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मेरी कवितायें..

तिनकों से बने सपनेतिनकों से बने सपने तो , हवा के हलके झोके से बिखर जाते हैं, आंधी तो आती है आशियाने उजाड़ने , सर उठाकर खड़े पेड़ों को उखाड़ने , जो जीवन भर की मेहनत से बनते हैं, जो वर्षों में सर उठाकर खड़े होते हैं , इसीलिये हम रेत के महल नहीं बनाते , तिनकों से सपने नहीं ...
मेरी कवितायें.....
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  June 8, 2017, 1:21 am
खुशीजख्म परायों ने दिए, मैं मुस्कराता रहा, जख्म तुमने दिए, मैं हँस दिया,बेवफाई के दौर से गुजरते हैं सभी, मैं भी गुजरा,बेवफाई जब तुमने की,मैं हंस दिया,गुम्बद मीनार पर चढ़कर,इतराने लगा,तब नींव का पत्थर, उसके गुरुर पर हंस दिया,मुश्किलें बहुत आईं जिन्दगी में,मुस्करा कर...
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  May 26, 2017, 10:08 pm
तपिश ये तपिश सिर्फ सूर्य की तो नहीं इसमें कोई मिलावट है,यूँ लगता है जैसे कोई घाम में आग घोल रहा है, ये थकान सिर्फ चलने की तो नहींइसमें कोई मिलावट है,यूँ लगता है जैसे कोई पाँव में पत्थर बाँध कर चला रहा है,ये दुश्मनी सिर्फ मेरी तेरी तो नहीं इसमें कोई मिलावट है,यूँ लगता है जैस...
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  April 4, 2017, 6:10 pm
और कारवां न वाह वाह का शोर न तालियों की गडगडाहटन मित्रों की पीठ पीछे दी गईं गालियाँ न भीड़ में पारित निंदा प्रस्ताव कोई भी तो मुझे डिगा नहीं सका मेरे चेहरे पर न एक दाग लगा सका सबसे बेखबर बेपरवाह आज भी मैं बढ़ रहा हूँ मंजिल-ऐ-ज़ानिब की ओर कारवां के साथ और कारवां वह तो बनता गया ...
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  January 3, 2017, 4:10 pm
सदियों बाद की पीढ़ी भीएक दिनहोगा राज हमारा |2|हिसाब तुम्हारा किया जाएगा |2|छांट छांट कर |2|छांट छांट कर एक एक गुनाह की, सज़ा मुकर्रर की जायेगी|2|जब होगी मौत तुम्हें|2| जब होगी मौत तुम्हें धरती के,इतने नीचेदफ़न किया जाएगा|2|सदियों बाद की पीढ़ी को|2| सदियों बाद की पीढ़ी को जब,मिलेंगी हड्...
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  January 3, 2017, 4:04 pm
सदियों बाद की पीढ़ी भीएक दिनहोगा राज हमारा |2|हिसाब तुम्हारा किया जाएगा |2|छांट छांट कर |2|छांट छांट कर एक एक गुनाह की, सज़ा मुकर्रर की जायेगी|2|जब होगी मौत तुम्हें|2| जब होगी मौत तुम्हें धरती के,इतने नीचेदफ़न किया जाएगा|2|सदियों बाद की पीढ़ी को|2| सदियों बाद की पीढ़ी को जब,मिलेंगी हड्...
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  January 3, 2017, 2:07 pm
घुप्प, शुभ्र घना कोहराघुप्प, कारी अमावस की रात के अँधेरे को परास्त कर देता है एक छोटे से टिमटिमाते दिए का प्रकाश पर घुप्प, शुभ्र घने कोहरे को कहाँ भेद पाता है अग्नि पिंड सूर्य का प्रकाश प्रकाश का अँधेरे को परास्त करना है अज्ञान पर ज्ञान की जीत पर, कोहरे को परास्त नहीं कर ...
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  December 20, 2016, 11:22 am
भला ‘मौन’ मौन भला होता है,अनेक बार,‘बकवास’ बोलते रहने से,तुम्हारा मौन इसीलिये भला लगा मुझे,इस बार, बचा तो मैं एक और,बकवास सुनने से,कितना अच्छा होता,तुम्हारे मुंह से निकले शब्दों के,अर्थ भी कुछ होते,कथनी और करनी में,रिश्ते भी कुछ होते,बच जाते दबे-कुचले,तुम्हारी ‘सनक’ के न...
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  December 17, 2016, 5:53 pm
दौर कहाँ बदला है मित्र?न रूस, न चायना में हो रही अब बारिश है, न भारत में खोलता कोई छाता है, न किसी को मास्को की ठंड से छींक आती है, फर्क यही है हमारी आलोचना की सच्चाई, अब उन्हें बहुत डराती है, अपने ‘गलत’ को ‘सही’ बताने,हमें साम्यवादी बताने की,ये उनकी पुरानी साजिश है,...
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  December 16, 2016, 12:50 am
    बिना ‘विचार’का कवि,बिना ‘विचार’ का साहित्यकार, प्रेमचन्द भी लज्जित होते,देख साहित्य के साथ ये व्यभिचार,मुक्तिबोध अश्रु बहाते,कवि का देख ये व्यवहार,मैं नहीं रूमानी ‘कवि’   उड़े जो कल्पनाओं में, यथार्थ को नकार, बिक चुके हैं नीम, पीपल , बरगद,बिक चुकी हैं ‘नदियां’...
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  December 14, 2016, 12:48 am
जब अपहरण हो रहा था हमारे नीम, पीपल, बरगद का,हल्दी, सौंठ और अदरक का, पेटेंट करा रहीं थीं इनका,विदेशी कंपनियां, तब तुमको भा रहा था ‘मोहन’ का नवउदारवाद, तुम बैठे थे अपने स्वार्थ में होकर चूर,कि, बढ़ जायेंगे तुम्हारे वेतन और मजूरी,अम्बानी, माल्या, टाटा, बिड़ला जैसे ऊँचे थे तुम्हा...
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  December 14, 2016, 12:42 am
मेरी फितरत इतनी कमजोर नहींमैं क्यों भरूं पिछले जन्म की करनी, मुझे क्या पता "करनी"तेरी है या मेरी है, इस जन्म का मेरा मजमून तो बेहतर है, पर,तेरी करनी मैं 'भोग'रहा हूँ, अपनी करनी का हिसाब मुझे चाहिए इसी जन्म में, 'पिछले''अगले'जन्म में मेरा भरोसा नहीं, मेरा विश्वास नहीं डोलता 'अग...
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  December 8, 2016, 1:48 pm
28नवम्बर,2016 को समर्पित  प्रधान सेवक के अवतार में  थर थर कांपते आक्रोश से खड़े हैं कतार में राष्ट्र प्रेमियों का आतंक सख्त कह भी नहीं सकते राक्षस आया है सत्ता में साधू के अवतार मेंदिखा रहे लक्ष्मण रेखा फरियादी से काजी तक कोनहीं किसी की कहीं कोई सुनवाई हर पल...
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  November 27, 2016, 7:09 pm
दिल के दर्द की बात होती हैकुछ दिन भूखे रहकर गुजारिये , पता चलेगा मुफलिसों में भी जान होती है, उजाले की बात करने वालो, दियों से तो अमावस की कारी रात भी उजरी होती है, पेट में रोटी न हो तो , दिन में भी रात होती है, स्लम में रहकर देखिये , कैसे दिन में भी रात होती है,अनुभ...
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  November 24, 2016, 1:11 pm
वो मगरमच्छ भी अब शर्माते हैंभूख को धैर्य रखना समझाते हैं, बात उनकी निराली है, आँखों को समझो समुन्दर, और आंसुओं का खारा पानी बताते हैं,बात करो आज की, तो हजार साल पीछे जाते हैं,धन्य है वो पाठशाला और गुरु, जहां आँखों वालों को अंधा बनाते हैं,पंडित-पुरोहित, शादीशुदा-गैरशादीश...
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  November 24, 2016, 12:56 pm
रोटी अब चाँद हो गयी हैन मेरा कोई पक्षकार है न मेरा कोई पक्ष है रिरियाती जनता है मिमयाता विपक्ष है ।औंधे मुहं पड़ा सुखों का संसार है उसके ऊपर ठहाके लगाता दुखों का पहाड़ है मरी हुई संवेदनाओं के बीच मनुष्य भी बना भक्ष्य है ।।राजा के चारणों के बीच बुद्धि बेआवाज ह...
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  November 20, 2016, 1:18 pm
जिस दिन आपका खाता भर जाएगा ईन्साफ अब कुछ इस कदर जल्द मिलने लगा है, अदालत काजी मुंसिफ की जरुरत न रही, सजा-ऐ-मौत भी अब सड़क पर तुरंत मिलने लगी है,सवाल न पूछिए अब, सवाल पूछने से पहले ही हर सवाल का जबाब मिलने लगा है, शिकायत न करिये, कोई है जो आपकी शिकायतों का खाता ल...
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  November 7, 2016, 8:49 pm
अकेले चलकर नहीं पहुंचा है,आदमी आदमियत तक,आदमी आज जहां है,कारवाँ में ही चलकर पहुँचा है,भीड़ से मंजिल का कोई वास्ता नहीं दोस्त,भीड़ तो हत्याएं करती है,कारवाँ मंजिल तय करता है,भीड़ का हिस्सा जब आदमी था,आदमी कहां वो तो आदम था,भीड़ में आज भी आदम हैं,आदमियों का कारवां तो धीरे धीरे स...
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  July 15, 2016, 5:18 pm
झरने पत्थरों से नहींपहाड़ों के दिल से निकलते हैंकभी देखिये खुद को पहाड़ बनाकरआंसुओं के झरने फूटेंगे दिल में सुराख बनाकरदर्द से दिल का रिश्ताबाती और मोम सा हैकिसी के दर्द से पिघले नहींवो दिल कैसा है ?पहाड़ से झरने नीचे झरते हैंआँख से आंसू नीचे ढलकते हैंये बात तेरी मेरी नह...
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  July 15, 2016, 5:15 pm
शब्द जहां थोथे पड़ जाते हैं, संवेदना जहां मर जाती है, उस मोड़ पर आकर खड़े हो गए हम, मनुष्यता जहां खो जाती है,दर्द बयां करने से क्या होगा यहाँ, मुरदों की ये बस्ती है, लाशें बिकती हैं महंगी यहाँ, जिन्दों की जाने सस्ती हैं,इंसान रेंगता यहाँ, दो हाथों पैरों पर, सियार ...
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  July 14, 2016, 4:19 pm
टूट रही थी सांस 'मेरी'और जुबां सूखी थी,तुझे नहीं पुकारा था, 'चंद बूँद'पानी की जरुरत थी ||तू इश्क को समझने में बड़ा कच्चा निकला, मेरे लबों को नहीं, मेरे सर को तेरी गोदी की जरुरत थी,इश्क में तू करता रहा वादे पे वादे ,मुझे तेरे वादों की नहीं, तेरी वफ़ा की जरूरत थी,तेरे नाले मुझसे थ...
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  January 12, 2016, 11:25 pm
पांच दोहे.. जग बदले, बदले जग की रीत, मैं 'अरुण'क्यों बदलूं, मुझे सबसे है प्रीत,रार रखना है तो सुनो मित्र, रखो खुद से रार, छवि न बदले कभी किसी की, चाहे दर्पण तोड़ो सौ बार,समझ बूझकर लो फैसले, समझ बूझकर करो बात, गोली जैसी घाव करे, मुंह से निकली बात, काग के सिर मुकुट रखे से, काग न होत होश...
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  September 8, 2015, 11:37 pm
मन की बात का बोझएक आदमी में छुपे हैं कई शैतान, आखिर कोई शैतान का सम्मान करे तो क्यों करे?एक आदमी के ज्ञान की परतों में छिपी हैं कई मूढ़ताएंआखिर कोई किसी मूढ़ पर भरोसा करे तो क्यों करे?एक आदमी के अतीत के पन्नों पर पुती है काली स्याही आखिर कोई किसी के अतीत से आँखें मूंदे तो क्य...
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  September 7, 2015, 12:38 am
मित्र कवि युद्ध शिल्पी न बनोकविता में तोप चलाओ, पर बेरोजगारी के खिलाफ, तलवारें भांजो पर भुखमरी के खिलाफ, डंडे बरसाओ पर स्त्री की अस्मत के खातिर , भाई कवि मित्र, पर अपनी कविता में, युद्ध के लिए देशों को न उकसाओ , इसकी कीमत बहुत भारी होती है, विधवाओं की सूनी मांग , समाज के लिए र...
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  August 28, 2015, 11:54 pm
मूर्खों को हमने सर बिठाकर रखा हैएक दिन किसी ने मुझसे पूछातलवार ज्यादा मार करेगी या फूल,मैंने कहा, तलवार, तो उसने कहा फिर कविता में इतनारस क्यूं,सीधे कहो न कि मूर्खों को हमने सर बिठाकर रखा है,    ...
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  August 19, 2015, 11:51 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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