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गुफ़्तगू

क्या से आगे क्या ?क्या से आगे क्या ?आक्षेप, पराक्षेप से भी क्या ?विशाल, व्यापक और विराट है क्यासर्वथा निस्सहाय नहीं है ये क्याउपायो में है जबाब हर क्या का,छोड़ो भी..प्रश्न के बदले प्रश्न कोलम्हो की खता वर्षो में गुज़र जाएगी..पत्थरो को तराश कर ही बनती है,जिन्दगी के क्या का ज...
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  January 19, 2017, 12:14 pm
लो गई..उतार चढ़ाव से भरीये साल भी गई...गुजरता पल,कुछ बची हुई उम्मीदेआनेवाली मुस्कराहटों का सबब होगा,इस पिंदार के साथ हम बढ़ चले।जरा ठहरो..देखोइन दरीचों से आती शुआएं...जिनमें असिर ..इन गुजरते लम्हों की कसक, कुछ ठहराव और अलविदा कहने का...,पयाम...नव उम्मीद के झलककुसुम के महक का,जी श...
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  December 28, 2016, 4:45 pm
                                                                                                                                                               बड़ा अजीब सफर है आजकल मेरे तख़य्युल काकुछ घटित घटनाएँ ..श...
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  December 12, 2016, 3:40 pm
यूँ तो कुछ नहीं बताने को..चंद खामोशियाँ बचा रखे हैंजिनमें असीर है कई बातें जो नक़्श से उभरते हैंखामोशियों की क्या ? कोई कहानी नहीं...ये सुब्ह से शाम तलक आज़माए जाते हैंक्यूँकि हर तकरीरें से तस्वीरें बदलती नहीं न हि हर खामोशियों की तकसीम लफ़्जों में होतीरफ़ाकते हैंं इ...
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  November 29, 2016, 2:50 pm
अाफियत की वक्त मुक़रर्र कर दो...चंद आफियत कीवक्त मुक़रर्र कर दो..पुरखुलूस की ताब से ही गुज़रती है जिन्दगी..हर लबो पर तब्बसुम की आबोताब कर दो..साजिशें थी दहर के चांद सितारो कीवर्ना खुशियाँ झाँकती हर दरीचों सेइस तरह ही हर पल को ढूढतीएक पल को गुज़ार दोचंद आफियत की...       ...
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  October 5, 2016, 6:28 pm
आसमान को और झुकना..आसमान को और झुकना पड़ेगान जानू फिज़ाओ की आगोश की बातें..ख्वाहिशों की मुरादो को पूरा करना पड़ेगाछोड़ो आज़ खोने की बातेंपाने के हुनर की ज़िक्र करना पड़ेगाजहर न बन जाउ पीते-पीतेअमृत की भी आस करना पड़ेगासहरा में सराबो से वास्ता सही..अब्र की आस करना पड़ेग...
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Tag :आसमान
  August 29, 2016, 5:44 pm
आँखों में कुछ नमी सी...आज छत से ..मैने सूरज को उगते देखाकई रंगो में ढल कर इक नई रंग में ढलते देखाहमारे हिस्से की धूप हमीं तक थी,मन में कुछ सुकून सी थी..हमारी कली जो आज फूल बनकर खिलखिलाएँ हैं,हमारी शादव्ल,शफ़़फा़फ जौ इन्हीं से हैंसमेटती हूँ ..इन लम्हो की अहसासों को,हमारे हिस्स...
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Tag :Sun light
  August 1, 2016, 3:17 pm
कभी-कभी दैनिक दिनचर्या से दूर हो कर सोची कुछ अपनी मन की बात..(उम्र के किसी भी दौर में ये नटखटी अंदाज अनयास ही लबो को मुस्कराहटो से लबरेज कर जाती हैं)जाड़ो की सुबह और गर्म चाय का सम्बन्ध बड़ी गहरी ..मम्मी...(दूसरे कमरे से आवाज़)आज क्या बनेगापति और बच्चो के लिए मौसम किसी पिकनीक...
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  July 14, 2016, 5:30 pm
जो मिली वज़ा थी...बस एक चुप सी लगी है...जो मिली वज़ा थी जो मिली बहुत मिली है, बस एक बेनाम सा दर्द गुज़र करहर लम्हो को अपने नाम कर जाता,सुकूत हि रिज़क बनी हैपर इक जिद्द सी मची है ज़फा न होगी अब खिज़ा, हिज्र कीबस एक चुप सी...                                ©पम्मी...
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Tag :#खिज़ा
  June 27, 2016, 3:06 pm
आहटे नहीं हैउन दमदार कदमों के चाल की,गुज़रती है जेहन में ..वो बोल‘मैं हुँ न..तुमलोग घबराते क्यों हो?’वो सर की सीकन और जद्दोजहद,हम खुश रहे..ये निस्वार्थ भाव कैसे?आप पिता थे..अहसास है अब भीआपके न होकर भी होने कागुंजती है..तुमलोग को क्या चाहिए?पश्चताप इस बातन पुछ सकीआपको क्या ...
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  June 19, 2016, 12:13 am
इत्ती  सी  ज़िंदगी ,, इत्ता  सारा  काम. . अब  बोलो  कैसे  करु हाँ , जी  बस  करना  जरूर  हैं। ओ>> जिसे  छुट्टियाँ  कहते हैं  आई थी  चली  भी  गयी...भाई, हद  हो  गई   हर  दिन  की  इक  कहानी.. सब  की  छुट्टियों  में  अपना  हिस्सा  ...
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  May 17, 2016, 3:16 pm
लोगो नेये कौन सीऱीवाज पाल रखी जहाँ खुद कीपाकीजगी साबितकरने की चाह मेंदुसरो को गिराना पडा,मसाइबो की क्या कमीखुद की रयाजत औरउसके समर की है आस..रफाकते भी चंद दिनो कीपर मुजमहिल इस कदर किमैं हि मैं हूँ।न जाने वो इख्लास की छवि गई कहाँजहाँ अजीजो की भी थी हदेंखुदी की जरकाऱसाब...
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Tag :छवि
  April 30, 2016, 12:59 pm
मुड़  कर जाती  ज़ीस्त गुज़रते  लम्हों  को शाइस्तगी  से ताकीद   की, फ़र्ज़  और क़र्ज़  किसी  ओर  रोज़,खोने  और  पाने  का हिसाब  किसी  ओर  दिन, मुद्द्त्तो  के  बाद  मिली पलक्षिण  को  समेट  तो  लू,शाद  ने  भी शाइस्तगी  से ताकीद  ...
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Tag :कर्ज.किसी
  March 31, 2016, 5:35 pm
नूर-ए-रंग है फाग कीहमें खिलने के लिए,चंद रस्म नहीं सिर्फनिभाने के लिए,निखर कर निखार देपूर्ण चांद निकला हैये बताने के लिए..-    ©पम्मी                     ...
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  March 22, 2016, 11:16 pm
ये मेआर...बेटियो सेमधु मिश्रित ध्वनि से पुछाकहाँ से लाती हो, ये मेआरनाशातो की सहर             हुनरमंद तह.जीब,और तांजीमसदाकत,शिद्दतो की मेआर,जी..मैने हँस कर कहाँमेरी माँ ने संवारा..उसी ने बनाया हैस्वयं को कस कर हर पलक्षिण मेंइक नई कलेवर के लिए शनैः शनैः प...
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  March 8, 2016, 8:55 am
जुम्बिशे  तो  हर    इक   उम्र  की  होगी कसमसाहटो  की  आहटे  भी  होगी ,शायद   इसलिए  हि कल  की  ज़िक्र  कर आज  हि  संवर  जाते , ज़िस्त  यू  हि कटती  जाती किसी  ने  कहाँ ?क्यू  कल  की  चिंता . . वो  भी  आजमा  कर.. रुकी  हुई  सी &n...
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Tag :आहटें
  February 14, 2016, 3:48 pm
कह  दो इन आइनों को नत हुआ है सच दस्तूर है आज का छद्म  रूप  के  सभी  है भक्त्त रोष  की आंच  में सभी  है  मस्त सत्य की  आंच कम  न  पड़  जाए इसलिए  लेखनी  को  सहारा मानती हूँ. .                                                  - © ...
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  January 31, 2016, 2:21 pm
                       स्वार्थ 'स्वार्थ 'शब्द   पर परिज्ञप्ति   चंद  परिज्ञा जी हाँ, स्वार्थ   ऐसी  प्रवृति  जो  हम  सभी  में  विराजमान ..  एक  संज्ञा  और  भाव  जो  सर्वथा  नकारात्मकता  ही संजोए   हुए  है। प्रश्न  है  स्वार्थ &nbs...
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  January 18, 2016, 3:27 pm
                                                नव वर्ष  की नवोत्थित  शफ़क़ यूँ  ही  बनी  रहे हमारे  एवानो में आसाइशे  से नज़दीकियों की                                                              सफ़र बहुत...
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  December 29, 2015, 9:09 pm
नियतखामोश  जबानों  की भी  खुद  की  भाषा  होती  है कभी अहदे - बफा  के  लिए ,कभी  माहोल को काबिल  बनाने के  लिए मु.ज्तारिब क्या  करु नियत नहीं . . दुसरे  पर कीचड़ उछाल कर ख़ुद को कैसे साफ़ रखू।   कभी  खुद  के  घोसले ,कभी दुसरो के  तिनके  की पा...
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  December 8, 2015, 6:39 pm
                                                                               रिश्ते  आप  सभी  का    अभिनन्दन, ब्लॉग  जगत  का  एक  कोना   जहाँ कलम  भी अपनी दवात  भी  अपनी  और  विचार  भी  अपने। . चलें   ...
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  November 24, 2015, 12:52 pm

                                                तलाश                                                                                            स्वतंत्रता  तो उतनी  ही है  हमारी          जितनी लम्बी बेड़ियों  ...
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  October 29, 2015, 3:23 pm
                                              कुछ                               भावनाओं  , संवेदनाओं   एवम विचारों  की प्रस्तुतिकरण की   प्रयास ताकि शब्द और भावो  की अभिवयक्ति संजीदगी  से हो  कुछ से सबकुछ का सफर..… ...
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  September 30, 2015, 1:02 pm
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