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मेरी कवितायें..

भंवर से कश्ती लगेगी किनारे कैसे?  ‘गज़ल’ को रख सका हैपहरे में ‘अरुण’कौन,पलक झपकते बदलते हैं रुख ‘रदीफ़-ओ-काफिये’बया ने मुश्किलों में बनाया ‘घरौंदा’ अपना तूफां ने इक पल में उड़ा दिए तिनके-तिनके छोड़कर चप्पू, ‘बूढ़े हाथों’ में, तुम निकल लियेभंवर से कश्ती लगेगी किनारे कैसे?अ...
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  January 18, 2018, 6:10 pm
तन्हां इस शहर में नहीं कोई शख्स  तन्हाई आये भी तो कैसे आये उनके पास सुबह होती है जिनकी, शाम की रोटी की फ़िक्र के साथ ,तन्हां इस शहर में नहीं कोई शख्स ‘अरुण’फ़िक्र-ओ-गम की बारात है सबके साथ,पीठ पर लादे प्लास्टिक का थैला, नहीं वो अकेला भोंकते कुत्तों की फ़ौज पीछे पीछे है उसक...
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  December 21, 2017, 2:10 pm
घर में रहें राधा डरी डरीछोड़ गए बृज कृष्ण, गोपी किस्से खेलें फ़ाग कहला भेजा मोहन ने, नहीं वन वहाँ, क्या होंगे पलाश?नदियों में जल नहीं, न तट पर तरुवर की छायागोपियाँ भरें गगरी सार्वजनिक नल से, आये तो क्यों आये बंसीवाला?घर में रहें राधा डरी डरी, सड़कों पर न कोई उनका रखवालाअब तो आ ...
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  December 16, 2017, 4:03 pm
तैरना आना पहली शर्त है नाव भी मैं, खिवैय्या भी मैंलहरों से सीखा है मैंने तूफां-ओ-आंधी का पता लगाना,जो बहे लहरों के सहारे, डूबे हैं तैरना आना पहली शर्त है समंदर में उतरने की,धारा के साथ तो बहते, शव हैं  मैं शव तो नहीं मुझे आता है दरिया पार करना, तुम्हें मिला समंदर, तुम्हारी ...
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  November 23, 2017, 4:30 pm
पीढ़ियाँ पर बढेंगी इसी राह पर आगेकोट के काज में फूल लगाने से कोट सजता है फूल तो शाख पर ही सजता है,क्यों बो रहे हो राह में कांटे तुम्हें नहीं चलना पीढ़ियाँ पर बढेंगी, इसी राह पर आगे,तुम ख़ूबसूरत हो, मुझे भी दिखे है ख़ूबसूरती के पीछे है जो छिपा, वो भी दिखे है,मैं न हटाता चाँद सितार...
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  November 19, 2017, 11:49 pm
नाव में पतवार नहींहुजूर, आप जहां रहते हैं, दिल कहते हैं,उसे ठिकाना नहीं, शीशे का घर है संभलकर रहियेगा, हुजूरटूटेगा तो जुड़ेगा नहीं,यादों की दीवारे हैं इश्क का जोड़ बेवफाई इसे सहन नहीं,ओ, साजिशें रचने वालोघर तुम्हारा हैक्या इसका एतबार नहीं?अपना रास्ता खुद बनायामोहताज न रह...
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  November 11, 2017, 5:20 pm
ये आलिमां भी बहायेंगे आब-ए-तल्ख़कैसे कैसों को दिया है,इंसान होकर सांप से डसते रहे,उन्हें भी दिया है,इस बार क्यों न सांप से ही डसवा लें,दूध की जगह खून पिलवा दें,दो गज जमीन के नीचे,2×3 के गढढे में,इंसानियत को दफना दें,ये तय जानकर,खून के दरिया को हमें पार न करना होगा,बाकी कायनात क...
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  November 11, 2017, 5:17 pm
अमावस की रात को चाँद का गायब होनाकोई नई बात नहींजहरीली हवाओं की धुंध इतनी छाईपूनम की रात को भी चाँद गायब हो गया|दिल में सभी के मोहब्बत रहती है कोई नई बात नहीं हमने मोहब्बत इंसानियत से की ये गजब हो गया| कहते हैं दर्द बयां करने से कम होता हैहमने बयां कियादर्द तो कम न हुआलोग ...
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  November 8, 2017, 12:55 pm
जिन्दगी का शायर हूँ जिन्दगी का शायर हूँ, मौत से क्या मतलब मौत की मर्जी है, आज आये, कल आये| टूट रहे हैं, सारे फैलाए भरम ‘हाकिम’ के,‘हाकिम’ को चाहे यह बात, समझ आये न आये|वो ‘इंसा’ गजब वाचाल निकलाबात उसकी, किसी को समझ आये न आये|‘आधार’ जरुरी है ‘जीवन’ के लिये‘आधार’ बिना रोटी नहीं...
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  November 6, 2017, 1:41 am
लोग सुनकर क्यूं मुस्कराने हैं लगे और भी खबसूरत अंदाज हैं मरने के लेकिनइश्क में जीना 'अरुण'को सुहाना है लगे क्यूं करें इश्क में मरने की बातइश्क तो जीने का खूबसूरत अंदाज है लगे दिल में आई है बहार जबसे पतझड़ को आने से डर है लगे हमें क्या मालूम महबूब का पता दिल ही उसक...
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  November 4, 2017, 1:57 am
ईश्वर भी अब मालिक हो गया है  पत्थर के देवता अब जमाने को रास नहीं आते संगमरमर के गढ़े भगवान हैं अब पूजे जाते,ईश्वर किसी मालिक से कम नहीं   मुश्किल है उसका मिलना रास्ते में आते जाते, भक्त को नहीं जरूरत कभी मंदिर जाने की भगवान उसके तो उसके साथ ही हैं उठते, बैठते, खाते,मंदि...
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  October 13, 2017, 5:39 am
लोकतंत्र में संघर्ष और संघर्ष प्रत्येक संघर्ष का लक्ष्य विजय विजय का अर्थ दोवक्त की रोटी/ दो कपड़े /सर पर छतअभावहीन जीवन जीने की चाहत बनी रहेगी जब तक विजय का अर्थ जारी रहेगा संघर्ष तब तक संघर्ष निरंतर हैसंघर्ष नियति है लोकतंत्र में|  क्लेश और क्लेश उत्सवधर्मी देश में ...
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  October 8, 2017, 4:57 pm
यह कैसा राजा हैयह कैसा राजा हैराजा है या चारण है खुद ही खुद के कसीदे गा रहा है|फ्रांस की रानी ने कहा थारोटी नहीं तो केक खाओ भारत में राजा भूखे को हवाई यात्रा करा रहा है|इसका विकास अजब है इसका चश्मा गजब है दिवाली से 15 दिन पहले दिवाली मना रहा है| यह राजा है या ब्रम्ह राक्षस इस...
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  October 8, 2017, 4:09 pm
शरद की वो रातशरद की वो रात आज वापस ला दो आसमान से बरसती काली राख बस आज रुकवा दो बन चुकी है खीर घर में उसे कैसे रखूं मैं खुले आसमां के नीचे ऐ चाँद एक काम करो आज मेरे चौके में ही आ जाओ और बूँद दो बूँद अमृत उसमें टपका दोअरुण कान्त शुक्ला, 5 अक्टोबर, 2017   ...
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  October 6, 2017, 12:04 am
अपना नसीब खुद बनाते हैं बड़ा ही बेदर्द सनम उनका निकला वो जां लुटा बैठे वो मैय्यत में भी न आया,  इश्क अंधा होता है वहां तक तो ठीक था वो अंधे होकर पीछे पीछे चल पड़े  ये गजब हो गया, कुछ दिन पहले तक उन्हें लगता था कहीं कोई दहशत नहीं अब उन्हें लगता है दहशत घुल गई है आबो-ऐ–हवा में, ...
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  September 24, 2017, 12:56 am
इस बरसात में पहली बार बारिश हुई इस बरसात में पहली बार भीगी सहर देखी इस बरसात में,पहली बार सड़कें गीली देखीं इस बरसात में पहली बार कीचड़ सने पाँव धोये आँगन में इस बरसात में,पहली बार साँसों में सौंधी खुशबू गई इस बरसात में पहली बार कच्छा-बनियान नहीं सूखीं इस बरसात में,सूखी तो ...
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  September 20, 2017, 11:15 pm
तुम्हारी मन की बात परप्रश्न सारे उठाकर रख दो ताक पर, जिसे जबाब देना है उसकी औकात नहीं जबाब देने की, पथ केवल एक ही शेष ठान लो मन में बाँध लो मुठ्ठियाँनिकल पड़ो, ख़ाक में उसे मिलानेजो चुप रहता है हर बवाल परउसकी कोई औकात नहीं   प्रश्न उठाने की हमारे इस जबाब पर,अ...
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  August 28, 2017, 1:36 pm
फहराएंगे कल तिरंगा आराम सेहाकिम का नया क़ायदा है रहिये आराम से, गुनहगार अब पकडे जायेंगे नाम से,हाकिम को पता है उसकी बेगुनाही,वो तो सजावार है उसके नाम से,उसका सर झुका रहा कायदों की किताब के सामने,हाकिम को चिढ़ है उस किताब के नाम से,जो जंग-ऐ- आजादी से बनाए रहे दूरियां,फहराएं...
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  August 14, 2017, 11:28 pm
तिनकों से बने सपनेतिनकों से बने सपने तो , हवा के हलके झोके से बिखर जाते हैं, आंधी तो आती है आशियाने उजाड़ने , सर उठाकर खड़े पेड़ों को उखाड़ने , जो जीवन भर की मेहनत से बनते हैं, जो वर्षों में सर उठाकर खड़े होते हैं , इसीलिये हम रेत के महल नहीं बनाते , तिनकों से सपने नहीं ...
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  June 8, 2017, 1:21 am
खुशीजख्म परायों ने दिए, मैं मुस्कराता रहा, जख्म तुमने दिए, मैं हँस दिया,बेवफाई के दौर से गुजरते हैं सभी, मैं भी गुजरा,बेवफाई जब तुमने की,मैं हंस दिया,गुम्बद मीनार पर चढ़कर,इतराने लगा,तब नींव का पत्थर, उसके गुरुर पर हंस दिया,मुश्किलें बहुत आईं जिन्दगी में,मुस्करा कर...
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  May 26, 2017, 10:08 pm
तपिश ये तपिश सिर्फ सूर्य की तो नहीं इसमें कोई मिलावट है,यूँ लगता है जैसे कोई घाम में आग घोल रहा है, ये थकान सिर्फ चलने की तो नहींइसमें कोई मिलावट है,यूँ लगता है जैसे कोई पाँव में पत्थर बाँध कर चला रहा है,ये दुश्मनी सिर्फ मेरी तेरी तो नहीं इसमें कोई मिलावट है,यूँ लगता है जैस...
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  April 4, 2017, 6:10 pm
और कारवां न वाह वाह का शोर न तालियों की गडगडाहटन मित्रों की पीठ पीछे दी गईं गालियाँ न भीड़ में पारित निंदा प्रस्ताव कोई भी तो मुझे डिगा नहीं सका मेरे चेहरे पर न एक दाग लगा सका सबसे बेखबर बेपरवाह आज भी मैं बढ़ रहा हूँ मंजिल-ऐ-ज़ानिब की ओर कारवां के साथ और कारवां वह तो बनता गया ...
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  January 3, 2017, 4:10 pm
सदियों बाद की पीढ़ी भीएक दिनहोगा राज हमारा |2|हिसाब तुम्हारा किया जाएगा |2|छांट छांट कर |2|छांट छांट कर एक एक गुनाह की, सज़ा मुकर्रर की जायेगी|2|जब होगी मौत तुम्हें|2| जब होगी मौत तुम्हें धरती के,इतने नीचेदफ़न किया जाएगा|2|सदियों बाद की पीढ़ी को|2| सदियों बाद की पीढ़ी को जब,मिलेंगी हड्...
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  January 3, 2017, 4:04 pm
सदियों बाद की पीढ़ी भीएक दिनहोगा राज हमारा |2|हिसाब तुम्हारा किया जाएगा |2|छांट छांट कर |2|छांट छांट कर एक एक गुनाह की, सज़ा मुकर्रर की जायेगी|2|जब होगी मौत तुम्हें|2| जब होगी मौत तुम्हें धरती के,इतने नीचेदफ़न किया जाएगा|2|सदियों बाद की पीढ़ी को|2| सदियों बाद की पीढ़ी को जब,मिलेंगी हड्...
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  January 3, 2017, 2:07 pm
घुप्प, शुभ्र घना कोहराघुप्प, कारी अमावस की रात के अँधेरे को परास्त कर देता है एक छोटे से टिमटिमाते दिए का प्रकाश पर घुप्प, शुभ्र घने कोहरे को कहाँ भेद पाता है अग्नि पिंड सूर्य का प्रकाश प्रकाश का अँधेरे को परास्त करना है अज्ञान पर ज्ञान की जीत पर, कोहरे को परास्त नहीं कर ...
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  December 20, 2016, 11:22 am
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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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