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Blog: उन्मुक्त उडान

Blogger: Rinki Raut
देश में चुनाव का दौर चल रहा हैl सभी राजनीतिक पार्टी अपने- अपने दाव-पेच में लगी है,सिर्फ दो तरह के ही काम किए जा रहे हैl एक विपक्ष की आलोचना और दूसरा झूठे वादे करना, आजाद भारत में चुनाव के समय यही चीज़ हर पार्टी को एक दुसरे से जोडती हैl “झूठे वादे और आलोचना” सभी राजनीतिक पार्टी... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   6:43pm 23 May 2016 #
Blogger: Rinki Raut
पीने से कोई सवाल हल नहीं होताऔर ना पीने से भी मेरा कोई सवाल हल नहीं हुआपीते-पीते मैं पूरी रात पी गयारात का खोखलापन, शराब का खालीपन सब पी गयानशा पर रति भर नहीं चढ़ाभूली हुई बात, रिश्ता और साथसब एक साथ पी गयापर मेरे कोई सवाल हल नहीं हुआइधर शराब की बोतल खाली हो रही थीउधर दिमाग ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   7:36am 22 May 2016 #
Blogger: Rinki Raut
 वो खाली पेट भटक रहाबंजर पड़ी ज़मीन कोतरही नज़र से ताक रहारोज़ सोचता गाँव छोड़ेशहर की तरफ खुद को मोडवो देश का अनंदाता हैभूखे पेट रोज़ सो जाता हैपेट की तपती आग जब शरीरको तोड़ जाती हैउसके बच्चो के पेट और पीठ का फर्क मिट जाता हैईट दर ईट जब बिक जाती हैवो देश का अनंदाता हैखून के आंस... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   12:00pm 12 Apr 2016 #
Blogger: Rinki Raut
शिकायत साँझ ने कुछ ऐसे कीजैसा कोई रूठा दोस्त शिकायत कर रहा होकहा की मुझे भूल गया तूसुबह से रात तक जगताखून पसीना बहाकागज़ जोड़ रहाआज हाथ थाम उसने लिया बैठाउस गाँव मे जिसे बहुत पहले अकेला छोड़ आया था मैं तनहा,शाम ने धुंध को लपेटे हुए पूछा उस शहर में ऐसा क्या पायातूने जो अपनी ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   7:21pm 20 Feb 2016 #
Blogger: Rinki Raut
देश में असहिष्णुता का मुदा आग की तरह लगी और बिना बुझाए बुझ भी गई, अब आगे का काम बुद्धिगीवी लोगो का है की वो सोचते रहे की असहिष्णुता के नाम पर देश में क्यों इतना शोर मचाIहम आम जनता के पास बहुत काम है,जैसे दाल,पेट्रोल और नई सिनेमा पर चर्चा करना आदिI फिर भी अपने विचार रखने में क... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   10:45am 5 Jan 2016 #
Blogger: Rinki Raut
‘जेब’ यानि पॉकेट यानि पैसा, ताकत संसाधन जुटाने और बाज़ार को खरीदने की ताकत पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान समाज में ‘ जेब’ शर्ट और पैंट में पाए जाते हैI जो महिलाए शर्ट और पैंट पहनती भी है, वो पैसे जेब में न रखकर पर्स में रखती है, पारंपरिक परिधान जैसे साड़ी, सलवार-कमीज़ में जेब नह... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   9:37am 30 Dec 2015 #
Blogger: Rinki Raut
मेरे सिरहाने रहकर भी मुझसे रूठी है किताबेकुछ टेबल पर,कुछ पलंगनीचे जा छुपीआधी पढ़ी, आधी बाकीकोने में रखी किताबेहमेश पढ़ी जाने के इंतजार मेंअलमीरा में सजी किताबेख़ामोशी से जिंदगी का साथ निभातीमेरी दोस्त किताबे..Rinki... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   10:05am 25 Dec 2015 #
Blogger: Rinki Raut
कही किसी ने धर्म पर अपनी राय दी मानवता की मर्यादा को तोड़ता हुआअसंवेदनशील टिप्पणीकही किसी ने खेल खेलाऐसा शतरंज का खेल जिसेखेलता कोई है पर मरते बस मोहरे हैमेरे शहर के मोहरे भीखबर सुन सक्रिय हो गएजुलुस निकला, नारा लगेशहर आतंक में डूब गयाहर इन्सान डरा थाआतंक चेहरे पर पसर... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   5:24pm 15 Dec 2015 #
Blogger: Rinki Raut
ये सवाल जो पीछा करता हैहर मोड़ पर पूछा करता हैतू कौन?तू कौन है?मैं हूँ वो हमेशा हसंता हूँपुरषार्थ पर यकीन करता हूँसमय पर जगतासमय पर सोता हूँनियम पर ही चलता हूँसमाज ही मेरा धर्म हैरिवाज ही मेरा कर्म हैवो बोले जो मैं सुनता हूँउनकी कही मैं करता हूँमैं आदम हूँमैं आदम हूँफिर ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   9:31am 8 Dec 2015 #
Blogger: Rinki Raut
ठण्ड में शाम जल्दी ही रात का कंबलओढ़े लेती हैसूरज भी अपने आप को स्वेटर में लपेट लेता हैहम भी आग से चिपक करगरमाहट को महशूस करते हैठण्ड की सुबह-शाम अलसाई सी नज़र आती हैदोपहर की धूप पूछो मत महबूबा सी नज़र आती हैबैठ साथ उसके दिन पलभर में गुजर जाता हैफिर शाम जल्दी से रात का कंबलओ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   8:05am 4 Dec 2015 #
Blogger: Rinki Raut
चाहे कितना भी भर लोअपनी सोच से ज्यदापहुँच से ऊपरढेर लगा लो पैसे काजाल बिछा लो रिस्तो काजितना हो सके खरीद लोछल लो किसी को प्यार के नाम सेखुद को बंद कर लोखुशी नाम के संदूक मेंचाहे कुछ भी कर लोजीत नहीं पाओगेभीतर के सूनेपन कोआकाश से कम है तुम्हारे पासन कोई मुकाबला, न कोई मे... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   6:46am 30 Nov 2015 #
Blogger: Rinki Raut
गुलज़ार कहते हैखुशी फूलझड़ी सी होती हैरोशनी बिखरती झट से खत्म हो जाती हैदर्द देर तक महकता हैभीतर ही भीतर सुलगता हैउसकी खुशबू जेहन में देरतक रहती हैख़ुशी को भी हम दर्द भर कर अहा से याद करते हैक्योंकि दर्द ही देर तक ठहरता हैदर्द यादों में जम जाता हैपिघलता है आंसू बनकभी हंस... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   11:30am 24 Nov 2015 #
Blogger: Rinki Raut
बाल दिवस के मेले मेंहर बाल कन्हिया बन नाच रहाहर बालिका मलाला बन कर अपने अधिकारों पर बात रख रही हर बच्चा कलाम सा दिख रहाहर के चहरे पर प्रतिभा का नूर बिखर रहावो जो लड़का खड़ा है एक कोने मेंबस रंग-बिरंगे गुबारे को देख रहालाल उसे लड्डू सा नज़र आ रहाहरा रंग के चप्पल का जाने कब से ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   3:17pm 14 Nov 2015 #
Blogger: Rinki Raut
कुम्हार चाक चलता हुए सोचताकितना बिक पाएगा दीया इस बारबिजली के बल्ब और मोमबती के बीचक्या कही टिक पाएगामिट्टी का दिया इस बारमिठाई आती है अब दुकानों सेपहले जैसा कहा मानता अब त्यौहार सस्ती चीजों से पटा है बाज़ार पल्स्टिक से बने सामानबिगाड़ रहे गरीब कलाकारों का त्यौहारक्... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   12:30pm 8 Nov 2015 #
Blogger: Rinki Raut
बार-बार जलाने के बाद भीरावण साल दर साल विशालकाय और विकराल रूप धारणकरता रहाना रावण को जलानेवाला हारेना ही रावण हारासिलसिला सदियों तक चलता रहारावण को जलानेवाले खुश है कीअपने से सौ गुना विशालकायरावण को हर बार जला ही देते हैरावण उनसे ज्यदा खुश हैजाने कब से जला रहे है फिर ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   6:58am 2 Nov 2015 #
Blogger: Rinki Raut
पहली ठोकर ने मुह के बल गिरायादर्द पुराना होने तक महसूस कियादूसरी ठोकर ने सर खोल कर रखा दियाहोश आने तक जिंदगी हवा हो गई थीतीसरी ठोकर ने आत्मा को रुला दियादुबारा न गिराने का इरादा करसोचा पत्थर ही हटा देपत्थर को जो  देखादिल ने कहा, चलो फिरठोकर खाते हैक्योंकि उस पत्थर का ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:39am 29 Oct 2015 #
Blogger: Rinki Raut
प्यार होने या न होने मेफर्क बस इतना थाजब वो था तो,मैं नहीं थाजब मैं था वो नहीं प्यार के देहलीज के लकीर परहम दोनों खड़े रहेसुबह से शाम तक परछाई बदलीहम खड़े रहे ठुठे पेड़ की तरहमौसम बदले हम खड़े रहेसमाज की तरफ मुह कियाबस उनकी सहमति के लिएआज हम दोनों खड़े है आमने-सामने अजनबी सा च... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   9:44am 13 Oct 2015 #
Blogger: Rinki Raut
लेटा था मैं समुंद्र किनारेलोगदौड़े-दौड़े आएमर गया ये तो..किसी ने कहाकितना सुन्दर बच्चा था..दुसरे ने कहामैं शांत लेटारहा समुंद किनारेशरणार्थी लगता हैडूब कर मर गयाएक रोशनी चमकीकिसी ने फोटो लियाकिसी ने लेख लिख दियामेरी कहानी सात समन्दर पर तक गईहंगामा ही हंगमा मचामैं फिर ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   4:47pm 11 Oct 2015 #
Blogger: Rinki Raut
सूरज की गरम रोशनीहवा का अपनापनफूलो की खुशबू का साथसब पहले जैसा हैकुछ तो खत्म नहीं हुआ बिखरे सपनों की आंचसूखे कुएं सी प्यासठण्ड में ठिठुरती हंसीरात में चांदनी सा जगता प्यारखत्म होने सा सवाल ही नहीं बनतातो तुम्हे क्यूँ लगता हैतुम्हारा जाना मेरे सब कुछ खत्म कर सकता हैत... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   2:48pm 6 Oct 2015 #
Blogger: Rinki Raut
कहत कबीर प्रेम जैसे लम्बा पेड़ खजूरचढ़े तो प्रेम रस मिले गिरे तो चकनाचूरप्रेम जैसे अग्नि परीक्षाजो पार न किया तो खाकपार कर जाने पर भी वनवासप्रेम धागा कच्चा सापिरोए मोती तो टूट जाएबधे कलाई पर तोअटूट विश्वास सा बंध जाएबसे पिया नयन में ऐसेउसमे कोई कहा समाएप्रेम जैसे गीत ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:42pm 4 Aug 2015 #
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