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Blog: ग्रेविटॉन

Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
जैसी होअच्छी होऐसी ही रहना तुमकांटो की बगिया मेंतितली सी उड़ जानारस्ते में पत्थर होनदिया सी मुड़ जानाभँवरों की मनमानीगुप-चुप मत सहना तुमसांपों का डर हो तोचिड़िया सी चिल्लानाबाजों के पंजों मेंमत आना, मत आनाजो दिल को भा जाएउससे सब कहना तुमसूरज की किरणों सेमत खुद को चम... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:56am 17 Sep 2021 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
गड़गड़ाकरखाँसता हैएक बूढ़ा ट्रैक्टरडगडगाताजा रहा हैईंट ओवरलोड करसरसराती कार निकलीघरघराती बसधड़धड़ाती बाइकों नेगालियाँ दीं दसकह रही हैसाइकिल तकहो गया बुड्ढा अमरन्यूनतम का भी तिहाईपा रहा वेतनपर चढ़ी चर्बी कहें सबख़ूब इसके तनथरथराकरकांपता हैरुख हवा का देखकरठीक होता ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   5:18pm 27 Jun 2021 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
-----------------------------------------------------------------रेल बेच डाली मैंने तेल बेच डाला मैंने,न्याय बेच डालूँगा ईमान बेच डालूँगा।धान बेच डाला खलिहान बेच डाला मैंने,बोलेगा अदानी तो किसान बेच डालूँगा। बनिया हूँ भाई सही कीमत मिली जो मुझे,राष्ट्रगान क्या है संविधान बेच डालूँगा।बहुमत न मिला तो झोला ले... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   10:09am 27 May 2021 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बह्र : ११२१२ ११२१२ ११२१२ ११२१२किसी रात आ मेरे पास आ मेरे साथ रह मेरे हमसफ़रतुझे दिल के रथ पे बिठा के मैं कभी ले चलूँ कहीं चाँद परतुझे छू सकूँ तो मिले सुकूँ तुझे चूम लूँ तो ख़ुदा मिलेतू जो साथ दे जग जीत लूँ तूझे पी सकूँ तो बनूँ अमरमेरे हमनशीं मेरे हमनवा मेरे हमक़दम मेरे हमजबा... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   10:12am 17 May 2021 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
जब तक रहना जीवन मेंफुलवारी बन रहनापूजा बनकर मत रहनातुम यारी बन रहनादो दिन हो या चार दिनों काजब तक साथ रहेइक दूजे से सबकुछ कह देंऐसी बात रहेसदा चहकती गौरैया सीप्यारी बन रहनाफटे-पुराने रीति-रिवाजों को न ओढ़ लेनागली मुहल्ले का कचराघर में न जोड़ लेनादेवी बनकर मत रहनातुम ना... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:32pm 27 Nov 2019 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
ट्रेन समय की छुकछुक दौड़ीमज़बूरी थी जानाभूल गया सबयाद रहा बस तेरा हाथ हिलानातेरे हाथों की मेंहदी मेंमेरा नाम नहीं थाकेवल तन छूकर मिट जानामेरा काम नहीं थायाद रहेगा तुझकोदिल परमेरा नाम गुदानातेरा तन था भूलभुलैयातेरी आँखें रहबरतेरे दिल तक मैं पहुँचा पर तेरे पीछे चलकरद... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   4:22pm 3 Nov 2019 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
जाते हो बाजार पिया तो दलिया ले आनाआलू, प्याज, टमाटर थोड़ी धनिया ले आनाआग लगी है सब्जी में फिर भी किसान भूखाबेच दलालों को सब खुद खाता रूखा-सूखायूँं तो नहीं ज़रूरत हमको लेकिन फिर भी तुम बेच रही हो बथुआ कोई बुढ़िया ले आनाजैसे-जैसे जीवन कठिन हुआ मजलूमों कावैसे-वैसे जन्नत का सप... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   2:47pm 18 Oct 2019 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
मैंने कहा जानवरों की रक्षा करोउन्होंने मुझे महात्मा बता दियाअनेकानेक पुरस्कारों से मुझे लाद दियामैंने कहा पूँजीपतियों से जानवरों की रक्षा करोमेरी बात किसी ने नहीं सुनीकुछ ने तो मुझे पागल तक कह दियामैंने कहा इंसानों की रक्षा करोउन्होंने कहा तुम हरामखोरी का समर्थन... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   10:04pm 15 Jun 2019 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २----------------------------------------अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहोख़ुद को थोड़ा और निचोड़ो कोई ग़ज़ल कहोवक़्त चुनावों का है, उमड़ा नफ़रत का दर्याबाँध प्रेम का फौरन जोड़ो कोई ग़ज़ल कहोहम सबके भीतर सोई जो मानवता उसकोकस कर पकड़ो और झिंझोड़ो कोई ग़ज़ल कहोखर पतवार जहाँ है दिल के उन सब... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   7:37am 7 Apr 2019 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
मेरा पहला नवगीत संग्रह लोकोदय प्रकाशन, लखनऊ से प्रकाशित हो गया है। नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करके आप इसे अमेजन (www.amazon.in) से मँगा सकते हैं। इस संग्रह को लोकोदय नवलेखन सम्मान से सम्मानित किया गया है।नीम तले खरीदें... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   4:00pm 28 Feb 2019 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
एक गाँव में कुछ लोग ऐसे थे जो देख नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो सुन नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो बोल नहीं पाते थे और कुछ ऐसे भी थे जो चल नहीं पाते थे। उस गाँव में केवल एक ऐसा आदमी था जो देखने, सुनने, बोलने के अलावा दौड़ भी लेता था। एक दिन ग्रामवासियों ने अपना नेता चुनने का निर्णय लि... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   9:02am 5 Apr 2018 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
उसने कहा 2=3 होता हैमैंने कहा आप बिल्कुल गलत कह रहे हैंउसने लिखा 20-20=30-30फिर लिखा 2(10-10)=3(10-10)फिर लिखा 2=3(10-10)/(10-10)फिर लिखा 2=3मैंने कहा शून्य बटा शून्य अपरिभाषित हैआपने शून्य बटा शून्य को एक मान लिया हैउसने कहा ईश्वर भी अपरिभाषित हैमगर उसे भी एक माना जाता हैमैंने कहा इस तरह तो आप हर व... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   9:21am 2 Feb 2018 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
कब तक ऐसे राज करेगा तेरी ऐसी की तैसीतू केवल पूँजी का चमचा तेरी ऐसी की तैसीपाँच साल होने को हैं अब घर घर जाकर देखेगाकरती है कैसे ये जनता तेरी ऐसी की तैसीखाता भर भर देने का वादा करने वाले तूनेखा डाला जो खाते में था तेरी ऐसी की तैसीबापू का नाखून नहीं तू गप्पू भी सबसे घटिया ब... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   3:51pm 1 Jan 2018 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
मेरा पहला कहानी संग्रह अंजुमन प्रकाशन, इलाहाबाद से प्रकाशित हो गया है। नीचे दिये गये पुस्तक के कवर पर  क्लिक करके इसे 30% छूट के साथ अमेजन (www.amazon.in) से मँगवाया जा सकता है।... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   10:32am 16 Oct 2017 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बह्र : फायलातुन फायलातुन फायलातुन फायलुन----------जिस घड़ी बाज़ू मेरे चप्पू नज़र आने लगे।झील सागर ताल सब चुल्लू नज़र आने लगे।ज़िंदगी के बोझ से हम झुक गये थे क्या ज़रा,लाट साहब को निरे टट्टू नज़र आने लगे।हर पुलिस वाला अहिंसक हो गया अब देश में,पाँच सौ के नोट पे बापू नज़र आने लगे।कल तलक ... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   7:10pm 17 Jun 2017 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
मिल नगर से न फिर वो नदी रह गई।लुट गया शुद्ध जल, गंदगी रह गई।लाल जोड़ा पहन साँझ बिछड़ी जहाँ,साँस दिन की वहीं पर थमी रह गई।कुछ पलों में मिटी बिजलियों की तपिश,हो के घायल हवा चीखती रह गई।रात ने दर्द-ए-दिल को छुपाया मगर,दूब की शाख़ पर कुछ नमी रह गई। करके जूठा फलों को पखेरू उड़ा,रूह तक... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   4:05am 10 Jun 2017 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बिना तुम्हारेहे मेरी तुमसब आधा हैसूरज आधा, चाँद अधूराआधे हैं ग्रह सारेदिन हैं आधे, रातें आधीआधे हैं सब तारेधरती आधीसृष्टि अधूरीरब आधा हैआधा नगर, डगर है आधीआधे हैं घर, आँगनकलम अधूरी, आधा काग़ज़आधा मेरा तन-मनभाव अधूरेकविता कामतलब आधा हैफागुन आधा, मधुऋतु आधी आया आधा सावनआ... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   5:49pm 13 Feb 2017 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
महाबुद्ध से शिष्य ने पूछा, “भगवन! समाज में असत्य का रोग फैलता ही जा रहा है। अब तो इसने बच्चों को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। आप सत्य की दवा से इसे ठीक क्यों नहीं कर देते?”महाबुद्ध ने शिष्य को एक गोली दी और कहा, “शीघ्र एवं सम्पूर्ण असर के लिये इसे चबा-चबाकर खाओ, म... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   4:21am 9 Feb 2017 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बह्र : मफऊलु फायलातुन मफऊलु फायलुन (221 2122 221 212)है अंग अंग तेरा सौ गीत सौ ग़ज़लपढ़ता हूँ कर अँधेरा सौ गीत सौ ग़ज़लदेखा है तुझको जबसे मेरे मन के आसपास,डाले हुए हैं डेरा सौ गीत सौ ग़ज़ल।अलफ़ाज़ तेरा लब छू अश’आर बन रहे,कर दे बदन ये मेरा सौ गीत सौ ग़ज़ल।नागिन समझ के जुल्फें लेकर गया, सो अब,गाता ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:59pm 22 Jan 2017 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
ये दुनिया है भूलभुलैयारची भेड़ियों नेभेड़ों की खातिरपढ़े लिखे चालाक भेड़ियेगाइड बने हुए हैं इसकेओढ़ भेड़ की खालजिन भेड़ों की स्मृति अच्छी हैउन सबको बागी घोषित कररंग दिया है लालफिर भी कोई राह न पायेइस डर के मारेछोड़ रखे मुखबिरभेड़ समझती अपने तन परखून पसीने से खेती करउगा रही ज... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   5:54pm 14 Jan 2017 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बह्र : ११२१ २१२२ ११२१ २१२२जो करा रहा है पूजा बस उसी का फ़ायदा हैन यहाँ तेरा भला है न वहाँ तेरा भला हैअभी तक तो आइना सब को दिखा रहा था सच हीलगा अंडबंड बकने ये स्वयं से जब मिला हैन कोई पहुँच सका है किसी एक राह पर चलवही सच तलक है पहुँचा जो सभी पे चल सका हैइसी भोर में परीक्षा मेरी ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   4:49am 10 Jan 2017 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
है यही विनती प्रभो नव वर्ष ऐसा होएक डॉलर के बराबर एक पैसा होऊसरों में धान हो पैदारूपया दे पाव भर मैदाहर नदी को तू रवानी देहर कुआँ तालाब पानी देलौट आए गाँव शहरों सेहों न शहरी लोग बहरों से खूब ढोरों के लिये चोकर व भूसा होकैद हो आतंक का दानवऔर सब दानव, बनें मानवताप धरती का ज... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   1:56pm 31 Dec 2016 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बह्र : 2122 1122 1122 22दिल के जख्मों को चलो ऐसे सम्हाला जाएइसकी आहों से कोई शे’र निकाला जाएअब तो ये बात भी संसद ही बताएगी हमेंकौन मस्जिद को चले कौन शिवाला जाएआजकल हाल बुजुर्गों का हुआ है ऐसादिल ये करता है के अब साँप ही पाला जाएदिल दिवाना है दिवाने की हर इक बात का फिरक्यूँ जरूरी है... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   9:32am 23 Dec 2016 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बह्र : 1212 1122 1212 22प्रगति की होड़ न ऐसे मकाम तक पहुँचेज़रा सी बात जहाँ कत्ल-ए-आम तक पहुँचेगया है छूट कहीं कुछ तो मानचित्रों मेंचले तो पाक थे लेकिन हराम तक पहुँचेवो जिन का क्लेम था उनको है प्रेम रोग लगागले के दर्द से केवल जुकाम तक पहुँचेन इतना वाम था उनमें के जंगलों तक जायँनगर से ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   7:18am 15 Dec 2016 #
Blogger: धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’
बह्र : 2122 2122 2122 212आदमी की ज़िन्दगी है दफ़्तरों के हाथ मेंऔर दफ़्तर जा फँसे हैं अजगरों के हाथ मेंआइना जब से लगा है पत्थरों के हाथ मेंप्रश्न सारे खेलते हैं उत्तरों के हाथ मेंजोड़ लूँ रिश्तों के धागे रब मुझे भी बख़्श देवो कला तूने जो दी है बुनकरों के हाथ मेंछोड़िये कपड़े, बदन पर बच न पा... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   7:43am 4 Dec 2016 #
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