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Blog: गुफ़्तगू

Blogger: Pammi singh
क्या से आगे क्या ?क्या से आगे क्या ?आक्षेप, पराक्षेप से भी क्या ?विशाल, व्यापक और विराट है क्यासर्वथा निस्सहाय नहीं है ये क्याउपायो में है जबाब हर क्या का,छोड़ो भी..प्रश्न के बदले प्रश्न कोलम्हो की खता वर्षो में गुज़र जाएगी..पत्थरो को तराश कर ही बनती है,जिन्दगी के क्या का ज... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:44am 19 Jan 2017 #
Blogger: Pammi singh
लो गई..उतार चढ़ाव से भरीये साल भी गई...गुजरता पल,कुछ बची हुई उम्मीदेआनेवाली मुस्कराहटों का सबब होगा,इस पिंदार के साथ हम बढ़ चले।जरा ठहरो..देखोइन दरीचों से आती शुआएं...जिनमें असिर ..इन गुजरते लम्हों की कसक, कुछ ठहराव और अलविदा कहने का...,पयाम...नव उम्मीद के झलककुसुम के महक का,जी श... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   11:15am 28 Dec 2016 #
Blogger: Pammi singh
                                                                                                                                                               बड़ा अजीब सफर है आजकल मेरे तख़य्युल काकुछ घटित घटनाएँ ..श... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   10:10am 12 Dec 2016 #
Blogger: Pammi singh
यूँ तो कुछ नहीं बताने को..चंद खामोशियाँ बचा रखे हैंजिनमें असीर है कई बातें जो नक़्श से उभरते हैंखामोशियों की क्या ? कोई कहानी नहीं...ये सुब्ह से शाम तलक आज़माए जाते हैंक्यूँकि हर तकरीरें से तस्वीरें बदलती नहीं न हि हर खामोशियों की तकसीम लफ़्जों में होतीरफ़ाकते हैंं इ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   9:20am 29 Nov 2016 #
Blogger: Pammi singh
अाफियत की वक्त मुक़रर्र कर दो...चंद आफियत कीवक्त मुक़रर्र कर दो..पुरखुलूस की ताब से ही गुज़रती है जिन्दगी..हर लबो पर तब्बसुम की आबोताब कर दो..साजिशें थी दहर के चांद सितारो कीवर्ना खुशियाँ झाँकती हर दरीचों सेइस तरह ही हर पल को ढूढतीएक पल को गुज़ार दोचंद आफियत की...       ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   12:58pm 5 Oct 2016 #
Blogger: Pammi singh
आसमान को और झुकना..आसमान को और झुकना पड़ेगान जानू फिज़ाओ की आगोश की बातें..ख्वाहिशों की मुरादो को पूरा करना पड़ेगाछोड़ो आज़ खोने की बातेंपाने के हुनर की ज़िक्र करना पड़ेगाजहर न बन जाउ पीते-पीतेअमृत की भी आस करना पड़ेगासहरा में सराबो से वास्ता सही..अब्र की आस करना पड़ेग... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   12:14pm 29 Aug 2016 #आसमान
Blogger: Pammi singh
आँखों में कुछ नमी सी...आज छत से ..मैने सूरज को उगते देखाकई रंगो में ढल कर इक नई रंग में ढलते देखाहमारे हिस्से की धूप हमीं तक थी,मन में कुछ सुकून सी थी..हमारी कली जो आज फूल बनकर खिलखिलाएँ हैं,हमारी शादव्ल,शफ़़फा़फ जौ इन्हीं से हैंसमेटती हूँ ..इन लम्हो की अहसासों को,हमारे हिस्स... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   9:47am 1 Aug 2016 #Sun light
Blogger: Pammi singh
कभी-कभी दैनिक दिनचर्या से दूर हो कर सोची कुछ अपनी मन की बात..(उम्र के किसी भी दौर में ये नटखटी अंदाज अनयास ही लबो को मुस्कराहटो से लबरेज कर जाती हैं)जाड़ो की सुबह और गर्म चाय का सम्बन्ध बड़ी गहरी ..मम्मी...(दूसरे कमरे से आवाज़)आज क्या बनेगापति और बच्चो के लिए मौसम किसी पिकनीक... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   12:00pm 14 Jul 2016 #
Blogger: Pammi singh
जो मिली वज़ा थी...बस एक चुप सी लगी है...जो मिली वज़ा थी जो मिली बहुत मिली है, बस एक बेनाम सा दर्द गुज़र करहर लम्हो को अपने नाम कर जाता,सुकूत हि रिज़क बनी हैपर इक जिद्द सी मची है ज़फा न होगी अब खिज़ा, हिज्र कीबस एक चुप सी...                                ©पम्मी... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   9:36am 27 Jun 2016 ##खिज़ा
Blogger: Pammi singh
आहटे नहीं हैउन दमदार कदमों के चाल की,गुज़रती है जेहन में ..वो बोल‘मैं हुँ न..तुमलोग घबराते क्यों हो?’वो सर की सीकन और जद्दोजहद,हम खुश रहे..ये निस्वार्थ भाव कैसे?आप पिता थे..अहसास है अब भीआपके न होकर भी होने कागुंजती है..तुमलोग को क्या चाहिए?पश्चताप इस बातन पुछ सकीआपको क्या ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   6:43pm 18 Jun 2016 #
Blogger: Pammi singh
इत्ती  सी  ज़िंदगी ,, इत्ता  सारा  काम. . अब  बोलो  कैसे  करु हाँ , जी  बस  करना  जरूर  हैं। ओ>> जिसे  छुट्टियाँ  कहते हैं  आई थी  चली  भी  गयी...भाई, हद  हो  गई   हर  दिन  की  इक  कहानी.. सब  की  छुट्टियों  में  अपना  हिस्सा  ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   9:46am 17 May 2016 #
Blogger: Pammi singh
लोगो नेये कौन सीऱीवाज पाल रखी जहाँ खुद कीपाकीजगी साबितकरने की चाह मेंदुसरो को गिराना पडा,मसाइबो की क्या कमीखुद की रयाजत औरउसके समर की है आस..रफाकते भी चंद दिनो कीपर मुजमहिल इस कदर किमैं हि मैं हूँ।न जाने वो इख्लास की छवि गई कहाँजहाँ अजीजो की भी थी हदेंखुदी की जरकाऱसाब... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   7:29am 30 Apr 2016 #छवि
Blogger: Pammi singh
मुड़  कर जाती  ज़ीस्त गुज़रते  लम्हों  को शाइस्तगी  से ताकीद   की, फ़र्ज़  और क़र्ज़  किसी  ओर  रोज़,खोने  और  पाने  का हिसाब  किसी  ओर  दिन, मुद्द्त्तो  के  बाद  मिली पलक्षिण  को  समेट  तो  लू,शाद  ने  भी शाइस्तगी  से ताकीद  ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   12:05pm 31 Mar 2016 #कर्ज.किसी
Blogger: Pammi singh
नूर-ए-रंग है फाग कीहमें खिलने के लिए,चंद रस्म नहीं सिर्फनिभाने के लिए,निखर कर निखार देपूर्ण चांद निकला हैये बताने के लिए..-    ©पम्मी                     ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:46pm 22 Mar 2016 #
Blogger: Pammi singh
ये मेआर...बेटियो सेमधु मिश्रित ध्वनि से पुछाकहाँ से लाती हो, ये मेआरनाशातो की सहर             हुनरमंद तह.जीब,और तांजीमसदाकत,शिद्दतो की मेआर,जी..मैने हँस कर कहाँमेरी माँ ने संवारा..उसी ने बनाया हैस्वयं को कस कर हर पलक्षिण मेंइक नई कलेवर के लिए शनैः शनैः प... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   3:25am 8 Mar 2016 #
Blogger: Pammi singh
जुम्बिशे  तो  हर    इक   उम्र  की  होगी कसमसाहटो  की  आहटे  भी  होगी ,शायद   इसलिए  हि कल  की  ज़िक्र  कर आज  हि  संवर  जाते , ज़िस्त  यू  हि कटती  जाती किसी  ने  कहाँ ?क्यू  कल  की  चिंता . . वो  भी  आजमा  कर.. रुकी  हुई  सी &n... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   10:18am 14 Feb 2016 #आहटें
Blogger: Pammi singh
कह  दो इन आइनों को नत हुआ है सच दस्तूर है आज का छद्म  रूप  के  सभी  है भक्त्त रोष  की आंच  में सभी  है  मस्त सत्य की  आंच कम  न  पड़  जाए इसलिए  लेखनी  को  सहारा मानती हूँ. .                                                  - © ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   8:51am 31 Jan 2016 #
Blogger: Pammi singh
                       स्वार्थ 'स्वार्थ 'शब्द   पर परिज्ञप्ति   चंद  परिज्ञा जी हाँ, स्वार्थ   ऐसी  प्रवृति  जो  हम  सभी  में  विराजमान ..  एक  संज्ञा  और  भाव  जो  सर्वथा  नकारात्मकता  ही संजोए   हुए  है। प्रश्न  है  स्वार्थ &nbs... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   9:57am 18 Jan 2016 #
Blogger: Pammi singh
                                                नव वर्ष  की नवोत्थित  शफ़क़ यूँ  ही  बनी  रहे हमारे  एवानो में आसाइशे  से नज़दीकियों की                                                              सफ़र बहुत... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   3:39pm 29 Dec 2015 #
Blogger: Pammi singh
नियतखामोश  जबानों  की भी  खुद  की  भाषा  होती  है कभी अहदे - बफा  के  लिए ,कभी  माहोल को काबिल  बनाने के  लिए मु.ज्तारिब क्या  करु नियत नहीं . . दुसरे  पर कीचड़ उछाल कर ख़ुद को कैसे साफ़ रखू।   कभी  खुद  के  घोसले ,कभी दुसरो के  तिनके  की पा... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   1:09pm 8 Dec 2015 #
Blogger: Pammi singh
                                                                               रिश्ते  आप  सभी  का    अभिनन्दन, ब्लॉग  जगत  का  एक  कोना   जहाँ कलम  भी अपनी दवात  भी  अपनी  और  विचार  भी  अपने। . चलें   ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   7:22am 24 Nov 2015 #
Blogger: Pammi singh
                                                तलाश                                                                                            स्वतंत्रता  तो उतनी  ही है  हमारी          जितनी लम्बी बेड़ियों  ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   9:53am 29 Oct 2015 #
Blogger: Pammi singh
                                              कुछ                               भावनाओं  , संवेदनाओं   एवम विचारों  की प्रस्तुतिकरण की   प्रयास ताकि शब्द और भावो  की अभिवयक्ति संजीदगी  से हो  कुछ से सबकुछ का सफर..… ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   7:32am 30 Sep 2015 #
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