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प्रमोद बेड़िया इस गली के आख़िरी में एक घर टूटा हुआजैसे बच्चे का खिलौना हो कोई टूटा हुआ ।उसने मुझको कल कहा था आप आकर देखिए रहे सलामत आपका घर मेरा घर टूटा हुआ ।आप उसको देख कर साबित नहीं रह पाएँगे ,रोता कलपता सर पटकता मेरा घर टूटा हुआ ।ज़िंदगी भर जो कमाई की वो सारी गिर गई...
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  May 8, 2015, 12:00 am
संदीप द्विवेदी (वाहिद काशीवासी)आज के समय में हमारे देश में काव्य की अनेक विधाएँ प्रचलित हैं जो हमें साहित्य के रस से सिक्त कर आनंदित करती हैं। इनमें कुछ इसी देश की उपज हैं तो कुछ परदेश से भी आई हैं और यहाँ आकर यहाँ के रंग-ढंग में ढल गई हैं। ऐसी ही एक अत्यंत लोकप्रिय काव्य ...
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  May 7, 2015, 10:42 pm
2015 और 2014 के उस एक क्षण के मिलन में 2015 ने 2014 से पूछा, "बड़े भाई, आपका आशीर्वाद दें, साथ ही अपना अनुभव भी बताएँ, मुझे 365 दिनों का श्वास मिला है, ये दिन कैसे काटूँ ताकि जीवन शांत और अर्थपूर्ण रहे|"2015 ने कहा, "कोशिश करो कि प्रकृति और मानव के बीच एक सेतु बनो ताकि दोनों एक दूसरे से ला...
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  January 27, 2015, 10:07 pm
             संगीता शर्मा ‘अधिकारी’पोषित पीठ क्यों सोचते हो तुमतुम्हारी पीठ परकोई होक्या फ़र्क पड़ता हैइस बात सेकि कोई पोषित करेतुम्हारी पीठक्या सिर्फ इसलिएकि कोई न चढ़ बैठेंतुम्हारी छाती परपर क्यों नहीं सोचते तुमबित्ती भर भीकि किसी की छाती पर चढ़नाइतना आसान ...
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  January 11, 2015, 11:17 am
आखिर कब तक- प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा थूकना एक आम प्रवृति है. प्रकृति के अनुसार प्रायः विजातीय द्रव्य को बाहर निकालना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. प्रत्येक प्राणी के मुँह में लार बनती है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने का एक प्रमुख कारक है. खाना खाने में इसीलिए कम से कम ३२...
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  January 7, 2015, 9:12 pm
  जनवादी लेखक संघ का सातवाँ राज्य सम्मलेन 13 दिसम्बर को मुरादाबाद में संपन्न हुआ| सम्मलेन का उद्घाटन करते हुए जलेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रख्यात साहित्यकार दूधनाथ सिंह ने कहा कि दक्षिणपंथ ने कभी भी कोई बड़ा लेखक, कलाकार, संस्कृतिकर्मी नहीं पैदा कियाऔर न ही कर सकता ह...
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  January 4, 2015, 10:48 am
सुरेन्द्र अग्निहोत्रीसावधान ! यह चंचल मनप्रेम-प्रीत की बातें करता फिर सहलाता है कंगन छल से दपर्ण में भी रूप देख इठलाता मनसावधान ! यह चंचल मनदुर्गम-पथ का राही वनराह भुलाता यह दुश्मन तन से मन की बातें करताधक-धक करता रहता तन सावधान ! यह चंचल मनपलक मूँद कर जब बैठा था पायल की ...
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  January 3, 2015, 11:41 pm
          प्रो.शरद नारायण खरे(1)नए साल केअंदाज़निरालेनए काण्ड नए घोटाले(2)नए साल मेंफिल्मी नायिका नेनए ढंग सेकपड़े उघाड़ेनए रिकॉर्डबना डाले(3)नए वर्ष मेंक्रिकेटर्सनया तोहफालेकर आएँगे अब मैच फिक्सिंग केनएतौर तरीकेनज़र आएँगे (4)स्वच्छता अभियानमें नए प्रयोगनया इ...
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  January 3, 2015, 8:40 pm
आचार्य शीलक रामअंग्रेजी नव- वर्ष मंगलमय हो!जड- चेतन यहाँ सब निर्भय हो!!उत्सवमय कामना जीवन कीभरा करुणा से सबका हृदय हो!!अन्य में देखे सब अपने को!हकीकत को भाई;नहीं सपने को!!अपने में सब देखें दूसरों कोनहीं कोई भी यहाँ सुनो निर्दय हो!!प्रत्येक साल में बारह हैं महीने!कामना सबक...
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  January 3, 2015, 7:04 pm
किरण सिंहशब्द चुनकर छन्द में गढ़ उठे मन के भावना भरसुन्दर सॄजन कर डालूँक्यों न तुझे ही विषय बना लूँकोरा कागज़ मन मेरा हैजहाँ तुम्हारा चित्र सजा हैतेरे प्रीत से चित्र रंगा लूँक्यों न तुझे ही विषय बना लूँनित्य भोर उठ प्रीति भैरवीहाथ जोडकर करूँ पैरवीरागिनियाँ संग राग ...
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  December 21, 2014, 7:23 pm
          आगमन वार्षिक सम्मान समारोह रविवार दिनांक 23 नवम्बर 14 को कैलाश हॉस्पिटल,नोएडा के प्रेक्षागृह  में आयोजित किया गया | कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० केशरी लाल वर्मा (चेयरमैन, तकनीकी एवं वैज्ञानिक शब्दावली आयोग एवं निदेशक, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली) ने...
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  December 14, 2014, 12:17 pm
- राम दत्त मिश्र ‘अनमोल’सपने में माँ मिलती है।कली हृदय की खिलती है।।करुणा की है वो मूरत,आँसू देख पिघलती है।सुखी रहे मेरा जीवन,नित्य मनौती करती है।बिठा के मुझको गोदी में,सौ-सौ सपने बुनती है।उसकी तो नाराजी भी,आशीषों-सी फलती है।नहीं किसी के दल में है,नहीं किसी से जलती है।...
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  December 14, 2014, 11:28 am
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, दिल्ली के ‘अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र’ में 'शब्द व्यंजना'और 'सन्निधि संगोष्ठी'के संयुक्त तत्वाधान में 'सारांश समय का'कविता-संकलन का लोकार्पण समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसून लतांत ने की, जबकि ...
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  December 14, 2014, 10:15 am
रक्त रंजितहोरहेफिर फिरहमारेगाँव।हरतरफविद्वेष कीलपटेंहवाहैगर्म,चलरहा हैहाथमेंतलवारलेकरधर्म,बढ़ रहें हैंअनवरतआगेघृणाकेपाँव।भयजगातीअपरचितध्वनिरोकती पथ,डगमगातासहजजीवनकासुखदरथ,नहींमिलतीदग्धमनकोकहींशीतलछाँव।--- त्रिलोक सिंह ठकुरेला ...
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  December 12, 2014, 10:58 pm
एक स्त्री का जब जन्म होता है तभी से उसके लालन-पालन और संस्कारों में स्त्रीयोचित गुण डाले जाने लगते हैं| जैसे-जैसे वह बड़ी होती है उसकेअन्दर वे गुण विकसित होने लगते हैं| प्रेम, धैर्य, समर्पण, त्याग ये सभी भावनाएँ वह किसी के लिए संजोने लगती है और यूँ ही मन ही मन किसी अनजाने-अन...
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  December 12, 2014, 12:08 am
अँधेरों में जब लिपटी थी रूह मेरीतुम आए एक रौशनी बनकरथी चारों तरफ स्याही निराशा कीतुम आए थे उम्मीद बनकरअमावस की रात मैं थी बनी हुईतुम आए तब पूर्णिमा का चाँद बनकरसुलझाने लग गयी मैं जब पहेलियाँसवाल बना दिया तुमने परिचय मुझसे तेराकरने लगी थी मैंमुस्कुराने की कोशिश तुम च...
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  December 11, 2014, 9:05 pm
       6नवम्बर, 2014को 7वें राष्ट्रीय पुस्तक मेला, इलाहाबाद में प्रो. राजेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में सामयिक प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित कथाकार महेन्द्र भीष्म के कहानी संग्रह ’लाल डोरा और अन्य कहानियाँ’ का लोकार्पण व परिचर्चा संपन्न हुई।  मुख्य वक्ता श्री प्र...
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  December 4, 2014, 8:57 pm
साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला को पंचवटी लोक सेवा समिति द्वारा हिन्दी पखवाड़े के समापन अवसर पर राष्ट्र-भाषा हिन्दी के संवर्द्धन में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए राष्ट्र भाषा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। मोहन गार्डन स्थित रेड रोज माडल स्कूल, मोहन गार्डन में राष...
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  December 4, 2014, 8:48 pm
(१)सहजसफललखमतअचरजकरउसजनपरकरवरदसरसलख डगमगडगमगहरपगहरक्षणतबलखनभपररखउसपरनख तनमनधनतजबसभगवनभजसररजधररससरससरसचख हटचलभकधतमतकररतरहजलजवजलसमबनवहमनरख कृतिकार- डॉ.आशुतोषवाजपेयी (२)जलबरसत– डमरूघनाक्षरीपवनबहनलग, सरसरसरसर,जलबरसतजसझरतसरसरस।लहरलहरनद , जलदग...
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  November 10, 2014, 9:38 pm
मधुकर अष्ठानाजन्म- 27-10-1939शिक्षा- एम.ए. (हिंदी साहित्य एवं समाजशास्त्र)प्रकाशन- सिकहर से भिनसहरा (भोजपुरी गीत संग्रह), गुलशन से बयाबां तक (हिंदी ग़ज़ल संग्रह) पुरस्कृत, वक़्त आदमखोर (नवगीत संग्रह), न जाने क्या हुआ मन को (श्रृंगार गीत/नवगीत संग्रह), मुट्ठी भर अस्थियाँ (नवगीत संग्र...
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  October 2, 2014, 8:50 am
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