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Blog: कलम

Blogger: maheshalok
                                           महेश आलोक की बेतरतीब डायरी(58)मैं जब सोता हूँ उस समयकविता नहीं रच रहा होता हूँकविता मुझे थपकी देकर सुलाती हैबन्धु! मैं हमेशा जागती हूँरचने के लियेस्वप्न देखना जरुरी है(59)कविता लिखना अन्ततः कला नहीं है।लेकिन बिन... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   4:31am 9 May 2016 #
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                                                     बेतरतीब(54)कभी कभी सोचता हूँ, हमारे समाज में जब-जब साम्प्रादायिक दँगे होते हैं,समाज में समरसता पैदा करने के लिये,सद्भाव पैदा करने के लिये कबीर की कविता याद आती है।आधुनिक हिन्दी कविता का कोई कवि क्यो... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   6:36am 20 Mar 2016 #
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                          एक कवि की नोटबुक(कुछ कवितानुमा टिप्पणियां)        (45)बहुत-बहुत लोग कविता लिखते हैं।उन्हे यह नहीं पता कविता कैसे लिखते हैं। समकालीन काव्य भाषा और मुहावरे का भी अपना सर्जनात्मक सँस्कार होता है।उस सँस्कारित चेतना के बिना कविता लेखन... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   8:42am 24 Jan 2016 #
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                                              महेश आलोक की डायरी                                                                  (1)उसे आग बहुत पसन्द है।जीवन हो या कविता या गद्य- हर जगह उसे आग चाहिये। वह निरन्तर भाग रहा है उस आग के ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   3:00pm 29 Dec 2015 #
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                         महेश आलोक की डायरी                                                           (1)आज महाविद्यालय में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ। फूहड़ हास्य और ओज के नाम से सांस्कृतिक पुनरुत्थान की गलाफाडू कविताएं सुनाई गयीं। श्र... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   3:04pm 23 Dec 2015 #
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एक कवि की नोटबुक- महेश आलोक                                                                  (1)मैं जिस क्षेत्र (शिकोहाबाद)में रह रहा हूँ वह ब्रज क्षेत्र में आता है। ब्रज वैसे भी मँचीय कविता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ लोगों की स्मृति में हिन्दी के प्र... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   2:46pm 9 Dec 2015 #
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कुछ कवितानुमा टिप्पणियाँ(महेश आलोक की बेतरतीब डायरी)                                                             (1)मैं नियति पर विश्वास नहीं करता। लेकिन अगर इस शब्द का इस्तेमाल करना ही पड़े तो क्या इस तरह कहा जा सकता है क्या कि मेरे द्वारा देखे गये ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   2:31pm 5 Dec 2015 #
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कुछ कवितानुमा टिप्पणियाँ(महेश आलोक की बेतरतीब डायरी)एक कविता जिसे आप बोध कविता-कथा कह सकते हैं-एक राजा को उपहार में बाज के दो बच्चे  मिले । वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे। राजा ने देखभाल के लिए एक आदमी को नियुक्त कर दिया। कुछ समय बीत जाने पर राजा बाजों को देखने उस जगह पहुँच ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   1:38pm 14 Nov 2015 #
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                                                        (1)मैं दुखी नहीं हूँ।कवि अपने आप से दुखी हो ही नहीं सकता।वह तो समाज के दुखी होने से दुखी होता है। समाज उसकी कविता में हँसे, उछले, कूदे, करवटें ले, ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   1:37pm 13 Nov 2015 #
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                 डा0महेश आलोक को वर्ष 2013 का उ0प्र0हिन्दी संस्थान का                      विश्वविद्यालय स्तरीय साहित्यकार सम्मान मिला डा0महेश आलोकडा0महेश आलोक को वर्ष 2013 का उ0प्र0हिन्दी संस्थान का विश्वविद्यालय स्तरीय साहित्यकार सम्मान प्राप्त हुआ है... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   7:57am 4 Nov 2014 #
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 (नारायण महाविद्यालय में‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ पर गोष्ठी एवं मानव श्रृंखला बनाकर                      पटेल जयन्ती मनायी गयी)डा0महेश आलोक बोलते हुएशिकोहाबाद- ‘अगर सरदार पटेल देश के प्रथम प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर समस्या जो आज विकराल रुप धारण किये है,उसका ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   7:51am 4 Nov 2014 #
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                                                                            गांधी अहिंसा और स्वच्छता की प्रयोगशाला हैं                                                                    (नारायण महाविद्यालय में ‘गां... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   6:21am 4 Nov 2014 #
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                                 हिन्दी दिखावे की भाषा नहीं है, आत्म-सम्मान की भाषा है           (नारायण महाविद्यालय में ‘हिन्दी दिवस’ पर परिचर्चा एवं प्रश्न-मंच का आयोजन)’‘हिन्दी का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं हो सकता।देश को विकसित और शिक्षित करने के ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   10:08am 25 Sep 2014 #
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नहीं रहे अमरकांत (http://onlinehindijournal.blogspot.in/  से साभार)कथाकार अमरकांत- डा०मनीश कुमार मिश्र        उत्तर प्रदेश में जिला बलिया के तहसील ‘रसड़ा’ के सुपरिचित गाँव ‘नगरा’ से सटा हुआ एक छोटा सा गाँव और है - ‘भगमलपुर’। यह गाँव नगरा गाँव का एक टोला/अंश/... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   1:55pm 21 Feb 2014 #
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प्रख्यात आलोचक डा० परमानन्द श्रीवास्तव का निधन प्रख्यात आलोचक डा० परमानन्द श्रीवास्तवराजेन्द्र यादव, सूफी गायिका रेशमा और अब प्रख्यात आलोचक डा० परमानन्द श्रीवास्तव का निधन हो जाना, न भरी जाने वाली गहरी क्षति है। वे वेन्टिलेटर पर थे, सुधार हो रहा था। हम सभी को विश... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   10:27am 5 Nov 2013 #
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        मैं सचमुच चिन्तित हूं। क्या मेरी पीढ़ी की युवा कविता रैखिक आग्रह या सामयिकता के रैखिक दबाव में लिखी जा रही है कि उसे जीवन में सुख-उल्लास का निरंतर अभाव  शुष्क से शुष्कतर किए जा रहा है। ऐसा कहते हुए मैं स्वयं को कटघरे में खड़ा पाता हॅू ।क्या हम उल्लास, राग और ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   1:56am 16 May 2013 #
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  कला के माध्यम से ईश्वर को भी पा सकते हैं                             फिल्मों ने कला के स्तर को क्षति पहुंचाई                                                                                                            &... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   6:36am 4 May 2013 #
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               अज्ञेय की काव्य दृष्टि: कुछ नोट्स                       (तार सप्तक एवं दूसरा सप्तक के संदर्भ में)                                                              &nb... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   2:40pm 15 Mar 2013 #
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सशक्त कथा शिल्पी कामतानाथ को हार्दिक श्रद्धांजलि-  महेश आलोक       सशक्त कथा शिल्पी के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले रचनाकार कामतानाथ का  लखनऊ स्थित डॉ राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस में शुक्रवार की रात लगभग 9 बजे निधन हो गया.वह 78 वर्ष के थे ।.स... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   8:48am 10 Dec 2012 #
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नवउदारवाद, बाजारवाद और अवसरवादी राजनीति ने हिन्दी को बहुत पीछे धकेल दिया है-डा0. वैदिकडा0 वैदिक बोलते हुए साथ में बैठे हुए बाएं उदयप्रताप सिंह तथा दाएं शब्दम् अध्यक्ष श्रीमती किरन बजाजकार्यक्रम विषय- हिन्दी मीडिया से वर्तमान एवं भविष्य को उम्मीदें तथा हिन्दी सेवी ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:09am 1 Dec 2012 #
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आओ कि देवताओं से साक्षात्कार करते हैं, पूछते हैं उनसे कि किस तरह रहते हैं इतनी उॅंचाई पर हमसे दूर रहकर हमारी आपदाओें पर हंसते हुए आओ देखें कि किस तरह उनका कटता है दूसरों की विपत्तियों पर हंसते हुए उनका दिन कैसे गुजरती हैं उनकी रातें ।हमारी अन्धकार भरी दुनिया ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   4:30pm 16 Nov 2012 #
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          आवास व्यवस्था  किसी भी संस्कृति का एक महत्व्पूर्ण अंग है। यह सर्वमान्य है कि आवासों का निर्माण एवं उसका स्वरूप उसके निर्माताओं की आवश्यकताओं एवं चतुर्दिक पर्यावरण पर  आधारित होता है। इसके अतिरिक्त निर्माण हेतु उपलब्ध सामग्री एवं संस्कृतियों का तक... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:50pm 12 Nov 2012 #
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                                                    और तब ईश्वर का क्या हुआ? - 1                                                        स्टीवन वाइनबर्ग                           ( यह आलेख ‘समय के साये में’ से साभार यह... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   2:13pm 3 Oct 2012 #
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