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Blog: कारवॉं karvaan

Blogger: कारवॉं
झटपट फौरी तौर पर कवि होने की हलतलबी से भरे इस समय में प्रदीप सैनी की कविताएं हमें जीवन संघर्ष में उतरने, उसे जानने-समझने और फिर दर्ज करने का हौसला देती हैं, यह बात आश्‍वस्‍त करती है। प्रदीप सैनी की कविताएं मुआफ़ी यूँ तो मुआफ़ी माँगना भी अब मुआफ़ कर देने की तरह भरोसे के लायक ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   5:13am 2 Oct 2020 #प्रदीप सैनी
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जिंदगी तो वो थी ...मेरी मानो मत ले जाओ  इन विदूषको को आसमान के पार चौदह बेजान ग्रह ये थोड़े धूमकेतु दो तारे और जब तक तुम तीसरे का रुख करोगे तुम्हारे विदूषक भूल चुके होंगे हंसने हंसाने की बातें क्या है कि वह लोक और इहलोक वाली यह दुनिया ---जो है सो हइये है माने एकदम पूर्ण !... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   9:52am 20 Sep 2020 #सत्‍यार्थ अनिरुद्ध
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अफवाह और इतिहासहमारे महापुरुष जितना इतिहास की किताबों में हैं, अफवाहों में उससे तनिक कम नहीं हैं। सबसे ज्यादा अफवाह गांधी बाबा को लेकर है। मेरी मां बताया करती थीं कि गांधी को उनकी इच्छा के विरुद्ध अंग्रेजी सरकार भी जेल में बंद नहीं रख सकती थी। गांधी में 'चमत्कारी'शक्त... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   8:42am 7 Sep 2020 #डॉ. राजूरंजन प्रसाद
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डायरी अंश 17 अगस्त एक लंबे अरसे बाद गाँव में। गाँव मन से खिसक गया। सब सिकुड़ गये। एक भाई ने मरती हुए माँ के अंगूठे करवा कर जमीन अपने हिस्से दान लिखवा दी। पंच आये हुए हैं। मैं देर तक पश्चिम के धोरे पर उतरी  सांझ  की तरफ देख रहा हूँ। उतनी ही उदास जितनी भाई की विधवा।ये दुख क... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   6:03am 3 Sep 2020 #माधव राठौड़
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सुदर्शन शर्मा की कविताओं में भाव पक्ष से ज्‍यादा उनका ज्ञान पक्ष प्रबल दिखता है। अपने ज्ञान की बदौलत वे सफलता से परकाया प्रवेश करती हैं और उसे जान-समझ कर उसके उजले-काले पक्ष को अभिव्‍यक्‍त करने की कोशिश करती हैं। अपनी इस क्षमता के बल पर परंपरा की रूढियों से टक्‍कर लेत... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   8:11am 16 Aug 2020 #सुदर्शन शर्मा
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भाजपा नेता अनुराग ठाकुरहों या योगी आदित्‍यनाथ, वे किसी भी तर्क से गोली मारने की बात कैसे कर सकते हैं। और अगर करते हैं तो समाज में बढती हिंसक घटनाओं की जिम्‍मेदारी से कैसे बच सकते हैं। चुनाव के दौरान कुछ मतों के लिए आप सीधे-सादे लोगों का दिमाग उत्‍तेजित कर देते हैं फिर ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   5:52am 19 Feb 2020 #
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 निराला के एक छोर पर शमशेर दूसरे पर नागार्जुन हैं। (दैनिक पाटलीपुत्र टाइम्‍स, पटना - 1995)क्‍या कविता केंद्र में वापस आ रही है और उसका उन्‍नयन हो रहा ?उन्‍नायक से ज्‍यादा जो कविता के नायक हैं वही ऐसा कहते हैं। अशोक वाजपेयी, कमलेश्‍वर ऐसे ही नायक हैं। कव‍िता कभी भी अपने सम... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   9:22am 29 Oct 2019 #ज्ञानेन्‍द्रपति
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रवि और मोहन दो दोस्त थे । वे फैंटम और शक्तिमान आदि की रामांचक चित्रकथाओं को देखना पसंद करते थे। धीरे-धीरे वे खुद कुछ रोमांचक कर गुजरने की सोचने लगे। वे जिस हॉस्टल में रहकर पढ़ते थे वह एक पहाड़ी पर स्थित था। उसके पास ही एक घाटी थी जिसमें हाथियों का झुुंड निवास करता था।रव... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   11:15am 16 Oct 2019 #
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हरि हैं राजनीति पढि आए ...राजधरम तो यहै 'सूर' , जोप्रजा न जाहिं सताए ॥ (भ्रमरगीत-सूरदास)इस गीत में सूरदास उधो से कहते हैं कि प्रजा को नहीं सताना ही राजधरम है पर क्‍या हो जब हरि ही राजनीति पढकर आ गये हों। तो वर्तमान निजाम नाम भर को रामराज है बाकी यह उनके नाम पर राजनीतिकों द्व... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   4:49am 4 Oct 2019 #
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वरिष्‍ठ कवि ज्ञानेन्‍द्रपति से कुमार मुकुल की बातचीत - समकालीन कविता 2006मैनेजर पांडेय का मानना है कि पिछले तीस वर्षों में हिंदी साहित्‍य की भाषा जनता की भाषा से अलग हुई है। इसमें जनवाद के तत्‍व घटे हैं। इसके कारण के रूप में वे प्रयोगवाद से अकविता के दौर तक की भाषा को दे... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   6:09am 17 Sep 2019 #बातचीत
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विडंबना-बोध को ऐसे यथार्थवादी ढंग से अभिव्यक्त करना कि वह रूढि़यों की मिट्टी पलीद कर दे, विष्‍णु नागर की रचनाओं की खासियत है। हिंदी में यह बात नागार्जुन के यहाँ और ज्यादा सादगी के साथ केदारनाथ अग्रवाल के यहाँ दिखती है। ऐसे में जब कवि ईश्वर से जुड़ी नई रूढि़याँ पैदा कर ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   7:17am 14 Sep 2019 #बातचीत
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मार्कोपोलो का यात्रा विवरण , 13वीं सदीअनुवाद - रामनाथ लाल सुमन, वि - 94इटली के वेनिस के पोलो वंश के दो भाई 1250 में व्‍यापार को एशिया रवाना हुए। इटली से ये लोग व्‍यापार को द्रव्‍य आदि लेकर तातारी राजा बारक खां के यहां पहुंचे। अपने लाल-रत्‍न पेशकर उन्‍होंने उसे खुश कर दिया और उ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   11:26am 13 Sep 2019 #
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रोजाना ना जाने कितनी कितनी बार उसकी धज्जियां सरेआम व सरेशाम उड़ायी जाती हैं पर धज्जियों का यह बादशाह कभी हार नहीं मानता। रावणके सिर की तरह उसकी धज्जि‍यां हमेशा उग-उग आती हैं।रक्‍तबीज की तरह अपनी हर बूंद से वह बहुगुणित होता जाता है। उसकी धज्जियां उडाकर सब प्रसन्‍न व... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   8:22am 11 Sep 2019 #
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1.मेरी समझ से कविता एक जिद से पैदा होती है, एक सच्‍ची जिच से। कि बात कहीं अटकी होती है और कविता उसका बाहर आना, रूपाकार लेना संभव करती है। डॉ विनय निजी बातचीत में जब-तब आग्रह करते ... कि मैं एक खंड काव्‍य लिखूं। कि मुझे लिखना चाहिए। अक्‍सर आदमी अपनी बातों को ही किसी बहाने अरोप... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   10:52am 9 Sep 2019 #
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1.बचपन में अंग्रेजी के शिक्षक पिता की टेबल पर जिन किताबों से मेरा साबका पडता था उनमें शेक्‍सपीयर के कम्‍पलीट वर्क्‍स के अलावे दिनकरकी कविताओं का संकलन 'चक्रवाल', मुक्तिबोध की 'भूरी-भूरी खाक धूल'के अलावा नामवर सिंह की 'दूसरी परंपरा की खोज'  और 'कविता के नये प्रतिमान'... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   10:41am 9 Sep 2019 #संस्‍मरण-मुकुल
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 गजानन माधव मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह, केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन और त्रिलोचनके बाद जिन कवियों ने हिन्‍दी में नयी जमीन तोडी है उनमेंरघुवीर सहाय,केदारनाथ सिंह और कुंअर नारायणप्रमुख हैं। इनमें रघुवीर सहाय जहां इस जनतंत्र में तंत्र की भूमिका को आलोचनात्‍मक ढंग ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   9:17am 7 Sep 2019 #संस्‍मरण-मुकुल
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"अपने आप को पहचानो, तुम स्वयं ईश्वर हो"का संदेश देने वाले स्‍वामी रामतीर्थ का कहना था कि - हमें धर्म और दर्शनशास्‍त्र को भौतिकविज्ञान की तरह पढना चाहिए। 1891 में पंजाब विवि से गणित में सर्वाधिक अंकों के साथ एमए करने वाले रामतीर्थ उसी कालेज में गणित के प्रोफेसर नियुक्‍त ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   7:28am 30 Aug 2019 #
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खेतड़ी महाराज को लिखित अपने एक पत्र में विवेकानंद लिखते हैं - जीवन में एक ही तत्‍व है, जो किसी भी कीमत पर अमूल्‍य है - वह है प्रेम, अनंत प्रेम। ईश्‍वर अनिर्वचनीय प्रेम स्‍वरूप है। भारतीय दर्शन में सामान्‍यतया चार पुरूषार्थों की चर्चा मिलती है, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   7:17am 22 Aug 2019 #
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1900 के बाक्‍सर( ई.ख.च्‍वान - संयुक्‍त धार्मिक धूंसेबाज - कमर पर लाल पटटा बांधते थे ये, बाक्‍सर नाम योरोपियनों ने दिया , इनके अलावा एक अन्‍य ता.ताव.हवी समाज था जिसे खडगधारी समाज कहा जाता था जो बाद में बाक्‍सर का हिस्‍सा हो गया, इनका नारा था विदेशियों को निकाल दो। खडगधारी समाज ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   10:26am 12 Aug 2019 #ठाकुर गदाधर सिंह
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जिस तरह निराला ने कविता को छंदों से मुक्त किया, केदारनाथ सिंह ने उदात्तता से मुक्त किया उसी तरह एक हद तक रघुवीर सहाय ने और ज्यादा समर्थ ढंग से विष्णु खरे ने उसे करुणा की अकर्मण्य लय से मुक्त किया है, और कविता को बचा लिया है अस्तित्व के संकट से। कवियों की बड़ी दुनिया के लि... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   9:00am 12 Aug 2019 #कुमार मुकुल
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लेखक की राजनीतिक दृष्टि साफ होनी चाहिए वरिष्‍ठ कवि विजेंद्रसे कवि, पत्रकार कुमार मुकुल कीबात-चीत-राष्‍ट्रकवि और जनकवि जैसे संबोधन को आप किस तरह देखते हैं। हाल के दशकों में ना कोई राष्‍ट्रकवि कहलाया ना जनकवि। जबकि राष्‍ट्र और जन दोनों विकसित हुए हैं ?राष्ट्र कवि और ज... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   12:25pm 9 Aug 2019 #Vijendra
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परिचय1933 में लोथल गुजरात में जन्‍मे और जयपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले हिम्‍मत शाह कला के क्षेत्र में विश्‍वविख्‍यात नाम है। जग्‍गूभाई शाह के शिष्‍य श्री शाह मध्‍यप्रदेश सरकार के कालिदास सम्‍मान, साहित्‍यकला परिषद अवार्ड, एलकेए अवार्ड, एआइएफएसीएस अवार्ड दिल्‍ली ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   5:09am 8 Aug 2019 #हिम्‍मत शाह
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जब कोई प्रतिभा उद्बोधन के नये स्‍तरों को अपने कलात्‍मक संघर्ष से उद्घाटित करने की कोशिश करती है तो समय और प्रकृति अपने पारंपरिक स्‍वरूप में उसे भटकाना व तोड़ना चाहते हैं। ऐसे में वह संघर्ष पीढि़यों में विस्‍थापित होता चला जाता है। और समय की सीमाएं तोड़ता कालातीत ह... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   4:53am 8 Aug 2019 #सत्‍यजीत राय
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हंस कार्यालय में एक बार राजेन्‍द्र यादव ने बिहार को लेकर कुछ हंसी के मूड में कहा तो मैंने भी हंसते कहा था - बहुत सताता है मगध। चंद्रगुप्‍त, चाणक्‍य, बुद्ध याद आते हैं। मगध जिसकी सीमाएं कंधार को छूती थीं और जिसकी राजधानी थी पाटलिपुत्र यानि आज का पटना। 1990 के अंत में जब सहर... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   12:12pm 7 Aug 2019 #
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