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Blog: इन्द्रधनुष

Blogger: Rajeev Bharol
प्यार के मौसम में हम बस प्यार की बातें करेंगेरात भर ग़ज़लों की और अशआर की बातें करेंगेइश्क़ के दरिया में आकर साहिलों की बात क्यों होअब तो हम लहरों की और मझधार की बातें करेंगेहोश ज़ब्तो सब्र जिम्मेदारियां रस्मो रवायतअक्ल वाले फिर वही बेकार की बातें करेंगेअहले दिल बातें क... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   5:02am 14 Dec 2018 #
Blogger: Rajeev Bharol
तेरा ऐ ज़िन्दगी हम साथ देंगेकि जब तक ले सकेंगे सांस लेंगेकिसे कल की ख़बर पर हम तुम्हारा जहां तक हो सकेगा साथ देंगेये दिल के घाव अपनों ने दिये हैंकिसे मालूम ये कब तक भरेंगेपपीहे तेरे दुख का गीत, बादल सुनेंगे देखना इक दिन सुनेंगे ये सोचा ही नहीं हमने कि तुम बिन अगर जीना हुआ क... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   10:35am 18 Nov 2018 #
Blogger: Rajeev Bharol
पुराने दोस्तों की मेज़बानी याद आयेगीतुम्हें महलों में भी बस्ती पुरानी याद आयेगीवो फुर्सत की दुपहरी और वो फरमाइशी नगमेतुम्हें परदेस में आकाशवाणी याद आएगीसमंदर का सुकूं बेचैन कर देगा तुम्हें जिस दिननदी की शोख लहरों की रवानी याद आएगीफकीरी सल्त्नत है हम फकीरों की तुम्... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   6:01am 1 Mar 2018 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
आपकी इमदाद कर सकता हूँ मैं    (इमदाद = सहायता, मदद)अपने पर खुद भी क़तर सकता हूँ मैंजिस्म ही थोड़ी हूँ मैं इक सोच हूँगर्क हो कर भी उभर सकता हूँ मैंइक फकत कच्चे घड़े के साथ भीपार दरिया के उतर सकता हूँ मैंबाँध कर मुट्ठी में रखियेगा मुझेखोल दोगे तो बिखर सकता हूँ मैंकह तो पाऊँ... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   3:58am 31 Aug 2015 #
Blogger: Rajeev Bharol
दीपावली के अवसर पर श्री पंकज सुबीर जी द्वारा आयोजित, तरही मुशायरे में कही गई मेरी यह ग़ज़ल, आप सब की नज्र: उसे उसी की ये कड़वी दवा पिलाते हैं,चल आइने को ज़रा आइना दिखाते हैं.गुज़र तो जाते हैं बादल ग़मों के भी लेकिन,हसीन चेहरों पे आज़ार छोड़ जाते हैं.(आज़ार = दर्द/तकलीफ़)खुद अपने ज़र्फ़ प... Read more
clicks 194 View   Vote 1 Like   10:31am 10 Nov 2014 #
Blogger: Rajeev Bharol
मुख़्तसर सी एक पुरानी ग़ज़ल आपकी समाअतों की नज्र..वतन, गाँव, घर याद आते बहुत थेमगर फिर भी हम मुस्कुराते बहुत थेमेरे क़त्ल का शक गया दोस्तों परवही मेरे घर आते जाते बहुत थेसराबों को वो सामने रख के अक्सरमेरी तिश्नगी आज़माते बहुत थे(सराब=मृगतृष्णा, तिश्नगी=प्यास)हम अपने ही घर ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   9:34pm 7 Aug 2014 #
Blogger: Rajeev Bharol
प्यास का कोई यहाँ हल नहीं होने वालासहरा सहरा है ये बादल नहीं होने वाला(सहरा = रेगिस्तान)सायबाँ होंगे कई मेरे सफ़र में लेकिनकोई साया तिरा आँचल नहीं होने वाला(सायबाँ=छाया देने वाले)इश्क़ के दावे मुहब्बत की नुमाइश होगीकैस जैसा कोई पागल नहीं होने वाला(कैस=मजनू का असली नाम)मु... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   7:09am 25 Jan 2014 #
Blogger: Rajeev Bharol
जुनूने शौक़ अगर है तो हिचकिचाना क्याउतरना पार या कश्ती का डूब जाना क्या(जुनूने शौक़ = कुछ प्राप्त करने का पागलपन)हमारे बिन भी वही कहकहे हैं महफ़िल मेंहमारा लौट के आना या उठ के जाना क्यायही कहा है सभी से कि ख़ैरियत से हूँअब अपना हाल हर इक शख्स को सुनाना क्यादिखाने को तो दिखा द... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   7:07am 24 Dec 2013 #
Blogger: Rajeev Bharol
बतला रहा हूँ यूं तो मैं सब कुछ सही सहीतफ़सीले-वाक़यात मगर फिर कभी सही( तफ़सीले-वाक़यात = Details of the events)उसने कबूतरों को भी आज़ाद कर दियाख़त की उमीद छोड़ दी मैंने रही सहीवैसे तो कहने सुनने को कुछ भी नहीं मगरमिल ही गये हैं आज तो कुछ बात ही सहीउसके भी ज़ब्तो-सब्र का कुछ एहतराम करजिसने तमाम ... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   4:22am 24 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Bharol
आईना ही जब झूठा हो जाता है.तब सच कहने से भी क्या हो जाता है.अम्न की बातें इस माहौल में मत कीजे,ऐसी बातों पे झगड़ा हो जाता है!आँगन में इतनी बारिश भी ठीक नहीं,पाँव फिसलने का खतरा हो जाता है.मिलना जुलना कम ही होता है उनसे,बात हुए भी इक अरसा हो जाता है.आओ थोड़ा झगड़ें, कुछ तकरार करें,... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   7:11am 22 Oct 2013 #
Blogger: Rajeev Bharol
यहीं, बीवी बच्चों में, घरबार में,मैं उलझा रहा अपने किरदार में.जो 'कुछ-लोग'चाहेंगे, होगा वही,छपेगा वही कल के अखबार में.अँधेरों से सूरज के घर का पता,यूं ही पूछ बैठा मैं बेकार में.अजी छोड़िये बातें ईमान कीं,हरिक चीज़ बिकती है बाज़ार में.ख़ुशी ढूँढता है ये नादान मन,कभी नफ़रतों ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   7:49am 23 Sep 2013 #
Blogger: Rajeev Bharol
देखा जाए तो भला चाहती है,मेरी बीमारी दवा चाहती है.खुद से बेज़ार हुआ चाहती है,तीरगी एक दिया चाहती है.(तीरगी = अँधेरा, बेज़ार = Dissatisfied)कितनी आसाँ है हयात उनके लिए, जिन चरागों को हवा चाहती है(हयात = ज़िन्दगी)डांटती है भी, तो अच्छे के लिए,माँ है, वो थोड़ी बुरा चाहती है.फिर से बहनों के पुर... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   7:27am 25 Aug 2013 #
Blogger: Rajeev Bharol
कब मुझे रास्ता दिखाती है,रौशनी यूं ही बरगलाती है.शाम ढलते ही लौट जाती है,वैसे इस घर में धूप आती है.अक्ल, बेअक्ल इस कदर भी नहीं,फिर भी अक्सर फरेब खाती है.जाने क्या चाहती है याद उसकी,पास आती है, लौट जाती है.रब्त हमको है इस ज़मीं से, हमें,इस ज़मीं पर ही नींद आती है.मांगता हूँ मैं खु... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   6:25am 25 Jul 2013 #
Blogger: Rajeev Bharol
श्री पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर आयोजित होली के तरही मुशायरे में कही गई गज़ल पेश है...आँखों में थे सितारे, हर ख़ाब था गुलाबी,उस उम्र में था मेरा हर फलसफा गुलाबी.मौसम शरारती है मेरी निगाहों जैसा,है हर गुलाब तेरे, रुखसार सा गुलाबी.फूलों को बादलों को, हो क्यों न रश्क आखिर,गेसू घटा... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:26am 3 Jul 2013 #
Blogger: Rajeev Bharol
मित्रगण, श्री पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर आयोजित नववर्ष के तरही मुशायरे में पिछले वर्ष कही गई गज़ल पेश है...नई सोच हो नया आसमां, नए हौसलों की उमंग हो,नए साल में नए गुल खिलें, नई हो महक नया रंग हो.मेरे दर पे आये फ़कीर को मेरी झोंपड़ी से न कुछ मिले,मेरा हाथ ऐ मेरे आसमां कभी इस कदर भी न... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   10:34am 31 Dec 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
समाअतों का यहाँ सिलसिला तो हो कोई,चलो गिला ही सही, इब्तिदा तो हो कोई.है इंकलाब ही इस दौर की ज़रूरत अब,पर इन्कलाब यहाँ चाहता तो हो कोई.मैं आसमान उसे कह भी दूं मगर उसका,बुलंदियों से कहीं वास्ता तो हो कोई.मिलेगी तुमको भी सरकार से मदद लेकिन,तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई.च... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   8:10am 27 Jul 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
तेरी खुशबू फिज़ाओं में बिखर जाए तो अच्छा हो, कोई झोंका तुझे छू कर गुज़र जाए तो अच्छा हो.कई दिन से तसव्वुर आपका मेहमां है इस दिल में,ये मेहमाँ और थोड़े दिन ठहर जाए तो अच्छा हो.सफर की मुश्किलों का यूं तो कुछ शिकवा नहीं फिर भी,मेरी मंजिल का हर रास्ता संवर जाए तो अच्छा हो.कफस में ह... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   9:34am 9 Jun 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
हैरान है दरिया ये मंज़र देख कर,अपनी तरफ आता समंदर देख कर.अमनो अमां पर हो रही हैं बैठकें,बच्चे बहुत खुश हैं कबूतर देख कर.गुज़रा हुआ इक हादसा याद आ गया,फिर से उन्हीं हाथों में खंजर देख कर.अबके बरस बादल भी पछताए बहुत,सैलाब में डूबे हुए घर देख कर.पंछी बिना दाना चुगे ही उड़ गए,आँगन ... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   8:44am 9 Apr 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
इस वर्ष दीपावली के अवसर पर श्री पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर आयोजित तरही मुशायरे में कही गई मेरी गज़ल पेश-ए-खिदमत है. तरही मिसरा था "दीप खुशियों के जल उठे हर सू". समाअत फरमाएं.मैंने चाहा था सच दिखे हर सू,उसने आईने रख दिए हर सू.ख्वाहिशों को हवस के सहरा में,धूप के काफिले मिले हर सू.... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   8:27am 29 Nov 2011 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
कहीं चौखट कहीं छप्पर नहीं है,यहाँ कोई मुकम्मल घर नहीं है.सुकूँ से पाँव फैलाऊं तो कैसे,मेरी इतनी बड़ी चादर नहीं है.अना के दायरे में जीते रहना,किसी भी कैद से कमतर नहीं है.मैं मुद्दत बाद तुमसे मिल रहा हूँ,खुशी से आँख फिर क्यों तर नहीं है?नज़र डाली तो है उसने इधर भी,मगर उसकी नज़र ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:37am 12 Sep 2011 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
बुलंदियों से हमें यूँ तो डर नहीं लगता पर आसमां पे बना घर भीघर नहीं लगता.मैं उनके सामने सच बात कह तो देता हूँ,मेरा कहा उन्हें अच्छा मगर नहीं लगता.झुका के सर को अगर उसके दर पे जाते तो,तुम्हारा इस तरह चौखट से सर नहीं लगता.फलों से खूब लदा पेड़ है यकीनन वो,मगर जो छांव दे, ऐसा शजर* ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   5:11am 1 Aug 2011 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
जहाँ कहीं हमें दाने दिखाई देते हैं,वहीँ पे जाल भी फैले दिखाई देते हैं.मैं कैसे मान लूं बादल यहाँ भी बरसा है,यहाँ तो सब मुझे प्यासे दिखाई देते हैं.तुम्हारा दर्द भी तुमसा ही बेवफा निकला,हमारे ज़ख्म तो भरते दिखाई देते हैं. कभी तो चाँद को मेरी नज़र से भी देखो,नहीं दिखेंगे जो धब... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   7:43am 25 Jun 2011 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
मुहब्बत का कभी इज़हार करना ही नहीं आया,मेरी कश्ती को दरिया पार करना ही नहीं आया.जिसे जो चाहिए था तोड़ कर वो ले गया उनसे,दरख्तों को कभी इनकार करना ही नहीं आया.हमारे दोस्तों ने हाथ में खंजर थमाया भी,मगर दुश्मन पे हमको वार करना ही नहीं आया.इधर नज़रें मिलीं और तुम उधर दिल हार भी ब... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   7:13am 25 May 2011 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
तुम्हारी सोच के सांचे में ढल भी सकता था,वो आदमी ही था इक दिन बदल भी सकता था.हमारा एक ही रस्ता था एक ही मंजिल,वो चाहता तो मेरे साथ चल भी सकता था.ज़मीर की सभी बातें जो मानने लगते,हमारे हाथ से मौका निकल भी सकता था.लहू था सर्द वहाँ पर सभी का मुद्दत से,अगर तुम आंच दिखाते उबल भी सकता ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:17am 7 May 2011 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol
पड़ा हुआ जो ये पानी में जाल है साहब,यकीन जानिये दरिया की चाल है साहब.खिलाफ ज़ुल्म के गुस्सा है जो ये लोगों में,ज़रा सी देर का केवल उबाल है साहब.हरेक बात पे रो रो के बात मनवाना,ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब.सुकूने दिल से है दौलत का वैर जग ज़ाहिर,अमीर है वो मगर ख़स्ताहालहै साह... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:09am 9 Mar 2011 #ग़ज़ल
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