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Blog: मेरी कवितायें..

Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
हाशिये के आदमी पर कविता कविता चौराहे पर देखी कविता सड़क पर देखीकविता मंच पर देखी कविता के नाम पर कवि को चुटकुले सुनाते भी देखा  कविता हाशिये पर देखी कविता हाशिये के आदमी पर भी देखी कवि को हाशिये पर पड़े आदमी पर कविताएँ सुना सुना कर वाह-वाही लूटते भी देखा आज उसी कवि ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   6:25pm 29 Jan 2019 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
गणतन्त्र दिवस की संध्या में—सर उठाकर जीने वाले... जन गीत शनै: शनै: खोया इतना कि,क्या क्या खोया याद नहीं,बस याद है तो इतना कि,न खोईंहमारी उम्मीदें,की कभी कोई फरियाद नहीं,बंद मुट्ठी हवा में लहराते,लड़ लड़ कर हक लेते आए हैं,सर उठाकर जीने वाले,सर झुकाकर कहाँ जी पाएंगे?तख्त बदले, त... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   12:25pm 28 Jan 2019 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
कभी गिरेबां में भी झांककर देखिये जनाबअसलियत सिर्फ सामने देखने से नहीं पता चलती,कभी गिरेबां में भी झांककर देखिये जनाब,सवाल पूछते रहना नहीं कोई खासियत,सवालों के कभी जबाब भी दीजिए जनाब,माना, आपने करोड़ों को पहनाई है टोपी,कभी करोड़ों के खातिर आप भी टोपी पहनें जनाब,बहुत हुईं... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   11:59am 23 Dec 2018 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
इस दौर में जो चुप हैं,जाहिर है वो बच जायेंगे,पर, ये कोई अकेला दौर नहीं है,कि, वो हमेशा के लिये बचे रह पायेंगे,इस दौर के बाद एक दौर और आयेगा, उन्हें मारने के लिये, जो पहले दौर में चुप थे, जाहिर है, हुकूमत को हर दौर में पता होता है, हुकुम के खातिर कौन है, हुकुम के खिलाफ कौ... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   10:50am 4 Dec 2018 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
उसी उदास शाम की राह तकते हुएथकी हुई उदास शाम, रोज की तरह, फिर आई है मेरे साथ वक्त बिताने, मैं सोचता हूँ, उसे कोई नया तोहफा दे दूं, मुस्कराने की कोई वजह दे दूं, आखिर कायनात जुडी है उसके साथ, वो क्यों उदास हो, उदास शाम के साथ, पर मेरी झोली में, रोज की तरह, और कुछ भी नया नहीं है, उसे... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   1:47pm 13 Oct 2018 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
साफ़ सुथरा कचरा और जीने के लिए मरने की लाचारीख़ूबसूरत कपड़े, शानदार सहायक, साफ़ सुथरा कचरा, ये सब सफाई कर्मचारियों को मिल जाए तो..गलतफहमी में न रहिये,प्रधानमंत्री हैं ये सफाई कर्मचारी नहीं,इसी दिल्ली में ८ दिन पहले सीवरेज की जहरीली गैस से ५ और मरे थे, वे भी सिर्फ कर्म... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   6:12pm 17 Sep 2018 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
श्रद्धांजली केदार को वे कभी मरते नहीं जिस क्षण उनकी देह बंद कर देती है सांस लेना उसी क्षण से साँसे लेने लगती हैं उनकी कविता उसी क्षण से बातें करने लगते हैं उनके उपन्यास, उनकी कहानी, नाटक के पात्र उनकी तूलिकाएं गीत गाने लगती हैं और उनकी बनाई तस्वीरें ड्राईं... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   11:48am 20 Mar 2018 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
भंवर से कश्ती लगेगी किनारे कैसे?  ‘गज़ल’ को रख सका हैपहरे में ‘अरुण’कौन,पलक झपकते बदलते हैं रुख ‘रदीफ़-ओ-काफिये’बया ने मुश्किलों में बनाया ‘घरौंदा’ अपना तूफां ने इक पल में उड़ा दिए तिनके-तिनके छोड़कर चप्पू, ‘बूढ़े हाथों’ में, तुम निकल लियेभंवर से कश्ती लगेगी किनारे कैसे?अ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   12:40pm 18 Jan 2018 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
तन्हां इस शहर में नहीं कोई शख्स  तन्हाई आये भी तो कैसे आये उनके पास सुबह होती है जिनकी, शाम की रोटी की फ़िक्र के साथ ,तन्हां इस शहर में नहीं कोई शख्स ‘अरुण’फ़िक्र-ओ-गम की बारात है सबके साथ,पीठ पर लादे प्लास्टिक का थैला, नहीं वो अकेला भोंकते कुत्तों की फ़ौज पीछे पीछे है उसक... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   8:40am 21 Dec 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
घर में रहें राधा डरी डरीछोड़ गए बृज कृष्ण, गोपी किस्से खेलें फ़ाग कहला भेजा मोहन ने, नहीं वन वहाँ, क्या होंगे पलाश?नदियों में जल नहीं, न तट पर तरुवर की छायागोपियाँ भरें गगरी सार्वजनिक नल से, आये तो क्यों आये बंसीवाला?घर में रहें राधा डरी डरी, सड़कों पर न कोई उनका रखवालाअब तो आ ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   10:33am 16 Dec 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
तैरना आना पहली शर्त है नाव भी मैं, खिवैय्या भी मैंलहरों से सीखा है मैंने तूफां-ओ-आंधी का पता लगाना,जो बहे लहरों के सहारे, डूबे हैं तैरना आना पहली शर्त है समंदर में उतरने की,धारा के साथ तो बहते, शव हैं  मैं शव तो नहीं मुझे आता है दरिया पार करना, तुम्हें मिला समंदर, तुम्हारी ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   11:00am 23 Nov 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
पीढ़ियाँ पर बढेंगी इसी राह पर आगेकोट के काज में फूल लगाने से कोट सजता है फूल तो शाख पर ही सजता है,क्यों बो रहे हो राह में कांटे तुम्हें नहीं चलना पीढ़ियाँ पर बढेंगी, इसी राह पर आगे,तुम ख़ूबसूरत हो, मुझे भी दिखे है ख़ूबसूरती के पीछे है जो छिपा, वो भी दिखे है,मैं न हटाता चाँद सितार... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   6:19pm 19 Nov 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
नाव में पतवार नहींहुजूर, आप जहां रहते हैं, दिल कहते हैं,उसे ठिकाना नहीं, शीशे का घर है संभलकर रहियेगा, हुजूरटूटेगा तो जुड़ेगा नहीं,यादों की दीवारे हैं इश्क का जोड़ बेवफाई इसे सहन नहीं,ओ, साजिशें रचने वालोघर तुम्हारा हैक्या इसका एतबार नहीं?अपना रास्ता खुद बनायामोहताज न रह... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   11:50am 11 Nov 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
ये आलिमां भी बहायेंगे आब-ए-तल्ख़कैसे कैसों को दिया है,इंसान होकर सांप से डसते रहे,उन्हें भी दिया है,इस बार क्यों न सांप से ही डसवा लें,दूध की जगह खून पिलवा दें,दो गज जमीन के नीचे,2×3 के गढढे में,इंसानियत को दफना दें,ये तय जानकर,खून के दरिया को हमें पार न करना होगा,बाकी कायनात क... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   11:47am 11 Nov 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
अमावस की रात को चाँद का गायब होनाकोई नई बात नहींजहरीली हवाओं की धुंध इतनी छाईपूनम की रात को भी चाँद गायब हो गया|दिल में सभी के मोहब्बत रहती है कोई नई बात नहीं हमने मोहब्बत इंसानियत से की ये गजब हो गया| कहते हैं दर्द बयां करने से कम होता हैहमने बयां कियादर्द तो कम न हुआलोग ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   7:25am 8 Nov 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
जिन्दगी का शायर हूँ जिन्दगी का शायर हूँ, मौत से क्या मतलब मौत की मर्जी है, आज आये, कल आये| टूट रहे हैं, सारे फैलाए भरम ‘हाकिम’ के,‘हाकिम’ को चाहे यह बात, समझ आये न आये|वो ‘इंसा’ गजब वाचाल निकलाबात उसकी, किसी को समझ आये न आये|‘आधार’ जरुरी है ‘जीवन’ के लिये‘आधार’ बिना रोटी नहीं... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   8:11pm 5 Nov 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
लोग सुनकर क्यूं मुस्कराने हैं लगे और भी खबसूरत अंदाज हैं मरने के लेकिनइश्क में जीना 'अरुण'को सुहाना है लगे क्यूं करें इश्क में मरने की बातइश्क तो जीने का खूबसूरत अंदाज है लगे दिल में आई है बहार जबसे पतझड़ को आने से डर है लगे हमें क्या मालूम महबूब का पता दिल ही उसक... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   8:27pm 3 Nov 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
ईश्वर भी अब मालिक हो गया है  पत्थर के देवता अब जमाने को रास नहीं आते संगमरमर के गढ़े भगवान हैं अब पूजे जाते,ईश्वर किसी मालिक से कम नहीं   मुश्किल है उसका मिलना रास्ते में आते जाते, भक्त को नहीं जरूरत कभी मंदिर जाने की भगवान उसके तो उसके साथ ही हैं उठते, बैठते, खाते,मंदि... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   12:09am 13 Oct 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
लोकतंत्र में संघर्ष और संघर्ष प्रत्येक संघर्ष का लक्ष्य विजय विजय का अर्थ दोवक्त की रोटी/ दो कपड़े /सर पर छतअभावहीन जीवन जीने की चाहत बनी रहेगी जब तक विजय का अर्थ जारी रहेगा संघर्ष तब तक संघर्ष निरंतर हैसंघर्ष नियति है लोकतंत्र में|  क्लेश और क्लेश उत्सवधर्मी देश में ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   11:27am 8 Oct 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
यह कैसा राजा हैयह कैसा राजा हैराजा है या चारण है खुद ही खुद के कसीदे गा रहा है|फ्रांस की रानी ने कहा थारोटी नहीं तो केक खाओ भारत में राजा भूखे को हवाई यात्रा करा रहा है|इसका विकास अजब है इसका चश्मा गजब है दिवाली से 15 दिन पहले दिवाली मना रहा है| यह राजा है या ब्रम्ह राक्षस इस... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   10:39am 8 Oct 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
शरद की वो रातशरद की वो रात आज वापस ला दो आसमान से बरसती काली राख बस आज रुकवा दो बन चुकी है खीर घर में उसे कैसे रखूं मैं खुले आसमां के नीचे ऐ चाँद एक काम करो आज मेरे चौके में ही आ जाओ और बूँद दो बूँद अमृत उसमें टपका दोअरुण कान्त शुक्ला, 5 अक्टोबर, 2017   ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   6:34pm 5 Oct 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
अपना नसीब खुद बनाते हैं बड़ा ही बेदर्द सनम उनका निकला वो जां लुटा बैठे वो मैय्यत में भी न आया,  इश्क अंधा होता है वहां तक तो ठीक था वो अंधे होकर पीछे पीछे चल पड़े  ये गजब हो गया, कुछ दिन पहले तक उन्हें लगता था कहीं कोई दहशत नहीं अब उन्हें लगता है दहशत घुल गई है आबो-ऐ–हवा में, ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   7:26pm 23 Sep 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
इस बरसात में पहली बार बारिश हुई इस बरसात में पहली बार भीगी सहर देखी इस बरसात में,पहली बार सड़कें गीली देखीं इस बरसात में पहली बार कीचड़ सने पाँव धोये आँगन में इस बरसात में,पहली बार साँसों में सौंधी खुशबू गई इस बरसात में पहली बार कच्छा-बनियान नहीं सूखीं इस बरसात में,सूखी तो ... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   5:45pm 20 Sep 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
तुम्हारी मन की बात परप्रश्न सारे उठाकर रख दो ताक पर, जिसे जबाब देना है उसकी औकात नहीं जबाब देने की, पथ केवल एक ही शेष ठान लो मन में बाँध लो मुठ्ठियाँनिकल पड़ो, ख़ाक में उसे मिलानेजो चुप रहता है हर बवाल परउसकी कोई औकात नहीं   प्रश्न उठाने की हमारे इस जबाब पर,अ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   8:06am 28 Aug 2017 #
Blogger: अरुण कान्त शुक्ला
फहराएंगे कल तिरंगा आराम सेहाकिम का नया क़ायदा है रहिये आराम से, गुनहगार अब पकडे जायेंगे नाम से,हाकिम को पता है उसकी बेगुनाही,वो तो सजावार है उसके नाम से,उसका सर झुका रहा कायदों की किताब के सामने,हाकिम को चिढ़ है उस किताब के नाम से,जो जंग-ऐ- आजादी से बनाए रहे दूरियां,फहराएं... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   5:58pm 14 Aug 2017 #
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