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कारवॉं karvaan

1990में मैं पटना आ गया था सहरसा से। लेखकों से मिलना जुलना , गोष्ठियों आदि का दौर आरंभ था। अरूण कमल, आलोक धन्‍वा, नंदकिशोर नवल,खगेंद्र ठाकुर, भृगुनंदन त्रिपाठी, मदन कश्‍यप, कर्मेंदु शिशिर,प्रेम कुमार मणि आदि पटना के सक्रिय लेखकों के घर आना जाना आरंभ हो चुका था। नवतुरिया लेख...
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कुमार मुकुल
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  April 23, 2019, 12:25 pm
तो भैया अब और कितना डिजि टल-मल विकास चाहते हैं। धरती पर 'स्‍वच्‍छ भारत'चलाते-चलाते हमने अंतरिक्ष में कचरा फैलाने की क्षमता हासिल कर ली है। मिशन शक्ति पर नासा का प्रहार अमेरिकी दुष्‍प्रचार और प्रोपे गैंडा है। भाई यह अमेरिकी गैंडा तो बड़ा खतरनाक लग रहा। अब अपने मोदी जी क...
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कुमार मुकुल
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  April 3, 2019, 3:00 pm
ऐसा कुछ नहीं है। यह मान्‍यता है बस।वैदिक समय में जो ब्रहृम का चिंतन करते थे यानि यह सोचते थे कि यह दुनिया किसने बनायी या यह अस्ति‍तव में कैसे आयी, उन्‍हें ब्राहृमण कहा जाने लगा। वे पढने लिखने का काम करते थे इसलिए उनको मान मिला। जो भी पढते लिखते थे वे ब्रहमण कहे गये न कि क...
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कुमार मुकुल
Tag :महाभारत
  April 1, 2019, 11:08 am
जहाँ हर चौक चौराहे परराजनीतिक हुंडारअपनी रक्तस्लथ दाढ़लोकतंत्र की राख सेचमकाते फिर रहेकोई पांव-पैदल चल रहाजन-गण-मन की धुन पर'ज्यां द्रेज'दो शब्दों का तुम्हारा नाममेरी समझ में नहीं आतापर  तुम्हारी सायकिल की टुन-टुनसुन पा रहा मैंजैसे  गांधी की आदमकद हरकतों के पीछेय...
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कुमार मुकुल
Tag :कुमार मुकुल
  March 30, 2019, 10:33 am
क्‍या पाकिस्‍तान शेर है ? नहीं जी, गीदड़ है। पर चुनाव तक उसे शेर मानने में अपुन के बाप का क्‍या जाता है। इसी तरह चुनाव में अपुन सवा सेर साबित हो जाएंगे! फिर इन गीदडों को कौन पूछेगा ? ये सीमा पर फूं फां करते रहेंगे लोहा लेने को अपने जवान हैं इतने, हम उनकी शहादत का सम्‍मान करत...
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कुमार मुकुल
Tag :व्‍यंग्‍य-मुकुल
  March 8, 2019, 10:43 am
युवाल नोआ हरारी की विश्‍वप्रसिद्ध पुस्‍तक'सेपियन्‍स'का अनुवाद अब हिंदी में उपलब्‍ध है। सेपियन्‍स रोचक ढंग से'मानव जाति का संक्षिप्‍त इतिहास'हमारे सामने रखती है। पुस्‍तक इस माने में अनोखी है कि मानव जाति के पूरे वैज्ञानिक विकास क्रम को सामने रखते हुए यह हमें आत्‍मा...
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कुमार मुकुल
Tag :युवाल नोआ हरारी
  March 4, 2019, 3:58 pm
Hearth र्ब्‍लाग के लिए अंचित द्वारा की गयी बातचीत at March 24, 2017आज से हमलोग अपनी इंटरव्यू वाली श्रृंखला की शुरुआत कर रहे हैं. इस श्रृंखला में हम कवियों से बात करेंगे और उनकी मनोस्थिति और कविता के प्रति नजरिया जानेंगे. हर कवि से हमने एक ही तरह के सवाल पूछे हैं और आगे हम देखेंगे कि उन...
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कुमार मुकुल
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  February 26, 2019, 12:45 pm
वैदिक काल के शब्‍द बताते हैं कि उनका निर्माण और नामकरण जीवों और वस्‍तुओं की गति के संदर्भ में किस तरह हुआ होगा। वेदों में गौ शब्‍द जाने और गति के अर्थ में प्रयुक्‍त है। यह किरणका पर्याय है क्‍योंकि किरण चलकर धरती तक आती है। सूर्य और चांदभी गौ हैं क्‍यों क‍ि वे चलते प्र...
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कुमार मुकुल
Tag :गाय
  February 13, 2019, 3:10 pm
चित्रकार बनने की आकांक्षा वॉन गॉग में शुरू से थी। गरीबी और अपमान में मृत्यु को प्राप्त होनेवाले महान चित्राकार रैम्ब्रां बहुत पसंद थे विन्सेन्ट को और उसका अंत भी रैम्ब्रां की तरह हुआ और दुनिया के कुछ महान लोगों की तरह उसकी पहचान भी मृत्यु के बाद हुई। जीते जी तो कला क...
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कुमार मुकुल
Tag :कुमार मुकुल
  December 12, 2018, 12:29 pm
सिद्ध मनोविज्ञानी कार्ल युंगने अपने एक लेख में पिकासो और उसकी कला को स्क्जिोफ्रेनिक कहा था। पिकासो के जीवन में और उसके चित्रों में आई दर्जन भर से ज्यादा स्त्रियों के साथ उसके व्यवहार को अगर देखा जाए तो युंग की बात सही लगती है। पर कलाकार यही तो करता है कि अपनी कमियों क...
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कुमार मुकुल
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  December 5, 2018, 2:06 pm
4 फरवरी 2016क्या आज का मेरा दिन खुशी में बीता है? दुकानदार से छुटटा पैसों की जगह माचिस की बजाए मिले तीन चॉकलेट मुंह में डालते हुए मैंने सोचा कि लगभग खुशी ही है यह। लगभग जयहिंद की तर्ज पर। हालांकि काफी बाइट से दिखते चॉकलेट का स्वाद वैसा नहीं था जैसा होना चाहिए था। अगर पसंद आत...
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कुमार मुकुल
Tag :डायरी
  November 26, 2018, 1:03 pm
करीब बीस साल पहले लिखा गया आलेखजाति और धर्म के काठ की हांड़ी राजनीति के चूल्हे पर एक-एक बार चढ़ चुकी है और अब अपने स्वाभाविक विकृत अंत की ओर बढ़ रही है। बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रमों को देख कर आप इसे अच्छी तरह समझ सकते हैं। तिलक, तराजू व तलवार को चार जूते मार...
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कुमार मुकुल
Tag :
  November 24, 2018, 11:33 am
Thursday, 22 March 2012  लगाएक पूरी नदी उछल कर मुझे डुबो देगीपर मुझे डर न थामारे जाने की सदियों की धमकियों के बीचमन ठहरा था आज    -  वर्तिका नंदास्त्री विमर्श के इस युग में जहां देह की मुक्ति से लेकर उनकी आर्थिक मुक्ति तक की बातें होती रहती हैं और स्त्री काफी हद तक बदली भी है। प...
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कुमार मुकुल
Tag :कुमार मुकुल
  November 22, 2018, 3:06 pm
 हिंसा और अहिंसा क्या हैजीवन से बढ़ हिंसा क्या है - केदारनाथ अग्रवालउपरोक्‍त पंक्तियां स्‍पष्‍ट करती हैं कि हिंसा और अहिंसा अपने आप में कुछ नहीं हैं। उनके परिपेक्ष्‍य ही उनकी सकारात्‍मकता या नकारात्‍मकता को दर्शाते हैं। भूखा व्‍यक्त्‍िा अगर हिंसा करता है तो उसे उ...
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कुमार मुकुल
Tag :कुमार मुकुल
  November 21, 2018, 11:48 am
इधरके वर्षों में हिंदी आलोचना का वरिष्ठ संसार बड़ी तेजी से संदिग्ध और गैरजिम्मेदारन होता गया है। आलोचना की पहली, दूसरी...परंपरा के तमाम उत्तराधिकारी, जिनकी अपनी-अपनी विरासतों पर निर्लज्ज दावेदारी है, आलोचना के मान- मूल्यों और उसकी मर्यादा से क्रमश: स्खलित होते चले गए ...
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कुमार मुकुल
Tag :कुमार मुकुल
  November 20, 2018, 11:29 am
 ‘सामाजिक परिवर्तन में बाधक हिन्दुत्व’दलित चिंतक एच एल दुसाध का दुसाध प्रकाशन से आया हजार पृष्ठों का ग्रंथ है। श्री दुसाध पत्रकारिता को समर्पित अकेले ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने राजनीति, साहित्य, फिल्म, क्रिकेट, दूरदर्शन, धर्म, भू-मंडलीकरण, शिक्षा और अर्थनीति ज...
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कुमार मुकुल
Tag :हिन्दुत्व
  November 19, 2018, 10:42 am
वेदों की आधारभूमी स्पष्ट है कि खेतिहर समाज के लिए वर्षा प्राथमिक जरूरत है, इसी तरह बादलों से वर्षा कराने वाले इंद्र की पूजा भी स्वाभाविक है।वेद आदिग्रंथ है। इसमें मांसाहारी समाज से विकसित हो, नए-नए बन रहे खेतिहर समाजके अनुभवों को ऋषियों ने अपनी ऋचाओं में अभिव्यक्त कि...
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कुमार मुकुल
Tag :इंद्र
  November 17, 2018, 10:59 am
उपन्‍यास जगत की महान हस्‍ती और अपराध और दंडजैसी सार्वकालिक कृति के सर्जकदास्‍वोएवस्‍की के जीवन को हम देखें तो वह भी अपराध और दंड के जटिल संजाल में गुत्‍थम-गुत्‍था दिखेगा। रूप सिंह चंदेल की पुस्‍तक दास्‍तोएवस्‍की के प्रेम को पढते हुए यह साफ हो जाता है कि जीवनानुभव क...
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कुमार मुकुल
Tag :
  November 16, 2018, 11:26 am
सहज बुद्धि के आधार पर मन पर नियंत्राण रखना ही जीवन का सबसे बड़ा अर्थ है। एडलर लिखते हैं कि ``जीवन का अर्थ है, मैं अपने साथी मनुष्यों में दिलचस्पी लूं, सम्पूर्ण का एक अंश बनूं, मानव-मात्र की भलाई के लिए अपना कर्तव्य-भाग निबाहूं।´´ वे मानते हैं कि दुनिया के सभी विफल मनुष्य ...
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कुमार मुकुल
Tag :फ्रायड
  November 15, 2018, 11:12 am
समय का संक्षिप्‍त इतिहास  कुछ नोटससंयोगों की सत्‍ता ईश्‍वरीय सत्‍ता का निषेध करती है : स्‍टीफेन हाकिंग 'पूरा सच कभी किसी एक के हिस्‍से नहीं पड़ता' - स्‍टीफेन हाकिंगको पढते हुए लगता है कि पूरा सच कभी किसी एक के हिस्‍से नहीं पड़ता। अरस्‍तू से हाकिंगतक सब थोड़ा-थोड़ा ब...
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कुमार मुकुल
Tag :Stephen Hawking
  November 14, 2018, 10:57 am
डॉ सेवा सिंहके लियेब्राहमणवादजातिसूचक संज्ञान नहीं एक विचारधारा है, वचर्स्वी वर्गों के प्रभुत्व को आधार प्रदान करने वाली एक सत्तामूलक विचारधारा। बौदध और लोकायत लंबे समय तक इसे चुनौती देते रहे पर छठी शताब्दी के बाद लोकायतों के विघटन और बौदधों के पतन के बाद से यह वि...
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कुमार मुकुल
Tag :डॉ सेवा सिंह
  November 6, 2018, 11:40 am
( 2017 - आज मुकुल जी को दुसरी बार सुना...मुझे उनके स्वेत धवल बालों से जलन है...वो मुझे भी चाहिए था।)कविता तब दीर्घजीवी होती है ....जब समय को लांघकर बार बार प्रासंगिक बनी रहे और कुमार मुकुल की कविता ऐसी ही है....''आफिसिअल समोसों परपलनेवाले चूहेमालिक के आलू के बोरों को काटते हुएसोचत...
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कुमार मुकुल
Tag :कृष्ण समिद्ध
  November 5, 2018, 11:03 am
चर्चित किताब : बयालीस - 'एक उर्सुला होती है' ( कुमार मुकुल )            इससे पहले भी युद्घ हुए थे           पिछला युद्ध जब ख़त्म हुआ           तब कुछ विजेता बने और कुछ विजित           विजितों के बीच आम आदमी भूखों मर...
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कुमार मुकुल
Tag :शहंशाह आलम
  November 3, 2018, 10:27 am
‘एक उर्सुला होती है’कवि कुमार मुकुल का ताज़ा कविता संग्रह है जिसकी कविताएँ जीवन और समाज में छीजते जा रहे प्रेम को केन्द्र में लाते हुए एक सार्थक-साहित्यिक हस्तक्षेप की बुनियाद रखती हैं। इस संग्रह में कुमार मुकुल विंसेंट वॉन गॉग और उर्सुला के बहाने प्रेम की प्रचलित...
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कुमार मुकुल
Tag :प्रांजल धर
  November 2, 2018, 1:55 pm
हर रचनात्‍मक यात्रा में सहजीवन के रूप में किसी न किसी 'उर्सुला'की मौजूदगी अवश्‍य रहती है, इस संग्रह की कविताएं इसी बात की तस्‍दीक करती हैं। इस तरह कुमार मुकुलवॉन गॉग की 'उर्सुला'को एक प्रतीक में बदल देते हैं, उर्सुला जो प्रतीक है सृजनात्‍मक जीजिविषा और जिगीषा की। हर रच...
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कुमार मुकुल
Tag :एक उर्सुला होती है
  November 1, 2018, 11:15 am
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