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Blog: आत्महंता

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पाठकों की आश्वस्ति के लिए मैं यह हलफनामा नहीं दे सकता कि कहानी के पात्र, घटनाक्रम, स्थान आदि काल्पनिक हैं। किसी भी तरह के मेल को मैं स्थितियों का संयोग नहीं ठहरा रहा। इसके बाद आपकी मर्जी, इसे कहानी मानें या ना मानें ! - लेखकधूल-धूप का चोली-दामन और बारिश की याद में सना हु... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   8:14pm 9 Jan 2013 #
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पाठकों की आश्वस्ति के लिए मैं यह हलफनामा नहीं दे सकता कि कहानी के पात्र, घटनाक्रम, स्थान आदि काल्पनिक हैं। किसी भी तरह के मेल को मैं स्थितियों का संयोग नहीं ठहरा रहा। इसके बाद आपकी मर्जी, इसे कहानी मानें या ना मानें ! - लेखकधूल-धूप का चोली-दामन और बारिश की याद में सना हु... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   8:02pm 9 Jan 2013 #
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                              पराई मिट्टी का हिंदी प्रेमहिंदी फैली या सहज हुई है तो स्वाभाविक स्थिति के कारण नहीं, संकट के कारण, पलायन के कारण, बोलियों की ताकत और सौंदर्य के कारण, दीनता के कारण। हिंदी प्रदेशों के अविकास ने महानगरों को सस्ते में मजदूर, नौकर, चपरासी, पहरेदार, रिक्... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   3:35pm 14 Oct 2012 #
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गत दिनों दैनिक भास्कर के धनबाद संस्करण के डीबी स्टार (19 अगस्त 2012, रविवार) की कवर स्टोरी धनबाद के ब्लॉगरों पर केंद्रित थी। उसमें आपके ब्लॉग आत्महंता का भी जिक्र था। रिपोर्टर सदफ नाज की यह स्टोरी जितनी अपने शीर्षक से विषय को फोकस कर रही थी, उतनी व्यौरे और प्रकृति में नहीं। ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   10:54am 4 Sep 2012 #
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गत दिनों दैनिक भास्कर के धनबाद संस्करण के डीबी स्टार (19 अगस्त 2012, रविवार) की कवर स्टोरी धनबाद के ब्लॉगरों पर केंद्रित थी। उसमें आपके ब्लॉग आत्महंता का भी जिक्र था। रिपोर्टर सदफ नाज की यह स्टोरी जितनी अपने शीर्षक से विषय को फोकस कर रही थी, उतनी व्यौरे और प्रकृति में नहीं। ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   10:52am 4 Sep 2012 #
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ग्लैड्सन डुंगडुंग(“उलगुलान का सौदा”नाम की किताब से चर्चित हुए ग्लैड्सन डुंगडुंग की कहानी से जनजातीय उत्पीड़न और विस्थापन का दर्द जाना जा सकता है। आवारा राजनीति और निर्बंध विकास के गल्ले से विस्थापन की पीड़ा नहीं सुनी जा सकती है। इसे विस्थापन के खिलाफ लड़नेवालों स... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   9:37am 20 Jul 2012 #
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                सूफी गायक की कबीर की अनूठी प्रस्तुतिबाजारवाद की सहूलियतों ने कई तरह से दौर को रिझाकर अंधा किया है। उसकी हसीन गोद में बैठकर मीडिया से ले लेकर राजनीति, विज्ञान से लेकर संस्कृति तक सभी अपने को धन्य मान रहे हैं। यह नए तरह का रीतिकाल है। सभी पैबस्त हैं किसी न किसी फ... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   1:54pm 9 Mar 2012 #
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       पल रहा है विकास का कीटनाशक सिद्धांतसन दो हजार के नवंबर में जब तीन नए राज्य बने तो उनमें से झारखंड शायद एकमात्र राज्य था जहां किसी मुल्क से आजाद होने जैसा उल्लास था और उम्मीदों के पुल कुछ उसी तरह बांधे जा रहे थे जैसे कि भारत में सुराज से बांधे गए थे। उन तीनों मे से उत्... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   12:31pm 26 Feb 2012 #
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ग्लैड्सन डुंगडुंग(“उलगुलान का सौदा”नाम की किताब से चर्चित हुए ग्लैड्सन डुंगडुंग की कहानी से जनजातीय उत्पीड़न और विस्थापन का दर्द जाना जा सकता है। आवारा राजनीति और निर्बंध विकास के गल्ले से विस्थापन की पीड़ा नहीं सुनी जा सकती है। इसे विस्थापन के खिलाफ लड़नेवालों से... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   6:29pm 20 Feb 2012 #
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फेसबुक पर अपनी टिप्पणी के कारण अरुण नारायण के निलंबन परदेश को नए बिहार से रू ब रू कराने के लिए धन्यवाद, नीतीश जी ! आपका यह बिहार होर्डिंगों व अखबारों में जगरमगर करता है। कौन नहीं जानता कि आउटडोर मीडिया (होर्डिंग, बैनर) व प्रिंट मीडिया (अखबार-पत्रिका) से झल्लाई जनता ने इन ह... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   11:44am 21 Sep 2011 #
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(उदय प्रकाश के ब्लाग पर 22 जुलाई के पोस्ट "लेखक भाषा का आदिवासी है" को पढ़कर लिखा गया। दरअसल यह साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए स्वीकार वक्तव्य था। यह पोस्ट उनके ब्लाग पर 24 अगस्त को किया था।)पहले तो यह कह दूं कि मैं जिस उदय प्रकाश को जानता हूं वह अबूतर-कबूतर से शुरू होता है, ज... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   8:42am 2 Sep 2011 #
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लड़कीजैसे हम अपने तलुए देखते हैं उसकी जांघें सहलाते हैं नितम्बों को थपथपाते हैं खुले में अपने स्तन के घाव का दर्दउसकी आँखों में दिखना तो दूर पीठ के खरोंच तक नहीं देख सकती खुले में यह सोचकर वह सिहर उठती है वह क्योंकि वह मल्लिका शेरावत और राखी सावन्त नहीं अपनी पीठ की खरो... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   11:18am 2 Aug 2011 #
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अन्ना के लिए अब चौकन्नेपन की जरूरतआंदोलन का खर्च कहां से आया, जांच हो : दिग्विजय सिंहकेवल लोकपाल से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा। - कपिल सिब्बल, केंद्रीय मंत्रीजितनी मर्जी हो लोकपाल बना लो भ्रष्टाचार बिल्कुल ही नहीं समाप्त होगा। जिसने भूख हड़ताल की है चाहे उसे लोकपाल ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   10:08am 13 Apr 2011 #
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    लाहेरजारा गांव पृष्ठभूमि में  बोड़ा पहाड़   तथा गोय नदी।         लाहेरजारा गांव, एक विहंगम दृश्य         ग्रामीणों के बीच     पिछले दिनों झारखंड के बोकारो जिला के कसमार प्रखंड का लगातार दौरा करने का मौका आया। जिला   का सर्वाधिक गरीब प्रखंड, पर संसाधनों को लेकर अति सजग। स... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   7:10am 13 Apr 2011 #
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रामदेव विश्वबंधु (दलित विमर्श, पंचायती राज व चुनाव सुधार के लिए फकीराना अंदाज में यायावर बने फिरनेवाले रामदेव जी लगातार अपने निजी जीवन को असहाय करने में लगे हैं। देश भर में घूम-घूम कर मंचों-अभियानों में शिरकत से उनका जी नहीं भरता। फिलहाल विश्वबंधु ग्राम स्वराज अभिया... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   10:34am 31 Mar 2011 #
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पुष्पराज(एक हैं पुष्पराज। जेएनयू में प्रो. रह चुके प्रो. ईश्वरी प्रसाद की उधारी से कहें तो घुमंतू पत्रकार। कुलदीप नैयर उन्हें प्रतिबद्धता और साहस से भरा मानते हैं तो प्रभाष जोशी उन्हें पत्रकारिता को सामाजिक बदलाव की दुधारी तलवार माननेवाले पत्रकारों की खत्म हो रही प... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   9:24am 31 Mar 2011 #
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ग्लोबल हो रही दुनिया में बाजार एमएनसी से पटते जा रहे हैं तो दूसरी ओर सहुलियत के जाल में लिपटे बाजार की नई-नई मोहक-हसीन अधीनताएं अस्मिताओं को निगलती जा रही है। बड़ी अर्थव्यवस्थाएं विकासशीलों को इस कदर लाचार कर दे रही हैं कि उनकी अस्मिताएं खुद ब खुद विलीन होती जाएंगी। ब... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   5:03am 20 Mar 2011 #
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यह मुल्क कब आजाद हुआ ? कोई बच्चा इसका उत्तर नहीं दे तो कहेंगे कि वह अभी बड़ा नहीं हुआ। किशोर जब इसका उत्तर नहीं दे तो कहते हैं कि उसका जीके अभी कमजोर है। कोई युवक इस सवाल पर चुप रहे तो कहेंगे कि उसे देश-दुनिया की खबर ही नहीं, तो कौन सी जिम्मेवारी के प्रति वह इंसाफ करेगा। और ज... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   12:15pm 4 Mar 2011 #
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बाबरी मस्जिद मामले में मालिकाने को लेकर आये फैसले पर एक नज़्म...मुकुल सरलदिल तो टूटा है बारहा लेकिनएक भरोसा था वो भी टूट गयाकिससे शिकवा करें, शिकायत हमजबकि मुंसिफ ही हमको लूट गयाज़लज़ला याद दिसंबर का हमें गिर पड़े थे जम्हूरियत के सुतून इंतज़ामिया, एसेंबली सब कुछफिर भ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   9:47am 26 Nov 2010 #
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(देश भर में औद्योगीकरण के नाम पर विस्थापन का जो खेल चल रहा है, नर्मदा, सिंगूर व नंदीग्राम उसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इस क्रम में भरी-पूरी आबादी को अमानवीय उत्पीड़न से गुजरना पड़ रह है। मानवता के नाते और भावी चुनौतियों के बरक्स विस्थापित हो रहे लाचार लोगों के दर्द को सुनना-... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   10:49am 22 Nov 2010 #
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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