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Blog: मेरी अमृता....

Blogger: Priyanka Singh
कुछ लोगखुशबू से होते हैहवाओं में रहते है ....पानी से बहते है ....प्रेम बुनते हैज़िन्दगी कहते है...लम्हों कि स्याही सेग़मों में रंग भरते हैंख़ामोशी लिखते हैइतिहास बनते हैदुनियाइन्हें कुछ भी कहेहम इन्हें ''अमृता''कहते है ....जन्मदिन मुबारक ....''मेरी अमृता''... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:16pm 31 Aug 2014 #
Blogger: Priyanka Singh
आपको लिखना बहुत कठिन है या यूँ कहूँ की मुमकिन ही नहीं ....... या फिर में प्रेम लिख दूँ तो उसका अर्थ आप हो ....या आप ही प्रेम हो ....आपसे न मिल पाने का मुझे बहुत गम है और ये भी की आपको बहुत देर से जान पायी काश मेरी नींद आपके रहते टूटती तो ....मैं आपसे सपनों में ही नहीं हकीकत में मिल पाती ....... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   12:42pm 31 Aug 2014 #
Blogger: Priyanka Singh
ये बहुत अजीब बात है की अमृता जी अपने सपनों में ईश्वर के रूपों को देखा करती थींकभी साईं ...कभी शिव ..कभी राम ...कृष्ण ...अल्लाह ....गुरुनानक साहब .... जैसे उनका कुछ हिस्सा इन विश्वास के प्रतीकों संग बंधा रहा हो ..... उन्होंने अपनी आख़िरी किताब  ''मैं तुम्हें फिर मिलूँगी''में कुछ हिस्से ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   4:05pm 22 Jul 2014 #
Blogger: Priyanka Singh
आजशाममेरेलिएअनमोलतोहफ़ालायीजिसकाज़िक्रमुझेपलमेंख़ुशकरताहैऔरफिररुलाताभीहै।सोशलसाईटसेजुड़नाआजसचमायनेमेंमुझेआनंदितकररहाहैजिसकेलिएमैंइसकेजन्मदाताकोबारम्बारधन्यवाददेरहीहूँ।रोज़कीतरहमेरालेखनऔरलोगोसे, दोस्तोंसेमेल-मिलापयानीबातोंकासिलसिलासोशलसाईटपर... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   1:02pm 14 Jan 2014 #
Blogger: Priyanka Singh
मुझे इस बात का बहुत अफ़सोस है की मैं अमृता जी से मिल नहीं पायी। उनका ऐसे जल्दी चले जाना मेरे लिए क्या है मैं इसे शब्दों में नहीं बयां कर सकती बस कह सकती हूँ कि ऐसा दुःख है जो कभी दूर नहीं हो पायेगा। मैं चाहती थी अमृता जी से मिलना उनसे बात करना कुछ सीखना और उन्हें छूना । उनके ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   12:25am 23 Nov 2013 #
Blogger: Priyanka Singh
एहसासों की लेखनी में श्रेष्ठ कवयित्री अमृता जी के जन्म दिन के उपलक्ष्य में मेरी एक अदना सी कोशिश, उनको बयां कर पाना आसां नहीं है,बस कोशिश की है....नज्मों को सांसेंलम्हों को आहेंभरते देखाअमृता के शब्दों मेंदिन को सोते देखासूरज की गलियों मेंबाज़ारचाँद पर मेला लगते देखा ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   1:00am 1 Sep 2013 #
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