घूमते से,,तुम्हारी ह...
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Tag :टेसू
  March 30, 2018, 12:19 pm
                       (चित्राभार इंटरनेट)अधर ना डोलेंदो नैना बोलेंभावों के भौंरेंमन कलियां खोलेंप्रेम की वाणीमौन की भाषाभरे भौन बिचपियमन टोहलेंअधर ना डोलेंदो नैना बोलें,,,रात्रि तिमिर मेंजुगनू चमके,जब प्रीतभरे दो,दृग अमृत खोलेंअधर ना डोलेंदो नैना बोलें,,...
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  March 29, 2018, 9:19 am
                      (चित्राभार इन्टरनेट)🌼'पीले लिली'🌼🌿🌿🌿🌿🌿रात भर ओस में भिगी तुम्हारी पंखुड़ियां,,,सूरज की पहली किरण के पड़ते ही,,जैसे धुली-धुली सी,,,ताज़गी से भरपूर दिखती हैं,,,। पत्तों पर अभी भी कुछ बूँदें बिखरी हैं शबनम की,,रात की निशानी सी,,,,,अरूणाई से रौशन चमक ...
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  March 22, 2018, 10:59 am
                        (चित्राभार इन्टरनेट)👶👶#बालकविता👶👶👶ग़ुसलखान कीखिड़की पर,रहती थी साबुनकी बट्टी,,जब जाती दोपहरबाद,मिलती थी वहचट्टी-बट्टी😢रक्खे मिलते गुदड़ीके ढेरकतरन-शतरन,जूट भतेर,,बूझ ना पाती करताकौन,,😰चुपके से घुसता,ना कोई टेर,,ए•सी• के फांकों मेंघु...
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Tag :बालकविता
  March 16, 2018, 1:13 pm
                       (चित्राभार इन्टरनेट)प्रीत हरीतिमा लिएअनोखीसाजन तुम्हरे मन कीगलियां,,,नरम घास का बिछागलिचा,स्नेह भरित जूही कीकलियां,,,बना गिलहरी सामन मेरा,,फुदक रहा हर डालपात पर,,अधिकार समझ मैंफिरूँ निडर सी,,,बैठ शाख पर तोड़ूँफलियां,,,साजन तुम्हरे मन कीगल...
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  March 16, 2018, 10:16 am
                      (चित्राभार इन्टरनेट)रह रह कर यादआ जाते हैं,,,बड़ी ज़ोर-ज़ोर सेपर फड़फड़ाते हैं,,दिल की कैद में बंदकुछ दास्तानी परिन्दे,,क्या करूँ?????आज़ाद कर दूँ????खुले आसमान में उड़ाइन्हे आबाद कर दूँ,,???पर ये जाएगें कहाँ???क्या किसी और केदिल को पिंजरा बनाएगें??फिर थ...
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  March 15, 2018, 7:23 pm
(चित्राभार इन्टरनेट)कल शाम की ही बात है,,, मुझे डाॅक्टर के पास अपनी नियमित जांच के लिए जाना था,।मैं और मेरे पतिदेव कार से घर की तरफ लौट रहे थे।शाम के करीब 7 या7:30 का समय रहा होगा। उस सड़क पर बहुत से ऑफिस,कोचिंग सेन्टर दुकान वगैरह थीं,,कुल मिलाकर चहल-पहल वाला इलाका था।        ...
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  March 14, 2018, 11:30 am
                            (चित्रा मेरे द्वारा☺)सुर्ख रंग तेरा और गहराया,तेरे सुरूर में जब मेरे इश्क़ का ग़ुरूर ठहराया।आंखों की मस्तियाँ, ना कर सकीं पर्दादारी,बहके अल्फ़ाज़ों ने कई बार तेरा नाम दोहराया।हर घूँट में तुझे घोल कर पीते गए,फिर यूँ हुआ के, हर चेहरे ...
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  March 11, 2018, 10:59 pm
                           (चित्राभार इन्टरनेट)ये मेरा ही जलाया अग्नि-कुंड है,,भस्म होने दो मुझेआहिस्ता-आहिस्ता,,,क्या कहूँ,,,,?किससे कहूँ,,,???क्या कोई समझ पाएगा,,,????अहेतुक मेरी ज्वालाकी धधकती आग मेंअपनी कुंठित सोच की रोटियां पकाएगा,,,इसलिए ,,,छोड़ दो मुझे,,,और,,,, जलने द...
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Tag :भस्म
  March 9, 2018, 9:10 am
                     (चित्राभार इन्टरनेट)काव्यसागर     तोअभी     बाधित है,स्व में     हिंडोलताचरम उत्पलावित है।बहेगा तब तट तोड़कर,अभी तो  लहरेंअधीर हैं,चंचल  हैं,अदम्य,परन्तु  भावघनत्व  फकीर   हैं।गुरूत्व का  सामिप्यअभी दूर है,अपनत्वका ...
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Tag :काव्य
  December 18, 2017, 11:45 am
                           (चित्राभार इंटरनेट)पिस रही हूँमैं भी पत्थरोंके बीच पर,हिना सी रंगततो नही देती?ऐ ज़िन्दगी !तू मुझे मेरीमुहब्बत तोनही देती,,,खूँटियों से बाँधदेती है किस्मत,कभी बेखुदी मेंबहक के चलभी दूँ तों,रस्सी की लम्बाईतक भटका करखींच लेती है,जब बे...
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Tag :खूँटियां
  December 18, 2017, 10:30 am
                       (चित्राभार इन्टरनेट)#बालकविताचिड़िया रानी बड़ी सयानीअपने मन की हो तुम रानी।  छोटे छोटे पैरों से तुमफुदक फुदक कर चलती हो।जाँच परख कर अच्छे सेफिर चोंच से दाना चुगती हो।बड़ी गजब की फुर्तिली होचंचल कोमल शर्मिली हो।कभी घास पर कभी डाल परचीं- च...
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Tag :बालकविता
  December 17, 2017, 7:39 pm
                         (चित्राभार इन्टरनेट)दुश्मन के छक्केछुड़ा दिएदंभ के परचमगिरा दिएवीर सपूतों ने हंसकरसीने को ढालबना दिए,,परिवार के ऊपरउन वीरों नेंदेश को सर्वोपरिमाना,,वीर सिपाही रहाडटाजब तक ना बैरीधूल चटाहुँकार भरी टंकारोंसे शत्रु केसीने चीर दिए,,उस ...
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  December 15, 2017, 9:50 am
                       (चित्राभार इन्टरनेट)जब भी बैठती हूँखुद के साथ अपनीहथेलियों को बड़े गौरसे देखती हूँ,,,,आड़ी तिरछी इन लकीरोंमें ना जाने क्या खोजती हूँ,,सिकोड़ कर कुछ गाढ़ीखिंची लकीरों की गहराईनापती हूँ,,,पता नही इन गहराइयों मेंखुद को कहाँ तक डूबादेखती हूँ????स...
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Tag :हाथों की लकीरें
  December 15, 2017, 9:40 am
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