| 1 मात़भूमि की सेवा में सदा बीते मेरा जीवन2 हंसी के पीछे छिपी खुशी या गम ये तो तू जाने 3 अछूत आया कहां से, ये बताए कोई मुझे तो 4 हवा सदृश तुम झौंका बन के जाती छूकर 5 तुम आयी तो सोचा जीभर देखूं देख न सका... |
JYOTISH NIKETAN SANDESH...
डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
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November 16, 2012, 5:07 pm |
| जो सोच-समझकर उचित-अनुचित का ध्यान रखते हुए धैर्य सहित निर्णय लेता है वही विवेकी कहलाता है। विवेकी सदैव सुकर्म ही करता है। नीर-क्षीर-विवेक से ही सुसम्मत निर्णय और प्रगति-पथ प्रशस्त होता है। विवेकी सदैव धैर्यवान् होता है!... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
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November 8, 2012, 9:08 am |
| ...जहां विवेक है वहां समझदारी है और समझदार व्यक्ति कभी भी विषय भोगों में नहीं उलझता है......विवेक दृष्टि से विषयों को दु:ख रूप मानकर उनके प्रति अरुचि का भाव वैराग्य है... ...सद्गुरु से प्रेम एवं ईश्वर से प्रेम ही जीवन का सार... यह लेख फरवरी 2012 के ज्योतिष निकेतन सन्देशअंक में... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| ...नेत्र नीरोग रहें उसमें रोशनी दीर्घकाल तक सामान्य रहे और किसी प्रकार की पीड़ा न हो इसके लिए चाक्षुषी विद्या की चर्चा होती है। चाक्षुषी विद्या चाक्षुषोपनिषत् पर आधारित है... अधिक जानकारी के लिए जनवरी माह में प्रकाशित लेख के लिए क्लिक करें... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| आपको लक्ष्य ज्ञात होना चाहिए और उसको पाने के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाना होगा। आप सभी में कुछ न कुछ करने की सामर्थ्य है, उसके द्वारा आप अपने स्वप्न को साकार कर सकते हैं। लक्ष्य को पाने के लिए अच्छा स्वास्थ्य, एकाग्रता, आत्मविश्वास, निरन्तर सक्रियता ... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| यदि आप सफलता पाना चाहते हैं तो सर्वप्रथम आपको यह निश्चित करना होगा कि आप क्या चाहते हैं। आप लक्ष्य जो भी बनाएं आपको बनाना ही होगा। लक्ष्य को पाने हेतु विभिन्न परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है। समस्याएं कितनी भी आएं सभी समस्याओं का हल एक साथ नहीं करना चाहि... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| लोक सेवा आयोग प्रत्येक वर्ष आईएएस की परीक्षा आयोजित करता है और लाखों युवक-युवतियां आईएएस की परीक्षा देते हैं, पर सभी सफल नहीं होते हैं। वे सफल होते हैं जो कठिन परिश्रम करते हैं और उनका भाग्य भी साथ देता है। सफल युवक-युवतियां सरकारी व प्रशासनिक नौकरी में आकर मान-... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| प्रायः लोग कॅम्प्यूटर के कारण भी स्वास्थ्य खराब कर बैठते हैं। वैसे भी आजकल कॅम्प्यूटर पर 8-12 घंटे तक लोग काम करने लगे हैं, कोई-कोई तो इससे भी अधिक देर तक कॅम्प्यूटर पर काम करता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए कॅम्प्यूटर पर काम करते समय निम्न बातों का अवश्य ध्यान रखें- 1. ... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| स्वैः ष एवै रिरिष्ज्ञीष्ट युर्जनः। 8.18.13वह दुर्जन अपने कर्मों से ही दुःखित हुआ। कुत्सित कर्म करने से दुर्जन कहलाते हैं। कुत्सित कर्मों का अन्त दुःख ही होता है। कुत्सित कर्म करने से सदैव बचना चाहिए। कुकर्मों से सदैव क्षणिक सुख जान पड़ता है, किन्तु अन्त सदैव दुःख पर ह... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| धन कलयुग का भगवान है। आपके पास धन की कमी रहती है तो चिन्ता न करें। यहां एक अनुभूत टोटका दे रहे हैं, इसको आस्था व विश्वास के साथ बिना नागा नियमित करने से धन लाभ होने लगेगा और धन की कमी दूर हो जाएगी। टोटका इस प्रकार है- यह प्रयोग शुक्लपक्ष के शनिवार या शनिचरी अमावस स... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| आप नेत्रों के कष्ट से परेशान है। आए दिन नेत्र संबंधी कोई न कोई कष्ट मिलता ही रहता है। आजकल कॅम्प्यूटर पर अधिक समय कार्य करने से भी नेत्र की ज्योति कम हो रही है और नेत्रों में जलन रहती है। आप नेत्र के किसी भी कष्ट से परेशान हैं तो आपको यहां एक अनुभूत मन्त्र बताते हैं ज... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| हम और हमारा शरीर अन्य जीवों की तुलना में अत्यधिक संवेदनशील होता है। इसीलिए भावी घटना के प्रति हमारा शरीर पहले ही आशंकित हो उठता है। शरीर के विभिन्न अंगों का फड़कना भी भावी घटनाओं के होने का संकेत है। कहने का तात्पर्य यह है कि आम जीवन में रोजाना हमारे साथ होने व... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| नेतृत्व करने की क्षमता उनमें उत्पन्न होती है जो उद्देश्य को लेकर कार्य करते हैं। जब आप उद्देश्य को लेकर कार्य करेंगे तो आप नेतृत्व करने के लिए अनुयायी बना सकेंगे। आपको उद्देश्य पूर्ण करने के लिए उत्साही होना होगा। उत्साह होगा तो कार्य के लिए तत्पर हों... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| वर्तमान में प्रत्येक व्यक्ति उच्च शिक्षा पाना चाहता है अथवा अपनी सन्तान को उच्च शिक्षा दिलाना चाहता है जिससे वह भविष्य में अच्छी नौकरी या व्यापार करके सुख व समस्या रहित जीवन जी सके। दूसरे शब्दों में यह कह लीजिए कि प्रत्येक व्यक्ति सन्तान को उच्... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
| आप क्या सभी धन की चाह में भागदौड़ करते हैं! धन के बिना आज कुछ भी क्रय नहीं होता है। कलयुग का भगवान् धन ही तो है। धन से सबकुछ मिल जाता है, पर मृत्यु को दूर नहीं भगाया जा सकता है। धन से जीवन नहीं मिलता है। सभी को धन की चाहत रहती है और चाहत को पूरा करने के लिए वे शुभाशुभ जैसे भ... |
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डॉ. उमेश पुरी 'ज्ञानेश्वर'
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