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Blog: GATHRI

Blogger: Guru Ji
1-पत्थर–पत्थर दर्द भरा नदियाँ- नदियाँ प्यासी बादल- बादल   घबराये है मंजिल पर उदासी जल्दी- जल्दी में यह सब हो रहा बारहोंमासी…2-छुट्टे सांड घुमते है साहित्य और स्वर्ग में रौदते है दाम्पत्य भरे पेडों को उन्हें खबर नहीं कैसे कमल खिला था अधजले पानी में,वे तो दिलजले ह... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   12:13pm 9 Dec 2016 #
Blogger: Guru Ji
काश ! मोदी, नीतीश और अखिलेश साथ-साथ होतेपूर्वांचल के पास तीन टिकियाँ का मंगल सूत्र होता और वे इस माटी के हाथ, मुह  होते....फिर न होता कोई दल न होती कोई लीला नेता और कवि तो रिटायर कभी होते नहींयूँ ही ये शेरशाह होते ... यूपी की सूरत निखर रही है रोज –रोज बिहार में न... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   12:02pm 6 Dec 2016 #
Blogger: Guru Ji
एक दिन अचानक आँख खुली तो पाया गायब थे  महुआ,जामुन,गुलर और अमलतास.गुम होने की सुचना थीबरगद पर मडराते गिद्धों की,   खरिहान का पुजवट, बसवारी में का गोहरा और छानी की ओरीयों की.   यह तो पता था कि पंचवर्षीय सूखे के भेट चढ़ गये गढ़ई के मेढक,पर नहर के कतार पर खड़े आम के पेड़ ,स... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   6:44am 3 Dec 2016 #
Blogger: Guru Ji
काली चिड़ियांघूम रही हैकितनो का हकचुग रही हैचिड़ियां  होकर भीचिडियों काजड़ समूल ही लील रही हैसोने की चिड़ियां आयेगीअबतोआश उठरही है .... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   7:41am 18 Nov 2016 #
Blogger: Guru Ji
लाचार कविसोच रहापहले क्या उठाऊंबन्दुककि कलमकि कुदालतभीसरहद ने कायरसाहित्य ने टुच्चा कविअध्यात्म नेअपात्र गृहस्थ कह दियाएक बार कलियुग नेदौड़ाया थाधरती रूपी गाय कोकुछ वैसा ही मंजर है .......... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   12:02pm 16 Nov 2016 #
Blogger: Guru Ji
सियासत नहीं आयेगी मिलने एल ओ सी से....उसे  फुरसत कहाँ दरबार कीकलाबाजियों सेखड़े धान ,पीले हाथ,व्याकुल मन ,खामोश गलियां,बेबश चेहरे ,पसीने का खून,सिसकते आँगन,लथपथ किलकारी,अधजली अगरबत्तियाँ ,कुरान के खुले पन्ने,माँ की लालच मेंठिठके अन्न दाताधन्य पहरुए,सांसों  को खोजने आ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   1:12pm 3 Nov 2016 #
Blogger: Guru Ji
हर फूल खोज रहा हैखुश्बूबाजार में,कुछ काँटों को औरज्यादे तीखापनचाहियें . ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   12:43pm 2 Nov 2016 #
Blogger: Guru Ji
गाँव ..गाँव नहींअब गोल बन गए है,ऐसा चढ़ा सत्ता काजहर कि राजनेतिअब हर चेहरे काखोल बन गये है ,मुअनी-जियनी,खेलल-गावलउठल-बईठल सबका अब अपनाभूगोल बन गये है .... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   11:53am 2 Nov 2016 #
Blogger: Guru Ji
गूगल जीवनगूगल साथीबे रंग हो गएसपने सारेकैसा दिया कैसी बातीमन की खुजलीबहुत रुलातीतन का पीपलरोज सूखतारिश्ते सब हो गए बरसातीउडती  तितलीबहता पछुआ कौन नज़ारेकैसा बादलरोज सुबेरे तलहटी मेंगुजती है हल्दीघाटीभरा कटोरा खाली दिल हैगाँधी बने की मांझीइस चक्कर में हो गए मा... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   12:28pm 1 Nov 2016 #
Blogger: Guru Ji
आज फिर वादियों में कुछ  फूलो कोजला दिया गयाआज फिर एक मौत पर नारे लगेकुछ खुशबुए सियासत की भेटचढ गईआस्तीन के सापों ने किया ऐसा कमालआज फिर कुछ सासेथमा दी गई आज फिर मजलूमो ने भेजी है तालीमके हवाले से अर्जियाकहते है सब्सिडी के सामान के बदलेदे दो खुला आकाश मनुष्यों की इस ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   5:19am 1 Nov 2016 #
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